वॉशिंगटन डीसी,एजेंसी। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के सलाहकार पीटर नवारो ने भारत पर एक्स्ट्रा टैरिफ लगाने के अमेरिकी फैसले का बचाव किया। उन्होंने भारत को “टैरिफ का महाराजा” करार देते हुए कहा कि भारत अमेरिकी सामानों पर दुनिया में सबसे ज्यादा टैरिफ और नॉन-टैरिफ बाधाएं लगाता है, जिससे अमेरिकी प्रोडक्ट्स को भारतीय मार्केट में एंट्री करने में मुश्किल होती है।
वहीं, ट्रम्प ने भारत पर और ज्यादा प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी है। उन्होंने बुधवार रात पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा,
अभी सिर्फ 8 घंटे ही हुए हैं। अभी तो बहुत कुछ होना बाकी है। बहुत सारे सेकेंडरी सैंक्शंस आने वाले हैं।
ट्रम्प ने भारत पर 25% एक्स्ट्रा टैरिफ लागू करने को लेकर पूछे गए सवाल पर यह जवाब दिया। ट्रम्प से पूछा गया था कि अमेरिका ने भारत पर ही क्यों सख्ती की, जबकि चीन जैसे और देश भी रूस से तेल खरीद रहे हैं।
भारत पर अब कुल अमेरिकी टैरिफ 50% हो गया है। ट्रम्प ने बुधवार को एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन कर 25% टैरिफ बढ़ा दिया। बढ़ा हुआ टैरिफ 27 अगस्त से लागू होगा।
आज से भारत पर 25% टैरिफ लागू हो गया है। एग्जीक्यूटिव ऑर्डर में कहा गया है कि रूसी तेल खरीद की वजह से भारत पर यह एक्शन लिया गया है।
नवारो बोले- खुद को नुकसान पहुंचाने वाला कदम नहीं उठाएंगे
नवारो ने गुरुवार को मीडिया से बात करते हुए कहा- भारत अमेरिकी डॉलर का इस्तेमाल रूसी तेल खरीदने के लिए करता है। फिर रूस उन डॉलर का इस्तेमाल हथियार बनाने में करता है, जिनसे यूक्रेन में लोग मारे जा रहे हैं।
इसके बाद अमेरिकी टैक्सपेयर्स को यूक्रेन की रक्षा के लिए हथियारों पर खर्च करना पड़ता है। यह गणित ठीक नहीं है।
चीन पर समान कार्रवाई न करने के सवाल पर नवारो ने कहा कि चीन पर पहले से ही 50% से ज्यादा टैरिफ हैं। हम ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहते जिससे हमें नुकसान हो।
विदेश मंत्रालय बोला- अमेरिकी कार्रवाई नाजायज
भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस कार्रवाई को गलत बताया है।
मंत्रालय ने बुधवार रात बयान जारी कर कहा-
अमेरिका ने हाल ही में भारत के रूस से किए जा रहे तेल आयात को निशाना बनाया है। हमने पहले ही साफ कर दिया है कि हम बाजार की स्थिति के आधार पर तेल खरीदते हैं और इसका मकसद 140 करोड़ भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि अमेरिका भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगा रहा है, जबकि कई और देश भी अपने हित में यही काम कर रहे हैं। हम दोहराते हैं कि ये कदम अनुचित, नाजायज और गलत हैं। भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।

क्या हैं सेकेंडरी सैंक्शंस?
ये वो प्रतिबंध होते हैं जो किसी देश पर सीधे नहीं, बल्कि किसी तीसरे देश से उसके व्यापारिक रिश्तों के चलते लगाए जाते हैं। यानी अमेरिका सीधे भारत को टारगेट न करके, उन कंपनियों और बैंकों पर सख्ती कर सकता है जो रूस से तेल खरीद में शामिल हैं।
भारत ने रूस-यूक्रेन जंग के बावजूद रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना जारी रखा है। अमेरिका लंबे समय से भारत पर इस फैसले को लेकर दबाव बना रहा है। हालांकि भारत हमेशा कहता रहा है कि उसकी ऊर्जा जरूरतें उसके राष्ट्रीय हित से जुड़ी हैं।
ट्रम्प के एग्जीक्यूटिव ऑर्डर में लिखा है-
“भारत सरकार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तरीके से रूस से तेल आयात कर रही है। ऐसे में अमेरिका में दाखिल होने वाले भारत के सामानों पर 25% एक्स्ट्रा टैरिफ लागू होगा।
हालांकि कुछ खास परिस्थितियों में इस टैरिफ से छूट भी दी जाएगी जैसे कि यदि कोई सामान पहले ही समुद्र में लद चुका है और रास्ते में है, या यदि वह कुछ खास तारीख से पहले अमेरिका में पहुंच चुका है।
इससे पहले मार्च 2022 में अमेरिका ने एक आदेश जारी कर रूसी तेल और उससे जुड़े उत्पादों के अपने देश में आयात पर पूरी तरह रोक लगा दी थी।
अब ट्रम्प प्रशासन ने यह पाया कि भारत उस रूसी तेल को खरीद रहा है, जिससे रूस को आर्थिक मदद मिल रही है। इस वजह से अब अमेरिका ने भारत पर यह नया टैरिफ लगाने का फैसला किया है।”
