कभी व्यवस्था पर है प्रश्न उठाते, कभी संविधान की बात सुनाते। लेकिन जब “अवसर” मिलता है, वे तभी वादों को भूल भी जाते। अब सत्ता पक्ष...
खेल की दुनिया भी बड़ी निराली है। यहां खिलाड़ी बल्ले से रन बनाते हैं और चयनकर्ता अपने फैसलों से सुर्खियां बटोरते हैं। कभी किसी खिलाड़ी को...
जिस थाने में सुरक्षा की उम्मीद ले आई, वहीं इंसानियत शर्मसार करने हो आई। जिस वर्दी पर विश्वास जताया था उसने, उसी ‘वर्दी’ पर सवालों की...
थाली में पकवान सजे हैं, आँखें टीवी पर अटकी, निवाला मुँह तक आता है, सुध-बुध कहीं भटकी। कभी समाचार-धारावाहिक, मूवी का शोर मचता, खाने का स्वाद...
चुनाव में हार-जीत तो लगी रहती है, लेकिन जब जीत का घोड़ा दौड़ते-दौड़ते अचानक ठोकर खा जाए तो सवार को भी अपनी सवारी पर शक होने...
भ्रष्टाचार की भी अपनी एक व्यवस्था है। यहाँ ईमानदारी पद देखकर नहीं, पद की ऊँचाई देखकर शर्माती है। सिपाही, क्लर्क और चौकीदार की अलमारी से निकले...
कता केवल देश की सीमाओं से नहीं, बल्कि आपसी विश्वास, समान अवसर और सामाजिक सद्भाव से होती है भारत की पहचान उसकी विविधता और एकता में...