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छत्तीसगढ़ में गिरफ्तार केरल की दो नन को जमानत

पीड़ित बोली-पीट-पीटकर बयान बदलवाया, दुर्ग से दिल्ली-केरल तक बवाल

बिलासपुर,एजेंसी। पिछले 9 दिनों से दुर्ग जेल में बंद दोनों नन को बिलासपुर NIA कोर्ट ने 50-50 हजार के मुचलके पर जमानत दे दी है। मिशनरी सिस्टर्स को NIA कोर्ट से बेल मिलने के बाद दुर्ग जेल से रिहाई हो गई है। इस दौरान केरल की राजनीतिक पार्टियों के नेता और बिशप काउंसिल ने जेल से रिहा ननों का स्वागत किया। बड़ी संख्या में केरल के नेता और सांसद दुर्ग जेल पहुंचे थे। इनमें 5 सांसद जॉन ब्रिटास, जोस के मणि, पी संतोष, चंडी ओमेन, सनी जोसेफ शामिल हैं।

ननों की गिरफ्तारी के खिलाफ लोकसभा-राज्यसभा संसद में मामला उठा, कई राज्यों में प्रदर्शन हुए। केरल से सांसदों का प्रतिनिधिमंडल भी ननों से मिलने दुर्ग जेल पहुंचा। सांसदों ने कहा कि सरकार ने फर्जी केस में फंसाकर जेल में डाला। वहीं मेघायल CM कॉनराड संगमा ने फर्जी केस रद्द करने की अपील की।

दोनों ननों की गिरफ्तारी का मामला दुर्ग कोर्ट से खारिज होने के बाद बिलासपुर NIA कोर्ट पहुंच था। कैथोलिक नन प्रीति मैरी और वंदना फ्रांसिस की जमानत याचिका पर आज यानी 2 अगस्त को फैसला आया। ननों के वकील ने बताया कि पुलिस के पास सबूत नहीं हैं।

छत्तीसगढ़ समेत कई जगहों पर बवाल के बीच 3 युवतियों में से एक युवती ने मीडिया के सामने आकर बयान दिया कि, ननों ने उसके साथ कोई गलत व्यवहार नहीं किया। दुर्ग में उनसे मारपीट की गई। जबरन बयान बदलवाया गया।

सबसे पहले जानिए NIA कोर्ट में क्या-क्या हुआ ?

ह्यूमन ट्रैफिकिंग केस में गिरफ्तार ननों के मामले में शुक्रवार को बिलासपुर NIA कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान पीड़ित पक्ष ने अपनी दलीलें दर्ज कराईं। NIA कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया था। NIA कोर्ट के जज सिराजुद्दीन कुरैशी आज ननों की जमानत पर फैसला सुनाया।

क्या है मानव तस्करी ?

मानव तस्करी एक संगठित अपराध है, जिसमें धोखे, लालच, जबरदस्ती या बलपूर्वक लोगों को उनके घर या देश से दूर ले जाकर उनका शोषण किया जाता है। इसमें जबरन मजदूरी कराना, यौन शोषण/वेश्यावृत्ति, अंग व्यापार और शादी के लिए तस्करी होती है।

इस केस में जमानत “नॉन-बेलेबल” होती है। खासकर बच्चों या महिलाओं से जुड़े मामलों में FIR होते ही गिरफ्तारी अनिवार्य होती है। वहीं सजा की बात करें तो कोर्ट 10 साल की सजा, आजीवन कारावास और जुर्माना लग सकता है।

दुर्ग रेलवे स्टेशन पर मानव तस्करी और धर्मांतरण को लेकर बजरंग दल का हंगामा

गिरफ्तारी और लोकसभा-राज्यसभा तक की कहानी ?

दरअसल, 25 जुलाई को मिशनरी सिस्टर्स और एक युवक 3 लड़कियों के साथ रेलवे स्टेशन पर घूम रहे थे। इस दौरान बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने एक लड़की को रोते हुए देखा। इस दौरान उसके साथ आया युवक लड़की से कह रहा था कि तुम इतनी दूर आ गई हो, इसलिए तुम्हें जाना होगा।

इस दौरान बजरंग दल के कार्यकर्ता युवक की बातचीत सुन रहे थे। ऐसे में उन्हें मिशनरी सिस्टर और युवक पर शक हुआ। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने तीनों से पूछताछ की। पता चला कि मिशनरी सिस्टर और युवक तीनों लड़कियों को आगरा ले जा रहे थे।

मिशनरी सिस्टर और युवक के बीच बातचीत पर शक होने पर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने स्टेशन पर हंगामा खड़ा कर दिया। हंगामे के बीच तीनों लड़कियों, 2 ननों और उनके साथ एक युवक को जीआरपी ने पकड़ लिया और थाने ले आई।

नारायणपुर की इन 3 युवतियों को आगरा ले जाया जा रहा था।

दुर्ग रेलवे स्टेशन से लेकर GRP थाने तक जमकर हंगामा

बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने मानव तस्करी और धर्मांतरण का आरोप लगाकर दुर्ग रेलवे स्टेशन के GRP चौकी में नारेबाजी कर हंगामा शुरू कर दिया। इस दौरान बजरंग दल के दुर्ग जिला संयोजक रवि निगम और बजरंग दल की प्रदेश संयोजिका ज्योति शर्मा को सूचना दी।

इस दौरान बजरंग दल की प्रदेश संयोजिका ज्योति शर्मा भी कार्यकर्ताओं के साथ थाने पहुंची। ज्योति शर्मा ने मिशनरी सिस्टर (नन) पर युवतियों को नौकरी का झांसा देकर ले जाकर बेचने और धर्मांतरण का आरोप लगाया।

साथ ही कहा कि यह मामला सिर्फ नौकरी दिलाने का नहीं, बल्कि मानव तस्करी और धर्मांतरण से जुड़ा है। इसके बाद दोनों ननों प्रीति मैरी और वंदना फ्रांसिस के खिलाफ FIR हुई। उन्हें गिरफ्तार किया गया।

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