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नवरात्रि का तीसरा दिन: माँ चंद्रघंटा स्वरूपा श्री सर्वमंगला देवी की पूजा में दिखी अगाध श्रद्धा

माता का वार होने के कारण मंगलवार को अभूतपूर्व भीड़
कोरबा। नवरात्रि के तीसरे दिन माँ श्री सर्वमंगला देवी मंदिर दुरपा कोरबा में चंद्रघंटा देवी स्वरूपा माँ श्री सर्वमंगला का दर्शन करने एवं पूजन करने अगाध श्रद्धा देखी गई। क्वांर शुकल तृतीया तिथि पर माँ आदिशक्ति के तृतीय स्वरूप का दर्शन करने के लिए अलसुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ देखी गई।

माँ सर्वमंगला देवी मंदिर दुरपा कोरबा के प्रबंधक एवं राजपुरोहित नमन पाण्डेय (नन्हा महराज) ने बताया माँ चंद्रघंटा साहस, शांति और सौम्यता की प्रतिक हैं और सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर में बढ़ने लगी थी। मंगलवार होने के कारण श्रद्धा का सैलाब देखने को मिला।

नन्हा महराज ने बताया कि माँ चंद्रघंटा के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्ध चन्द्र होने के कारण आदिशक्ति के तृतीय रूप को चंद्रघंटा देवी के रूप में जाना जाता है और माँ सर्वमंगला की पूजा अर्चना आज चंद्रघंटा देवी के रूप में की गई। श्री पाण्डेय ने बताया कि वेद पुराणों में मान्यता है कि माँ चंद्रघंटा स्वरूपा की पूजा अर्चना से साधकों, भक्तों के जीवन से सभी बाधाएं दूर होती हैं, संकट टल जाता है और जीवन में अलौकिक शांति की प्राप्ति होती है और घर परिवार खुशहाल बनता है।

तीसरे दिन विशेष रूप से छप्पन भोग में माँ को केसर की खीर और दूध से बनी मिठाईयों को शामिल किया गया और माता को अर्पित किया गया।
माँ की महाआरती से चारों तरफ फैल रहा सत्व का प्रकाशपूंज

रोज सुबह एवं संध्या 07.00 बजे माँ की महाआरती की जाती है और आज संध्या महाआरती में मंगलवार होने के कारण हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। माँ की आरती करने से मन में तामसिक प्रवृत्ति का नाश होता है और माँ के प्रति श्रद्धा का भाव जागृत होता है। आरती से बच्चों में संस्कार पनपता है और बुद्धि में श्रेष्ठता आती है। नमन पाण्डेय ने बताया कि महाआरती से परिसर सहित चारों तरफ सत्व का प्रकाशपूंज फैलता है और वातावरण में विशुद्धता आती है और मन पवित्र होता है।
कल माँ कुसमाण्डा स्वरूपा की होगी पूजा

कल बुधवार को माँ सर्वमंगला देवी की पूजा अर्चना माँ कुसमाण्डा स्वरूपा के रूप में होगी और श्रद्धालु तथा भक्तजन माँ को भोग अर्पण के रूप में मालपुआ एवं फल अर्पित कर सकते हैं, इससे माँ प्रसन्न होती हैं और ऐसा करने से शत्रु कम होते हैं और शत्रुता का नाश होता है। माँ कुसमाण्डा देवी सौम्य होती हैं और उनकी पूजा अर्चना से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

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