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सुमेधा पुल पर लुट कांड सहित तीन अलग अलग जगह पर लुटकांड करने वाले आरोपी पुलिस के गिरफ्त में,,,दो आरोपी नाबालिक,,,देखे पूरी खबर
संवाददाता साबीर अंसारी
बाँकी मोगरा दर्री :– इन दिनों क्षेत्र में बढ़ते अपराध अपने चरम सीमा पर है, कम उम्र के युवाओं के साथ साथ नाबालिक भी रख चुके है अपराध की दुनिया में कदम।
बड़े शहर में देखे जाते थे ऐसे अपराध, अब नए उम्र के युवक छोटे छोटे क्षेत्रों में दे रहे ऐसे घटनाओ को अंजाम
खुलासा – पकड़े गए आरोपियों द्वारा तीन जगह लुट कांड किया जाना स्वीकार किया गया है।
पहली घटना है जिला कोरबा के क्षेत्र बाँकी मोगरा और दर्री के सीमा सुमेधा पुल पर बीते दिनांक 22 सितंबर को लुट कांड की घटना घटित हुई थी जिसमें बाकी मोगरा निवासी अमित सिंह से बाइक, पैसा, मोबाइल और सारा समान लुट कर अमित को पुल के नीचे फेकने की कोशिश की गई थी, जिसके शिकायत के लिए पीड़ित को दोनों थाना को चक्कर काटना पड़ा था बाद में दर्री थाना में शिकायत दर्ज की गई थी।

दूसरी घटना को अंजाम दिया है पहली घटना के अंजाम देने के तुरंत बाद बलगी में स्कूटी से आ रही महिला के साथ लूटपाट का जिसकी शिकायत दर्री थाना में दर्ज कराई गई थी।
तीसरी वारदात पेट्रोल टंकी में लुट किया गया जिसकी शिकायत दर्री थाना में दर्ज कराई गई थी।
प्रशासनिक आला अधिकारियों के दिया निर्देश पर क्राइम ब्रांच और दर्री पुलिस ने इस लुट कांड के तीन आरोपीयो को मध्यप्रदेश के डिंडोरी से गिरफ्तार किया गया है, ये तीनों आरोपी दर्री प्रगति नगर के बताए जा रहे है।
आरोपियों से दो मोटर सायकल १– स्पलेंडर और २– पल्सर व मोबाइल जप्त किया गया।
- अब तक कुल 08 आरोपियों को पुलिस ने हिरासत में लिया है जिनमें दो नाबालिक है, इनके से कुछ आरोपी आदतन चोर बताए जा रहे है जो आए दिन ऐसी चोरियों की घटनाओं को अंजाम देते है।
आरोपी के नाम जो गिरफ्तार किए गए है👇
1 – प्रमोद कुमार उर्फ कल्लू (आदतन चोर) पिता गोपाल प्रसाद केवट उम्र 19 साल पता पानी टंकी गुप्ता मुहल्ले बाँकी मोगरा
2 – विष्णु उर्फ छोटू श्रीवास पिता कन्हैया श्रीवास उम्र 18 साल पता कुदरी पारा बाँकी मोगरा
3 – विकास श्रीवास पिता कन्हैया श्रीवास उम्र 20 साल पता कुदरी पारा
4 – राजा बाबू पिता रमेश उम्र 21 साल पता प्रगति नगर दर्री
5 – संदीप दिवाकर पिता लखनलाल दिवाकर 20 साल पता प्रगति नगर दर्री
6 – राहुल यादव पिता राजकुमार यादव उम्र18 साल पता प्रगति नगर दर्री
निखिल साहू और सक्षम (नाबालिक)
सुमेंधा पुल, पेट्रोल पंप और बलगी लूटकांड के स्वीकारने के बाद आसपास के क्षेत्रों में हुई लुट कांड और चोरीयो की जुड़ी हो सकती है आरोपियों के तार। पुलिस प्रशासन द्वारा आरोपियों से पूछताछ जारी व सभी एंगल से की जा रही जांच।
मिली जानकारी अनुसार बीते दिनांक 22 सितंबर की रात लगभग 10:34 बजे सुमेधा पुल पर अमित सिंह से लुट को अंजाम देने के बाद आरोपी दर्री की ओर भागे फिर दर्री से बलगी पहुंचे जहां स्कूटी सवार युवती से लूटपाट की घटना की, इस घटना की शिकायत पर पुलिस द्वारा छानबीन किया गया जिसमें सीसीटीवी कैमरा की फुटेज से आरोपी गण की पहचान कर सभी को हिरासत में ले लिया गया है। दर्री थाना में सभी शिकायत दर्ज कर दर्री थाना द्वारा तीन अलग अलग घटनाओं के पर अपराध पंजीबद्ध कर माननीय न्यायालय में पेश किया जाएगा।
अपराध क्रमांक 215/25 धारा 304 (2) बी एन एस दर्ज की गई है इसकी प्रार्थी अंजली सूर्यवंशी बलगी की घटना।
अपराध क्रमांक 216/25 धारा 304 (2), 3(5), 309(4) बी एन एस दर्ज की गई है इस अपराध का प्रार्थी दिलबोध यादव ।
अपराध क्रमांक 224/25 धारा 310(2) बी एन एस दर्ज की गई है इस अपराध का प्रार्थी अमित सिंह बाँकी मोगरा की घटना।
जगह जगह हो रहे लुट की घटनाओं से नगर वासियों में डर देखा जा रहा है, इन आरोपियों के गिरफ्तारी व कार्यवाही के बाद लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
इन आरोपियों द्वारा बार बार लुट के घटना को अंजाम देकर गायब होकर पुलिस को एक के बाद एक चुनौती देने जैसा था, जिसे जिला पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी व प्रशासनिक आला अधिकारियों ने घटना को गंभीरता से लेते हुए खोजबीन कर कार्यवाही की निर्देश दिए जिसके बाद क्राइम ब्रांच व दर्री पुलिस हरकत में आते हुए शिकायत पर जांच करते हुए आरोपियों की पतासाजी शुरू कर दी, और सुराग मिलने अनुसार एक के बाद एक सभी आरोपियों को धर दबोचा। दर्री पुलिस और क्राइम ब्रांच ने मिलकर सभी को हिरासत में लिया, थाना बाँकी मोगरा पुलिस का भी आरोपियों को पकड़ने में बड़ा योगदान रहा।
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SECL के बंद मकान में लगी भीषण आग, DJ-लाइट व टेंट का लाखों का सामान जलकर खाक, असामाजिक तत्वों पर जताई जा रही शंका
संवाददाता साबीर अंसारी
बांकीमोंगरा :– पुराने थाना परिसर के पीछे स्थित रहवासी क्षेत्र में एक बंद पड़े SECL के मकान में शनिवार दोपहर करीब 12:30 बजे अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही देर में पूरे मकान को अपनी चपेट में ले लिया। घटना से क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
जानकारी के अनुसार, मकान से उठते धुएं को सबसे पहले वहां खेल रहे बच्चों ने देखा और इसकी सूचना अपने परिजनों को दी। देखते ही देखते धुआं आग की भयावह लपटों में बदल गया। सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों ने डायल 112 को फोन किया, जिसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची। वहीं नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा के कर्मचारी विद्यासागर पानी का टैंकर लेकर घटनास्थल पहुंचे।

स्थानीय रहवासियों, पुलिस एवं नगर पालिका के सहयोग से बाल्टियों और टैंकर के पानी की मदद से आग बुझाने का प्रयास शुरू किया गया। लोगों की तत्परता से आग को आसपास के मकानों तक फैलने से रोक लिया गया, जिससे एक बड़ी दुर्घटना टल गई।
बताया जा रहा है कि उक्त मकान का उपयोग एक लाइट एवं साउंड संचालक द्वारा गोदाम के रूप में किया जा रहा था, जहां डीजे, साउंड सिस्टम, लाइटिंग उपकरण, टेंट एवं अन्य सामग्री रखी हुई थी। आग की चपेट में आने से लगभग 5 लाख रुपये से अधिक मूल्य का डीजे, लाइट एवं टेंट का सामान पूरी तरह जलकर खाक हो गया।

घटना को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। स्थानीय लोगों द्वारा असामाजिक तत्वों के द्वारा आग लगाए जाने की शंका भी जताई जा रही है। हालांकि आग लगने के वास्तविक कारणों का अभी खुलासा नहीं हो सका है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।
वहीं लोगों में इस बात को लेकर भी नाराजगी देखने को मिली कि हमेशा की तरह अग्निशमन वाहन आग से अधिकांश सामान जलकर खाक हो जाने के बाद मौके पर पहुंचा। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि फायर ब्रिगेड केंद्र दूर होने के कारण आपात स्थितियों में अक्सर विलंब होता है, जिससे नुकसान बढ़ जाता है।
खबर लिखे जाने तक आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया था। राहत की बात यह रही कि घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, लेकिन लाखों रुपये की संपत्ति नष्ट हो गई। अब सभी की नजर पुलिस जांच पर टिकी है कि आग हादसा थी या इसके पीछे किसी असामाजिक तत्व का हाथ है।
नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा
बांकी – एसईसीएल कॉलोनी में चरम पर अवैध बेजा कब्जा, रहवासियों ने सौंपा ज्ञापन, प्रबंध की नजर अनदेखी समझ से परे…देखे पूरी खबर
संवाददाता साबीर अंसारी
बांकी मोंगरा :- नगर पालिका परिषद बांकी मोगरा के वॉर्ड क्रमांक 14 एसईसीएल कॉलोनी में इन दिनों अवैध कब्जा निर्माण जोरो पर है, किसी ने कॉलोनी के बिछे बची जगह में अपना मकान निर्माण करा लिया तो कही क्वाटर के सामने पक्का निर्माण कराकर अतिक्रमण किया गया है।
इसी विषय पर गंभीर होकर कॉलोनी के रहवासियों ने एसईसीएल प्रबंधन को ज्ञापन सौंपकर क्षेत्र में कथित बेजा कब्जे को हटाने की मांग की है। ज्ञापन में संतराम साहू का नाम उल्लेखित करते हुए आरोप लगाया गया है कि उनके द्वारा कॉलोनी क्षेत्र में अतिक्रमण किया गया है, जिससे स्थानीय नागरिकों को विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है और भविष्य में इससे बड़ी बड़ी समस्याएं भी उत्पन्न होगी ।

• शिकायत के बाद भी प्रबंधन की नजर अनदेखी करना समझ से परे।
• आखिर क्यों नहीं की जाती कार्यवाही, क्या पर्दे के पीछे चलता है की और खेल।

स्थानीय निवासियों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि बार-बार शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, इस ज्ञापन में एसईसीएल प्रबंधन से मामले की जांच कर कार्रवाई करने तथा भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की गई है साथ ही चेतावनी दी है कि समय रहते कार्यवाही नहीं हुई तो हम आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे, जिसकी संपूर्ण जवाबदारी प्रबंधन की होगी ।
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‘PM को बच्चों के भविष्य की नहीं, अपनी सरकार के अस्तित्व की चिंता है’ : राहुल गांधी
नई दिल्ली, एजेंसी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की गड़बड़ी पर चुप्पी और शिक्षा मंत्री के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं किया जाना यह दर्शाता है कि उन्हें केवल अपनी सरकार के अस्तित्व की चिंता है, लाखों छात्रों के भविष्य की नहीं। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि वह पहले दिन से ही सीबीएसई की 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (ओएसएम) और 'सीओईएमपीटी' को अनुबंध दिए जाने के मामले में स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग कर रहे हैं, क्योंकि देश के युवाओं को सच जानने का अधिकार है। गांधी ने मीडिया की खबरों को साझा किया और लोगों से उन्हें ध्यानपूर्वक पढ़ने का आह्वान किया।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया, ”सीबीएसई ने ओएसएम निविदाएं तीन बार आमंत्रित कीं। पहली बार एक भी बोली नहीं लगी। दूसरी बार कोई भी बोलीदाता पात्र नहीं पाया गया। और अंततः, तकनीकी मानकों को तब तक कमतर किया गया जब तक कि ‘सीओईएमपीटी’ उन्हें पार नहीं कर गई। स्कैनिंग रेजोल्यूशन कम कर दिया गया। रोबोटिक स्कैनर की अनिवार्यता हटा दी गई। सीएमएमआई प्रमाणन स्तर-5 से घटाकर स्तर-3 कर दिया गया। उत्तर पुस्तिकाओं में त्रुटियों के लिए जुर्माने के प्रावधान भी हटा दिये गए।” राहुल गांधी ने कहा, ”भारत की सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनी टीसीएस ने भी तीसरे दौर के लिए अर्हता प्राप्त की थी। लेकिन टीसीएस दौड़ में हार गई और सीओईएमपीटी-एक ऐसी कंपनी जिसका रिकॉर्ड विफलताओं से भरा रहा है-वह जीत गई। और आज सीबीएसई के छात्र किस बात की शिकायत कर रहे हैं? खराब तरीके से स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं, गायब पन्ने और एक खराब मूल्यांकन पोर्टल।”

गांधी ने कहा कि शिक्षकों ने सीबीएसई को चेतावनी दी थी कि ओएसएम प्रणाली को राष्ट्रव्यापी क्रियान्वयन से पहले कम से कम एक या दो साल की अतिरिक्त तैयारी की आवश्यकता है, फिर भी इसे जल्दबाजी में आगे बढ़ा दिया गया। लोकसभा में विपक्ष के नेता गांधी ने कहा, ”तो मैं फिर से पूछता हूं – कौन चाहता था कि सीओईएमपीटी जीते? किसने धीरे-धीरे मानकों को इतना कम किया कि यह कंपनी इसे पार कर सके?” उन्होंने कहा, “प्रधान जी और सीबीएसई का कहना है कि ‘कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया’। यह कोई जवाब नहीं है, यह जवाबदेही नहीं है। सवाल यह है कि क्या अनुबंध ईमानदारी से उस सर्वश्रेष्ठ कंपनी को दिया गया था जो काम को सही ढंग से कर सकती थी?”

गांधी ने कहा कि 18.5 लाख बच्चों का भविष्य एक ऐसी कंपनी के हाथों में सौंप दिया गया, जो केवल तब अर्हता प्राप्त कर सकी जब उसके लिए नियमों में ”ढील दी गई।” उन्होंने कहा, ”सवाल पूछने के कारण मुझ पर हमला करने वाले भाजपा मंत्रियों के लिए – मैंने पहले दिन से ही स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की। इसे (जांच को) सीबीएसई से लेकर सीओईएमपीटी को दिए गए हर अनुबंध तक विस्तारित करें। हमारे युवाओं को सच्चाई जानने का हक है।” गांधी ने कहा, “मोदी जी, सीबीएसई की गड़बड़ी पर आपकी चुप्पी और शिक्षा मंत्री के खिलाफ आपकी निष्क्रियता देश को बताती है कि आपको वास्तव में किसकी परवाह है – लाखों छात्रों के भविष्य की नहीं, बल्कि सिर्फ अपनी सरकार के अस्तित्व की।”

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मीडिया की खबरों का हवाला देते हुए कहा कि उनसे यह खुलासा हुआ है कि सीबीएसई ने इस साल की कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं के लिए ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (ओएसएम) प्रणाली प्रदान करने वाले ठेकेदारों के लिए प्रस्तावों के वास्ते अपने अनुरोध में तकनीकी शर्तों को लगातार नरम किया। रमेश ने अन्य चिंताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि न्यूनतम ‘स्कैनिंग रेजोल्यूशन’ को 300 डीपीआई से घटाकर 200 डीपीआई कर दिया गया और अनिवार्य ‘कैपेबिलिटी मैच्योरिटी मॉडल इंटीग्रेशन’ (सीएमएमआई) प्रमाणन को स्तर-5 से घटाकर स्तर-3 कर दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जुर्माना के प्रावधानों को इस तरह बदला गया कि उनका ध्यान त्रुटियों के बजाय गति पर केंद्रित हो गया। उन्होंने कहा कि साथ ही, उत्तर पुस्तिकाओं की ‘स्पाइन’ (बाइंडिंग) काटे बिना स्कैन करने की शर्त हटा दी गई और रोबोटिक स्कैनर के प्रावधान को भी खत्म कर दिया गया।

जयराम रमेश ने शेयर किया पोस्ट
रमेश ने अपने पोस्ट में कहा, “अंतिम ‘आरएफपी’ अगस्त 2025 में जारी किया गया था, जो सीबीएसई कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं से केवल छह महीने पहले था। हम पहले से ही जानते हैं कि ओएसएम को लागू करने की जल्दबाजी में क्षेत्रीय केंद्रों पर प्रायोगिक परियोजना आयोजित करने के सीबीएसई बोर्ड के समझदारी भरे सुझाव को नजरअंदाज कर दिया गया था।” उन्होंने आरोप लगाया कि स्पष्ट रूप से, सीबीएसई की कार्रवाई में अनावश्यक जल्दबाजी तथा गुणवत्ता एवं छात्र-केंद्रित प्रावधानों को कमजोर करने की झलक मिलती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस वर्ष से ही ओएसएम को अपना लिया जाए। कांग्रेस नेता ने अपनी पोस्ट में प्रश्न किया, ”कई सवाल उठते हैं- ‘आरएफपी’ में तकनीकी शर्तों को क्यों कमजोर किया गया? क्या यह निविदा के लिए बोली लगाने वाले ठेकेदारों के कहने पर किया गया था? सीबीएसई ने उन प्रावधानों (उच्च स्कैनिंग रिज़ॉल्यूशन, गलत तरीके से स्कैन की गई प्रतियों के लिए जुर्माना आदि) को क्यों कमजोर किया जो त्रुटियों को कम कर सकते थे और छात्रों व मूल्यांकनकर्ताओं की सहायता कर सकते थे? किस तरह का दबाव था?”

रमेश ने यह सवाल भी उठाया कि क्षेत्रीय स्तर पर प्रायोगिक परियोजना के जरिए गहन जांच किए बिना और तकनीकी बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता से समझौता करके ‘ओएसएम’ को अपनाने में इतनी जल्दबाजी दिखाने के पीछे क्या कारण था। उन्होंने सवाल किया, “क्या सीओईएमपीटी की पृष्ठभूमि की जांच की गई थी, जिसे अंततः सीबीएसई ने अनुबंध दिया? क्या सीबीएसई ने इस तथ्य पर विचार किया कि सीओईएमपीटी का नाम पहले ‘ग्लोबारेना’ था और वह विवादों में घिरी रही थी? क्या मोदी सरकार के राजनीतिक आकाओं की ओर से यह सुनिश्चित करने का दबाव था कि ठेका सीओईएमपीटी को ही मिले?”
कांग्रेस नेता रमेश ने कहा, ”सीबीएसई को पाक साफ होना चाहिए और वेंडर के चयन, आरएफपी में किए गए संशोधनों, ओएसएम को अपनाने में दिखाई गई जल्दबाजी के कारणों और परीक्षाओं से पहले आयोजित बोर्ड बैठकों के विवरण से संबंधित सभी दस्तावेज सार्वजनिक करने चाहिए। शायद मंत्री प्रधान कीचड़ उछालने और राजनीति करने के बजाय इन सवालों के जवाब दे सकते हैं।”
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