बिलासपुर, एजेंसी। बिलासपुर के लाखासार गौधाम की अव्यवस्थाओं को लेकर राज्य शासन ने हाईकोर्ट में जवाब पेश किया। शासन की ओर से कहा गया कि गौधाम में चारे, पानी और मवेशियों के रहने की पर्याप्त व्यवस्था है।
साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि किसी छोटे कमरे में 205 मवेशियों को ठूंसकर नहीं रखा गया था। शासन ने जानकारी दी कि प्रदेश में कुल 142 रजिस्टर्ड गौशालाएं संचालित हैं, जिनमें करीब 39 हजार मवेशियों का संरक्षण किया जा रहा है।

मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने पूछा कि अगर सभी व्यवस्थाएं संतोषजनक हैं, तो सड़कों पर आवारा मवेशियों की संख्या कम क्यों नहीं हो रही है।
दरअसल चीफ जस्टिस ने 3 मई को दैनिक भास्कर में पब्लिश खबर को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार करते हुए सुनवाई शुरू की थी। खबर में लाखासार गौधाम में मवेशियों की बदहाल स्थिति का जिक्र किया गया था।
रिपोर्ट में बताया गया था कि एक छोटे शेड में 205 गायों को ठूंसकर रखा गया है और उनके बैठने तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। इसी गौधाम का शुभारंभ दो महीने पहले मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया था।
राज्य शासन का जवाब- नहीं है कोई अव्यवस्था
इस मामले में डिवीजन बेंच ने पशुपालन विभाग के सचिव को शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने के निर्देश दिए थे। गुरुवार को राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि लाखासार स्थित सुरभि गोधाम 25 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है।
वहां पशुओं के लिए 3 बड़े शेड, चारे और नेपियर घास की पर्याप्त व्यवस्था है। सरकार ने यह भी बताया कि चारे के लिए 5 एकड़ जमीन पर नेपियर घास उगाई जा रही है। वहीं, पानी की व्यवस्था के लिए गोधाम परिसर में तीन बोरवेल चालू हालत में हैं।
142 रजिस्टर्ड गौशालाओं में 39 हजार मवेशी
राज्य शासन ने शपथ पत्र में बताया कि प्रदेश में 142 रजिस्टर्ड गौशालाएं संचालित हैं, जिनमें करीब 39 हजार मवेशियों को रखा गया है। हालांकि, राज्य सरकार के जवाब के बाद भी हाईकोर्ट ने मामले को बंद नहीं किया।
डिवीजन बेंच ने कहा कि बार-बार यह बात सामने आ रही है कि गोधाम बनने के बावजूद मवेशी सार्वजनिक स्थानों पर घूम रहे हैं। इससे स्पष्ट होता है कि जिम्मेदार पक्षों की ओर से किए गए इंतजाम अब भी पर्याप्त नहीं हैं।
मामले की अगली सुनवाई जुलाई में होगी।
नोडल अफसरों को सौंपी गई जिम्मेदारी, होगी नियमित मॉनिटरिंग
सरकार ने बताया कि 7 नवंबर 2025 को जारी आदेश के तहत विशेष नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। इन अधिकारियों की जिम्मेदारी जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग के बीच समन्वय स्थापित करना है, ताकि छत्तीसगढ़ कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम, 2004 के तहत जब्त और आवारा मवेशियों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके।
सरकार ने जिला प्रशासन को पशुपालन विभाग के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि गौधामों में रखे गए मवेशियों को सिर्फ छत ही नहीं, बल्कि चारा, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएं।
जवाबदेही तय करने के लिए अब पशुपालन विभाग के संचालक को हर महीने प्रोग्रेस रिपोर्ट भेजना अनिवार्य किया गया है।
