पहलगाम,एजेंसी। कश्मीर की हरी-भरी बायसरन घाटी, उसकी खूबसूरती को निहारते टूरिस्ट, गोलियां, चीखें, बचने-बचाने की कोशिशें और 26 कत्ल, 22 अप्रैल को हुए पहलगाम अटैक की कहानी बस इतनी ही है। पहलगाम में तीन आतंकी आए और हमेशा का दर्द देकर चले गए। अब हमले के तीन महीने बाद सेना और पुलिस की टीमों ने श्रीनगर से 22 किमी दूर दाचीगाम के जंगलों में तीनों आतंकियों को मार गिराया है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को लोकसभा में कहा कि जिन आतंकियों ने बायसरन घाटी में हमारे 26 टूरिस्ट्स की जान ली। उनके खिलाफ ऑपरेशन महादेव चलाया गया और 28 जुलाई को तीनों को ढेर कर दिया गया। इन आतंकियों के नाम सुलेमान, हमजा अफगान और जिब्रान हैं। सुलेमान लश्कर का कमांडर था। इसके ढेरों सबूत हैं। अफगान और जिब्रान ए कैटेगरी के आतंकी थे।

इस स्टोरी में पढ़िए, देखिए और सुनिए पहलगाम हमले की पूरी कहानी…
शुरुआत ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ यानी बायसरन घाटी से
जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर से करीब 90 किमी दूर है पहलगाम। यहां से 6 किमी दूर बायसरन घाटी है। हरी घास के बड़े-बड़े मैदान, देवदार के घने जंगल, बर्फ से ढंकी पहाड़ियों की वजह से ये जगह स्विट्जरलैंड का एहसास दिलाती है। इसलिए इसका नाम ही पड़ गया मिनी स्विट्जरलैंड। यहां सिर्फ घोड़े या ट्रैक करके ही जा सकते हैं। पहलगाम से बायसरन घाटी जाने के तीन रास्ते हैं, जो एक पॉइंट पर जाकर मिलते हैं।
अप्रैल से जून और सितंबर से नवंबर बायसरन जाने का सबसे अच्छा टाइम माना जाता है। पीक सीजन की वजह से यहां काफी भीड़ होगी, ये बात आतंकी भी जानते थे। इसलिए उन्होंने हमले के लिए अप्रैल का महीना चुना।
22 अप्रैल का दिन, जब बायसरन घाटी में अटैक हुआ
दोपहर करीब 2 बजे, टूरिस्ट के ग्रुप घाटी में एंजॉय कर रहे थे। वीडियो-फोटो शूट कर रहे थे। एडवेंचर एक्टिविटी कर रहे थे। उसी वक्त तीन आतंकी जंगल की ओर से आए और गोलियां बरसाने लगे। पहली गोली करीब 2.20 बजे चली। शुरुआत में किसी को समझ नहीं आया कि क्या हुआ है।
जब लाशें गिरने लगीं, तब लगा कि हमला हुआ है। लोग बचने के लिए भागे, लेकिन उस मैदान में छिपने की जगह ही नहीं थी।
अहमदाबाद के ऋषि भट्ट उस वक्त जिप लाइन राइड कर रहे थे। अपना वीडियो बना रहे थे, लेकिन उसमें गोली लगने के बाद जमीन पर गिरते लोग भी रिकॉर्ड हो गए।
कुल 13 मिनट तक फायरिंग हुई। उसी वक्त मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा के रहने वाले नवीन चौधरी रील बना रहे थे। वे एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट के सेमिनार में शामिल होने कश्मीर गए थे।
नवीन को गोली चलने की आवाज आई। नवीन बताते हैं कि शुरुआत में लगा कि कोई पटाखे फोड़ रहा है। लोगों के चिल्लाने की आवाजें सुनकर और भागते देख समझ आया कि ये आतंकी हमला है। वे हमले वाली जगह से दूर थे, इसलिए सुरक्षित बच निकले।
उधर, घाटी में आतंकियों ने लोगों से नाम और धर्म पूछा, कलमा पढ़ने के लिए कहा, जो कलमा नहीं पढ़ पाए उनके सिर में गोली मार दी।
