बाराद्वार। नगर और आसपास के गांवों में 14 सितंबर से शुरू होने वाले गणेशोत्सव की तैयारियां तेज हो गई हैं। लोग गणेश की मूर्ति, सजावट, पूजा सामग्री खरीदने में जुटे हैं। पर्यावरण को देखते हुए इस बार भी सिर्फ मिट्टी की मूर्ति स्थापित करने का फैसला लिया गया है। पंडालों में भी मिट्टी की मूर्ति लगेगी। घरों में भी मिट्टी की मूर्ति ही रखी जाएगी। बंगाल से मूर्ति बनाने बाराद्वार आए मूर्तिकार बबलू पाल और राजीव पाल ने बताया कि उन्होंने केवल मिट्टी से गणेश की मूर्तियां बनाई हैं। पीओपी का इस्तेमाल नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि दूसरे शहरों में पीओपी की मूर्तियां बनती रही हैं। इससे पर्यावरण पर बुरा असर पड़ता है। पीओपी और उसका मलबा अघुलनशील होता है। यह पानी में नहीं घुलता। मिट्टी पानी में आसानी से घुल जाती है। इसलिए मिट्टी की मूर्ति ही स्थापित करनी चाहिए। इस साल बाराद्वार में मारवाड़ी धर्मशाला में सार्वजनिक गणेशोत्सव समिति, दुर्गा मंदिर के पास विघ्नहर्ता ग्रुप, कन्याशाला के पास बिच्छू ग्रुप, अग्रसेन मार्ग में आजाद बॉयस ग्रुप, अग्रसेन मार्ग में तहलका ग्रुप, दुर्गा मंदिर के पास सिद्धिविनायक गणेशोत्सव समिति, नेहरू चौक के पास लिटिल स्टार ग्रुप, कन्याशाला के पास सुपर स्टार गणेश उत्सव समिति, पुराना सेंट्रल बैंक के पास युवा शक्ति गणेश उत्सव समिति, अजय कम्प्यूटर्स के पास विश्व विनायक गणेश उत्सव समिति, पेट्रोल पंप के पास बजरंगी ग्रुप गणेश उत्सव समिति, सोसायटी रोड में आदर्श ग्रुप, वार्ड नंबर 10 में एकदन्ता गणेश उत्सव समिति, हाई स्कूल मोहल्ला में सार्वजनिक गणेशोत्सव समिति, बाजार मोहल्ला में विघ्नहर्ता गणेशोत्सव समिति पंडाल बनाकर मिट्टी की मूर्ति की स्थापना करेंगे। 14 सितंबर को पूजा-अर्चना के साथ विधि-विधान से स्थापना होगी। उत्सव 10 दिन तक धूमधाम से मनाया जाएगा। इसके अलावा वार्ड नंबर 1, मुक्ताराजा, रेलवे कॉलोनी, बस स्टैंड, जैजैपुर नाका चौक, बिजली ऑफिस के पास, आसपास के गांवों में भी समितियां पंडाल बनाकर गणपति की मूर्ति स्थापित करेंगी। 10 दिन तक श्रद्धा और भक्ति भाव से पूजा होगी। समितियों के सदस्यों ने कहा कि वे हर साल मिट्टी की प्रतिमा ही स्थापित करते हैं। इस बार भी मिट्टी की प्रतिमा रखकर पूजा करेंगे।
इस बार मिट्टी की प्रतिमाओं से होगा पर्यावरण संरक्षण
