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नेपाल बाढ़ में 10 सेकेंड ने बचाई कई जानें:चेतावनी मिलते ही ऊंचाई की तरफ भागे लोग, अब तक 919 मौतें, 4200 से ज्यादा लापता

काठमांडू/नई दिल्ली, एजेंसी। नेपाल में 26 अगस्त की बाढ़ के दौरान सिर्फ 10 सेकेंड कई लोगों के लिए जिंदगी और मौत का फर्क बन गए। रसुवा कस्टम ऑफिस के अधिकारी करबीर गैरे ने बाढ़ का पानी आते देखा और लोगों को ऊंचाई की ओर भागने को कहा।

करीब 10 सेकेंड बाद तेज बहाव ने आसपास के ढांचे बहा दिए। नेपाल के फ्लड फोरकास्टिंग डिविजन के मुताबिक, सुबह करीब 9 बजे तिब्बत की तरफ से भोटेकोशी में बाढ़ की सूचना मिली।

इसके 15-16 मिनट बाद रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन में करीब 6 लाख SMS अलर्ट भेजे गए। समय पर चेतावनी मिलने से कई लोग सुरक्षित जगह पहुंच सके।

नेपाल-तिब्बत में बाढ़ से 919 लोगों की मौत हो चुकी है। अकेले नेपाल में 903 मौते हुई हैं, जबकि तिब्बत में मरने वालों का आंकड़ा 16 पहुंच गया है 4200 से ज्यादा लोग लापता हैं।

नेपाल त्रासदी की ताजा तस्वीरें…

नेपाल के नुवाकोट में 32 साल की प्रबिता रोइला का उनके परिवार ने सूर्यामती नदी किनारे अंतिम संस्कार किया।

नेपाल के नुवाकोट में 32 साल की प्रबिता रोइला का उनके परिवार ने सूर्यामती नदी किनारे अंतिम संस्कार किया।

चितवन के जंगल में सामूहिक दफन स्थल पर शवों को कब्र तक ले जाते सशस्त्र पुलिस बल के जवान।

पुलिसकर्मी ने बाढ़ प्रभावित इलाके से एयरलिफ्ट किए गए शव से भरे बैग पर केमिकल डाला।

लापता लोगों के परिजनों से DNA सैंपल मांगे गए

नेपाल में लापता लोगों की पहचान के लिए उनके परिजनों से DNA सैंपल मांगे गए हैं। पुलिस ने माता-पिता और बच्चों से DNA देने के साथ लापता व्यक्ति की आखिरी बार देखे जाने की जगह और समय की जानकारी देने को कहा है।

नेपाल के बाहर रहने वाले ऐसे लोग, जिनके रिश्तेदार नेपाल में लापता हैं, उन्हें अपने देश में DNA प्रोफाइलिंग कराकर रिपोर्ट ईमेल से नेपाल पुलिस को भेजने को कहा गया है।

नेपाल के काठमांडू में त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल की दीवारों पर लगी शवों की तस्वीरें देखते हुए परिवार और रिश्तेदार।

नेपाल बाढ़ में बहे 4 शव उत्तर प्रदेश में मिले

नेपाल में आई बाढ़ के बाद 4 अज्ञात शव बहकर उत्तर प्रदेश पहुंच गए। ये शव नारायणी-गंडक नदी से यूपी के महाराजगंज जिले में मिले थे। इन्हें नेपाल प्रशासन को सौंप दिया गया हैं।

अधिकारियों के मुताबिक, शवों में 3 महिलाएं और एक पुरुष शामिल हैं। पहचान नहीं होने के कारण पोस्टमॉर्टम के दौरान DNA सैंपल लिए गए हैं। ये सैंपल नेपाल प्रशासन के साथ साझा किए जाएंगे, ताकि लापता लोगों के परिजनों के DNA से उनका मिलान किया जा सके।

चीन ने नेपाल को डेटा न देने के आरोप को खारिज किया

चीन ने नेपाल के उन आरोपों को खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि चीन ने ग्लेशियरों की गतिविधियों और पानी के स्तर से जुड़े डेटा नहीं दिए। चीन ने कहा कि उसने नेपाल के साथ जरूरी जानकारी समय पर साझा की है।

रॉयटर्स के मुताबिक, नेपाल और चीन के अधिकारियों ने 27 मई को काठमांडू में बैठक की थी। इसमें बाढ़, मौसम और ग्लेशियर से जुड़े खतरों पर चर्चा हुई थी। नेपाल ने ग्लेशियरों में होने वाली शुरुआती हलचल और संभावित खतरे की जानकारी पहले देने की मांग की थी।

नेपाल के एक सरकारी हाइड्रोलॉजिस्ट ने कहा कि चीन भारी बारिश का अनुमान तो साझा करता है, लेकिन हिमस्खलन, पानी के स्तर, भूस्खलन और दूसरे बड़े प्राकृतिक खतरों की जानकारी नहीं देता।

हालांकि, चीनी विदेश मंत्रालय के मुताबिक जानकारी खुले और पारदर्शी तरीके से जारी की गई थी। चीन के वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल सेंटर ने 26 अगस्त की आपदा से 12 दिन पहले नेपाल को भारी बारिश, भूस्खलन और अचानक बाढ़ जैसे खतरों की चेतावनी भी ईमेल से भेजी थी।

नेपाल की मदद के लिए कई देश आगे आए

नेपाल के विदेश मंत्री ने कहा है कि भीषण बाढ़ से हुए नुकसान का आंकड़ा अरबों डॉलर तक पहुंच सकता है। इस बीच कई देशों ने नेपाल के लिए आर्थिक और मानवीय मदद का ऐलान किया है।

भारत: विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत ने शवों की DNA जांच के लिए फोरेंसिक टीम और सुरंगों से कर्माचारियों को सुरक्षित निकालने में मदद के लिए टनल रेस्क्यू टीम तैनात की है। साथ ही भारत ने 10 टन मानवीय सहायता के साथ 11 सदस्यीय मेडिकल और सुरंग बचाव टीम भी भेजीं है।

ब्रिटेन: प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने 50 लाख पाउंड की मदद का ऐलान किया है। उन्होंने नेपाल की स्थिति को बेहद चिंताजनक और भयावह बताया।

यूरोपीय संघ: यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने 20 लाख यूरो की तत्काल मानवीय सहायता देने की घोषणा की है। इस मदद का इस्तेमाल लोगों तक जरूरी राहत सामग्री पहुंचाने में किया जाएगा।

कनाडा: विदेश मंत्री अनिता आनंद ने 50 लाख कनाडाई डॉलर की मदद का ऐलान किया है। यह राशि संयुक्त राष्ट्र, रेड क्रॉस और अन्य गैर-सरकारी संगठनों के जरिए राहत कार्यों में खर्च की जाएगी।

अमेरिका: अमेरिकी विदेश विभाग ने 5 लाख डॉलर की मदद देने की घोषणा की है। इससे आपातकालीन आश्रय, पानी, स्वच्छता और दूसरी जरूरी राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।

चीन: नेपाल में चीन के राजदूत के मुताबिक, चीन ने भी आपातकालीन राहत सामग्री और आर्थिक मदद उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है।

नेपाल में सोमवार को सेना के एक ट्रेनिंग सेंटर में चीन के टनल रेस्क्यू एक्सपर्ट पहुंचे।

सुरंगों में फंसे लोगों का रेस्क्यू जारी

नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान लगातार जारी है। त्रिशूली-3A समेत कई प्रोजेक्ट्स की सुरंगों के मुहाने पर जमा मलबा और कीचड़ हटाकर अंदर पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

रेस्क्यू टीमों में नेपाल के सुरक्षा बलों के साथ भारत और चीन के विशेषज्ञ भी शामिल हैं। टीमें सुरंगों के अंदर मौजूद लोगों से संपर्क करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।

बाढ़ के बाद सुरंगों के रास्ते मलबे से बंद हो गए हैं। ऐसे में भारी मशीनों और दूसरे उपकरणों की मदद से रास्ता खोलने का काम किया जा रहा है।

सद्गुरु का नेपाल के राहत कोष में रू.1 करोड़ देने का ऐलान

सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने नेपाल में बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में 1 करोड़ रुपए देने का ऐलान किया है। उन्होंने रविवार को काठमांडू में ‘इन सॉलिडैरिटी विद नेपाल’ कार्यक्रम में यह घोषणा की।

सद्गुरु ने कहा कि इतनी बड़ी आपदा से निपटने की जिम्मेदारी अकेले नेपाल की नहीं होनी चाहिए। उन्होंने हिमालयी क्षेत्र में आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों के लिए भारत, चीन, पाकिस्तान, नेपाल और भूटान का साझा हिमालयी बोर्ड बनाने का सुझाव भी दिया।

नेपाल-चीन का अहम व्यापारिक रास्ता बाढ़ में तबाह

बाढ़ ने नेपाल-चीन के अहम व्यापारिक रास्ते रासुवागढ़ी-केरुंग बॉर्डर को भारी नुकसान पहुंचाया है। बाढ़ में सीमा चौकी, नेपाल-चीन को जोड़ने वाला फ्रेंडशिप ब्रिज और तिमुरे का बड़ा हिस्सा तबाह हो गया।

यह रास्ता नेपाल के लिए इसलिए अहम है क्योंकि चीन से आने वाला बड़ी मात्रा में सामान इसी रूट से देश में पहुंचता है। रास्ता बंद होने से सामान की आवाजाही प्रभावित हुई है और कारोबारियों की मुश्किल बढ़ गई है।

नेपाल-चीन सीमा पर स्थित रासुवागढ़ी बॉर्डर पॉइंट की आपदा से पहले और बाद की तस्वीर।

नेपाल में बाढ़ के बाद जन-जीवन अस्त-व्यस्त

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद धादिंग के एक स्कूल में मलबे के बीच अपना बैग तलाशती छात्रा।

सैलाब के बाद घर में बचे सामान को समेटने की कोशिश करता स्थानीय निवासी।

बाढ़ के बाद त्रिशूली नदी तट पर कीचड़ में पड़ा नेपाली झंडा।

बाढ़ के बाद सरस्वती प्रतिमा के आसपास जमा मलबा।

90% प्रभावित इलाकों में बिजली बहाल

बाढ़ से बिजली आपूर्ति प्रभावित होने के बाद मंत्रालय ने बिजली बहाल करने के साथ वैकल्पिक ऊर्जा की व्यवस्था पर भी काम शुरू किया है। मंत्रालय के मुताबिक, नुवाकोट के करीब 90% प्रभावित इलाकों में बिजली बहाल हो चुकी है। रसुवा में भी बिजली बहाली का काम तेजी से चल रहा है।

बिजली और रोशनी की समस्या से निपटने के लिए मंत्रालय ने 2 किलोवाट के संस्थागत सोलर सिस्टम और 20 वाट के 500 सोलर सेट की व्यवस्था शुरू की थी। इन्हें दूसरे दिन ही वन-डोर सिस्टम के जरिए प्रभावित इलाकों में भेज दिया गया था।

नेपाल में तबाही के बाद की तस्वीरें…

नेपाल के नुवाकोट जिले के देवीघाट मेंभीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद पेड़ उखड़ा और मकान क्षतिग्रस्त।

नुवाकोट में भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद कीचड़ में दबा क्षतिग्रस्त मंदिर।

नेपाल के नुवाकोट जिले के देवीघाट में भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद क्षतिग्रस्त मकान का जायजा लेते लोग। तस्वीर 31 अगस्त की है।

तिब्बत बॉर्डर पर बनी झील का पानी निकला, बाढ़ का खतरा टला

नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर टूटने के बाद बनी बैरियर झील का पानी प्राकृतिक बहाव से निकल गया है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय के मुताबिक, झील में जमा पानी लगभग पूरी तरह बाहर निकल चुका है। इससे डाउनस्ट्रीम इलाकों में झील के फटने से अचानक बाढ़ आने का खतरा फिलहाल टल गया है।

यह झील पिछले हफ्ते ग्लेशियर टूटने के बाद चोचेन खोला और चीन की पुरेपु त्सांगपो नदी के संगम के पास बनी थी। इसके पीछे करीब 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी जमा हो गया था।

नेपाल में भारतीय फोरेंसिक टीम तैनात, DNA जांच में करेगी मदद

नेपाल में बाढ़ के बाद भारत ने फोरेंसिक और टनल रेस्क्यू टीमें भेजी हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम काठमांडू पहुंचकर काम शुरू कर चुकी है। यह टीम बाढ़ में मारे गए लोगों की पहचान के लिए DNA सैंपल की जांच में नेपाली अधिकारियों की मदद करेगी।

वहीं, भारतीय टनल रेस्क्यू टीम ने चिलिमे और लांगटांग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में नेपाल सेना के सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन में मदद की। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, इन प्रोजेक्ट्स में करीब 898 कर्मचारी अब भी फंसे हुए हैं।

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