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देश में पर्यटन बढ़ाने के लिए होटल निर्माण को मिलेगी बड़ी छूट, FAR और लाइसेंसिंग नियमों में बदलाव

नई दिल्ली,एजेंसी। देश में पर्यटन उद्योग को तेजी से बढ़ावा देने के लिए संसद की स्थायी समिति ने नई सिफारिशें पेश की हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में होटल और ठहरने की सुविधाओं की कमी बेहद गंभीर है और इसे दूर करने के लिए नियमों में बड़े बदलाव किए जाने चाहिए।

FAR नियमों में छूट की सिफारिश 
समिति ने मुख्य रूप से फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) नियमों में छूट देने की सिफारिश की है, जिससे भूमि पर बड़े और बेहतर होटल बनाए जा सकें। इसके अलावा, लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं को भी आसान और तेज़ बनाने की मांग की गई है। समिति चाहती है कि दो साल के भीतर आवश्यक अनुमोदनों की संख्या 20 से कम कर दी जाए और पुराने नियमों को हटाया जाए। खासकर, ब्रिटिश शासन काल के दौरान बने “साराय एक्ट” को समाप्त या बदलने की सलाह दी गई है, जो इन्‍स और गेस्ट हाउस की पंजीकरण प्रक्रिया को अनिवार्य करता है।

राज्य सरकारों के साथ समन्वय बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है, ताकि होटल क्षमता बढ़ाने के लिए योजनाओं को राष्ट्रीय मिशन “50 ग्लोबली कंपटीटिव डेस्टिनेशंस” में शामिल किया जा सके। समिति ने यह भी सुझाव दिया कि पर्यटन मंत्रालय नियमित रूप से प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक करे, ताकि सभी हितधारक इस पर निगरानी रख सकें।

दोगुनी होगी कमरों की संख्या 
समिति ने देश में होटल रूम की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताई। वर्तमान में लगभग 1.8 लाख ब्रांडेड और 15,000 अनब्रांडेड कमरे उपलब्ध हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि देश को कम से कम इनकी संख्या दोगुनी करनी होगी। होटल रूम की कमी की वजह से कीमतें बहुत अधिक हो जाती हैं। बड़े आयोजनों के दौरान रात का किराया 12-13 लाख रुपये तक पहुंच जाता है, जबकि थाईलैंड जैसे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थलों में ₹25,000-45,000 की दर पर होटल उपलब्ध होते हैं।

‘पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी को इंडस्ट्री स्टेटस देना जरूरी’
होटल उद्योग ने समिति की सिफारिशों का स्वागत किया है। फेडरेशन ऑफ एसोसिएशंस इन इंडियन टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी (FAITH) के जनरल सेक्रेटरी, राजीव मेहरा ने कहा कि FAR नियमों में राहत होटल डेवलपर्स को भूमि का बेहतर उपयोग करने और अधिक कमरे जोड़ने में मदद करेगी। लेकिन उनका मानना है कि यह पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा, “पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी को इंडस्ट्री स्टेटस देना जरूरी है। इससे निवेश बढ़ेगा और सस्ती फाइनेंसिंग की सुविधा मिलेगी। साथ ही, विभिन्न मंजूरी प्रक्रियाओं को सरल बनाना भी आवश्यक है।”

इस रिपोर्ट के साथ ही देश में होटल निर्माण और पर्यटन के विकास के लिए एक व्यापक नीति की मांग फिर से जोर पकड़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन सुझावों को लागू किया गया, तो भारत अंतरराष्ट्रीय पर्यटन में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को मजबूत कर सकता है।

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