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छत्तीसगढ़

रायपुर : विशेष लेख : प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण का अनूठा संगम है नंदनवन जंगल सफारी

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320.15 हेक्टेयर में फैला नंदनवन जंगल सफारी बना प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों का पसंदीदा केंद्र

  •  धनंजय राठौर ,संयुक्त संचालक, जनसंपर्क
  •  अशोक कुमार चंद्रवंशी, सहायक जनसंपर्क अधिकारी
 नंदनवन जंगल सफारी नवा रायपुर

नंदनवन जंगल सफारी नवाँ रायपुर में पर्यटकों के लिए कई प्रकार की रोमांचक सफारी राइड्स उपलब्ध हैं, जिनमें शाकाहारी सफारी, टाइगर सफारी, भालू सफारी और लायन सफारी प्रमुख हैं। इसके अलावा यहाँ एक छोटा चिड़ियाघर (नंदनवन जू) भी है।
छत्तीसगढ़ की राजधानी नवा रायपुर (अटल नगर) के सेक्टर-39 में स्थित नंदनवन जंगल सफारी राज्य के प्रमुख पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण केंद्रों में शामिल है। 320.15 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला यह विशाल परिसर प्रकृति प्रेमियों, वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। यहां वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ पर्यटकों को प्राकृतिक वातावरण में वन्यजीवों को देखने और उनके बारे में जानने का अवसर मिलता है।

 नंदनवन जंगल सफारी नवा रायपुर
मिनी जू से जंगल सफारी तक का सफर
    नंदनवन की शुरुआत वर्ष 1979 में रायपुर में ‘नंदनवन मिनी जू’ के रूप में हुई थी। यह वन्यजीवों के रेस्क्यू और राहत केंद्र के रूप में विकसित किया गया था। वर्ष 2008 में केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) ने इसे आधिकारिक रूप से ‘मिनी जू’ की मान्यता दी।
    इसके बाद नवा रायपुर में आधुनिक और विशाल जंगल सफारी विकसित करने के लिए वर्ष 2012 से 2015 के बीच 320.15 हेक्टेयर भूमि आवंटित की गई। 1 नवंबर 2016 को छत्तीसगढ़ राज्य के 16वें स्थापना दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नंदनवन जंगल सफारी का उद्घाटन किया।

320.15 हेक्टेयर में फैला नंदनवन जंगल सफारी बना प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों का पसंदीदा केंद्र
वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण शिक्षा पर विशेष जोर
    नंदनवन जंगल सफारी का मुख्य उद्देश्य वन्यजीवों का संरक्षण, दुर्लभ प्रजातियों का संरक्षण एवं प्रजनन और लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। यहां वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप सुरक्षित और तनावमुक्त आवास उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है।
    विद्यार्थियों और पर्यटकों को वन्यजीवों तथा जैव विविधता के महत्व की जानकारी देने के लिए यहां विभिन्न पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
पांच प्रमुख सफारी जोन हैं आकर्षण का केंद्र
    नंदनवन जंगल सफारी को वन्यजीवों की सुरक्षा और पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग जोन में विकसित किया गया है।

320.15 हेक्टेयर में फैला नंदनवन जंगल सफारी बना प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों का पसंदीदा केंद्र
शाकाहारी सफारी
    30.89 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस जोन में चीतल, सांभर, नीलगाय और काला हिरण जैसे वन्यजीव प्राकृतिक वातावरण में विचरण करते हैं।
भालू सफारी
    20.03 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित भालू सफारी पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। यहां भालुओं को प्राकृतिक वातावरण में देखने का अवसर मिलता है।
बाघ सफारी
    20.04 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली बाघ सफारी में पर्यटक देश के राष्ट्रीय पशु बाघ को करीब से देखने का रोमांचक अनुभव प्राप्त करते हैं।
सिंह सफारी
    20.01 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित सिंह सफारी में एशियाई शेरों का संरक्षण किया जा रहा है।
जू जोन
    50 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले जू जोन में विभिन्न प्रजातियों के पक्षी, सरीसृप और अन्य वन्यजीव आकर्षण का केंद्र हैं।

दुर्लभ और विशेष वन्यजीवों का भी संरक्षण
    नंदनवन जंगल सफारी में विभिन्न चिड़ियाघरों के साथ पशु विनिमय कार्यक्रम के माध्यम से कई दुर्लभ और विशेष वन्यजीवों को लाया गया है। यहां सफेद बाघ, दरियाई घोड़ा, घड़ियाल और क्लोन जंगली भैंसा ‘दीपाशा’ जैसे वन्यजीव पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण हैं।
देश-विदेश से पहुंचते हैं पर्यटक
    वनमंडलाधिकारी थेजस शेखर ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप की मंशानुरूप नंदनवन जंगल सफारी पर्यटकों के बीच लगातार लोकप्रिय हो रहा है। गौरतलब है कि वर्ष 2018-19 में ही देश-विदेश से 1 लाख 74 हजार 611, वर्ष 2019-20 में 1 लाख 60 हजार 767 ,वर्ष 2020-21 में 1 लाख 60 हजार 32, वर्ष 2021-22 में 1 लाख 73 हजार 72, वर्ष 2022-23 में 2 लाख 77 हजार 881, वर्ष 2023-24 में 2 लाख 62 हजार 486, वर्ष 2024-25 में 2 लाख 70 हजार 942, वर्ष 2025-26 में 3 लाख 24 हजार 785, से अधिक पर्यटकों ने जंगल सफारी का भ्रमण किया। यह आंकड़ा इसकी बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है।
जैव विविधता संरक्षण के प्रति जागरूकता का केंद्र
    नंदनवन जंगल सफारी में अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस, विश्व बाघ दिवस और वन्यजीव सप्ताह जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन आयोजनों के माध्यम से लोगों, विद्यार्थियों और पर्यटकों को वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाता है।
रायपुर से आसान पहुंच
    नंदनवन जंगल सफारी नवा रायपुर (अटल नगर) के सेक्टर-39 में स्थित है। यह स्वामी विवेकानंद अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे, रायपुर से लगभग 15 किलोमीटर और रायपुर रेलवे स्टेशन से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जंगल सफारी प्रत्येक सोमवार को बंद रहती है।
वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण शिक्षा का ऐसा अनूठा केंद्र
नंदनवन जंगल सफारी आज छत्तीसगढ़ में पर्यटन, वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण शिक्षा का ऐसा अनूठा केंद्र बन चुका है, जहां प्रकृति के करीब पहुंचकर वन्यजीवों को देखने के साथ-साथ उनके संरक्षण का संदेश भी मिलता है ।

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कोरबा

भाजपा नेता अरूण मिश्रा (पप्पू महराज) का निधन

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कोरबा। सिंचाई कालोनी रामपुर कोरबा निवासी भाजपा नेता अरूण मिश्रा (पप्पू महराज) का आज प्रात: आकस्मिक निधन हो गया। अरूण मिश्रा पूर्व एल्डमेन एवं भाजपा नेता बाल महराज एवं भाजपा नेता राकेश मिश्रा के बड़े भाई हैं।
वे अपने पीछे पत्नी, एक पुत्र, दो पुत्रियां, दो भाई सहित भरापूरा परिवार छोड़कर स्वर्गलोक सिदार गए। वे कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे और आज प्रात: ह्दयाघात आने से उनका निधन हो गया। उनके निधन और नियति के इस असहनीय आघत से सम्पूर्ण मिश्रा परिवार को असहनीय वेदना पहुंची है।
उनका अंतिम संस्कार दोपहर 3.00 बजे पोड़ीबहार स्थित आदर्श नगर मुक्तिधाम में किया गया। उनकी अंतिम यात्रा निज निवास वार्ड क्र. 37 सिंचाई कालोनी रामपुर से निकल कर पोड़ीबहार मुक्तिधाम पहुंची, जहां उनके पुत्र विभव मिश्रा ने उनका अग्रिसंस्कार विधि विधान से पंडित जी की उपस्थिति में किया। उनकी अंतिम यात्रा में कोरबा के भाजपा नेता, स्थानीय नागरिकगण एवं परिजन बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
पप्पू महराज सरल और व्यवहार कुशल व्यक्तित्व के धनी थे। उनके निधन से शुभचिंतक हतप्रभ हैं। वे वनविभाग सहित अन्य विभागों में ठेकेदार थे।

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कोरबा

मानवीय प्रेरणा:अस्पताल में भर्ती अखबार वितरक रामा का हालचाल जानने पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल पहुंचे

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रेडक्रास सोसायटी के अध्यक्ष रामसिंह अग्रवाल, पत्रकार गेंदलाल शुक्ला भी पहुंचे
एमजेएम हास्पिटल के डायरेक्टर डॉ. प्रिंस जैन स्वयं कर रहे रामा का ईलाज
कोरबा। कोरबा में कभी-कभी ऐसे दृश्य आ जाते हैं, जो लोगों के लिए प्रेरणा का सबब बन जाते हैं। आर्थिक दृष्टि से यदि समाज का आंकलन करें तो नीचे तबके में अखबार वितरक भी आते हैं। अखबार वितरक रामा उर्फ रामायण सिंह को कोरबा के अधिकांश लोग जानते हैं और करीब 40 साल से भी अधिक समय से अखबार वितरण कर परिवार का लालन-पोषण कर रहे हैं। तीन दिन पूर्व रामायण सिंह को कमजोरी लगी और अखबार वितरक संघ के जिला इकाई के अध्यक्ष विपेन्द्र कुमार साहू एवं टीम ने रामा को एमजेएम हास्पिटल टीपी नगर कोरबा में भर्ती कराया।

एमजेएम हास्पिटल के डायरेक्टर डॉ. प्रिंस जैन रामा से परिचित थे और विपेन्द्र कुमार साहू ने जब डॉ. जैन से सम्पर्क किया तो डॉ. प्रिंस जैन रामा को सहृदयता से अपने अस्पताल में भर्ती किया और स्वयं की देख-रेख में उनका ईलाज प्रारंभ किया। यह मानवता के प्रति उत्कृष्ट उदाहरण कहा जा सकता है।

यह दृश्य हमें प्रेरणा देता है। इतना ही नहीं जब रामा की तबियत खराब होने की सूचना पूर्व कैबिनेट मंत्री जयसिंह अग्रवाल को मिली तो वे भी वरिष्ठ अखबार वितरक रामा का हालचाल जानने एमजेएम अस्पताल पहुंचे। श्री अग्रवाल पहले डॉ. प्रिंस जैन के केबिन में पहुंचे और रामा के बारे में जानकारी ली। दोनों साथ मिलकर रामा से मिले और उनका हालचाल जाना। यह दृश्य भी हमें प्रेरित करता है कि एक कोरबा के लब्धप्रतिष्ठित राजनेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री जयसिंह अग्रवाल नीचे तबके के व्यक्ति का हालचाल जानने अस्पताल पहुंचते हैं। श्री अग्रवाल ने डॉ. प्रिंस जैन से कहा कि रामा का ईलाज बेहतर ढंग से करें और खर्च की परवाह न करें।

चेम्बर आफ कामर्स के पूर्व अध्यक्ष एवं रेडक्रास सोसायटी के कोरबा जिला अध्यक्ष तथा कोरबा के समाजसेवी रामसिंह अग्रवाल भी रामा को देखने एमजेएम अस्पताल पहुंचे और उनका हालचाल जाना। रामसिंह अग्रवाल ने रामा से कहा- फिकर करे के जरूरत नई हे… सब बंदोबस्त हो जाही। पैसा कौड़ी के जरूरत नई हे। उन्होंने भी डॉ. प्रिंस जैन को रामा का ईलाज पूरी सिद्दत से करने की बात कही। वरिष्ठ पत्रकार गेंदलाल शुक्ला सहित कोरबा के कई मूर्धन्य लोग भी रामा को देखने पहुंचे थे।
छत्तीसगढ़ अखबार वितरक संघ के जिला इकाई के अध्यक्ष सहित उनकी टीम ने भी रामा को सहयोग प्रदान किया और लगातार तीन दिन से संघ के सदस्य उनकी निगरानी कर रहे हैं और हौसला बढ़ा रहे हैं।

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कोरबा

अमृत सरोवरों के तट पर हर्षोल्लास से मनाया गया स्वतंत्रता दिवस

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ध्वजारोहण के साथ निकली तिरंगा यात्रा, वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बढ़ाया उत्साह

जल एवं पर्यावरण संरक्षण के साथ सामुदायिक सहभागिता का दिया संदेश

कोरबा। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में विकसित किए गए अमृत सरोवरों के तट पर स्वतंत्रता दिवस का पर्व उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया।

कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देशन एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री प्रतीक जैन के मार्गदर्शन में जिले के विभिन्न अमृत सरोवर परिसरों में ध्वजारोहण सहित सामुदायिक, सांस्कृतिक एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी विविध गतिविधियों का आयोजन किया गया।

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अमृत सरोवर स्थलों को विशेष रूप से सजाया गया। विभिन्न स्थानों पर स्वतंत्रता सेनानियों, शहीद परिवारों के सदस्यों एवं ग्राम पंचायत के वरिष्ठ नागरिकों द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। इसके पश्चात स्थानीय जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों, विद्यार्थियों, युवाओं एवं सामाजिक संगठनों की सहभागिता से तिरंगा यात्रा निकाली गई। तिरंगा यात्रा के दौरान देशभक्ति के नारों से गांव और सरोवर परिसर गूंज उठे।

अमृत सरोवर बने सामुदायिक सहभागिता के केंद्र

आयोजन का उद्देश्य अमृत सरोवरों को केवल जल संरक्षण के स्थलों तक सीमित न रखते हुए उन्हें जीवंत सामुदायिक केंद्रों के रूप में विकसित करना तथा ग्रामीणों में सामुदायिक भागीदारी की भावना को मजबूत करना रहा। कार्यक्रमों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों, विद्यार्थियों, खिलाड़ियों, स्व-सहायता समूहों, युवा क्लबों, पर्यावरण प्रेमियों एवं अन्य नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

वृक्षारोपण और स्वच्छता से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

अमृत सरोवर परिसरों में वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान और श्रमदान जैसी गतिविधियां आयोजित की गईं। ग्रामीणों ने सरोवरों एवं आसपास के क्षेत्रों को स्वच्छ एवं सुंदर बनाए रखने का संकल्प लिया। जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और सामुदायिक सहभागिता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए शपथ, जनसंपर्क एवं जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।

ग्रामीण प्रतिभाओं को मिला मंच

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ग्रामीण प्रतिभाओं को अपनी कला एवं प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिला। विभिन्न अमृत सरोवर स्थलों पर देशभक्ति गीत, सांस्कृतिक कार्यक्रम, नुक्कड़ नाटक, निबंध लेखन एवं चित्रकला प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। बच्चों और युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए स्वतंत्रता, राष्ट्रप्रेम, स्वच्छता, पर्यावरण एवं जल संरक्षण का संदेश दिया।

इन आयोजनों के माध्यम से अमृत सरोवरों को जल संरक्षण, पर्यावरण जागरूकता, सामुदायिक सहभागिता और सतत आजीविका के बहुआयामी केंद्र के रूप में विकसित करने का संदेश दिया गया। कार्यक्रमों में स्थानीय जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी, छात्र-छात्राएं, वीबी-जी राम जी योजना के हितग्राही, युवा तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

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