सुरक्षित श्रम, सामाजिक सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य, सम्मानजनक रोजगार और डिजिटल सेवाओं का व्यापक विस्तार
छगल लाल लोन्हारे
संयुक्त संचालक, जनसंपर्क
राष्ट्र निर्माण में श्रमिकों का योगदान सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। श्रमिकों के सम्मान, सुरक्षा और समग्र विकास के बिना विकसित राज्य की कल्पना संभव नहीं है। इसी सोच को आधार बनाकर छत्तीसगढ़ शासन का श्रम विभाग श्रमिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन के निर्देशन में श्रमिकों के हितों की रक्षा, सामाजिक सुरक्षा का विस्तार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता तथा आधुनिक तकनीक के माध्यम से सेवाओं को सरल बनाने के लिए अनेक महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। राज्य सरकार के ढाई साल में श्रम विभाग की उपलब्धियाँ राज्य सरकार की श्रमिक हितैषी सोच और संवेदनशील प्रशासन का परिचायक हैं।
प्रशासनिक ढांचे का विस्तार, सेवाओं की बेहतर पहुंच
श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन तथा श्रमिकों को त्वरित और गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने पाँच नए जिलों में श्रम पदाधिकारी कार्यालय स्थापित किए हैं। मंत्री लखन लाल देवांगन ने बताया कि पाँच श्रम पदाधिकारी कार्यालयों को सहायक श्रमायुक्त कार्यालय के रूप में उन्नत किया गया है। अब प्रदेश में 10 सहायक श्रमायुक्त कार्यालय एवं 23 श्रम पदाधिकारी कार्यालय सहित कुल 33 श्रम कार्यालय संचालित हैं। इससे श्रमिकों की समस्याओं के त्वरित निराकरण और योजनाओं के प्रभावी संचालन को नई गति मिली है।
समय के अनुरूप श्रम कानूनों में सुधार
औद्योगिक विकास और श्रमिक हितों के संतुलन को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने श्रम कानूनों में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। छत्तीसगढ़ कारखाना नियम, 1962 में संशोधन कर निर्धारित सुरक्षा प्रावधानों के साथ महिलाओं के रोजगार के अवसरों का विस्तार किया गया है। वहीं छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना नियम, 2021 में संशोधन के माध्यम से श्रम पहचान पंजीयन प्रमाण-पत्र अब 24 घंटे के भीतर जारी किए जाने का प्रावधान किया गया है। इससे उद्योगों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को सरल एवं पारदर्शी सेवाएँ उपलब्ध होंगी तथा ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को भी बढ़ावा मिलेगा।
56 लाख से अधिक श्रमिक सामाजिक सुरक्षा के दायरे में
श्रम विभाग के अंतर्गत संचालित छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल, भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल तथा असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल के माध्यम से अब तक लगभग 56.83 लाख संगठित, निर्माण एवं असंगठित श्रमिकों का पंजीयन किया जा चुका है।
3.48 लाख श्रमिकों को बीमा, चिकित्सा, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं कौशल उन्नयन जैसी सुविधाओं का लाभ
वर्ष 2026 में 30 जून तक विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से लगभग 3.48 लाख श्रमिकों को बीमा, चिकित्सा, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं कौशल उन्नयन जैसी सुविधाओं का लाभ प्रदान किया गया है। इन योजनाओं पर लगभग 173.32 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं, जो श्रमिक कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
निर्माण श्रमिकों को बढ़ी आर्थिक सहायता
मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना के अंतर्गत आवास निर्माण अथवा घर खरीदने के लिए दी जाने वाली सहायता राशि एक लाख रुपये से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपये कर दी गई है। यह निर्णय निर्माण श्रमिकों के अपने घर के सपने को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
महिला श्रमिकों को स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता के नए अवसर
इसी प्रकार दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के अंतर्गत पंजीकृत महिला निर्माण श्रमिकों एवं उनके समूहों को ई-रिक्शा खरीदने के लिए सहायता राशि भी एक लाख रुपये से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपये कर दी गई है। इससे महिला श्रमिकों को स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता के नए अवसर मिल रहे हैं।
शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई पहल
राज्य सरकार ने श्रमिक परिवारों के भविष्य को संवारने के उद्देश्य से अटल कैरियर निर्माण योजना प्रारंभ की है। इसके माध्यम से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों को इंजीनियरिंग एवं मेडिकल जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए गुणवत्तापूर्ण निःशुल्क कोचिंग उपलब्ध कराई जाएगी।
पंजीकृत निर्माण श्रमिकों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण
वहीं मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक स्वास्थ्य परीक्षण योजना के माध्यम से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। इस पहल से बीमारियों की प्रारंभिक पहचान, समय पर उपचार तथा स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।
उत्कृष्ट शिक्षा से उज्ज्वल भविष्य की ओर
श्रमिक परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत पात्र निर्माण श्रमिकों के प्रथम दो बच्चों को कक्षा 6वीं से 12वीं तक उत्कृष्ट निजी आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जा रही है।मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप वर्ष 2026-27 से इस योजना के अंतर्गत लाभान्वित बच्चों की संख्या 100 से बढ़ाकर 200 कर दी गई है। यह पहल श्रमिक परिवारों के बच्चों के भविष्य को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने का माध्यम बनेगी।
पाँच रुपये में पौष्टिक भोजन
शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना के माध्यम से पंजीकृत निर्माण, संगठित एवं असंगठित श्रमिकों को मात्र 5 रुपये में गरम एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश के 18 जिलों में 39 भोजन केन्द्र संचालित हैं, जो हजारों श्रमिकों के लिए राहत का माध्यम बने हुए हैं।
डिजिटल सेवाओं से बढ़ी पारदर्शिता
श्रम विभाग द्वारा विकसित ‘ई-श्रम साथी मोबाइल एप’ श्रमिकों और नियोजकों के लिए एक महत्वपूर्ण डिजिटल प्लेटफॉर्म बनकर उभरा है। इस एप के माध्यम से स्वयं पंजीयन, श्रमिक एवं नियोजक के बीच सीधा संपर्क तथा रोजगार संबंधी जानकारी आसानी से उपलब्ध हो रही है। इससे पारदर्शिता के साथ रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि हो रही है।
मॉडल लेबर चौक से मिलेगा सम्मानजनक वातावरण
राज्य सरकार द्वारा मॉडल लेबर चौक फेसिलिटेशन सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। इन केन्द्रों पर श्रमिकों के पंजीयन, विभिन्न योजनाओं के आवेदन, भोजन, पेयजल, विश्राम एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। इससे श्रमिकों को सम्मानजनक एवं सुरक्षित कार्य वातावरण उपलब्ध होगा।
सामाजिक सुरक्षा को मिला नया विस्तार
मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना के अंतर्गत सामान्य मृत्यु पर आश्रितों को 1 लाख रुपये, कार्यस्थल दुर्घटना में मृत्यु होने पर 5 लाख रुपये तथा स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में 2.50 लाख रुपये की सहायता प्रदान की जाती है। साथ ही अपंजीकृत निर्माण श्रमिकों की कार्यस्थल दुर्घटना में मृत्यु होने पर भी उनके आश्रितों को 1 लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
पंजीकृत श्रमिकों की मृत्यु पर आश्रितों को 1 लाख रुपये की सहायता
इसी प्रकार असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल के अंतर्गत पंजीकृत श्रमिकों की मृत्यु पर आश्रितों को 1 लाख रुपये तथा दिव्यांगता की स्थिति में 50 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाती है।
सुरक्षित कार्यस्थल की दिशा में प्रयास
राज्य के विभिन्न कारखानों में श्रमिकों को उनके कार्य के अनुरूप वरिष्ठ अधिकारियों एवं सुरक्षा अधिकारियों द्वारा नियमित प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। इससे कार्यस्थलों पर सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित होने के साथ-साथ दुर्घटनाओं में कमी और उत्पादकता में वृद्धि हो रही है।
श्रमिक कल्याण की नई पहचान
छत्तीसगढ़ में श्रम विभाग द्वारा किए जा रहे व्यापक सुधार यह सिद्ध करता है कि राज्य सरकार श्रमिकों को केवल योजनाओं का लाभार्थी नहीं, बल्कि विकास यात्रा का महत्वपूर्ण सहभागी मानती है। प्रशासनिक ढाँचे का विस्तार, श्रम कानूनों का आधुनिकीकरण, डिजिटल सेवाओं का विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, सामाजिक सुरक्षा एवं सम्मानजनक रोजगार जैसी पहलें श्रमिकों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रही हैं। श्रमिकों के कल्याण और सशक्तिकरण के इन प्रयासों से छत्तीसगढ़ समावेशी और संवेदनशील विकास की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है।
रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ NSUI ने संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए 9 नए अध्यक्षों की नियुक्ति की है। प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय ने राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ की अनुशंसा पर ये नियुक्तियां की हैं। इनमें 4 विधानसभा अध्यक्ष और 5 जिला अध्यक्ष शामिल हैं। सभी नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू होंगी।
पाटन से कांकेर तक नई टीम
4 विधानसभा और 5 जिलों को मिले नए अध्यक्ष
विधानसभा स्तर पर डेविड बघेल को पाटन, नंद कुमार नेताम को भानुप्रतापपुर, विक्रम मलिक को अंतागढ़ और नूतन पटेल को कांकेर विधानसभा अध्यक्ष बनाया गया है।
वहीं जिला स्तर पर दुष्यंत आर्या को मुंगेली, उस्मान रजा को बालोद, रोशन सिंह ठाकुर को खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, रंजेश सिंह क्षत्री को बिलासपुर ग्रामीण और समर्थ मिरानी को बिलासपुर शहर की जिम्मेदारी दी गई है।
यूथ कांग्रेस चुनाव के बीच हुई नई नियुक्तियां
NSUI में ये नियुक्तियां ऐसे समय हुई हैं, जब छत्तीसगढ़ युवा कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव को लेकर विवाद चल रहा है। चुनाव प्रक्रिया और कथित अनियमितताओं को लेकर कार्यकर्ताओं की शिकायतों के बीच युवा कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी स्मृति रंजन लेंका ने 17 से 19 अगस्त तक छत्तीसगढ़ का दौरा किया था।
इस दौरान प्रभावित कार्यकर्ताओं से बातचीत कर उनकी शिकायतें सुनी गईं। इसके बाद भी विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। इसी बीच NSUI की नई नियुक्तियों को संगठनात्मक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
छात्र हितों और संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी
NSUI ने नवनियुक्त पदाधिकारियों से संगठन की रीति-नीति और संविधान के अनुरूप काम करने की अपेक्षा जताई है। उन्हें छात्र हितों की रक्षा के साथ संगठन को मजबूत, सक्रिय और जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
इन नियुक्तियों के जरिए NSUI ने विधानसभा और जिला स्तर पर अपनी संगठनात्मक टीम को और मजबूत करने की कोशिश की है।
रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के अधिकांश इलाकों में लगातार बारिश हो रही है, जिससे कई जगह हालात बिगड़े हुए हैं। मनेंद्रगढ़ जिले में जनकपुर के पास गोहड़ारी नदी में बना करीब 50 साल पुरानी पुलिया क्षतिग्रस्त हो गया। पानी के तेज बहाव से पुलिया के पियर (खंभे) टूट गए और करीब 70% हिस्से को नुकसान पहुंचा है। भारी वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है।
मौसम विभाग के मुताबिक आज भी उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ में कुछ जगहों पर मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। प्रदेश में बारिश का दौर अगले 7 दिन तक जारी रहने की संभावना है। गुरुवार को सरगुजा, बिलासपुर और दुर्ग संभाग में कई जगह बारिश हुई, जबकि कुछ जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की गई।
मनेंद्रगढ़ के गोहड़ारी नदी में बनी पुलिया में भारी वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है।
पुलिया के करीब 70% हिस्से को नुकसान पहुंचा है।
खारुन नदी में बहे ग्रामीण का शव मिला
कोरबा के पाली थाना क्षेत्र में बुधवार सुबह खारुन नदी में बहा 45 वर्षीय गेंदलाल का शव करीब 24 घंटे बाद गुरुवार सुबह मिला। वह नदी किनारे गुड़ाखू करने गया था, तभी पैर फिसलने से तेज बहाव में बह गया। करीब 500 मीटर दूर झाड़ियों में उसका शव मिला।
वहीं, रायगढ़ के धरमजयगढ़ ब्लॉक के पुटूकछार गांव में नदी का जलस्तर बढ़ने से रपटा पुल चार दिनों से डूबा है। इससे खम्हार-पुटूकछार मार्ग पर लोगों का आना-जाना बंद है। स्कूली बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं और ग्रामीणों को भी गांव से बाहर निकलने में परेशानी हो रही है।
कोरबा में खारुन नदी में बहे ग्रामीण का शव निकालते गोताखोर की टीम।
कोरबा में खारुन नदी में बहा ग्रामीण का दूसरे दिन शव मिला।
सीजन में अब सिर्फ 6% कम बारिश
प्रदेश में 1 जून से अब तक हुई बारिश का आंकड़ा सामान्य के करीब पहुंच गया है। मौसम विभाग के अनुसार छत्तीसगढ़ में सीजन की औसत बारिश सामान्य से सिर्फ 6% कम है। इसे सामान्य बारिश की कैटेगरी में माना जा रहा है।
पिछले 24 घंटे में प्रदेश का सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान जगदलपुर में 30.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं सबसे कम न्यूनतम तापमान पेंड्रा रोड में 21.2 डिग्री सेल्सियस रहा।
रायपुर में गरज-चमक के साथ पड़ेंगी बौछारें
रायपुर शहर में आज (21 अगस्त) गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। शहर का अधिकतम तापमान करीब 30 डिग्री और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है।
1 जून से 20 अगस्त तक प्रदेश में 771.8 एमएम बारिश
छत्तीसगढ़ में 1 जून से 20 अगस्त तक औसतन 771.8 एमएम (30.4 इंच) बारिश हुई है, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश 818.7 एमएम (32.2 इंच) मानी जाती है। यानी प्रदेश में बारिश सामान्य से सिर्फ 6% कम है और राज्य की स्थिति नार्मल कैटेगरी में बनी हुई है।
हालांकि प्रदेश का कुल आंकड़ा सामान्य है, लेकिन जिला स्तर पर बारिश में बड़ा अंतर है। कहीं सामान्य से 55% ज्यादा बारिश हुई है, तो कुछ जिलों में अब भी 41% तक की कमी बनी हुई है।
33 में से 21 जिलों में स्थिति नार्मल, 8 में एक्सेस बारिश
प्रदेश के 13 जिलों में बारिश नार्मल रही है, जबकि 8 जिलों में सामान्य से ज्यादा यानी एक्सेस बारिश दर्ज की गई है। वहीं 7 जिले डेफिशिएंट कैटेगरी में हैं। बाकी जिलों में भी सामान्य के आसपास बारिश दर्ज की गई है।
सबसे ज्यादा बारिश सारंगढ़-बिलाईगढ़ में हुई। यहां 1 जून से 20 अगस्त तक 1014.6 एमएम (40 इंच) बारिश हुई, जो सामान्य 653 एमएम (25.7 इंच) से 55% ज्यादा है। इसके बाद बलरामपुर में 45%, मुंगेली में 35%, महासमुंद में 26%, बलौदाबाजार में 25%, जांजगीर में 21% और नारायणपुर में 21% एक्सेस बारिश दर्ज की गई।
रायगढ़ के पुटूकछार गांव में 4 दिन से रपटा पुल डूबा।
सरगुजा में सबसे ज्यादा कमी, बेमेतरा और कांकेर भी पीछे
बारिश की कमी वाले जिलों में सबसे खराब स्थिति सरगुजा की है। यहां सामान्य 851.6 एमएम के मुकाबले सिर्फ 499.7 एमएम बारिश हुई है। यानी जिला अब भी सामान्य से 41% नीचे है।
इसके बाद बेमेतरा और कांकेर दोनों में 39% की कमी दर्ज की गई है। जशपुर में बारिश सामान्य से 33% कम है। इसके अलावा बस्तर में 25% और कोंडागांव में 22% की कमी बनी हुई है।
बलरामपुर जिले में मूसलाधार बारिश के कारण कन्हर नदी उफान पर है।
रायपुर में 12% ज्यादा, दुर्ग में 14% कम
रायपुर में इस सीजन अब तक 805.5 एमएम (31.7 इंच) बारिश हो चुकी है, जबकि सामान्य आंकड़ा 722.2 एमएम (28.4 इंच) है। यहां बारिश सामान्य से 12% ज्यादा है।
वहीं दुर्ग में 606.3 एमएम (23.9 इंच) बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य 707.4 एमएम (27.8 इंच) से 14% कम है, लेकिन यह जिला अभी भी नार्मल कैटेगरी में है। इसी तरह राजनांदगांव में 14% और कबीरधाम, मोहला-मानपुर-चौकी में 17% तक की कमी के बावजूद स्थिति नॉर्मल रेंज में है।
बस्तर संभाग में भी अलग-अलग तस्वीर
बस्तर क्षेत्र में भी बारिश का वितरण एक जैसा नहीं है। नारायणपुर में सामान्य से 21% ज्यादा बारिश हुई है, जबकि बीजापुर और दंतेवाड़ा में स्थिति नार्मल है। दूसरी तरफ बस्तर में 25%, कोंडागांव में 22% और कांकेर में 39% की कमी दर्ज की गई है।
यानी बस्तर क्षेत्र में भी कुछ जिलों में अच्छी बारिश हुई, लेकिन कई जिले अब तक मानसून की कमी से जूझ रहे हैं।
रामानुजगंज नगर के वार्ड क्रमांक 13 में एक कच्चा मकान अचानक ढह गया।
किन जिलों में सबसे ज्यादा बारिश
बारिश की वास्तविक मात्रा की बात करें तो नारायणपुर में 1068.7 एमएम (42.1 इंच), सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 1014.6 एमएम (40 इंच), बलरामपुर में 994.4 एमएम (39.2 इंच), जांजगीर में 942.6 एमएम (37.1 इंच), महासमुंद में 939.5 एमएम (37 इंच) और बीजापुर में 939.4 एमएम (37 इंच) बारिश दर्ज की गई है।
वहीं सबसे कम बारिश बेमेतरा में 455.3 एमएम (17.9 इंच) और सरगुजा में 499.7 एमएम (19.7 इंच) हुई है।
क्या कहता है पूरा डेटा?
छत्तीसगढ़ के लिए राहत की बात यह है कि अगस्त के तीसरे हफ्ते तक प्रदेश की कुल मौसमी बारिश सामान्य के करीब पहुंच गई है। जून और जुलाई के शुरुआती दौर में कई जिलों में बनी भारी कमी अब काफी हद तक भर चुकी है।
लेकिन आंकड़े यह भी बता रहे हैं कि प्रदेश की औसत बारिश को देखकर हर जिले की स्थिति का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। 33 में कई जिलों में सामान्य या एक्सेस बारिश है, जबकि सरगुजा, बेमेतरा, कांकेर, जशपुर, बस्तर और कोंडागांव जैसे जिलों में बारिश की कमी अब भी बनी हुई है।
आने वाले दिनों में इन जिलों में अच्छी बारिश होती है तो सीजन के अंत तक इनका रेनफॉल डेफिसिट और कम हो सकता है।
रायपुर/दुर्ग-भिलाई, एजेंसी। छत्तीसगढ के दुर्ग जिले के भिलाई में चल रही शिव महापुराण कथा के चौथे दिन कथावाचक प्रदीप मिश्रा ने दिल्ली के जेन-जी प्रोटेस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित गाली-गलौज को लेकर युवाओं के संस्कारों पर सवाल उठाए। उन्होंने व्यासपीठ से कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपशब्द कह देना, ये कौन से संस्कार हैं?
इसके बाद कथा सुनने आए जेन-जी लड़के-लड़कियों को खड़ा कर देश की मर्यादा और संस्कारों को बनाए रखने की शपथ भी दिलाई। उन्होंने व्यासपीठ से अपील करते हुए कहा बच्चों को कार भले मत दिलाओ। कार दिलाओगे तो बच्चे बेचकर खा जाएंगे। बच्चों को संस्कार दिलाओ तो वे कारों की लाइन लगा देंगे।
कथा सुनने आए जेन-जी लड़के-लड़कियों को खड़ा कर संस्कार बनाए रखने की शपथ दिलाई।
प्रधानमंत्री को गाली देने पर जेन-जी के संस्कारों पर सवाल
आज देखिए, क्या हो रहा है? कहीं न कहीं हमारे बच्चे संस्कारों से दूर हो रहे हैं। अभी कुछ दिन पहले हमने दिल्ली का नजारा देखा था। क्या संस्कार थे? भारत को विश्वगुरु बनाने की पहल करने वाले और विदेशों में भी जिस भारत का डंका बज रहा है, जो हर सनातनी के दिल में निवास करते हैं, ऐसे प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी, जो राजगद्दी पर बैठे हैं, उन्हें तुम अपशब्द कह रहे हो। ये जेन-जी है? क्या ये आज की जनरेशन है? इसे संस्कार कहेंगे?”
कथा में युवाओं को खड़ा कर दिलाई शपथ
प्रदीप मिश्रा ने कथा में मौजूद युवा लड़के-लड़कियों को खड़ा कराया और देश के प्रति जिम्मेदारी की शपथ दिलाई। उन्होंने युवाओं से भारत की मर्यादा और संस्कारों को बनाए रखने का संकल्प लेने को कहा।
शपथ के दौरान उन्होंने युवाओं से कहलवाया कि हम भारत के हैं और भारत हमारा है। भारत की मर्यादा और संस्कारों के लिए कभी हम अपनी शिक्षा को लज्जित नहीं होने देंगे। खूब पढ़ेंगे और छत्तीसगढ़ और देश को भी आगे बढ़ाएंगे।
पं. प्रदीप मिश्रा ने व्यास पीठ से कहा- माता-पिता बच्चों को गाड़ी नहीं संस्कार दें। (सौजन्य: आस्था चैनल)
महंगे कॉलेज में पढ़ाओ, लेकिन संस्कार भी दो
प्रदीप मिश्रा ने पेरेंट्स से कहा कि बच्चों को अच्छी शिक्षा दें, महंगे से महंगे कॉलेज में पढ़ाएं, अच्छे कपड़े और अच्छा भोजन दें, लेकिन इसके साथ उन्हें अच्छे संस्कार और ज्ञान भी दें। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को संस्कारों में ढालने से एक ऐसा इतिहास बनेगा, जिसमें हम गर्व से कह सकेंगे हमर छत्तीसगढ महान, मेरा छत्तीसगढ़, मेरा देश महान कहेंगे।
स्कूलों में मंत्र और राष्ट्रगीत का भी किया जिक्र
प्रदीप मिश्रा ने छत्तीसगढ़ के स्कूलों में प्रार्थना और मंत्र-पाठ अनिवार्य किए जाने की तारीफ की। कहा कि छत्तीसगढ़ से सभी स्कूलों में राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, दीप मंत्र, सरस्वती वंदना, गुरुमंत्र महापुरुषों के जीवन का वाचन शांति मंत्र कराया जा रहा है।
इसे सनातनी पहल और भारत को विश्वगुरु बनाने की पहल बताया। कहा कि आने वाली पीढ़ी जब संस्कारों में ढलेगी तो उसके भीतर देश और छत्तीसगढ़ के प्रति गर्व की भावना पैदा होगी।
भिलाई के सेक्टर-6 स्थित सिविक सेंटर जयंती स्टेडियम मैदान में चल रही कथा। (सौजन्य: आस्था चैनल)
‘बच्चों की शादी सादगी से करो’
कथा के दौरान प्रदीप मिश्रा ने भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि शादी, धन और वैभव के प्रदर्शन से नहीं, बल्कि संस्कारों के साथ हुई थी। बच्चों के विवाह के लिए आप कर्ज नहीं लीजिए उनके विवाह सादगी के साथ करें।
उन्होंने माता-पिता से बच्चों की शादी में दिखावे और ज्यादा खर्च से बचने की अपील की। कहा कि बच्चों की शादी में जरूरत से ज्यादा खर्च करने के बजाय सादगी से विवाह करें और बच्चों को संस्कार दें।