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छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस को कोरबा तक लाने 37 साल पड़ गए कम

कोरबा। रेलवे बोर्ड छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस को दोनों दिशाओं से चलाने की मंजूरी दे चुका है, पर जोन व डिवीजन में बैठे अफसरों की मनमानी के कारण यह गाड़ी तीन दशक बाद भी वापसी में कोरबा तक नहीं आ सकी है।

इस गाड़ी को वापसी में कोरबा तक लाने 37 साल की लंबी अवधि भी कम पड़ गई है। अफसरों की अदूरदर्शिता का खामियाजा यहां से अमृतसर जाने वाले यात्री भुगत रहे हैं। यही नहीं अमृतसर की ओर से कोरबा आने वाली इस गाड़ी के यात्रियों को बिलासपुर में अपनी यात्रा समाप्त करनी पड़ रही है, वहां के कोरबा आने यात्रियों को साधन तलाशने जद्दोजहद करनी पड़ती है।

रेल संघर्ष समिति की मांग भी पूरी नहीं हुई: रेल संघर्ष समिति कोरबा रेल प्रबंधन से विस्तार करने की मांग करता रहा है। मांग को पूरा कराने सांसद, विधायकों के साथ रेलवे के अधिकारियों को भी ज्ञापन सौंपा जा चुका है। समिति की मांग रही है कि कम से कम अपनी ही समीक्षा बैठक में किए निर्णय का पालन करते हुए छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस को कोरबा तक चलाया जाए पर इस मांग को भी रेलवे के अधिकारी खारिज करते आ रहे हैं।

6 घंटे इंतजार करो या अन्य विकल्प चुनने की मजबूरी 18238 छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस अमृतसर से बिलासपुर की 2013 किमी की दूरी तय करती है। अमृतसर से रोज शाम 4.10 बजे छूटने के बाद तीसरे दिन सुबह 10.55 बजे बिलासपुर पहुंचती है। इस गाड़ी में जो यात्री कोरबा के होते हैं, उन्हें वहां भटकना पड़ता है। बिलासपुर से कोरबा आने के लिए सुबह 9.35 बजे के बाद शाम को 5.10 बजे सवारी गाड़ी मिलती है। ऐसे में उनके पास 6 घंटा बिलासपुर में बैठने या फिर अन्य साधन चुनने का ऑप्शन ही रहता है।

समीक्षा बैठक का निर्णय गया रद्दी की टोकरी में 27 दिसंबर 2023 को बिलासपुर में रेल मंडल प्रबंधक प्रवीण पाण्डेय ने वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक व वरिष्ठ मंडल यांत्रिक अभियंता के साथ बैठक बुलाकर गाड़ियों के परिचालन की समीक्षा की थी। बैठक में अधिकारियों ने निर्णय लिया था छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस को बिलासपुर के स्थान पर कोरबा तक चलाया जाएगा। अफसरों ने प्रचार प्रसार भी किया, लेकिन बाद में उस निर्णय की कापी रद्दी की टोकरी में डाल दी।

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