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कौन है अधिकृत प्रतिनिधि? बांकीमोंगरा में पार्षद प्रतिनिधि की भूमिका पर उठे सवाल, राकेश-जगदीश के खिलाफ जांच की मांग,,,देखे पूरी खबर

संवाददाता साबीर अंसारी

कलेक्टर को सौंपे आवेदन में शासकीय कामकाज में कथित हस्तक्षेप और दबाव बनाने के आरोप, दस्तावेज व अन्य साक्ष्य संलग्न होने का दावा

बांकीमोंगरा। नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा में पार्षद प्रतिनिधि की भूमिका को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। मामले में राकेश पटेल और जगदीश पटेल की भूमिका को लेकर सवाल उठाते हुए कलेक्टर के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की गई है। शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने और यदि आरोप सही पाए जाएं तो नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।

विवाद की शुरुआत आखिर किस बात से हुई?

शिकायत में मुख्य सवाल यह उठाया गया है कि निर्वाचित पार्षद के प्रतिनिधि के तौर पर किस व्यक्ति को शासकीय स्तर पर कार्य करने का अधिकार है और उसकी सीमाएं क्या हैं?

आवेदनकर्ताओं का आरोप है कि राकेश पटेल एवं जगदीश पटेल द्वारा स्वयं को पार्षद प्रतिनिधि के रूप में प्रस्तुत करते हुए नगर पालिका सहित अन्य मामलों में कथित रूप से हस्तक्षेप किया जा रहा है। शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि आम लोगों से जुड़े कई मामलों में प्रभाव और दबाव का इस्तेमाल किया गया।

हालांकि, शिकायत में लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

ठेका, पेंशन से लेकर SECL L&R तक का जिक्र

कलेक्टर को दिए गए आवेदन में ठेका, रोजगार, राशन कार्ड, पेंशन और SECL L&R से जुड़े मामलों का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इन मामलों में लोगों के बीच प्रभाव बनाने और कथित रूप से दबाव डालने की कोशिश की गई।

यही नहीं, आवेदन में कथित अवैध वसूली के आरोप भी लगाए गए हैं। इन आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

राजपत्र को बनाया आधार, प्रशासन से मांगी स्पष्टता

मामले में शिकायतकर्ताओं ने 6 अगस्त 2026 के छत्तीसगढ़ राजपत्र की प्रति सहित अन्य दस्तावेज संलग्न किए जाने की बात कही है। इसके अलावा फोटो और वीडियो साक्ष्य उपलब्ध कराने का भी दावा किया गया है।

अब पूरे मामले में प्रशासन के सामने सबसे अहम सवाल यही है कि संबंधित व्यक्तियों की भूमिका वास्तव में क्या है और क्या उन्हें पार्षद प्रतिनिधि के रूप में शासकीय कार्यों में हस्तक्षेप करने का अधिकार है?

शिकायत के बाद बढ़ी प्रशासनिक जिम्मेदारी

शिकायत की प्रतियां संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों एवं अन्य जिम्मेदार पदाधिकारियों को भी भेजी गई हैं। ऐसे में अब निगाहें प्रशासन की जांच पर टिकी हैं।

यदि जांच में शिकायत में लगाए गए आरोप प्रमाणित होते हैं तो संबंधित व्यक्तियों की भूमिका और कथित हस्तक्षेप पर प्रशासन को नियमानुसार कार्रवाई करनी पड़ सकती है। वहीं, यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो प्रशासन द्वारा वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना भी जरूरी होगा।

असली मुद्दा—प्रतिनिधि की सीमा क्या है?

यह विवाद केवल दो व्यक्तियों के खिलाफ शिकायत तक सीमित नहीं है। इसका बड़ा सवाल यह है कि निर्वाचित जनप्रतिनिधि के प्रतिनिधि की भूमिका और अधिकारों की सीमा आखिर क्या है?

शासकीय कामकाज में कौन हस्तक्षेप कर सकता है, किसे फाइलों या प्रस्तावों पर अधिकार है और आम जनता से जुड़े मामलों में प्रतिनिधि की वैधानिक भूमिका कितनी है—इन सवालों पर प्रशासन की स्पष्टता इस विवाद को खत्म करने में अहम हो सकती है।

फिलहाल मामला शिकायत और आरोपों के स्तर पर है। राकेश पटेल, जगदीश पटेल अथवा संबंधित पार्षद का पक्ष सामने आने पर उसे भी समाचार में प्रमुखता से शामिल किया जाना उचित होगा।

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