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उम्मेंद सिंह की पूरी हुई उम्मीद, पंचराम को भी नहीं हुई धान बेचने में परेशानी

किसानों की बदली तस्वीर 

कोरबा। जिले के पाली विकासखंड के ग्राम नानपुलाली के 72 वर्षीय किसान उम्मेंद सिंह हर वर्ष धान की अच्छी फसल की उम्मीद के साथ खेत में मेहनत करते हैं। तीन बेटों के पिता उम्मेंद सिंह ने इस वर्ष भी लगभग छह एकड़ खेत में धान की पैदावार ली। उन्होंने बताया कि इस बार टोकन कटाने के बाद पहले 76 क्विंटल और फिर 20 क्विंटल धान आसानी से बेच दिया।
किसान उम्मेंद सिंह कहते हैं कि उनके गांव के पास बने जलाशय से नहर द्वारा पानी खेतों तक पहुँच जाता है, जिससे सिंचाई का काम सरल हो जाता है। पिछले वर्ष धान बेचने से मिली राशि से उन्होंने अपने पोते की शादी भी संपन्न कराई थी।
उम्मेंद सिंह याद करते हैं कि पहले के समय में फसल लेना ही कठिन था, तो धान बेचना उससे भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण। सिंचाई की कमी से पैदावार घट जाती थी और उपार्जन केंद्रों में सुविधाएँ न होने के कारण किसानों को रात-रातभर धान बेचने के लिए प्रतीक्षा करनी पड़ती थी। अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। टोकन कटाने के बाद किसान सीधे केंद्र पहुँचकर धान बेच लेते हैं। उपार्जन केंद्रों में बैठने की सुविधा के साथ-साथ 10 हजार रुपये तक निकालने की भी व्यवस्था की गई है।


पाली मुख्यालय निवासी पंचराम पटेल भी इस बदलाव को महसूस करते हैं। लगभग 14-15 एकड़ खेत में धान उगाने वाले पंचराम ने बताया कि पिछले वर्ष उन्होंने 170 क्विंटल धान बेचा था। इस बार कुछ धान घर के उपयोग के लिए रखकर बाकी बेच चुके हैं। वे कहते हैं कि उन पर काफी कर्ज था, जिसे धान बेचने के बाद चुकाने में मदद मिली। उनके अनुसार धान का मूल्य पहले की तुलना में बढ़ा है और उपार्जन केंद्रों में सुविधाएँ भी काफी बेहतर हुई हैं।


ग्राम केरा झरिया के किसान बलराम सिंह के पास लगभग 10-11 एकड़ खेती है। सिंचाई की कोई स्थायी सुविधा न होने पर भी वे बारिश के भरोसे फसल लेते हैं। पिछले वर्ष जहाँ उन्होंने 76 क्विंटल धान बेचा था, वहीं इस बार अभी तक 55 क्विंटल बेच चुके हैं। इस वर्ष धान की बालियों में कीड़े लगने से उत्पादन कुछ कम हुआ है, लेकिन फिर भी वे मानते हैं कि किसानों के लिए उपार्जन केंद्रों में सुविधाएँ पहले की तुलना में कहीं बेहतर हैं और मूल्य भी संतोषजनक मिल रहा है।


ग्राम सैला के किसान जगनारायण सिंह आठ एकड़ में खेती करते हैं। पास के बाँध से उपलब्ध पानी ने उनकी सिंचाई की समस्या हल कर दी है। पिछले वर्ष उन्होंने 110 क्विंटल धान बेचा था, जबकि इस बार लगभग 144 क्विंटल बेच रहे हैं। धान बेचने से मिली राशि से वे बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाते हैं और इस वर्ष अपने कुछ कर्ज भी चुकाने की उम्मीद रखते हैं।
जगनारायण सिंह का कहना है कि टोकन काटने से लेकर धान बेचने तक अब कोई परेशानी नहीं होती। वे मानते हैं कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में किसानों को लगातार सुविधाएँ मिल रही हैं और खेत से लेकर उपार्जन केंद्र तक उनकी मुश्किलें कम हुई हैं।

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