वॉशिंगटन, एजेंसी। अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के लिए मंगलवार को मतदान शुरू हो गया। भारतीय समयानुसार शाम 4:30 बजे सबसे पहले 8 राज्यों में पोलिंग बूथ खुले। इनमें कनेक्टिकट, इंडियाना, केंटकी, मेन, न्यू हैम्पशायर, न्यू जर्सी, न्यूयॉर्क और वर्जीनिया शामिल हैं।
इन चुनावों में अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सभी 435 सीटों और उच्च सदन सीनेट की 35 सीटों पर वोट डाले जाएंगे।
अमेरिका में राष्ट्रपति के चुनाव के ठीक दो साल बाद मिडटर्म चुनाव कराए जाते हैं। इसमें संसद की सीटों और कुछ राज्यों में गवर्नर के पदों के लिए मतदान होता है।
फिलहाल ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के पास संसद के दोनों सदनों में बहुमत है। अगर पार्टी इनमें से किसी एक सदन में भी बहुमत खो देती है, तो ट्रम्प के लिए अपने एजेंडे से जुड़े कानून पास कराना मुश्किल हो जाएगा।
अमेरिकी संसद में बहुमत का गणित
अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में बहुमत हासिल करने के लिए अलग-अलग सीटों की जरूरत होती है।
सीनेट में बहुमत के लिए 51 सीटें जरूरी
सीनेट में कुल 100 सीटें हैं। अभी रिपब्लिकन पार्टी के पास 53 सीटें हैं, जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 45 हैं। इसके अलावा 2 निर्दलीय सांसद हैं, जो डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर काम करते हैं। इस तरह दोनों पक्षों के बीच सीटों का अनुपात 53-47 है।
बहुमत के लिए 51 सदस्यों का समर्थन जरूरी है। हालांकि, अगर दोनों पार्टियों के पास 50-50 सीटें होती हैं तो उपराष्ट्रपति जेडी वेंस निर्णायक वोट दे सकते हैं।
इस बार सीनेट की 35 सीटों पर चुनाव होना है। इनमें 22 सीटें रिपब्लिकन और 13 सीटें डेमोक्रेटिक पार्टी के पास हैं। डेमोक्रेट्स को बहुमत हासिल करने के लिए कम से कम 4 सीटों का शुद्ध फायदा उठाना होगा।
हाउस में बहुमत के लिए 218 सीटें जरूरी
अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में कुल 435 सीटें हैं। यहां बहुमत के लिए 218 सीटों की जरूरत होती है।
इस बार हाउस की सभी 435 सीटों पर चुनाव होना है यानी हर सीट पर मुकाबला होगा। जिस पार्टी को 218 या उससे ज्यादा सीटें मिलेंगी, वह सदन में बहुमत हासिल कर लेगी।
इस तरह मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को दोनों सदनों में अपना बहुमत बचाना होगा, जबकि डेमोक्रेट्स की कोशिश दोनों सदनों में बहुमत हासिल करने की होगी।
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव में बड़े मुद्दे…
ईरान युद्ध और महंगाई
ईरान युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका में डीजल 70% और पेट्रोल 50% तक महंगा हुआ है। ट्रम्प की अप्रूवल रेटिंग गिरकर 31% पर आ गई है। ईंधन की बढ़ती कीमतें मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के लिए चुनौती हैं। रूस से 3 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा डीजल खरीदने के फैसले पर भी ट्रम्प की आलोचना हो रही है।
इमिग्रेशन और अवैध प्रवासी
ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल के पहले 18 महीनों में करीब 9.8 लाख लोगों को डिपोर्ट किया गया। मेक्सिको बॉर्डर पर अवैध घुसपैठ 95% घटी। लेकिन छापेमारी और बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों को भी निकालने का विरोध हो रहा है। डेमोक्रेट्स का आरोप है कि इससे परिवार बिछड़ रहे हैं, जबकि खेती और निर्माण जैसे क्षेत्रों में मजदूरों की कमी हो सकती है।
टैरिफ और नौकरियां
ट्रम्प ने टैरिफ से अमेरिकी कंपनियों और नौकरियों को फायदा पहुंचाने का वादा किया था। लेकिन इससे गाड़ियों, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ों और निर्माण सामग्री की कीमतें 12% से 18% तक बढ़ने का दावा है। टैरिफ से अमेरिकी परिवारों का खर्च बढ़ा है और दूसरे देशों के जवाबी टैरिफ से किसानों के सोयाबीन और मक्का कारोबार पर असर पड़ा है।
गर्भपात का अधिकार और महंगा इलाज
केएफएफ के सर्वे के मुताबिक, 68% महिला वोटरों और 18 से 29 साल के 74% युवाओं के लिए गर्भपात का अधिकार बड़ा चुनावी मुद्दा है। डेमोक्रेट्स चाहते हैं कि महिलाओं को गर्भपात कराने का कानूनी अधिकार पूरे देश में मिले। वहीं, रिपब्लिकन चाहते हैं कि हर राज्य खुद तय करे कि वहां गर्भपात की अनुमति होगी या नहीं। वहीं, ओबामाकेयर के तहत 2.13 करोड़ लोग स्वास्थ्य बीमा का लाभ लेते हैं। सरकारी मदद घटने पर बीमा महंगा होने का मुद्दा भी चुनाव में अहम है।
सीनेट की 5 सीटों पर कड़ा मुकाबला
टेक्सास: रिपब्लिकन केन पैक्सटन और डेमोक्रेट जेम्स टैलारिको के बीच मुकाबला बराबरी का है। अक्टूबर के दो सर्वे में दोनों को 49% वोट मिले, जबकि एक अन्य सर्वे में टैलारिको 3.8 पॉइंट आगे हैं।
ओहायो: रिपब्लिकन जॉन हस्टेड का मुकाबला डेमोक्रेट शेरोड ब्राउन से है। सर्वे में ब्राउन 4 से 6 पॉइंट आगे हैं। यह सीट रिपब्लिकन के लिए बहुमत बचाने के लिहाज से अहम है।
नॉर्थ कैरोलाइना: डेमोक्रेट रॉय कूपर सर्वे में 52% वोट के साथ रिपब्लिकन माइकल वाटले से 13 पॉइंट आगे हैं। माइकल को 39% वोट मिले हैं।
मिशिगन: डेमोक्रेट अब्दुल अल-सईद को रिपब्लिकन माइक रोजर्स के मुकाबले मामूली बढ़त मिली है। सर्वे में अल-सईद 50% और रोजर्स 48% पर हैं।
मेन: डेमोक्रेट ट्रॉय जैक्सन सर्वे में 49% वोट के साथ रिपब्लिकन सीनेटर सुसान कॉलिन्स (47%) से आगे हैं। कॉलिन्स को 47% वोट मिले हैं।
समोसा कॉकस: 6 भारतवंशी मैदान में, रामास्वामी भी रेस में
अमेरिका में भारतीय मूल के नेताओं को समोसा कॉकस कहा जाता है। मौजूदा सदस्य अमी बेरा, रो खन्ना, प्रमिला जयपाल और सुहास सुब्रमण्यम कैलिफोर्निया, वॉशिंगटन और वर्जीनिया से दोबारा चुनाव लड़ रहे हैं। एरिजोना से अमीश शाह और फ्लोरिडा से पिया डांडिया भी हाउस उम्मीदवार हैं। सभी छह डेमोक्रेट हैं।
इस बार दो सीटों पर भारतीय मूल के उम्मीदवार आमने-सामने हैं। कैलिफोर्निया में रो खन्ना का मुकाबला रिपब्लिकन रितेश टंडन से है। वहीं, वॉशिंगटन में प्रमिला जयपाल के सामने रिपब्लिकन नीरव शेठ हैं।
राजा कृष्णमूर्ति सीनेट चुनाव की डेमोक्रेटिक प्राइमरी हार गए, जबकि श्री थानेदार हाउस की प्राइमरी में हारकर बाहर हो गए। अमीश शाह और पिया डांडिया जीतते हैं तो समोसा कॉकस की संख्या छह बनी रह सकती है।
वहीं, रिपब्लिकन विवेक रामास्वामी ओहायो से गवर्नर उम्मीदवार हैं। उनका मुकाबला डेमोक्रेट एमी एक्टन से है। जीतने पर वे बॉबी जिंदल और निक्की हेली के बाद अमेरिका के तीसरे भारतीय मूल के गवर्नर होंगे।
समोसा कॉकस नाम 2018 में भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने दिया था। समोसा भारत का लोकप्रिय नाश्ता है। इसी के जरिए उन्होंने भारतीय मूल के सांसदों की साझा पहचान को एक हल्के-फुल्के नाम से जोड़ा।
काठमांडू, एजेंसी। नेपाल के एवरेस्ट क्षेत्र में मंगलवार सुबह लैंडिंग के दौरान दो हेलिकॉप्टर आपस में टकरा गए। हादसे में एक भारतीय पर्यटक की मौत हो गई, जबकि न्यूजीलैंड का एक भारतीय मूल का नागरिक घायल हो गया। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों हेलिकॉप्टरों के रोटर ब्लेड आपस में टकराए थे।
हादसा सुबह 8:11 बजे सोलुखुम्बु जिले के फेरीचे हेलीपैड पर हुआ। यहां फिशटेल एयर और एयर डायनेस्टी के हेलिकॉप्टर उतरने की कोशिश कर रहे थे।
अधिकारियों के मुताबिक फिशटेल एयर के हेलिकॉप्टर में सवार भारतीय पर्यटक वसंत कुमार बालारामारामाडु की मौत हुई है। इसी हेलिकॉप्टर में सवार न्यूजीलैंड के नागरिक शैलेश कृष्ण पटेल घायल हुए हैं। वे भारतीय मूल के हैं।
नेपाल में पहाड़-घाटियां, बदलता मौसम, जोखिम भरे रनवे विमान या हेलिकॉप्टर हादसे की मुख्य वजह हैं।
दो दिशाओं से आते हुए हेलिकॉप्टर फेरीचे हेलीपैड उतरने की कोशिश कर रहा है।
दोनों हेलिकॉप्टर की टक्कर हो जाती है। इस दौरान एक का मलबा पास खड़े लोगों के पास गिरता है।
टक्कर के बाद दोनों हेलिकॉप्टर गिर जाते हैं। इस दौरान लोग वहां से भागते हुए दिखाई दे रहे हैं।
हादसे के बाद क्षतिग्रस्त हेलिकॉप्टर के पास जांच करते अधिकारी।
हादसे के बाद एयर डायनेस्टी हेलिकॉप्टर के विंग और गेट टूट गए।
एक ही जगह उतरने की कोशिश में हादसा
नेपाली अधिकारियों के मुताबिक एक हेलिकॉप्टर लुकला से आ रहा था, जबकि दूसरा एवरेस्ट बेस कैंप के पास गोरक्षेप की तरफ से लौट रहा था। दोनों अलग-अलग दिशाओं से एक ही जगह उतरने की कोशिश कर रहे थे।
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, हेलीपैड पर बर्फ जमी होने के कारण भी यह स्थिति बनी हो सकती है। हालांकि, हादसे की असली वजह की पुष्टि नहीं हुई है।
फिशटेल एयर और एयर डायनेस्टी के हेलिकॉप्टर उतरने की कोशिश कर रहे थे, तभी दोनों आपस में टकरा गए।
घायल को रेस्क्यू कर काठमांडू ले जाया जा रहा
शैलेश को प्रभु हेलिकॉप्टर की मदद से रेस्क्यू कर काठमांडू के मेडिसिटी अस्पताल पहुंचाया गया। मृतक पर्यटक का शव लुकला के अस्पताल ले जाया गया। दोनों हेलिकॉप्टरों के पायलटों की चोटों को लेकर शुरुआती रिपोर्टों में अलग-अलग जानकारी सामने आई है।
फेरीचे एवरेस्ट क्षेत्र में स्थित है। यहां आने-जाने के लिए हेलिकॉप्टर सेवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। हादसे के समय दोनों हेलिकॉप्टरों में कुल कितने लोग सवार थे, यह अभी साफ नहीं है। टक्कर की वजह की भी जांच की जा रही है।
हेलिकॉप्टर सर्विस का सेंटर है फेरीचे हेलीपैड
फेरीचे हेलीपैड समुद्र तल से करीब 4,371 मीटर (14,340 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है। यह नेपाल के एवरेस्ट क्षेत्र में हेलिकॉप्टर सर्विस का सेंटर है।
यहां से पर्वतारोहियों और ट्रेकिंग पर आने वाले पर्यटकों को मदद पहुंचाई जाती है। खासतौर पर ऊंचाई के कारण तबीयत बिगड़ने, सांस लेने में परेशानी होने या किसी दुर्घटना में घायल होने पर लोगों को हेलिकॉप्टर से निचले इलाकों या अस्पतालों तक पहुंचाया जाता है।
उत्तराखंड में 4 दिन पहले हेलिकॉप्टर क्रैश, 6 लोगों की मौत
उत्तराखंड के चमोली जिले में 30 अक्टूबर को बद्रीनाथ से देहरादून लौट रहा ट्रांस भारत एविएशन का हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया था। हादसा जोशीमठ के पास चाई गांव के नजदीक हुआ। इसमें पायलट समेत सभी 6 लोगों की मौत हो गई थी।
हेलिकॉप्टर में 5 यात्री सवार थे, जो कर्नाटक के रहने वाले थे। विमान ने दोपहर 1:14 बजे बद्रीनाथ से उड़ान भरी थी और जोशीमठ घाटी के ऊपर उसका संपर्क टूट गया था। हादसे की जांच विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) कर रहा है।
तेल अवीव, एजेंसी। इजराइल में विपक्षी नेता गादी आइजनकोट ने नई सरकार बनाने के लिए 4 शर्तें रखी हैं। इजराइली मीडिया वायनेट के मुताबिक, इनमें हरेदी समुदाय को सैन्य सेवा देना अनिवार्य होगा।
इसके अलावा इजराइल को यहूदी और लोकतांत्रिक देश बनाए रखना और गाजा से हमास का शासन खत्म करना शामिल है। आइजनकोट ने कहा कि इन शर्तों को मानने वाले दलों के लिए गठबंधन में शामिल होने का रास्ता खुला है।
दरअसल, 27 अक्टूबर को हुए चुनाव में किसी भी गठबंधन को बहुमत नहीं मिला। 120 सीटों वाली संसद में सरकार बनाने के लिए 61 सीटें जरूरी हैं।
आइजनकोट की पार्टी याशार 21 सीटें जीतकर विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी बनी है। वे प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के लिए अलग-अलग दलों के नेताओं से बातचीत कर रहे हैं।
आइजनकोट की शर्तें…
पहली शर्त- इजराइल यहूदी और लोकतांत्रिक देश बना रहे
आइजनकोट चाहते हैं कि इजराइल की पहचान यहूदी और लोकतांत्रिक देश के रूप में बनी रहे। सरकार सभी नागरिकों को बराबर अधिकार दे और धर्म या समुदाय के आधार पर किसी से भेदभाव न करे। यानी देश में हर नागरिक की आजादी और अधिकारों का सम्मान हो।
दूसरी शर्त- सभी नागरिकों के लिए सैन्य सेवा जरूरी हो
इजराइल के हर नागरिक को सेना, राष्ट्रीय या नागरिक सेवा करनी जरूरी हो। यानी देश की सेवा की जिम्मेदारी सभी नागरिकों की हो।
फिलहाल इजराइल में यहूदी नागरिकों के लिए सेना में सेवा करना जरूरी है, लेकिन बेहद धार्मिक हरेदी समुदाय को इससे छूट मिलती रही है। इस समुदाय के लोगों का कहना है कि वह धार्मिक पढ़ाई करते हैं इसलिए सेना में भर्ती नहीं हो सकते।
आइजनकोट की पार्टी का कहना है कि जब देश सुरक्षा चुनौतियों और युद्ध का सामना कर रहा है, तो सेना में सेवा की जिम्मेदारी किसी एक वर्ग पर नहीं, बल्कि सभी नागरिकों पर होनी चाहिए।
इजराइल में हरेदी समुदाय की आबादी करीब 10 लाख हो गई है। यह कुल आबादी का लगभग 13% है।
तीसरी शर्त- आजादी के समय तय सिद्धांतों का पालन हो
आइजनकोट चाहते हैं कि नई सरकार 1948 में इजराइल की आजादी के समय तय सिद्धांतों के मुताबिक काम करे। इनमें इजराइल को यहूदी देश बनाए रखने के साथ लोकतंत्र, आजादी, न्याय और सभी नागरिकों को बराबर अधिकार देने की बात शामिल है।
यह शर्त इसलिए जरूरी है क्योंकि नेतन्याहू सरकार के न्यायपालिका में बदलाव करने के फैसले पर विवाद हुआ है। विरोधियों का आरोप है कि इन बदलावों से लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर हो सकती हैं। आइजनकोट ने इन विवादित कानूनों को रद्द करने की भी बात कही है।
चौथी शर्त- गाजा से हमास का शासन खत्म हो
आइजनकोट चाहते हैं कि गाजा में हमास का शासन खत्म हो और उसकी सैन्य ताकत भी खत्म की जाए।
हमास ने 7 अक्टूबर 2023 को इजराइल पर हमला किया था। इसमें कई लोग मारे गए और कई को बंधक बना लिया गया। इसके जवाब में इजराइल ने गाजा में सैन्य कार्रवाई शुरू की, जिसमें भारी तबाही हुई और बड़ी संख्या में फिलिस्तीनी मारे गए।
आइजनकोट का मानना है कि इजराइल की सुरक्षा के लिए हमास को दोबारा गाजा की सत्ता में आने से रोकना जरूरी है।
7 अक्टूबर 2023 को 25 साल की नोआ अर्गमानी को हमास के लड़ाकों ने ट्राइब ऑफ नोवा ट्रान्स फेस्टिवल पर हमला करने के बाद उसके दोस्त से अलग करके किडनैप कर लिया था।
इजराइल में सरकार बनाने के लिए 42 दिन मिलते हैं
इजराइल में चुनाव के बाद राष्ट्रपति सभी दलों के नेताओं से बात करते हैं। इसके बाद वे किसी एक सांसद को सरकार बनाने की जिम्मेदारी सौंपते हैं। उस सांसद को तय समय में संसद का विश्वास हासिल करना होता है।
इजराइल में सरकार बनाने के लिए चुने गए नेता को शुरुआत में 28 दिन का समय मिलता है। जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति इसे 14 दिन और बढ़ा सकते हैं। यानी सरकार बनाने के लिए कुल 42 दिन मिल सकते हैं।
इस दौरान नेता को दूसरी पार्टियों से बातचीत कर समर्थन जुटाना होता है। इसके लिए पार्टियों के बीच नीतियों और मंत्रिपदों को लेकर समझौते हो सकते हैं।
चुनाव नतीजे आने के बाद से ही आइजनकोट नेतन्याहू विरोधी दलों के नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं। उनकी कोशिश ज्यादा से ज्यादा सांसदों का समर्थन जुटाकर राष्ट्रपति इसाक हर्जोग के सामने सरकार बनाने का दावा मजबूत करने की है।
याशार पार्टी के नेता गादी आइजनकोट और डेमोक्रेट पार्टी के नेता यायर गोलान ने 29 अक्टूबर को मुलाकात की थी।
लिकुड पर याशार के सांसदों को तोड़ने की कोशिश का आरोप
याशार पार्टी ने नेतन्याहू की लिकुड पार्टी पर उसके सांसदों को अपने पाले में लाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। पार्टी के मुताबिक, लिकुड के कुछ नेता उसके सांसदों को फोन कर नेतन्याहू का समर्थन करने के लिए मना रहे हैं।
जारी बयान में याशार ने कहा कि चुनाव में हार के बाद लिकुड के नेता परेशान हैं और उसके सांसदों से संपर्क कर रहे हैं।
ओमान, एजेंसी। होर्मुज में गुरुवार को 27 भारतीय क्रू सदस्यों वाले तेल टैंकर MT लुईस 1 पर हमला हुआ। पनामा के झंडे वाले इस टैंकर के पास एक छोटी नाव पहुंची थी। नाव से आए लोगों ने जहाज के बाहरी हिस्से (हुल) पर दो लिम्पेट माइंस चिपका दीं और वहां से चले गए।
कुछ देर बाद दोनों विस्फोटकों में धमाका हुआ, जिससे इंजन रूम में आग लग गई। इसकी वजह से जहाज का इंजन कुछ समय के लिए बंद हो गया। हालांकि, क्रू ने आग पर काबू पा लिया और जहाज को सुरक्षित कर लिया।
हमले के पीछे किसका हाथ है, इसकी पुष्टि नहीं हुई है। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बताया कि जहाज पर सवार सभी 27 भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। किसी को चोट नहीं आई है।
पहली बार लिम्पेट माइंस से सफल हमला
रॉयटर्स के मुताबिक, फरवरी में अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद होर्मुज में पहली बार लिम्पेट माइंस से सफल हमला हुआ है।
इससे पहले सितंबर में भी इसी तरह के विस्फोटक लगाने की कोशिश की गई थी, लेकिन उनमें धमाका नहीं हुआ था। ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी UKMTO के मुताबिक, टैंकर पर हमला ओमान के खासाब शहर से करीब 46 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में हुआ।
लिम्पेट माइंस छोटे आकार के विस्फोटक होते हैं, जिन्हें गोताखोर या छोटी नाव से जहाज के बाहरी हिस्से पर चिपकाया जा सकता है। इनमें चुंबक लगे होते हैं, जिससे ये जहाज पर चिपक जाते हैं। इनका इस्तेमाल आमतौर पर जहाजों को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जाता है।
एक दिन में दो तेल टैंकरों पर हमला
29 अक्टूबर को लाइबेरिया के झंडे वाले तेल टैंकर एमटी अरजानाह पर भी हमला हुआ था। इस जहाज पर दो भारतीय नागरिक सवार थे। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल के मुताबिक, दोनों भारतीय सुरक्षित हैं।
इस तरह एक ही दिन में होर्मुज के आसपास दो तेल टैंकरों पर हमले हुए। दोनों जहाजों पर कुल 29 भारतीय नाविक सवार थे। सभी सुरक्षित हैं।
होर्मुज में अब तक 122 जहाजों पर हमला
इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) के मुताबिक, 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से 30 अक्टूबर तक फारस की खाड़ी, होर्मुज और ओमान की खाड़ी में 122 जहाजों पर हमला हुआ।
होर्मुज दुनिया का एक अहम समुद्री रास्ता है। यहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल दूसरे देशों तक पहुंचता है। लगातार हो रहे हमलों से तेल की सप्लाई और दुनियाभर के कारोबार पर असर पड़ सकता है।
अमेरिकी चुनाव के बाद ईरान पर फिर हमले की तैयारी
अमेरिका और इजराइल 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर फिर हमला कर सकते हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, दोनों देश तेज सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं। इसमें ईरान के तेल-गैस ठिकानों, परमाणु केंद्रों और मिसाइलों-ड्रोन के ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने मिडिल ईस्ट में अपनी तैयारी बढ़ा दी है। कुछ संवेदनशील ठिकानों से सैनिकों को हटाया जा रहा है और हथियारों का भंडार बढ़ाया जा रहा है। इजराइल की सुरक्षा के लिए पैट्रियट मिसाइल सिस्टम भी भेजा जा रहा है। यह सिस्टम दुश्मन की मिसाइलों और लड़ाकू विमानों को हवा में ही मार गिराता है। हालांकि, ट्रम्प ने अभी हमले का अंतिम फैसला नहीं लिया है।