नई दिल्ली,एजेंसी। देश में तेजी से बढ़ती कार्यशील आबादी और रोजगार की कमी को ध्यान में रखते हुए उद्योग जगत के बड़े नामों ने सोमवार को एक महत्वाकांक्षी पहल ‘Hundred Million Jobs’ की शुरुआत की। इस पहल का उद्देश्य अगले 10 सालों में भारत में 10 करोड़ नए रोजगार अवसर पैदा करना है।
इस अवसर पर आयोजित प्रेस वार्ता में इस मिशन की घोषणा नैसकॉम के सह-संस्थापक हरीश मेहता, वैश्विक उद्यमी नेटवर्क ‘द इंडस एंटरप्रेन्योर्स’ (TiE) के संस्थापक ए जे पटेल और सेंटर फॉर इनोवेशन इन पब्लिक पॉलिसी (CIPP) के संस्थापक के यतीश राजावत ने की।
संस्थापकों ने बताया कि भारत में हर साल लगभग 1.2 करोड़ नई कार्यशील उम्र की आबादी जुड़ रही है, लेकिन पारंपरिक उद्योग जैसे निर्माण और विनिर्माण तेजी से रोजगार पैदा करने में सक्षम नहीं हैं। इसके चलते रोजगार सृजन की दर देश की आर्थिक वृद्धि के मुकाबले पीछे रह गई है।
नई चुनौतियां:
आधुनिक तकनीक, स्वचालन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव ने कई उद्योगों में शुरुआती स्तर के रोजगार घटा दिए हैं। ऐसे में यह चिंता बढ़ रही है कि तेज़ आर्थिक वृद्धि भी यदि रोजगार सृजन से मेल नहीं खाएगी तो युवाओं के लिए अवसर सीमित रह जाएंगे।
मिशन की कार्यप्रणाली:
‘हंड्रेड मिलियन जॉब्स’ मिशन का फोकस उद्यमिता, कौशल विकास और श्रम-प्रधान व्यवसायों पर रहेगा। इसका मकसद रोजगार सृजन को केवल संख्या तक सीमित न रखकर इसे आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण संकेतक बनाना है। मिशन यह सुनिश्चित करेगा कि विभिन्न क्षेत्रों में लोगों को सुदृढ़ और स्थायी आजीविका के अवसर मिलें।
हरीश मेहता ने कहा, “यह पहल उन लोगों को सशक्त बनाने की दिशा में है जो रोजगार उत्पन्न करते हैं – उद्यमी, MSME और अन्य नियोक्ता। इसके जरिए कौशल, डेटा और नीतियों के सामंजस्य से अगली पीढ़ी के लिए स्थिर और गरिमापूर्ण रोजगार सुनिश्चित किया जाएगा।”
AJ पटेल ने जोर देकर कहा कि भारत के स्टार्टअप और लघु उद्योग, जो देश के GDP में करीब 30 प्रतिशत योगदान देते हैं और सबसे बड़े नियोक्ता हैं, केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह सकते। अगर भारत हर साल 80-90 लाख नई नौकरियां देना चाहता है, तो बुनियादी ढांचे और नीति संबंधी बाधाओं को दूर करना जरूरी है ताकि उद्यमिता आम लोगों के लिए भी व्यवहारिक विकल्प बन सके।
