काठमांडू/नई दिल्ली, एजेंसी। नेपाल में बाढ़ के बाद हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में फंसे कर्मचारियों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन तेज कर दिया गया है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 898 कर्मचारी अब भी फंसे हैं, जबकि 361 कर्मचारियों को अब तक बचाया जा चुका है।
त्रिशूली-3 ‘ए’ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन में कुछ कामयाबी मिली है। बचावकर्मी मशीनों की मदद से मिट्टी और गाद हटा रहे हैं। सुरंग में 6 इंच का छेद कर पाइप के जरिए हवा पहुंचाई जा रही है।
अब इसे बड़ा कर मैनहोल बनाने की तैयारी है, ताकि बचाव दल सुरंग के अंदर जाकर लोगों की तलाश कर सके।
26 अगस्त को नेपाल की भोटेकोशी और त्रिशुली नदी में अचानक बाढ़ आ गई थी। इस आपदा में नेपाल में अब तक 788 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, तिब्बत में मरने वालों का आंकड़ा 16 पहुंच गया है।
बाढ़ के बाद तबाही का मंजर
नेपाल के देवीघाट में त्रिशूली नदी के किनारे बाढ़ में तबाह हुए घरों का एरियल व्यू।
नुवाकोट में घरों की छतों के ऊपर से बाढ़ का पानी और मलबा गुजरने के निशान दिखाई दे रहे हैं।
रसुवा से रेस्क्यू लोगों को एयरलिफ्ट करने वाले बैरक के बाहर लापता परिजन का इंतजार करती महिला रो पड़ी।
नुवाकोट के देविघाट में बाढ़ से तबाह घर में सामान तलाशने के बाद बच्ची का पैर कीचड़ से सना नजर आया।
नेपाल बाढ़ में मरने वालों की संख्या 788 पहुंची
नेपाल पुलिस के मुताबिक, रविवार शाम तक 788 शव बरामद किए जा चुके हैं। इसके अलावा 2,502 लोग लापता हैं।
NDRRMA के मुताबिक, लापता लोगों में 933 क्षेत्रीय जलविद्युत प्रोजेक्ट्स के कर्मचारी शामिल हैं। इसके अलावा 592 विदेशी नागरिक और विदेशी समूहों के साथ यात्रा कर रहे 127 नेपाली नागरिकों का भी अब तक पता नहीं चल पाया है।
20 साल की युवती ने 17 परिजनों को खोया
नेपाल के रसुवा जिले की 20 वर्षीय कोपिला तामांग ने बाढ़ में अपने परिवार के 17 सदस्यों को खो दिया। 2015 के भूकंप में उनका घर तबाह हुआ था, लेकिन इस बार बाढ़ उनके नए घर के साथ मां, बहन, दादी और एक महीने के भतीजे समेत कई परिजनों को भी बहा ले गई।
कोपिला ने CNN से कहा, “मैं खुद को बिल्कुल अकेला और खोया हुआ महसूस करती हूं।” उनका 7 साल का भाई अब भी मानता है कि उनकी मां वापस आएंगी।
नेपाल में 26 अगस्त को बाढ़ आई थी तब कोपिला तामांग काठमांडू में थी।
त्रिशूली-3 ‘ए’ सुरंग के अंदर जाने का रास्ता मिला
त्रिशूली-3 ‘ए’ प्रोजेक्ट की सुरंग में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए बचाव अभियान जारी है। रेस्क्यू टीम सुरंग के एक दूसरे रास्ते से अंदर जाने की कोशिश कर रही है।
टीम को सुरंग का ऊपरी हिस्सा मिल गया है। उसे खोलने के लिए मशीनों से खुदाई की जा रही है। रास्ता साफ और सुरक्षित होने के बाद रेस्क्यू टीम सुरंग के अंदर जाएगी और तलाश अभियान आगे बढ़ाएगी।
त्रिशूली-3 ‘ए’ सुरंग में फंसे लोगों तक पहुंचने की उम्मीद बढ़ी, चार छेद किए गए
त्रिशूली-3 ‘ए’ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में चल रहे बचाव अभियान में कुछ सफलता मिली है।
अब तक सुरंग के सामने वाले हिस्से में चार छेद किए जा चुके हैं। अब इसी रास्ते से सुरंग के अंदर जाकर फंसे लोगों की तलाश और उन्हें बाहर निकालने का काम आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।
नेपाल की मदद के लिए कई देश आगे आए
नेपाल के विदेश मंत्री ने कहा है कि भीषण बाढ़ से हुए नुकसान का आंकड़ा अरबों डॉलर तक पहुंच सकता है। हालांकि, उन्होंने कहा कि इस स्तर पर नुकसान का अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी। इस बीच कई देशों ने नेपाल के लिए आर्थिक और मानवीय मदद का ऐलान किया है।
भारत: विदेश मंत्री एस. जयशंकर के मुताबिक, भारत से राहत सामग्री लेकर तीसरी उड़ान शुक्रवार को काठमांडू पहुंची। इसमें 10 टन मानवीय सहायता के साथ 11 सदस्यीय मेडिकल और सुरंग बचाव टीम भी शामिल थी।
ब्रिटेन: प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने 50 लाख पाउंड की मदद का ऐलान किया है। उन्होंने नेपाल की स्थिति को बेहद चिंताजनक और भयावह बताया।
यूरोपीय संघ: यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने 20 लाख यूरो की तत्काल मानवीय सहायता देने की घोषणा की है। इस मदद का इस्तेमाल लोगों तक जरूरी राहत सामग्री पहुंचाने में किया जाएगा।
कनाडा: विदेश मंत्री अनिता आनंद ने 50 लाख कनाडाई डॉलर की मदद का ऐलान किया है। यह राशि संयुक्त राष्ट्र, रेड क्रॉस और अन्य गैर-सरकारी संगठनों के जरिए राहत कार्यों में खर्च की जाएगी।
अमेरिका: अमेरिकी विदेश विभाग ने 5 लाख डॉलर की मदद देने की घोषणा की है। इससे आपातकालीन आश्रय, पानी, स्वच्छता और दूसरी जरूरी राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।
चीन: नेपाल में चीन के राजदूत के मुताबिक, चीन ने भी आपातकालीन राहत सामग्री और आर्थिक मदद उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है।
तिब्बत सीमा के पास बनी झील का पानी निकला
नेपाल-चीन सीमा के पास बाढ़ के बाद बनी झील का ज्यादातर पानी प्राकृतिक रास्ते से निकल गया है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने रविवार को कहा कि इससे निचले इलाकों में अचानक बड़ी बाढ़ आने का खतरा फिलहाल कम हो गया है।
यह झील पिछले बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद बनी थी। लांगटांग री पर्वत क्षेत्र में ग्लेशियर और चट्टानों का बड़ा हिस्सा टूटकर नदी में गिर गया था, जिससे नदी का बहाव रुक गया और वहां पानी जमा होकर झील बन गई।
चीन के मुताबिक, झील में करीब 20 लाख घन मीटर पानी जमा था। आशंका थी कि प्राकृतिक बांध टूटने पर नेपाल और चीन के निचले इलाकों में फिर बड़ी बाढ़ आ सकती है। इसी वजह से दोनों देशों की एजेंसियां लगातार झील की निगरानी कर रही थीं।
तिब्बत में क्या हो रहा है, इसकी जानकारी मिलना इतना मुश्किल क्यों है?
चीन ने 1950 के दशक में तिब्बत को अपने नियंत्रण में ले लिया था। तब से तिब्बत चीन के सबसे ज्यादा निगरानी वाले और कड़े नियंत्रण वाले इलाकों में शामिल है।
बाढ़ की इस आपदा को चीन सरकार कितनी गंभीरता से ले रही है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने खुद राहत और बचाव के लिए निर्देश दिए हैं। प्रधानमंत्री ली छियांग भी गुरुवार को घटनास्थल पर पहुंचे। किसी बड़ी आपदा के तुरंत बाद उनका इस तरह मौके पर पहुंचना काफी दुर्लभ माना जाता है।
तिब्बत में पहुंचना विदेशी लोगों के लिए आसान नहीं है। वहां जाने के लिए विशेष वीजा की जरूरत होती है और विदेशी मीडिया के लिए वहां प्रवेश करना बेहद मुश्किल है। वहां मौजूद लोगों से सीधे संपर्क करना भी आसान नहीं है।
नेपाल से तिब्बत होते हुए पवित्र कैलाश पर्वत की यात्रा करने वाले तीर्थयात्रियों के लिए भी कई तरह की मंजूरियां जरूरी होती हैं। उन्हें कुल चार अलग-अलग परमिट लेने पड़ते हैं। यही वजह है कि तिब्बत में इस समय वास्तव में क्या हो रहा है, इसकी स्वतंत्र जानकारी जुटाना मुश्किल है।
भारत ने नेपाल के लिए 68.5 टन राहत सामग्री भेजी
नेपाल ने बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों को दोबारा जोड़ने के लिए भारत और चीन से कुल 42 बेली ब्रिज बनाने में मदद मांगी है।
भारत ने अब तक 68.5 टन राहत सामग्री भेजी है। इसके साथ ही सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए टनल विशेषज्ञों, फोरेंसिक एक्सपर्ट्स और तकनीकी टीमों को भी नेपाल भेजा गया है।
भारत ने कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, हाइजीन किट समेत राहत सामग्री उपलब्ध कराई है। इसके अलावा 230 फीट लंबे बेली ब्रिज बनाने के लिए सामान भी नेपाल पहुंचाए गए हैं। भारत जल्द ही 7 और बेली ब्रिज के लिए सामान और टेक्निकल टीम भेजेगा।
‘चाय के लिए नहीं रुकते तो जान जा सकती थी’
तीर्थयात्री गडा एलावेनी ने ANI को बताया कि वे तीन बसों में काठमांडू से सफर कर रहे थे। रास्ते में सभी लोग चाय पीने के लिए कुछ देर के लिए रुक गए। यह रुकना बाद में उनकी जिंदगी का सबसे अहम फैसला साबित हुआ। उन्हें बाद में पता चला कि उनसे करीब आधे घंटे पहले निकली दो बसें बाढ़ की तेज धारा में बह गईं और उनका कोई पता नहीं चला।
एलावेनी ने कहा कि उन्हें बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि रास्ते में इतनी बड़ी आपदा आने वाली है। उन्होंने कहा, “हमने कभी नहीं सोचा था कि हमारे साथ ऐसा होगा। खैर, हमें दर्शन नहीं मिले, लेकिन भगवान हमें सुरक्षित घर ले आए।” उन्होंने बताया कि उन्होंने काठमांडू से करीब 80 किलोमीटर का सफर तय किया था और तीनों बसों में सवार सभी लोग सुरक्षित हैं।
नेपाल में बाढ़ के बाद मलबे में दबा सोलर पावर प्लांट
नई दिल्ली, एजेंसी। जेन-जी प्रदर्शन के दौरान दिल्ली के जंतर-मंतर से पीएम मोदी को गाली देने वाली 15 साल की नाबालिग का एक वीडियो आम आदमी पार्टी ने पोस्ट किया है। 39 सेकेंड्स के वीडियो में उसने कहा है- मेरी जिंदगी नर्क बन गई है। मुझे हर जगह टॉर्चर किया जा रहा है।
मेरे पास जो था, वो सब चला गया मेरा। न मैं कहीं जा सकती हूं। न कहीं रह सकती हूं। ने मेरे पास कोई फ्रीडम है। मुझे हर जगह अपना मुंह छिपा-छिपाकर रहना पड़ रहा है। इसके बाद पीएम के लिए आपत्तिजनक शब्द कहे।
FIR दर्ज होने के बाद माफी मांगी थी
23 जुलाई को छात्रों के प्रदर्शन के दौरान वीडियो में नाबालिग पीएम मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते नजर आई थीं। उसके खिलाफ गाजियाबाद की रहने वाली स्मृति सिंह ने नोएडा के एक्सप्रेसवे पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी।
इसके बाद पुलिस ने 30 जुलाई को नाबालिग के खिलाफ जानबूझकर अपमान करने, सार्वजनिक उपद्रव फैलाने और मानहानि के आरोप में केस दर्ज किया था। कॉकरोच जनता पार्टी ने इस कार्रवाई का विरोध किया था।
एफआईआर दर्ज होने के बाद नाबालिग ने माफी मांग ली थी। हाथ जोड़ते हुए कहा था- मैंने जो किया, वह माफी के लायक नहीं था। मैं सिर्फ 15 साल की हूं। यह मेरी पहली और आखिरी गलती है। मैं दोबारा ऐसा नहीं कहूंगी। मुझे अपने किए पर शर्मिंदगी है। मैं किसी से नजर नहीं मिला पा रही हूं। प्लीज, मुझे माफ कर दीजिए।
लड़की का वायरल वीडियो 23 जुलाई का है। इसमें वह पीएम के लिए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करती नजर आई थी।
36 दिन चला CJP का प्रदर्शन, प्रधान के इस्तीफे से खत्म हुआ
15 मई को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने बेरोजगारों को लेकर कॉकरोच वाला कमेंट किया। इसके खिलाफ सोशल मीडिया पर 16 मई को कॉकरोच जनता पार्टी बनी। 6 जून को इसे बनाने वाले अभिजीत दीपके भारत आए। 20 जून से जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी NEET पेपर लीक के मुद्दे को लेकर धरने पर बैठे।
36 दिन तक चला यह आंदोलन 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफे के बाद खत्म हुआ। प्रधान ने एक बयान में इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा- पिछले 10 दिन की घटनाओं ने उन्हें बहुत दुखी किया है और यह मुद्दा व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का मामला नहीं है।
इसके अलावा, छात्रों के साथ अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक ने भी 26 दिन की भूख हड़ताल सरकार के आश्वासन के बाद खत्म कर दी थी।
नई दिल्ली, एजेंसी। बिहार में गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है। पटना का दीघा घाट डूब चुका है। वहीं, बगहा के डुमरिया घाट पर गंडक नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है। 15 जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
मध्य प्रदेश के सतना, चित्रकूट, टीकमगढ़, छतरपुर और पन्ना में बाढ़ जैसे हालात हैं। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी खतरे के निशान से करीब 26 फीट ऊंची बह रही है। घाट किनारे करीब 400 दुकानें डूब चुकी हैं। लोग घरों और होटलों में फंसे हैं। 2 हेलिकॉप्टर के साथ SDRF की टीमें रेस्क्यू में जुटी हैं।
राजस्थान में जयपुर समेत 15 शहरों का अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज हुआ। इस साल मानसून के कमजोर रहने के कारण जयपुर सहित 17 जिलों में सूखे जैसे हालात हैं।
मौसम विभाग (IMD) के अनुसार अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल के गंगा तटीय इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है।
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देशभर से मौसम की तस्वीरें
चित्रकूट में तुलसीदास की मूर्ति भी टूट गई है। कंधे के ऊपर का हिस्सा बह गया।
मध्य प्रदेश के चितहरा रेलवे स्टेशन के पास ट्रैक पर कई फीट पानी भर गया है। जलभराव के कारण 24 यात्री ट्रेनें और 20 मालगाड़ियां प्रभावित हुई हैं।
छत्तीसगढ़ के कोरबा शहर का दादर नाला उफान पर है। चिमनी भट्टा इलाके में कमर तक पानी भर गया है।
बिहार के पटना में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। दीघा घाट पर गंगा, आधा किलोमीटर नजदीक आ गई है।
यूपी के उन्नाव में गंगा का जलस्तर बढ़ने से पानी शहर के कई इलाकों में पहुंच गया है। सड़कों पर नावें चल रही हैं।
उत्तराखंड नैनीताल के रामनगर में टेढ़ा रोड-पाटकोट मार्ग पर नाला अचानक उफान पर आ गया।
चित्रकूट में मंदाकिनी नदी में आई बाढ़ अब भयावह हो चुकी है। नदी खतरे के निशान से करीब 26 फीट ऊंची बह रही है। लोगों को एयरलिफ्ट किया जा रहा है।
न्यूयॉर्क, एजेंसी। RSS प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में शनिवार रात करीब 42 मिनट स्पीच दी। उन्होंने कहा कि एकता और विविधता भारत के DNA में है। लोग अलग दिखते हैं, उनके रहने के तरीके हैं, लेकिन सभी के बीच एक जन्मजात जुड़ाव है।
भागवत ने कहा- विविधता में एकता भारत की पारंपरिक सोच है और देश समय-समय पर पूरी दुनिया को इसका एहसास कराता रहा है। उन्होंने आगे कहा- सोचने की क्षमता इंसान के लिए एक वरदान है। सही सोच इंसान को भगवान के करीब ले जाती है, जबकि गलत सोच उसे जानवरों के करीब ले जाती है।
न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ कार्यक्रम में 5,000 से ज्यादा भारतीय मूल के अमेरिकी शामिल हुए। इसका आयोजन अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (AHEAD) ने किया। कार्यक्रम में 30 देशों के 180 धार्मिक नेता पहुंचे थे।
भागवत के भाषण की बड़ी बातें…
धर्म सिर्फ पूजा नहीं, जीवन को संतुलित रखने का नियम
भागवत ने कहा कि भारत में जिस सिद्धांत को धर्म कहा जाता है, उसे सिर्फ धर्म या पूजा के तौर पर नहीं समझना चाहिए। धर्म वह व्यवस्था है जो ब्रह्मांड और जीवन को संभालती है। यह जीवन की अलग-अलग स्थितियों के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद करती है।
सिर्फ भौतिक सुख से जिंदगी में संतुष्टि नहीं मिलती
भागवत ने कहा कि पैसा, सामान और दूसरी भौतिक सुविधाएं हमेशा खुशी नहीं दे सकतीं। भौतिक सुख अस्थायी होता है और बहुत ज्यादा सुविधाएं होने के बावजूद संतुष्टि की कमी रह सकती है।
अमेरिका कर्मभूमि है, उसके प्रति सच्चे रहें
अमेरिका में रहने वाले भारतीयों से भागवत ने कहा कि आपकी पहली जिम्मेदारी अपनी कर्मभूमि के प्रति है, उसके प्रति वफादार रहना चाहिए।
जीवन में सीधे संन्यास नहीं, हर पड़ाव की अपनी जिम्मेदारी
भागवत ने कहा कि इंसान के जीवन में चार चरण होते हैं- ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास। पहले सीखना, फिर परिवार और समाज को संभालना और बाद में अपने अनुभव अगली पीढ़ी को देना जरूरी है।
व्यक्ति, समाज और पर्यावरण साथ आगे बढ़ें
भागवत ने कहा कि प्रगति के लिए न व्यक्ति को दबाना चाहिए और न समाज को। व्यक्ति, समाज और पर्यावरण की भलाई साथ-साथ होनी चाहिए।
कार्यक्रम से जुड़ी तस्वीरें…
भागवत के लिए भारतीय प्रवासियों ने पारंपरिक लोकगीत गाए।
मैडिसन स्क्वायर गार्डन में RSS चीफ भागवत के संबोधन से पहले बड़ी संख्या में लोग जुटे।
मैडिसन स्क्वायर गार्डन के बाहर भारतीय महिलाओं ने पुरुषों को राखी बांधी।
मैडिसन में संबोधन से पहले टाइम्स स्क्वायर के बिलबोर्ड पर भागवत की तस्वीरें दिखाई गईं।