श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ निमित्त भण्डारे का आयोजन
कोरबा। मातनहेलिया परिवार द्वारा जश्न रिसोर्ट में गत 24 अगस्त से 30 अगस्त तक श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन पितृमोक्षार्थ गया श्राद्ध निमित्त कराया गया था और विश्व विख्यात कथा वाचक एवं जीवन प्रबंधन गुरू पंडित विजय शंकर मेहता द्वारा एक सप्ताह तक भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का प्रसंग संगीतमय कथा के माध्यम से सुनाया था। 31 अगस्त को हवन पूजन एवं सहस्त्रधारा के साथ कथा सम्पन्न हुई थी और पितृपक्ष में मातनहेलिया परिवार गया सहित अन्य स्थानों में पितृमोक्ष के अन्य विधानों को सम्पन्न कराया। 23 सितम्बर को मातनहेलिया परिवार कोरबा पहुंचा और इसके बाद 25 सितम्बर को जश्न रिसोर्ट में भण्डारे का आयोजन किया।

श्रीमद्भागवत कथा निमित्त किया गया भण्डारे का आयोजन
मातनहेलिया परिवार ने कोरबा को महाभण्डारे में आमंत्रित किया था। आज दोपहर 12.00 बजे से जश्न रिसोर्ट में भगवान श्री को भोग लगाने के बाद आमलोगों के लिए भण्डारे का शुभारंभ किया गया, जो शाम तक चलता रहा।
हजारों लोगों ने भोग प्रसाद ग्रहण किया
मातनहेलिया परिवार द्वारा आयोजित इस विशाल महाभण्डारा में 12.00 बजे से ही कोरबा सहित आसपास के जिलों के लोग भण्डारा में आने लगे थे। मातनहेलिया परिवार के रिश्तेदार भी दूर दराज से पहुंचे थे। हजारों लोगों ने भोग प्रसाद ग्रहण किया।
आम से लेकर खास लोगों का हुजूम रहा महाभण्डारे में
कोरबा सहित आसपास के लोग बड़ी संख्या में भोग प्रसाद ग्रहण करने जश्न रिसोर्ट पहुंचे थे। आम से लेकर खास लोगों का हुजूम देखने को मिला।
मातनहेलिया परिवार ने जताया आभार
24 से 30 अगस्त तक जश्न रिसोर्ट में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ में शामिल होकर पूण्य लाभ लेने एवं महाभण्डारा में शामिल होने के लिए कोरबावासियों सहित रिश्तेदारों, परिजनों एवं दूर दराज से आए प्रियजनों का मातनहेलिया परिवार ने आभार जताया। मातनहेलिया परिवार के प्रमुख राजबीर प्रसाद अग्रवाल, राजकुमार अग्रवाल, भगवानदास अग्रवाल ने सभी लोगों का हृदय से आभार जताया। उन्होंने पंडित विजय शंकर मेहता एवं उनकी टीम का भी आभार जताया और कहा कि एक सप्ताह तक कोरबावासियों को उनके सानिध्य में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ रूपी गंगा में स्नान करने का सुअवसर मिला और जीवन प्रबंधन के बारे में भी बहुत कुछ सीखने को मिला। हम ऐसे महापुरूषों के आभारी हैं, जो सनातन धर्म को आगे बढ़ाते हुए धर्मयात्रा पर निकले हैं और हमारी संस्कृति, सभ्यता और सनातन परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं और राष्ट्रनिर्माण की अपनी यात्रा में हजारों-लाखों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।
