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छत्तीसगढ़

​रायपुर : विशेष लेख : आधुनिक तकनीक से वन संरक्षण को नई दिशा

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छत्तीसगढ़ का ऑटोमेटेड फॉरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम बना जंगलों का सतर्क प्रहरी

  • (धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक)
  • (अशोक कुमार चंद्रवंशी, सहायक जनसंपर्क अधिकारी)
छत्तीसगढ़ का ऑटोमेटेड फॉरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम बना जंगलों का सतर्क प्रहरी

ऑटोमेटेड फॉरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम एक उन्नत तकनीक है जो जंगलों में आग लगने की घटनाओं का तुरंत पता लगाकर संबंधित अधिकारियों को सूचित करती है। भारत में, भारतीय वन सर्वेक्षण और विभिन्न राज्य वन विभाग फोरेस्ट फायर अलर्ट एंड मानिटरिंग सिस्टम सैटेलाइट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं। जंगल की आग को ध्यान में रखते हुए श्फोरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम संस्करण 2.0 लाया गया है और पूरी प्रक्रिया को स्वचालित बना दिया गया है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार वन संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग कर रही है। इसी दिशा में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा विकसित ऑटोमेटेड फॉरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम जंगलों में लगने वाली आग की घटनाओं पर त्वरित नियंत्रण सुनिश्चित कर रहा है।

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में विकसित यह तकनीक वन विभाग की कार्यप्रणाली को अधिक तेज, प्रभावी और पारदर्शी बना रही है। इससे वन संपदा, वन्यजीवों और जैव विविधता की सुरक्षा को नई मजबूती मिली है।

अब कुछ ही मिनटों में मिलती है आग लगने की सूचना

पहले वनाग्नि की जानकारी प्राप्त करने और संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने में एक से दो घंटे का समय लग जाता था। इस दौरान आग कई बार बड़े क्षेत्र में फैल जाती थी। अब नई स्वचालित प्रणाली के माध्यम से यह पूरी प्रक्रिया केवल 5 से 10 मिनट में पूरी हो जाती है। इससे समय रहते आग पर नियंत्रण संभव हो रहा है।

उपग्रह तकनीक से होती है सटीक निगरानी

यह प्रणाली अत्याधुनिक उपग्रह तकनीक पर आधारित है। उपग्रह जंगलों में तापमान में होने वाले असामान्य बदलाव की पहचान करता है। वैज्ञानिक विश्लेषण के बाद आग की पुष्टि होने पर संबंधित वन मंडल, रेंज और बीट स्तर के अधिकारियों को तत्काल एसएमएस और ई-मेल के माध्यम से अलर्ट भेज दिया जाता है।

रियल टाइम मॉनिटरिंग से बढ़ी कार्यक्षमता

वन विभाग ने इस प्रणाली को जीआईएस आधारित रियल टाइम डैशबोर्ड से जोड़ा है। इसके माध्यम से अधिकारी वनाग्नि की घटनाओं पर लगातार निगरानी रखते हैं। सूचना मिलते ही फील्ड स्टाफ मौके पर पहुंचकर आग बुझाने की कार्रवाई करता है और उसकी ऑनलाइन रिपोर्ट दर्ज करता है। इससे भविष्य की रणनीति बनाने और संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने में भी सहायता मिलती है।

जनजागरूकता और पूर्व तैयारी पर विशेष जोर

वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग केवल तकनीक पर ही निर्भर नहीं है, बल्कि वनाग्नि की रोकथाम के लिए जनभागीदारी को भी बढ़ावा दे रहा है। हर वर्ष वनाग्नि सीजन से पहले फायर लाइन निर्माण, जनजागरूकता अभियान, प्रशिक्षण तथा मॉक ड्रिल आयोजित किए जाते हैं, ताकि आग की घटनाओं को न्यूनतम किया जा सके।

सरकार की प्राथमिकता है सुरक्षित वन

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप का कहना है कि राज्य सरकार आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन के माध्यम से वन संपदा की सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता दे रही है। उनका मानना है कि यह प्रणाली वन संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है तथा भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणादायी मॉडल साबित होगी।

वन संरक्षण की दिशा में एक प्रभावी पहल

छत्तीसगढ़ का ऑटोमेटेड फॉरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम आधुनिक तकनीक, त्वरित सूचना प्रणाली और प्रभावी प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया है। इससे वनाग्नि पर समय रहते नियंत्रण संभव हो रहा है और राज्य की अमूल्य वन संपदा, वन्यजीवों तथा पर्यावरण की सुरक्षा को नई मजबूती मिल रही है। यह पहल विकसित छत्तीसगढ़ और सुरक्षित पर्यावरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में निगम-मंडल-आयोग और बोर्ड में नियुक्तियां:ममता साहू महिला-आयोग और गौरीशंकर श्रीवास‌ केश शिल्पी कल्याण बोर्ड के बने अध्यक्ष, 25 नेताओं को मिली जिम्मेदारी

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रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ सरकार ने लंबे इंतजार के बाद निगम, मंडल, आयोग और बोर्ड में नई नियुक्तियों की घोषणा कर दी है। जारी सूची के अनुसार 13 निगम, मंडल, आयोग और बोर्ड में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों सहित कुल 25 लोगों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

राज्य केश शिल्पी कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष गौरीशंकर श्रीवास को बनाया गया है, जबकि डॉ. ममता साहू को राज्य महिला आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वहीं रामलाल चौहान को अनुसूचित जाति आयोग का अध्यक्ष और आनंद निषाद को मछुआ कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया है।

सरकार ने इसके अलावा शिक्षा आयोग, शाकंभरी बोर्ड, संस्कृत विद्या मंडल, रायपुर विकास प्राधिकरण, श्रम कल्याण मंडल, गौ सेवा आयोग, अनुसूचित जनजाति आयोग, फिल्म विकास निगम और राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग सहित अन्य संस्थाओं में भी अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की है।

काफी समय से इन नियुक्तियों का इंतजार किया जा रहा था। सूची जारी होने के साथ ही विभिन्न आयोगों और बोर्डों में नई जिम्मेदारियां तय हो गई हैं।

देखिए लिस्ट…

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कोरबा

रोजगार सह आवास दिवस में जल संरक्षण, आवास पूर्णता और आजीविका संवर्धन पर दिया गया विशेष जोर

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मोर गांव -मोर पानीअभियान के तहत जल संरक्षण एवं जलसंवर्धन के बताए गए लाभ

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) एवं विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम के प्रावधानों की दी गई जानकारी

क्यूआर कोड स्कैन प्रणाली से योजनाओं की जानकारी प्राप्त करने के लिए ग्रामीणों को किया गया प्रेरित

कोरबा। जिले की सभी ग्राम पंचायतों में मंगलवार को रोजगार सह आवास दिवस जनभागीदारी के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम, जल संरक्षण, आजीविका संवर्धन तथा ग्रामीण विकास से संबंधित विभिन्न जनजागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया। ग्रामीणों को शासकीय योजनाओं की जानकारी दी गई

कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देशन तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत दिनेश कुमार नाग के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में जिले की ग्राम पंचायतों में रोजगार एवं आवास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। ‘मोर गांव–मोर पानी’ अभियान के अंतर्गत निर्मित नवा तरिया सहित अन्य जल संरक्षण एवं जल संवर्धन कार्यों के महत्व से ग्रामीणों को अवगत कराया गया तथा वर्षा जल संचयन, भू-जल संवर्धन और सिंचाई क्षमता बढ़ाने के लाभ बताए गए।

कार्यक्रम में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अपूर्ण आवासों को शीघ्र पूर्ण कराने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को निर्माण सामग्री आपूर्ति से जोड़ने तथा डीलर दीदी इनिशिएटिव के माध्यम से उन्हें स्वरोजगार एवं लखपति दीदी बनने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

रोजगार सह आवास दिवस के दौरान विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम के प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी गई। कार्य की मांग के आधार पर रोजगार उपलब्ध कराने, मनरेगा के अपूर्ण कार्यों को समयबद्ध पूर्ण करने, श्रमिकों के शेष ई-केवाईसी, लंबित जियो टैगिंग तथा आजीविका डबरी जैसे कार्यों को गति देने पर विशेष चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि आजीविका डबरियां ग्रामीणों के लिए सिंचाई, मत्स्य पालन और अतिरिक्त आय का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही हैं।

ग्रामीणों को योजनाओं की जानकारी सरल एवं पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ग्राम पंचायतों के सार्वजनिक स्थलों पर क्यूआर कोड प्रदर्शित किए गए। ग्रामीणों को अधिक से अधिक क्यूआर कोड स्कैन कर प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), विकसित भारत–जी राम जी तथा अन्य शासकीय योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया गया।

रोजगार सह आवास दिवस के अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि, पंचायत प्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी, प्रधानमंत्री आवास योजना एवं विकसित भारत–जी राम जी के हितग्राही तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

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छत्तीसगढ़

मुख्यमंत्री उत्कर्ष योजना कक्षा 6वीं प्रवेश परीक्षा का परिणाम जारी:9 जुलाई तक दर्ज करा सकेंगे दावा-आपत्ति, बीईओ कार्यालय में देख सकते हैं रिजल्ट

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रायपुर, एजेंसी। मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति एवं जनजाति विद्यार्थी उत्कर्ष योजना (पूर्व में जवाहर उत्कर्ष योजना) के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कक्षा 6वीं में प्रवेश के लिए आयोजित प्रवेश परीक्षा का परिणाम मंगलवार को घोषित कर दिया गया। परीक्षा परिणाम की सूची सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को भेज दी गई है।

परीक्षा में शामिल विद्यार्थी अपने संबंधित विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) कार्यालय में संपर्क कर अपना परिणाम देख सकते हैं। योजना के तहत चयनित विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने का उद्देश्य रखा गया है।

यदि किसी विद्यार्थी को परीक्षा परिणाम को लेकर कोई दावा या आपत्ति दर्ज करानी है, तो वह 09 जुलाई 2026 तक निर्धारित प्रारूप में आवेदन प्रस्तुत कर सकता है। निर्धारित तिथि के बाद प्राप्त होने वाले दावा-आपत्तियों पर विचार नहीं किया जाएगा।

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