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ईरान पर हमले के बाद तेल बाजार में उथल-पुथल, सरकार ने पेट्रोल-डीजल कीमतों पर दिया नया अपडेट

नई दिल्ली,एजेंसी। ईरान पर हमले के बाद वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल बढ़ा दी है। संभावित युद्ध की आशंकाओं के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है, जिससे पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर लोगों की चिंता भी बढ़ गई है। हालांकि राहत की बात यह है कि अब तक भारत के प्रमुख शहरों में पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों पर इसका सीधा असर नहीं पड़ा है। 

ग्राहकों के लिए राहत 

भारत सरकार का कहना है कि भारत अब गैस आपूर्ति के लिए सिर्फ कतर पर निर्भर नहीं है। सरकार वैकल्पिक बाजारों की तलाश में है और ऐसे देशों से आपूर्ति बढ़ाने की कोशिश कर रही है, जहां मौजूदा युद्ध का असर नहीं है। ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों ने भारत को गैस सप्लाई का प्रस्ताव भी दिया है। सरकारी सूत्रों ने बताया कि फिलहाल उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। निकट भविष्य में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना कम है।

भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद वैश्विक मानक ब्रेंट क्रूड करीब 16.8 प्रतिशत तक चढ़ चुका है, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) में लगभग 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

नोमुरा की रिपोर्ट

वित्तीय सेवा कंपनी नोमुरा की एक रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल भारत की ऑयल मार्केटिंग कंपनियां कच्चे तेल की बढ़ी कीमतों का असर सीधे उपभोक्ताओं पर नहीं डाल रही हैं। कंपनियां कुछ समय तक बढ़ी लागत का बोझ खुद उठाकर कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश कर रही हैं।

इस बीच भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए रूस से तेल आयात फिर से बढ़ाना शुरू कर दिया है। मिडिल ईस्ट में तनाव और संभावित सप्लाई बाधा को देखते हुए भारत ने रूसी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाने का फैसला किया है। भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का लगभग 90 प्रतिशत आयात करता है। 

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