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कमर तक पानी में शव लेकर श्मशान पहुंचे ग्रामीण:रास्ता गड्ढे-कीचड़ में बदला, फिसल कर गिरे लोग, कहा- बरसात में किसी की मौत न हो

दुर्ग-भिलाई,एजेंसी। दुर्ग जिले के सेमरिया गांव का एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में कई ग्रामीण एक शव को कंधे पर लेकर कमर भर पानी और कीचड़ से भरे रास्ते से गुजरते दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, बारिश में बागडूमर से सेमरिया तक करीब 4 किलोमीटर रास्ते में जगह-जगह बड़े गड्ढे और पानी भर जाता है।

श्मशान घाट तक पहुंचने वाले अंतिम डेढ़ किलोमीटर रास्ते की हालत सबसे ज्यादा खराब है। हाल ही में एक शव को श्मशान घाट ले जाने के दौरान करीब 30-40 ग्रामीणों को कंधा लगाना पड़ा। कीचड़ में कई लोग फिसले, जबकि कुछ ग्रामीण रास्ते में ही पीछे रह गए।

सेमरिया गांव दुर्ग जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर और भिलाई स्टील प्लांट से करीब 20 किलोमीटर दूर है। यह अहिवारा विधानसभा क्षेत्र के धमधा जनपद पंचायत अंतर्गत बागडूमर ग्राम पंचायत का आश्रित गांव है।

बारिश में अंतिम यात्रा के लिए शव को श्मशान घाट तक जाने के लिए कमर तक पानी को पार करना पड़ता है।

सेमरिया गांव में बारिश के दिनों में सड़क की बदहाली लोग परेशान

श्मशान घाट तक पहुंचने का लगभग डेढ़ किलोमीटर का रास्ता कीचड़ से भरा

नाले के पास कमर भर पानी

ग्रामीणों के अनुसार, गांव से श्मशान घाट तक का लगभग डेढ़ किलोमीटर का रास्ता पूरी तरह कीचड़ से भरा रहता है। नाले के पास पानी का स्तर काफी बढ़ जाता है, जिसके कारण हालिया अंतिम यात्रा में शव को कमर तक पानी के बीच से पार कराना पड़ा था।

लोग बोले- बरसात में किसी की मौत न हो

ग्रामीण तन्नू सोरी ने कहा कि हाल ही में शव ले जाते समय दाह संस्कार में शामिल होने आए कई लोग कीचड़ में गिर गए। कमर भर पानी पार कर शव को श्मशान घाट तक ले जाना पड़ा। उन्होंने कहा कि कई सालों से ग्रामीण इस रास्ते की परेशानी देख रहे हैं और सड़क बनवाने के लिए लगातार मांग कर रहे हैं।

उन्होंने मीडिया के माध्यम से प्रशासन से सड़क बनाने की अपील की। उनका कहना है कि गांव वालों को ऐसी सड़क चाहिए, जिससे कम से कम किसी व्यक्ति को अंतिम विदाई देने के लिए इस तरह संघर्ष न करना पड़े।

श्मशान घाट में शेड, लेकिन पहुंचने का रास्ता नहीं

ग्रामीणों के अनुसार श्मशान घाट में शेड बनाया गया है, लेकिन वहां तक पहुंचने का रास्ता ही सबसे बड़ी समस्या है। बारिश में कीचड़ और पानी के कारण शेड तक शव ले जाना मुश्किल हो जाता है।

रामअवतार यादव ने बताया कि उन्होंने करीब 2 दिन पहले अंतिम यात्रा का वीडियो बनाया था। उनके मुताबिक गांव से शव को लेकर लोग सामान्य तरीके से आगे बढ़े, लेकिन श्मशान घाट के रास्ते में स्थिति इतनी खराब हो गई कि शव उठाने के लिए करीब 30 से 40 लोगों की जरूरत पड़ी।

यादव ने बताया कि कुछ लोग गिरते-पड़ते श्मशान घाट तक पहुंचे, जबकि कुछ लोग रास्ते की कठिनाई के कारण वहां तक नहीं पहुंच सके। उनका कहना है कि बारिश के दौरान कई बार शेड होने के बावजूद रास्ते की समस्या के कारण खुले में अंतिम संस्कार करने की स्थिति बन जाती है।

‘बचपन बीत गया, सड़क नहीं बदली’

यादव ने कहा कि उनकी उम्र करीब 32 वर्ष हो चुकी है और बचपन से गांव की यही बदहाल स्थिति देखते आ रहे हैं। उन्होंने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से गांव की सड़क और विकास कार्यों पर ध्यान देने की मांग की।

उन्होंने बताया कि दुर्ग जिला पंचायत की अध्यक्ष सरस्वती बंजारे इसी क्षेत्र से जिला पंचायत की सदस्य हैं और विधायक डोमन लाल कोर्सेवाड़ा इस विधानसभा क्षेत्र की विधायक हैं।

सिर्फ श्मशान घाट नहीं, गांव तक पहुंचना भी मुश्किल

सेमरिया की आबादी करीब 500 है और यहां आदिवासी गोंड समाज के लोगों की बहुलता है। ग्रामीणों के मुताबिक बागडूमर से गांव तक आने वाला करीब 4 किलोमीटर का रास्ता भी बारिश में बेहद खराब हो जाता है।

तन्नू सोरी (22) ने बताया कि गांव के युवा अहिवारा जाकर कंप्यूटर क्लास करते हैं, लेकिन बरसात में सड़क की हालत के कारण वहां जाना मुश्किल हो जाता है। साइकिल पंचर होने और रास्ते में गिरने की घटनाएं होती रहती हैं।

उन्होंने बताया कि कई बार नेताओं से सड़क बनाने की मांग की गई। उनका कहना है कि अगर बस्तर और अन्य वन क्षेत्रों में सड़कें बन सकती हैं तो उनके गांव तक सड़क क्यों नहीं पहुंच सकती।

‘यह बस्तर नहीं, भिलाई से 20 किलोमीटर दूर है’

ग्रामीणों की सबसे बड़ी नाराजगी इसी बात को लेकर है कि सेमरिया किसी दूरस्थ जंगल या सुदूर इलाके में नहीं है। भिलाई इस्पात संयंत्र से करीब 20 किलोमीटर की दूरी पर होने के बावजूद गांव की सड़क व्यवस्था इतनी खराब है कि बारिश में सामान्य आवागमन तक मुश्किल हो जाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि एक तरफ शहरों में सड़क, बिजली और दूसरी बुनियादी सुविधाओं के विकास की बातें होती हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके गांव में अंतिम यात्रा के लिए भी कीचड़ और पानी से जूझना पड़ रहा है।

कलेक्टर बोले- 2 सड़कों की समस्या सामने आई

दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह ने बताया कि इस सड़क के लिए प्रस्ताव शासन को पहले ही भेजा जा चुका है। वहीं श्मशान घाट तक जाने वाली सड़क के लिए ग्रामीण सड़क योजना के अभियंता को सर्वे करने के निर्देश दिए गए हैं। सर्वे के बाद इसे योजना के नेटवर्क में शामिल करने के लिए प्रस्ताव जल्द भेजा जाएगा।

उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त करते हुए कहा कि सड़क की समस्या को देखते हुए उच्च स्तर पर विशेष रूप से बात कर इसे स्वीकृत कराने का प्रयास किया जाएगा।

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