DivyaAkash: Your Daily Source for Hindi News

नेपाल में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में 898 कर्मचारी फंसे:6 इंच छेद कर पाइप से हवा पहुंचाई, बाढ़ से अब तक 804 मौतें

काठमांडू/नई दिल्ली, एजेंसी। नेपाल में बाढ़ के बाद हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में फंसे कर्मचारियों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन तेज कर दिया गया है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 898 कर्मचारी अब भी फंसे हैं, जबकि 361 कर्मचारियों को अब तक बचाया जा चुका है।

त्रिशूली-3 ‘ए’ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन में कुछ कामयाबी मिली है। बचावकर्मी मशीनों की मदद से मिट्टी और गाद हटा रहे हैं। सुरंग में 6 इंच का छेद कर पाइप के जरिए हवा पहुंचाई जा रही है।

अब इसे बड़ा कर मैनहोल बनाने की तैयारी है, ताकि बचाव दल सुरंग के अंदर जाकर लोगों की तलाश कर सके।

26 अगस्त को नेपाल की भोटेकोशी और त्रिशुली नदी में अचानक बाढ़ आ गई थी। इस आपदा में नेपाल में अब तक 788 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, तिब्बत में मरने वालों का आंकड़ा 16 पहुंच गया है।

बाढ़ के बाद तबाही का मंजर

नेपाल के देवीघाट में त्रिशूली नदी के किनारे बाढ़ में तबाह हुए घरों का एरियल व्यू।

नेपाल के देवीघाट में त्रिशूली नदी के किनारे बाढ़ में तबाह हुए घरों का एरियल व्यू।

नुवाकोट में घरों की छतों के ऊपर से बाढ़ का पानी और मलबा गुजरने के निशान दिखाई दे रहे हैं।

रसुवा से रेस्क्यू लोगों को एयरलिफ्ट करने वाले बैरक के बाहर लापता परिजन का इंतजार करती महिला रो पड़ी।

नुवाकोट के देविघाट में बाढ़ से तबाह घर में सामान तलाशने के बाद बच्ची का पैर कीचड़ से सना नजर आया।

नेपाल बाढ़ में मरने वालों की संख्या 788 पहुंची

नेपाल पुलिस के मुताबिक, रविवार शाम तक 788 शव बरामद किए जा चुके हैं। इसके अलावा 2,502 लोग लापता हैं।

NDRRMA के मुताबिक, लापता लोगों में 933 क्षेत्रीय जलविद्युत प्रोजेक्ट्स के कर्मचारी शामिल हैं। इसके अलावा 592 विदेशी नागरिक और विदेशी समूहों के साथ यात्रा कर रहे 127 नेपाली नागरिकों का भी अब तक पता नहीं चल पाया है।

20 साल की युवती ने 17 परिजनों को खोया

नेपाल के रसुवा जिले की 20 वर्षीय कोपिला तामांग ने बाढ़ में अपने परिवार के 17 सदस्यों को खो दिया। 2015 के भूकंप में उनका घर तबाह हुआ था, लेकिन इस बार बाढ़ उनके नए घर के साथ मां, बहन, दादी और एक महीने के भतीजे समेत कई परिजनों को भी बहा ले गई।

कोपिला ने CNN से कहा, “मैं खुद को बिल्कुल अकेला और खोया हुआ महसूस करती हूं।” उनका 7 साल का भाई अब भी मानता है कि उनकी मां वापस आएंगी।

नेपाल में 26 अगस्त को बाढ़ आई थी तब कोपिला तामांग काठमांडू में थी।

त्रिशूली-3 ‘ए’ सुरंग के अंदर जाने का रास्ता मिला

त्रिशूली-3 ‘ए’ प्रोजेक्ट की सुरंग में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए बचाव अभियान जारी है। रेस्क्यू टीम सुरंग के एक दूसरे रास्ते से अंदर जाने की कोशिश कर रही है।

टीम को सुरंग का ऊपरी हिस्सा मिल गया है। उसे खोलने के लिए मशीनों से खुदाई की जा रही है। रास्ता साफ और सुरक्षित होने के बाद रेस्क्यू टीम सुरंग के अंदर जाएगी और तलाश अभियान आगे बढ़ाएगी।

त्रिशूली-3 ‘ए’ सुरंग में फंसे लोगों तक पहुंचने की उम्मीद बढ़ी, चार छेद किए गए

त्रिशूली-3 ‘ए’ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में चल रहे बचाव अभियान में कुछ सफलता मिली है।

अब तक सुरंग के सामने वाले हिस्से में चार छेद किए जा चुके हैं। अब इसी रास्ते से सुरंग के अंदर जाकर फंसे लोगों की तलाश और उन्हें बाहर निकालने का काम आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।

नेपाल की मदद के लिए कई देश आगे आए

नेपाल के विदेश मंत्री ने कहा है कि भीषण बाढ़ से हुए नुकसान का आंकड़ा अरबों डॉलर तक पहुंच सकता है। हालांकि, उन्होंने कहा कि इस स्तर पर नुकसान का अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी। इस बीच कई देशों ने नेपाल के लिए आर्थिक और मानवीय मदद का ऐलान किया है।

भारत: विदेश मंत्री एस. जयशंकर के मुताबिक, भारत से राहत सामग्री लेकर तीसरी उड़ान शुक्रवार को काठमांडू पहुंची। इसमें 10 टन मानवीय सहायता के साथ 11 सदस्यीय मेडिकल और सुरंग बचाव टीम भी शामिल थी।

ब्रिटेन: प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने 50 लाख पाउंड की मदद का ऐलान किया है। उन्होंने नेपाल की स्थिति को बेहद चिंताजनक और भयावह बताया।

यूरोपीय संघ: यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने 20 लाख यूरो की तत्काल मानवीय सहायता देने की घोषणा की है। इस मदद का इस्तेमाल लोगों तक जरूरी राहत सामग्री पहुंचाने में किया जाएगा।

कनाडा: विदेश मंत्री अनिता आनंद ने 50 लाख कनाडाई डॉलर की मदद का ऐलान किया है। यह राशि संयुक्त राष्ट्र, रेड क्रॉस और अन्य गैर-सरकारी संगठनों के जरिए राहत कार्यों में खर्च की जाएगी।

अमेरिका: अमेरिकी विदेश विभाग ने 5 लाख डॉलर की मदद देने की घोषणा की है। इससे आपातकालीन आश्रय, पानी, स्वच्छता और दूसरी जरूरी राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।

चीन: नेपाल में चीन के राजदूत के मुताबिक, चीन ने भी आपातकालीन राहत सामग्री और आर्थिक मदद उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है।

तिब्बत सीमा के पास बनी झील का पानी निकला

नेपाल-चीन सीमा के पास बाढ़ के बाद बनी झील का ज्यादातर पानी प्राकृतिक रास्ते से निकल गया है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने रविवार को कहा कि इससे निचले इलाकों में अचानक बड़ी बाढ़ आने का खतरा फिलहाल कम हो गया है।

यह झील पिछले बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद बनी थी। लांगटांग री पर्वत क्षेत्र में ग्लेशियर और चट्टानों का बड़ा हिस्सा टूटकर नदी में गिर गया था, जिससे नदी का बहाव रुक गया और वहां पानी जमा होकर झील बन गई।

चीन के मुताबिक, झील में करीब 20 लाख घन मीटर पानी जमा था। आशंका थी कि प्राकृतिक बांध टूटने पर नेपाल और चीन के निचले इलाकों में फिर बड़ी बाढ़ आ सकती है। इसी वजह से दोनों देशों की एजेंसियां लगातार झील की निगरानी कर रही थीं।

तिब्बत में क्या हो रहा है, इसकी जानकारी मिलना इतना मुश्किल क्यों है?

चीन ने 1950 के दशक में तिब्बत को अपने नियंत्रण में ले लिया था। तब से तिब्बत चीन के सबसे ज्यादा निगरानी वाले और कड़े नियंत्रण वाले इलाकों में शामिल है।

बाढ़ की इस आपदा को चीन सरकार कितनी गंभीरता से ले रही है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने खुद राहत और बचाव के लिए निर्देश दिए हैं। प्रधानमंत्री ली छियांग भी गुरुवार को घटनास्थल पर पहुंचे। किसी बड़ी आपदा के तुरंत बाद उनका इस तरह मौके पर पहुंचना काफी दुर्लभ माना जाता है।

तिब्बत में पहुंचना विदेशी लोगों के लिए आसान नहीं है। वहां जाने के लिए विशेष वीजा की जरूरत होती है और विदेशी मीडिया के लिए वहां प्रवेश करना बेहद मुश्किल है। वहां मौजूद लोगों से सीधे संपर्क करना भी आसान नहीं है।

नेपाल से तिब्बत होते हुए पवित्र कैलाश पर्वत की यात्रा करने वाले तीर्थयात्रियों के लिए भी कई तरह की मंजूरियां जरूरी होती हैं। उन्हें कुल चार अलग-अलग परमिट लेने पड़ते हैं। यही वजह है कि तिब्बत में इस समय वास्तव में क्या हो रहा है, इसकी स्वतंत्र जानकारी जुटाना मुश्किल है।

भारत ने नेपाल के लिए 68.5 टन राहत सामग्री भेजी

नेपाल ने बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों को दोबारा जोड़ने के लिए भारत और चीन से कुल 42 बेली ब्रिज बनाने में मदद मांगी है।

भारत ने अब तक 68.5 टन राहत सामग्री भेजी है। इसके साथ ही सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए टनल विशेषज्ञों, फोरेंसिक एक्सपर्ट्स और तकनीकी टीमों को भी नेपाल भेजा गया है।

भारत ने कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, हाइजीन किट समेत राहत सामग्री उपलब्ध कराई है। इसके अलावा 230 फीट लंबे बेली ब्रिज बनाने के लिए सामान भी नेपाल पहुंचाए गए हैं। भारत जल्द ही 7 और बेली ब्रिज के लिए सामान और टेक्निकल टीम भेजेगा।

‘चाय के लिए नहीं रुकते तो जान जा सकती थी’

तीर्थयात्री गडा एलावेनी ने ANI को बताया कि वे तीन बसों में काठमांडू से सफर कर रहे थे। रास्ते में सभी लोग चाय पीने के लिए कुछ देर के लिए रुक गए। यह रुकना बाद में उनकी जिंदगी का सबसे अहम फैसला साबित हुआ। उन्हें बाद में पता चला कि उनसे करीब आधे घंटे पहले निकली दो बसें बाढ़ की तेज धारा में बह गईं और उनका कोई पता नहीं चला।

एलावेनी ने कहा कि उन्हें बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि रास्ते में इतनी बड़ी आपदा आने वाली है। उन्होंने कहा, “हमने कभी नहीं सोचा था कि हमारे साथ ऐसा होगा। खैर, हमें दर्शन नहीं मिले, लेकिन भगवान हमें सुरक्षित घर ले आए।” उन्होंने बताया कि उन्होंने काठमांडू से करीब 80 किलोमीटर का सफर तय किया था और तीनों बसों में सवार सभी लोग सुरक्षित हैं।

नेपाल में बाढ़ के बाद मलबे में दबा सोलर पावर प्लांट

Exit mobile version