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वेदांता प्लांट हादसा…NGSL के पास थी ऑपरेशन-मेंटेनेंस की जिम्मेदारी:इसकी भूमिका भी जांच के दायरे में, बॉयलर ब्लास्ट में अब तक 24 लोगों की मौत

सक्ती, एजेंसी। सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए बॉयलर ब्लास्ट मामले की जांच का दायरा बढ़ गया है। जांच अब केवल हादसे तक सीमित न रहकर ऑपरेशन फेलियर की ओर भी इशारा कर रही है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि, प्लांट के ऑपरेशन और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी संभाल रही एनटीपीसी जीई पावर सर्विस लिमिटेड (एनजीएसएल) की भूमिका अब जांच के केंद्र में है।

एनजीएसएल, एनटीपीसी और जीई पावर इंडिया लिमिटेड का एक संयुक्त उपक्रम है, जिसमें दोनों की 50-50 प्रतिशत हिस्सेदारी है। एनटीपीसी देश की सबसे बड़ी सरकारी बिजली उत्पादक कंपनी है, जबकि जीई पावर इंडिया निजी क्षेत्र की एक प्रमुख कंपनी है, जो 1999 से पावर सेक्टर में सक्रिय है। इसके बावजूद, 600 मेगावॉट क्षमता वाली यूनिट का सुरक्षित संचालन सुनिश्चित नहीं हो सका।

क्या सुरक्षा अलार्म को अनदेखा किया गया ?

यह हादसा सिंघीतराई प्लांट की बॉयलर यूनिट-1 में हुआ था, जिसका संचालन स्टेशन हेड राजेश सक्सेना के अधीन था। मजिस्ट्रियल जांच में अब इस बात पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है कि क्या बॉयलर का दबाव बढ़ने के बावजूद सुरक्षा अलार्म को अनदेखा किया गया था। साथ ही, निर्धारित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) का पालन किया गया था या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है।

इस पूरे मामले की जांच सक्ती कलेक्टर अमृत विकास तोपनो और एसपी प्रफुल्ल ठाकुर के नेतृत्व में की जा रही है। जिला प्रशासन ने संबंधित दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। तकनीकी पहलुओं की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए एक केंद्रीय टीम को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया गया है।

राजेश सक्सेना पर थी संचालन की जिम्मेदारी

सिंघीतराई प्रोजेक्ट में एनजीएसएल की टीम तैनात है, जिसमें राजेश सक्सेना प्रोजेक्ट हेड और साइट इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। वे वरिष्ठ महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी हैं। वेदांता प्रबंधन और एनजीएसएल कॉर्पोरेट ऑफिस के बीच समन्वय की मुख्य कड़ी माने जाते हैं। यूनिट-1 के दैनिक संचालन की सीधी जिम्मेदारी भी उन्हीं के पास थी।

इसके अलावा मेंटेनेंस टीम बॉयलर, टरबाइन और अन्य सहायक उपकरणों के रखरखाव के लिए जिम्मेदार थी। ऐसे में ऑपरेशन और मेंटेनेंस से जुड़े सभी अधिकारियों की भूमिका की बारीकी से जांच की जा रही है।

ऑपरेशन-मेंटेनेंस की जिम्मेदारी भी एनजीएसएल के पास

जानकारी के अनुसार, वेदांता की तरफ से 2022 में प्लांट अधिग्रहित करने के बाद पिछले साल एनजीएसएल को संचालन और रखरखाव की अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई थी। इसमें मशीनों की नियमित निगरानी, तकनीकी खामियों की समय पर पहचान और सुधार, सुरक्षा मानकों का पालन, कर्मचारियों और उपकरणों की सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल था।

औद्योगिक सुरक्षा विभाग के सहायक संचालक अश्विनी पटेल ने बताया कि, सिंघीतराई प्लांट में ऑपरेशन और मेंटेनेंस का कार्य एनजीएसएल की तरफ से किया जा रहा था। वहीं, वेदांता कंपनी के पीआरओ दीपक विश्वकर्मा ने भी पुष्टि की है कि बॉयलर यूनिट-1 की जिम्मेदारी एनजीएसएल के पास थी।

जांच की दिशा बदली, जवाबदेही तय होना बाकी

हादसे के बाद अब जांच की दिशा स्पष्ट रूप से ऑपरेशन और मेंटेनेंस से जुड़ी लापरवाही की ओर मुड़ गई है। प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि क्या तकनीकी चेतावनियों को नजरअंदाज किया गया, या सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन नहीं हुआ।

फिलहाल जांच जारी है और आने वाले दिनों में यह तय होगा कि इस भीषण हादसे के लिए जिम्मेदारी किस स्तर पर तय की जाती है। प्रबंधन, ऑपरेशन टीम या मेंटेनेंस एजेंसी।

अब तक 24 श्रमिकों की मौत, बाकी का इलाज जारी

गौरतलब है कि वेदांता प्लांट मे हुए हादसे में अब तक 24 लोगों की मौत हो चुकी है। बाकी घायलों का इलाज कई अस्पतालों मे जारी है।

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