प्योंगयांग/ बीजिंग, एजेंसी। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) ने उत्तर कोरिया की दो दिवसीय राजकीय यात्रा मंगलवार को संपन्न कर ली और बीजिंग लौट गए। सात वर्षों बाद हुई इस यात्रा को दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों को पुनर्जीवित करने और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में अपनी भूमिका मजबूत करने के महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। प्योंगयांग में सोमवार को पहुंचने पर शी जिनपिंग का भव्य स्वागत किया गया। उत्तर कोरियाई नेता Kim Jong Un स्वयं उनके स्वागत और विभिन्न सार्वजनिक कार्यक्रमों में मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने शिखर वार्ता में द्विपक्षीय सहयोग को और विस्तार देने पर जोर दिया।

चीनी और उत्तर कोरियाई सरकारी मीडिया के अनुसार, शी जिनपिंग ने व्यापार, कृषि, निर्माण, प्रौद्योगिकी और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की चीन की इच्छा व्यक्त की। वहीं किम जोंग उन ने कहा कि चीन के साथ मित्रता को उत्तर कोरिया की “सर्वोच्च रणनीतिक प्राथमिकता” के रूप में बनाए रखा जाएगा। दोनों नेताओं ने 1950-53 के कोरियाई युद्ध में मारे गए चीनी सैनिकों की स्मृति में बने चीन-उत्तर कोरिया मैत्री स्मारक का भी दौरा किया और पारंपरिक मित्रता को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब उत्तर कोरिया के रूस के साथ संबंध तेजी से मजबूत हुए हैं। यूक्रेन युद्ध के दौरान प्योंगयांग और मॉस्को की बढ़ती निकटता ने बीजिंग की चिंता बढ़ाई है। विश्लेषकों के अनुसार, शी जिनपिंग की यात्रा का एक प्रमुख उद्देश्य उत्तर कोरिया पर चीन के पारंपरिक प्रभाव को फिर से मजबूत करना और यह दिखाना था कि बीजिंग अब भी प्योंगयांग का सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है। सरकारी मीडिया रिपोर्टों में कहा गया कि किम जोंग उन ने ताइवान मुद्दे पर चीन की “एक-चीन नीति” का समर्थन दोहराया। दोनों देशों ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर आपसी समन्वय बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी जताई।
हालांकि दोनों देशों की सरकारी रिपोर्टों में उत्तर कोरिया के परमाणु हथियार कार्यक्रम पर किसी विस्तृत चर्चा का उल्लेख नहीं किया गया। यह विषय क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक माना जाता है। यात्रा से पहले किम जोंग उन की बहन Kim Yo Jong ने स्पष्ट कहा था कि उत्तर कोरिया अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को छोड़ने वाला नहीं है और वह अपने परमाणु शस्त्रागार का विस्तार जारी रखेगा। दूसरी ओर चीन ने एक बार फिर कोरियाई प्रायद्वीप के परमाणु निरस्त्रीकरण के समर्थन की अपनी पुरानी नीति दोहराई। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Lin Jian ने कहा कि इस मुद्दे पर बीजिंग की नीति में कोई बदलाव नहीं आया है।
यात्रा के अंतिम दिन किम जोंग उन और उनकी पत्नी स्वयं हवाई अड्डे तक शी जिनपिंग और उनकी पत्नी को विदा करने पहुंचे। उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया के अनुसार, उनके सम्मान में विशेष विदाई समारोह आयोजित किया गया। किम ने कहा कि शी जिनपिंग की यात्रा पूरी तरह सफल रही और इससे दुनिया को यह संदेश गया कि चीन और उत्तर कोरिया अपनी पारंपरिक मित्रता और रणनीतिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
