मुंबई, एजेंसी। मीडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच जहां आमतौर पर सोने की कीमतों में तेजी देखने को मिलती है, वहीं इस बार उल्टा ट्रेंड देखने को मिला है। मार्च के दौरान सोने की कीमतों में गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया है, जिससे बाजार में नई अनिश्चितता पैदा हो गई है। अब Morgan Stanley ने इस कमजोरी के पीछे कई अहम कारणों का खुलासा किया है।

एक महीने में 10% से ज्यादा गिरावट
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव के बाद 2 मार्च को एमसीएक्स पर गोल्ड फ्यूचर्स रू.1,67,090 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था। हालांकि, 2 अप्रैल तक यह गिरकर रू.1,49,680 पर आ गया। इस दौरान सोने में 10% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
डॉलर की मजबूती बनी सबसे बड़ी वजह
Morgan Stanley के एनालिस्ट्स के अनुसार, सोने की गिरावट की मुख्य वजह अमेरिकी डॉलर की मजबूती है। डॉलर मजबूत होने पर अन्य मुद्राओं में सोना महंगा हो जाता है, जिससे इसकी मांग घटती है।
ब्याज दरों की उम्मीद ने भी डाला असर
मध्यपूर्व तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा है। ऐसे में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कम हो गई है। ऊंची ब्याज दरें सोने के लिए नकारात्मक मानी जाती हैं।
लिक्विडिटी दबाव और बिकवाली
शेयर बाजार में गिरावट के चलते निवेशकों पर मार्जिन कॉल का दबाव बढ़ा है। ऐसे में कई निवेशक नकदी जुटाने के लिए सोना बेच रहे हैं, जिससे कीमतों पर और दबाव आया है।
बदला बाजार का ट्रेंड
आमतौर पर शेयर बाजार में गिरावट के दौरान सोना मजबूत होता है लेकिन इस बार दोनों में कमजोरी देखने को मिल रही है। इससे निवेशकों के बीच अनिश्चितता और बढ़ गई है।
