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चैतुरगढ के शंकर खोला को पर्यटन विकास की दरकार

कोरबा/पाली (कमल वैष्णव) . कोरबा जिले का बारहमासी, सदाबहार धार्मिक पर्यटन स्थल चैतुरगढ किसी परिचय का मोहताज नही है, किन्तु यही स्थित शंकर खोला आज भी उपेक्षित है. जहां पर्यटन की संभावना है जिसे विकसित कर सुविधा बढ़ाने की आवश्यकता है.


छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में मैकाल पर्वत श्रृंखला की एक ऊंची चोटी पर चैतुरगढ और इसका अभेद किला स्थित है. यह मंदिर प्राचीन कल्चुरी शासकों ने 14वीं शताब्दी में बनवाया था. मंदिर के गर्भगृह में 12 भुजाओं वाली मां महिषासुर मर्दिनी की मूर्ति स्थापित है.चैतुरगढ़ माता महिषासुर मर्दिनी मंदिर के लिए प्रसिद्ध है. इसकी ऐतिहासिक महत्ता है जो क्षेत्र की आस्था से भी जुड़ा है.चैतुरगढ़ की पहाड़ियों को उनकी प्राकृतिक सुंदरता और रोमांचकारी अनुभवों के लिए जाना जाता है. इसे छत्तीसगढ़ का कश्मीर भी कहा जाता है क्योंकि यहां गर्मी के मौसम में भी तापमान सामान्य से न्यूनतम होता है.यह छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों में से एक है. पिछले कुछ वर्षो में कई विकास कार्य हुए हैं. सबसे अच्छी बात पहाड़ी पर स्थित होने के बाद सरल सुगम पहुँच मार्ग सहित पर्यटन सुविधा के कार्य भी हुए हैं.

इसी चैतुरगढ़ किले मे मन्दिर से 3 किमी दूर दूसरे छोर पर स्थित प्रसिद्ध प्राचीन मान्यताओं से जुड़ी ’शंकर गुफा’ भी है. जहां दूर दूर से भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर दर्शन के लिए पहुंचते हैं.यह जगह एकांत और मन की शांति के लिए अपने आप में बहुचर्चित और प्रसिद्ध है. भक्त इस जगह को लेकर एकदम शांत माहौल शुद्ध वातावरण की वजह से एकमात्र स्थान भी मानते हैं.लेकिन इतनी प्रसिद्धि के बाद भी शंकर गुफा का रास्ता अपने भक्तों के सुगमता के लिए आज भी तरस रहा है.शासन प्रशासन की अनदेखी की वजह से पहुँच मार्ग नहीं बन पाया है. शंकर खोला पॉइंट से नीचे गुफा जाने तक का पैदल रास्ता है, जो दुर्गम और खतरनाक है.आज तक इस रास्ते में पक्की सीढ़ी व रेलिंग की निर्माण नहीं हो सका है. इसी कारण से माता के दर्शन और आसपास घूमने तीर्थाटन करने के बाद भक्त और यात्री चैतुरगढ के पूरे किले, ऐतिहासिक और पुरातत्वविक धरोहरो का पूरा दीदार नही कर पाते हैं और वापस चले जाते हैं. जबकि जैव विविधता,वन्य जीवों,प्राकृतिक सुन्दरता से य़ह स्थल ओतप्रोत है.किले के चारो ओर वाचिग टावर से प्रकृत्ति से रूबरू होना रोमांचित कर देता है. जंगल के सन्नाटे के बीच जल प्रपात के शोर जैसी कई अन्य खूबसूरती का अनुभव नही उठा पाते है.चैतुरगढ के पूरे किले की परिक्रमा,चारो प्रवेश द्वार, वाचिंग टावरो को जोड़ने एक सुगम सड़क बनाने की आवश्यकता है.मन्दिर से शंकर खोला स्थल तक पहुँच मार्ग तथा यहां आवागमन के लिए बैट्री चलित वाहन सुविधा हो जाए तो यह सोने पे सुहागा होगा और इससे शंकर गुफा जाने वाले भक्तों की संख्या भी बढ़ जाएगी.

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