दुर्ग-भिलाई, एजेंसी। दुर्ग में गुरुवार को गृहमंत्री विजय शर्मा ने वंदे मातरम्, नक्सलवाद और जेल में बंद नक्सल मामलों के आरोपियों समेत कई मुद्दों पर सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कांग्रेस की ओर से वंदे मातरम् के दो पैरा गाने की बात पर कहा कि देश में जो व्यवस्था तय हुई है, उसका पूरा पालन होना चाहिए।
विजय शर्मा ने कहा कि पहले वंदे मातरम् पूरा गाया जाता था, लेकिन बाद में तुष्टीकरण के कारण इसे सीमित कर दिया गया। अब देश अपने स्वाभिमान और मान-बिंदुओं के साथ खड़ा है, इसलिए वंदे मातरम् को लेकर भी पहले की व्यवस्था बहाल होनी चाहिए।
गृहमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि किसी मुद्दे को राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। भाजपा का विरोध करने के चक्कर में देश का विरोध नहीं होना चाहिए। वंदे मातरम् और तिरंगा किसी राजनीतिक दल के नहीं, बल्कि पूरे देश के हैं।
विजय शर्मा ने कहा कि तिरंगा यात्रा भाजपा की नहीं, बल्कि देश के नागरिकों की यात्रा है। सरकार ने जंगलों से नक्सलवाद को बाहर किया है, जिसके दिमाग में नक्सल होगा, उसे दिमाग से भी निकालेंगे।
विजय शर्मा ने कहा कि जिसके दिमाग में नक्सल होगा, उसे दिमाग से भी निकालेंगे।
भाजपा कोर ग्रुप की थी बैठक
दरअसल दुर्ग में 20 अगस्त को भाजपा कोर ग्रुप की बैठक थी, जिसमें शामिल होने उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा भी पहुंचे थे। इस दौरान दिमागी नक्सलवाद को लेकर कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम के बयान पर सवाल पूछा गया।
इस पर विजय शर्मा ने नक्सलवाद का मुद्दा उठाते हुए कहा कि नक्सल आखिर कहां होता है? उन्होंने कहा कि नक्सलवाद सिर्फ जंगल में नहीं, बल्कि दिमाग में भी होता है। जब किसी व्यक्ति के दिमाग में नक्सली सोच पैदा होती है, तभी वह हथियार उठाता है।
उन्होंने बस्तर में नक्सली हिंसा से प्रभावित लोगों का जिक्र करते हुए कहा कि कई लोगों ने आईईडी विस्फोटों में अपने पैर गंवाए हैं, जबकि कई परिवारों ने अपने लोगों को खोया है। ऐसी हिंसा पर किसी को गर्व कैसे हो सकता है।
विजय शर्मा ने ताड़मेटला में 76 जवानों की मौत का भी जिक्र किया और नक्सलवाद को लेकर कांग्रेस के पुराने रुख पर सवाल उठाए।
दिमागी नक्सलवाद में फर्क बताया
विजय शर्मा ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार के खिलाफ बोलने और उसकी आलोचना करने की पूरी आजादी है। सरकार से सवाल करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, समाज में वैमनस्य फैलाना या देश में अराजक स्थिति पैदा करने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी।
जेल में बंद नक्सल आरोपियों के मामलों की समीक्षा
गृहमंत्री ने सालों से जेल में बंद नक्सल मामलों के आरोपियों को लेकर सरकार की प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पुराने मामलों में करीब 1300 लोग जेल में बंद हैं। इन मामलों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर समीक्षा की जा रही है।
सबसे पहले यह देखा जा रहा है कि किन मामलों में जनहानि हुई है और किन मामलों में जनहानि नहीं हुई। जिन मामलों में जनहानि नहीं हुई, उन्हें भी दो श्रेणियों में बांटा गया है। एक श्रेणी में यूएपीए जैसे केंद्रीय कानून के तहत दर्ज मामले हैं, जबकि दूसरी श्रेणी में ऐसे मामले हैं, जिनमें कोई केंद्रीय कानून लागू नहीं है।
मामलों की हो रही समीक्षा
विजय शर्मा के मुताबिक फिलहाल उन मामलों की समीक्षा की जा रही है, जिनमें जनहानि नहीं हुई है और केंद्रीय कानून भी लागू नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इन प्रकरणों की स्थिति का परीक्षण किया जा रहा है।
विजय शर्मा ने पिछली कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि उसने नक्सलवाद से जुड़े मामलों में किसी व्यक्ति को रिहा नहीं किया।
उनके मुताबिक, पिछली सरकार ने ऐसे लोगों को जरूर छोड़ा, जिनके मामलों का नक्सलवाद से कोई संबंध नहीं था। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार नक्सल मामलों में नियमानुसार कार्रवाई करके दिखाएगी।
