रायपुर,एजेंसी। रायपुर स्थित राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल डॉ. भीमराव अंबेडकर हॉस्पिटल स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। जिसके कारण यहां काम तो प्रभावित हो रहा है, वहीं डॉक्टर्स-मरीजों के बीच विवाद की स्थिति बन रही है। दरअसल, रविवार रात नाइट ड्यूटी पर तैनात जूनियर डॉक्टर्स और मरीज के साथ पहुंचे अटेंडर्स के बीच गाली-गलौज और मारपीट हो गई।
भास्कर ने इस घटना के बाद पड़ताल की जिसमें सामने आया कि, पूरा विवाद समय पर वार्ड बॉय नहीं मिलने से हुआ था। मरीज को डॉक्टर्स एक्स-रे और यूएसजी जैसी जांच के लिए भेजना चाहते थे। लेकिन स्टाफ की कमी के कारण दोनों पक्षों में झड़प हो गया। अस्पताल में वार्ड बॉय और अटेंडर जैसे 166 पद खाली पड़े हैं। डॉक्टर्स के मुताबिक सरकार भर्ती नहीं कर रही, जूडा पर वर्क लोड बढ़ रहा है।
रविवार रात ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर्स और अटैंडर्स के बीच विवाद हो गया था।
पहले जानिए पूरा मामला
रविवार रात को डॉक्टर्स वार्ड बाय के आने का इंतजार कर रहे थे और लेटलतीफी होता देख मरीज के साथ पहुंचे दो अटेंडर्स अग्रेसिव हो गए। डॉक्टरों के मुताबिक दोनों अटेंडर्स को कई दफा समझाइश देने के बावजूद वो शांत नहीं हुए। दोनों गाली-गलौज पर उतर आए। इसके बाद महिला स्टाफ के साथ दोनों ने अभद्रता की और फिर विवाद हो गया।
दोनों पक्षों ने पूरे मामले की थाने में शिकायत दी थी। मरीज के साथ पहुंचे लोगों (अटेंडर्स) ने डॉक्टरों पर मारपीट का आरोप लगाया था। वहीं डॉक्टरों ने भी अटेंडर्स पर महिला स्टाफ के साथ बदसलूकी और इलाज के दौरान बाधा पहुंचाने का आरोप लगाया।

जूडा ने पूरे मामले को लेकर प्रोटेस्ट किया था।
जूडा प्रोटेस्ट किया, दूसरे पक्ष ने माफी मांगी
पूरे मामले को लेकर जूडा ने प्रोटेस्ट किया था। जिसके बाद दूसरे पक्ष ने माफी मांग ली और मामला शांत हो गया। लेकिन हाल की घटना केवल उदाहरण है। स्टाफ की कमी से जूझ रहे इस हॉस्पिटल में कई दफा इसी कारण के चलते विवाद हो चुका है।
हॉस्पिटल को 500 से ज्यादा स्टाफ की जरूरत है। ताकि डॉक्टर कंफर्टेबल होकर इलाज कर सके और मरीज या उनके परिजन इमरजेंसी के दौरान पैनिक न हो। लेकिन सरकार भर्तियां नहीं निकाल रही।
वार्ड बॉय मिलता तो नहीं होता विवाद
डॉक्टर्स और अटेंडर्स बीच हुए विवाद का एक तीसरा और बेहद महत्वपूर्ण पक्ष और है। डॉक्टरों और दोनों अटेंडर्स ने बताया कि विवाद वाली रात हॉस्पिटल में वार्ड बॉय की कमी थी। इसलिए लंबी बहस का दौर चला और विवाद हुआ। समय पर जांच के लिए वार्ड बॉय मिल जाते तो ये विवाद इतना नहीं बढ़ता।
1135 बेड पर 720 बेड के लिए ही कर्मचारी
मेकाहारा में इस समय मरीजों के लिए 1135 बेड हैं। लेकिन अस्पताल में कर्मचारी लगभग 700 बेड के हिसाब से ही हैं। यही वजह है कि आए दिन मरीज, अटैंडर्स और डॉक्टरों के बीच तनाव पैदा हो जाता है। मरीजों के साथ पहुंचे अटैंडर्स वार्ड में इलाज उनका कराने के लिए कभी स्ट्रेचर तो कभी व्हीलचेयर लेकर भटकते रहते हैं।
सरकार खाली पदों पर नहीं निकाल रही भर्ती
स्वास्थ्यकर्मियों की भर्ती को लेकर हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन कई बार शासन को लेटर लिख चुका है। लेकिन खाली पदों पर भर्ती नहीं निकाली गई है। अस्पताल में तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों के 844 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 296 नियमित कर्मचारी हैं। 428 पद अभी खाली हैं।
