नई दिल्ली, एजेंसी। केंद्रीय सूचना और प्रसारण, संसदीय कार्य राज्य मंत्री एल मुरुगन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। पीएम मोदी को 5 पेज की चिट्ठी में उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता भी छोड़ने की बात कही है।

मुरुगन ने चिट्ठी में लिखा-
मुझे जिम्मेदारियों से मुक्त किया जाए। मैं तमिलनाडु में BJP को मजबूत करने के लिए अपना समय देना चाहता हूं।
मुरुगन ने लिखा- आपके नेतृत्व में देश और तमिलनाडु की सेवा करना उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान है। वे गरीब परिवार से आते हैं और उनके माता-पिता मजदूरी करते थे।
भाजपा और एबीवीपी में करीब 30 साल काम करते हुए उनका मूल मंत्र रहा है कि राष्ट्र पहले, पार्टी दूसरे और खुद सबसे आखिर में। मंत्री और सांसद के रूप में जिम्मेदारी देने के लिए आपका आभार।
तमिलनाडु के रहने वाले मुरुगन मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं। उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 तक था।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में विजय की पार्टी के प्रत्याशी से हारे थे
इसी साल 4 मई को आए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के परिणामों में केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन तमिलनाडु की अविनाशी (SC) सीट से किस्मत आजमा रहे थे। वे दूसरे नंबर पर रहे। उन्हें 56,200 से ज्यादा वोट मिले। सीएम विजय की टीवीके (थलापति विजय की पार्टी) के प्रत्याशी कमाली एस. से वह 15373 वोटों से हार गए थे।
माता-पिता दिहाड़ी मजदूरी करते थे, मुरुगन मंत्री बने तो कहा था- हम फावड़ा चलाकर ही खुश
एल मुरुगन जब पहली बार मंत्री बने थे, तब उनके माता पता तमिलनाडु में नमक्कल जिले के कुनूर गांव में दिहाड़ी मजदूरी करते हैं।
एल मुरुगन के पिता लोगनाथन और मां वरुदम्मल गांव में अपने छोटे से घर में रहते हैं। वह अनुसूचित जाति के अरुंथथियार समुदाय से आते हैं। बेटे के केंद्रीय मंत्री बनने के बाद भी उनकी दिनचर्या में बदलाव नहीं आया था। गांव वाले बताते हैं कि बेटे के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष होने के बाद भी लोगनाथन कोरोना महामारी के टीके के लिए आम लोगों की तरह कतार में लगे थे।
मुरुगन की मां वरुदम्मल ने तब कहा था- हमने अपने बेटे का भविष्य बनाने के लिए कुछ नहीं किया, लेकिन आज उसने जो जगह कमाई है, वह उसी की मेहनत हैं। हमें उस पर गर्व है। हम खेतों में काम कर रहे थे। मंत्री बनने की खबर सुनने के बाद भी दोनों ने काम रोका नहीं था।
