थाली में पकवान सजे हैं, आँखें टीवी पर अटकी,
निवाला मुँह तक आता है, सुध-बुध कहीं भटकी।
कभी समाचार-धारावाहिक, मूवी का शोर मचता,
खाने का स्वाद न मिलता, ध्यान कहीं नहीं रहता।
खाना सिर्फ पेट भरना नहीं, ये जीवन का आधार,
हर निवाला स्वाद समझना, सेहत का यह उपहार।
बैठो शांत, सुकून के संग, भोजन का करें सम्मान,
टीवी को थोड़ी छुट्टी देकर, अपनों से करों संवाद।
जल्दी-न हड़बड़ी में खाओ, हर कौर खूब चबाओ,
स्वाद व संतुलन सेहत का, थाली में मेल बिठाओ।
मोबाइल व टीवी छोड़ो यार, भोजन को दो समय,
स्वस्थ शरीर का मंत्र, ‘सजग’ रहों जीवन सुखमय।
संजय एम तराणेकर
(कवि, लेखक व समीक्षक)
इन्दौर-452011 (मध्य प्रदेश)
मो. 98260 25986

