Connect with us

देश

बिहार की नई सरकार में NDA के संभावित 18 मंत्री:नीतीश का इस्तीफा कल, डिप्टी CM की रेस में सम्राट समेत तीन नाम

Published

on

पटना,एजेंसी। बिहार में अब नई सरकार बनाने की कवायद तेज हो गई है। JDU ने कल विधायक दल की बैठक बुलाई है। इसमें नीतीश कुमार को विधायक दल का नेता चुना जाएगा। कल यानी सोमवार को BJP विधायक दल की भी बैठक हो सकती है।

CM नीतीश कुमार 17 नवंबर को राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपेंगे और इसी दिन नई सरकार बनाने का दावा भी पेश कर सकते हैं। CM हाउस के सूत्रों की मानें तो 20 नवंबर को नीतीश कुमार 10वीं बार CM पद की शपथ ले सकते हैं।

2025 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन सरकार में एक बार फिर से नीतीश कुमार की पार्टी JDU का कद बढ़ना तय माना जा रहा है। जानकारी के मुताबिक नीतीश कुमार के साथ-साथ 18 मंत्री भी शपथ ले सकते हैं।

वहीं, डिप्टी CM की रेस में बीजेपी से सम्राट चौधरी, रामकृपाल यादव, मंगल पांडे के नाम की चर्चा है। चिराग पासवान की पार्टी LJP(R) की भी बिहार सरकार में एंट्री होगी।

JDU- BJP के बराबर मंत्री होंगे, RLM भी सरकार का हिस्सा होगी

सूत्रों की मानें तो इस बार 30-32 मंत्रियों का मंत्रिमंडल हो सकता है। इसमें JDU और ‌BJP के बराबर-बराबर मंत्री हो सकते हैं। इनके अलावा चिराग पासवान की पार्टी को 3 मंत्री पद, जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को एक-एक मंत्री पद मिल सकता है। विधानसभा के मौजूदा नंबर के हिसाब से बिहार में कुल 36 मंत्री बनाए जा सकते हैं। कहा जा रहा है कि JDU के कोटे से 11 मंत्री बनाए जा सकते हैं।

चिराग पासवान की पार्टी LJP(R) की बिहार सरकार में एंट्री होगी।

चिराग पासवान की पार्टी LJP(R) की बिहार सरकार में एंट्री होगी।

‌BJP के साथ LJP(R) कर सकती है डिप्टी CM पद की दावेदारी

2020 चुनाव परिणाम के बाद से BJP ने बिहार में दो डिप्टी CM पद की परंपरा शुरू की। एक बार फिर से दो डिप्टी CM बनाने की चर्चा है, लेकिन दोनों BJP की जगह एक डिप्टी CM पद पर LJP(R) भी दावेदारी कर रही है। फिलहाल कैमरे पर सीधे बोलने की बजाय वे दबी जुबान ये बातें कर रहे है। हालांकि नीतीश कुमार CM होंगे तो डिप्टी CM कौन होगा ये BJP ही तय करेगी।

JDU अपने कोटे के मंत्रियों में बड़ा बदलाव नहीं करेगी

पिछली सरकार में JDU कोटे से 13 मंत्री थे। संभव है कि इसमें से 10 मंत्रियों को नई सरकार में फिर से मंत्री बनाया जा सकता है। पार्टी मंत्रिमंडल में बड़ा फेरबदल करने के मूड में नहीं है।

भाजपा अपने डिप्टी CM को बदल सकती है

पिछली सरकार में भाजपा कोटे से 19 मंत्री हैं। इसमें बड़े पैमाने पर बदलाव की सूचना है। डिप्टी CM विजय सिन्हा को रिप्लेस किया जा सकता है। साथ ही सम्राट चौधरी को भी बदला जा सकता है, लेकिन वह अभी भी डिप्टी CM की रेस में हैं। इसके अलावा मंगल पांडेय और रजनीश कुमार में से किसी एक के डिप्टी CM बनने की चर्चा है।

कुशवाहा की पत्नी बन सकती हैं मंत्री

HAM से संतोष मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता के साथ LJP(R) के प्रदेश अध्यक्ष राजू तिवारी मंत्री बन सकते हैं। संभावित मंत्रियों की लिस्ट में संजय पासवान के नाम की भी चर्चा है।

मंत्री के साथ स्पीकर की भी रेस में विजय सिन्हा

पिछली बार की तरह इस बार भी BJP स्पीकर का पद अपने पास रख सकती है। सूत्रों के मुताबिक भाजपा विजय सिन्हा को डिप्टी CM न बनाकर स्पीकर बना सकती है। हां, इतना जरूर तय है कि विजय सिन्हा को कोई न कोई बड़ा पद मिलेगा।

  • 2010 तक ये पद नीतीश कुमार अपने पास रखते थे, लेकिन 2020 में जैसे ही नीतीश कुमार कमजोर हुए, BJP ये पद अपने हिस्से में ले ली।
  • 2020-25 के बाद नीतीश कुमार के पाला बदल के कारण दो बार NDA की सरकार बनी । दोनों बार BJP के स्पीकर बने।
  • हालांकि इस बार BJP के साथ JDU का भी नंबर बढ़ा है। विधान परिषद के सभापति पहले से ही ‌BJP कोटे से है। CM नीतीश कुमार की सहमति के बाद वहां BJP नेता अवधेश नारायण सिंह को सभापति बनाया गया है।
बिहार चुनाव जीतने के बाद दिल्ली भाजपा ऑफिस में जश्न मनाया गया।

बिहार चुनाव जीतने के बाद दिल्ली भाजपा ऑफिस में जश्न मनाया गया।

मंत्रिमंडल में MP और राजस्थान का प्रयोग कर चौंका सकती है BJP

MP और राजस्थान के मंत्रिमंडल की तर्ज पर बिहार के नए मंत्रिमंडल से भी पुराने और दिग्गज नेताओं की छुट्‌टी हो सकती है। इनकी जगह नए चेहरों की एंट्री हो सकती है।

  • राजस्थान और मध्य प्रदेश में बनी नई सरकार में पार्टी की तरफ से न केवल पूरी तरह नई टीम को मौका दिया गया है, बल्कि जातियों के समीकरण का भी ख्याल रखा गया है। वर्षों से जमे-जमाए चेहरों को बदल दिया गया।
  • राजस्थान में BJP ने पूरी तरह से नए चेहरे पर दांव लगाया । यहां 22 मंत्री में से 17 नए चेहरों को मौका दिया गया। जबकि मध्य प्रदेश में भी 28 मंत्रियों में 22 नए चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह दी गई।

2020 से सरकार में BJP का दबदबा रहा है

  • बिहार में 15 साल के भीतर दूसरी बार 200 पार के नंबर के साथ बिहार NDA सत्ता में आई है। 14 नवंबर को आए नतीजे में NDA को 202 सीटें मिली हैं। 2020 के नतीजे की तरह एक बार फिर से NDA में BJP सबसे बड़ी पार्टी बनी है।
  • पार्टी को 89 सीटें मिली हैं, लेकिन इस बार JDU के जीत का ग्राफ 43 से बढ़ कर 85 पहुंच गया है। इन दोनों के साथ सरकार में तीसरी बड़ी पार्टी के रूप में 19 सीटों के साथ LJP(R) की एंट्री हुई है। जीतन राम मांझी की हम की सीटें भी पिछली बार की तुलना में 4 से बढ़ कर 5 हो गई हैं। 4 विधायक के साथ उपेंद्र कुशवाहा भी इस बार सरकार के साझीदार हैं।
  • 2005 और 2010 में जब-जब NDA की सरकार बनी है, मंत्रिमंडल में JDU भारी रही है, लेकिन 2020 में जैसे ही BJP का नंबर बढ़ा, तभी से मंत्रिमंडल में BJP दबदबा भी बढ़ा है। 2010 में जब NDA को 206 सीटें मिली थीं, तब मंत्रियों की संख्या 30 थी।
  • इनमें जदयू के 19 और BJP के 11 मंत्री थे। इसी तरह 2020 में जब BJP ने 74 और JDU ने 43 सीटों के साथ सरकार बनाई थी तब 31 मंत्रियों का मंत्रिमंडल था, लेकिन BJP के 19 और JDU के 12 मंत्री को ही जगह दी गई थी। इसके अलावा एक निर्दलीय और HAM के हिस्से 1-1 मंत्री पद आया था।

NDA के सरकार कैसे होता रहा है मंत्रालय का गठन

  • 2025 को मिलाकर 4 बार BJP-JDU साथ मिलकर बहुमत हासिल की है।
  • 2010 में JDU बड़ी और BJP छोटी पार्टी थी, JDU के 19 और BJP के 11 मंत्री थे।
  • 2020 में BJP बड़ी और JDU छोटी पार्टी थी BJP के 16 और JDU के 12 मंत्री थे।
  • 2010 में स्पीकर JDU के तो 2020 में स्पीकर BJP के बने थे।

फिलहाल सरकार में हिस्सेदार का समीकरण ये

पार्टीविधायकमंत्री
BJP8019
JDU4313
HAM0401
निर्दलीय11

18-20 के बीच शपथ ले सकते हैं नीतीश कुमार

17 नवंबर को सरकार की नीतीश सरकार की आखिरी कैबिनेट होगी। इसमें विधानसभा को भंग करने की सिफारिश होगी। फिर नई सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। नई सरकार 18 से 20 नवंबर के बीच शपथ ले सकती है।

इधर, शनिवार की रात जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा व केंद्रीय मंत्री ललन सिंह दिल्ली पहुंचे। गृह मंत्री अमित शाह व भाजपा के कई बड़े नेताओं से बात की। इससे पहले दोनों जदयू नेताओं ने पटना में मुख्यमंत्री से बात की। भाजपा नेताओं की भी बैठक हुई।

सीएम आवास आकर चिराग पासवान ने नीतीश कुमार से मुलाकात की।

सीएम आवास आकर चिराग पासवान ने नीतीश कुमार से मुलाकात की।

उपेंद्र-चिराग बोले- नीतीश ही CM होंगे

मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर तक है। रविवार को 18वीं विधानसभा की अधिसूचना होगी। नई सरकार में चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी की भी हिस्सेदारी होगी। चिराग के 19 व उपेंद्र के 4 प्रत्याशी जीते हैं। अभी सरकार में भाजपा, जदयू और हम के मंत्री हैं। डिप्टी सीएम दो रहेंगे। अभी दोनों डिप्टी सीएम भाजपा के हैं। यह बदल भी सकता है।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

देश

पंजाब के पूर्व डिप्टी-CM सुखबीर बादल पर गुरुद्वारे में हमला:नांदेड़ में निहंग ने कृपाण मारी, 2024 में भी गोल्डन टेंपल में सुखबीर पर हुई थी फायरिंग

Published

on

लुधियाना/महाराष्ट्र,एजेंसी। महाराष्ट्र के नांदेड़ में गुरुवार को शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर हमला हुआ। पुलिस के मुताबिक, गुरुद्वारा माता साहिब कौर में एक निहंग ने उन पर कृपाण से हमला किया। बादल के हाथ में चोट लगी है। हमले के दौरान उनकी सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी भी घायल हो गया। घटना दोपहर करीब 1 बजे की बताई जा रही है। पुलिस ने हमले के आरोपी निहंग जसपाल सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। सुखबीर बादल परिवार के साथ नांदेड़ के गुरुद्वारे में माथा टेकने पहुंचे थे। हमले के बाद उन्हें यशोसाई अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

सुखबीर बादल पर 4 दिसंबर 2024 को भी हमला हुआ था। गोल्डन टेंपल में सेवादार की धार्मिक सजा भुगतने के दौरान उन पर फायरिंग की गई थी।

सुखबीर सिंह बादल ने अपने परिवार के साथ तख्त श्री हजूर साहिब में मत्था टेका।

सुखबीर सिंह बादल ने अपने परिवार के साथ तख्त श्री हजूर साहिब में मत्था टेका।

हमले के बाद सुखबीर सिंह बादल को अस्पताल ले जाया गया।

हमले के बाद सुखबीर सिंह बादल को अस्पताल ले जाया गया।

यशोसाईं अस्पताल के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

यशोसाईं अस्पताल के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

हमले से पहले बादल अपनी पत्नी हरसिमरत कौर बादल के साथ नांदेड़ में तख्त श्री हजूर साहिब गए थे।

हमले से पहले बादल अपनी पत्नी हरसिमरत कौर बादल के साथ नांदेड़ में तख्त श्री हजूर साहिब गए थे।

महाराष्ट्र सीएम फडणवीस ने जांच के आदेश दिए

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नांदेड़ के पुलिस अधीक्षक से बात की और सुखबीर सिंह बादल पर हुए हमले की जांच के आदेश दिए।

इस हमले के दौरान बादल के सुरक्षाकर्मी संतोष हेगड़े ने भी हमलावर को रोकने का प्रयास किया, जिसमें वह भी घायल हुआ। हमलावर को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। घटना से जुड़े CCTV फुटेज तथा चश्मदीद लोगों से जानकारी जुटाई जा रही है।

हमलावर को सम्मानित करने का दावा

इस घटना के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि हमला करने वाले निहंग जसपाल सिंह को सम्मानित किया गया। हालांकि, वीडियो को लेकर किए जा रहे दावे की पुष्टि अभी नहीं हुई है।

दावा है कि जिस निहंग को दस्तार बांधा जा रहा है उसी ने हमला किया है। मौके पर एक पुलिसवाला भी मौजूद है, जो बाद में इसे पकड़कर ले गया।

दावा है कि जिस निहंग को दस्तार बांधा जा रहा है उसी ने हमला किया है। मौके पर एक पुलिसवाला भी मौजूद है, जो बाद में इसे पकड़कर ले गया।

अकाली दल के प्रवक्ता बोले- सिख धर्म विरोधी ताकतों की साजिश

इस मामले में अकाली दल के प्रवक्ता एडवोकेट अर्शदीप सिंह कलेर ने कहा कि सुखबीर बादल पूरी तरह स्वस्थ हैं। मामला महाराष्ट्र का है, इसलिए वहां की पुलिस जांच करेगी कि हमलावर कौन है?। उसने किसके कहने पर हमला किया?।उन्होंने आरोप लगाया कि इसके पीछे कुछ सिख धर्म विरोधी ताकतों की साजिश हो सकती है।

अकाल तख्त जत्थेदार ने कहा- हमलावर सच्चा सिख नहीं

इस बारे में सिखों की सर्वोच्च संस्था श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि गुरुद्वारा साहिब ऐसी जगह है, जहां श्रद्धालु सभी की भलाई के लिए अरदास करने आते हैं। सच्चा सिख किसी ऐसे व्यक्ति पर हमला नहीं कर सकता, जो गुरुद्वारा साहिब में माथा टेकने आया हो। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं से गुरुद्वारों की मर्यादा को ठेस और पूरे सिख समुदाय की छवि को नुकसान पहुंची है।

2024 में भी हुआ था हमला

गोल्डन टेम्पल में सुखबीर सिंह बादल पर दिसंबर 2024 में हुए हमले की तस्वीर।

गोल्डन टेम्पल में सुखबीर सिंह बादल पर दिसंबर 2024 में हुए हमले की तस्वीर।

एक बुजुर्ग व्यक्ति भीड़ के बीच से धीरे-धीरे सुखबीर बादल की ओर बढ़ा। उसने अपनी जेब से 9mm की पिस्टल निकाली और सीधे बादल पर निशाना साधकर गोली चला दी।

सुखबीर सिंह बादल पर 4 दिसंबर 2024 को अमृतसर के गोल्डन टेंपल के प्रवेश द्वार पर जानलेवा फायरिंग की गई थी। इसमें वह बाल-बाल बच गए थे।

यह हमला उस समय हुआ था जब वह अकाल तख्त की ओर से सुनाई गई एक धार्मिक सजा (तनखैया) काट रहे थे।

सुखबीर बादल को सिखों की सर्वोच्च संस्था अकाल तख्त ने धार्मिक रूप से दोषी घोषित किया था। यह सजा अकाली दल सरकार के दौरान हुई गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाओं के प्रायश्चित के रूप में दी गई थी।

उस दिन उनकी सजा का दूसरा दिन था। पैर में फ्रैक्चर होने के कारण वह व्हीलचेयर पर बैठे थे। गले में पट्टी लटकी हुई थी, नीली पोशाक पहने थे और हाथ में भाला लेकर द्वार पर पहरेदार के रूप में सेवा दे रहे थे।

Continue Reading

देश

एमपी-राजस्थान में 3 दिनों से बारिश,कई जगह बाढ़ जैसे हालात:नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट में पानी भरा, काशी में 100 मंदिर डूबे

Published

on

नई दिल्ली, एजेंसी। देश के मध्य और पूर्वी हिस्से में मानसून एक्टिव है। मध्यप्रदेश, राजस्थान के कई इलाकों में लगातार तीसरे दिन भारी बारिश से हालात खराब हैं। इसकी वजह तीन मानसूनी सिस्टम हैं। इनके कारण अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से बड़ी मात्रा में नमी आ रही है।

भोपाल में बुधवार को लगातार तीसरे दिन स्कूलों में छुट्टी है। यहां दो दिनों में 8.57 इंच बारिश हुई। करीब 200 मकानों में ढाई फीट तक पानी भर गया। रतलाम, झाबुआ, धार, बड़वानी और इंदौर में अगले 24 घंटे में यहां 4 इंच से ज्यादा बारिश का अनुमान है।

उधर, राजस्थान में खोखी बांध की दीवार टूटने से 300 बीघा फसल खराब हो गई है। कोटा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे की टनल के एक हिस्से में दो-तीन फीट तक पानी भरा हुआ है।

वहीं, उत्तर प्रदेश में पिछले 2 दिनों से भारी बारिश हो रही है। इसके चलते जेवर में बने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मंगलवार को पानी भर गया था। इसका वीडियो आज सामने आया है। वाराणसी में घाटों की सीढ़ियों तक पानी पहुंच गया है। 100 से ज्यादा छोटे मंदिर डूब गए हैं।

सैटेलाइट मैप में देखें मानसूनी बादलों की स्थिति

देशभर से मौसम की तस्वीरें

मध्य प्रदेश में पिछले तीन दिनों से बारिश हो रही है। वहीं, शिवपुरी में NH-46 पर करीब एक फीट तक पानी भर गया। इससे काफी देर तक जाम लगा रहा। प्रदेश में अब तक 19.6 इंच बारिश हो चुकी है।

मध्य प्रदेश में पिछले तीन दिनों से बारिश हो रही है। वहीं, शिवपुरी में NH-46 पर करीब एक फीट तक पानी भर गया। इससे काफी देर तक जाम लगा रहा। प्रदेश में अब तक 19.6 इंच बारिश हो चुकी है।

राजस्थान में पिछले 3 दिनों से भारी बारिश हो रही है। इसके चलते कोटा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की टनल में पानी भर गया है। इस वजह से बुधवार सुबह से यहां लंबा जाम लगा हुआ है। पिछले दो दिनों से ट्रैफिक रेंग-रेंगकर चल रहा है।

राजस्थान में पिछले 3 दिनों से भारी बारिश हो रही है। इसके चलते कोटा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की टनल में पानी भर गया है। इस वजह से बुधवार सुबह से यहां लंबा जाम लगा हुआ है। पिछले दो दिनों से ट्रैफिक रेंग-रेंगकर चल रहा है।

उत्तर प्रदेश के नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बारिश के बाद पानी भर गया था। एयरपोर्ट अथॉरिटी के मुताबिक, इससे फ्लाइट ऑपरेशन और यात्रियों की आवाजाही पर कोई असर नहीं पड़ा। घटना मंगलवार की है, जिसका वीडियो अब वायरल हो रहा है।

उत्तर प्रदेश के नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बारिश के बाद पानी भर गया था। एयरपोर्ट अथॉरिटी के मुताबिक, इससे फ्लाइट ऑपरेशन और यात्रियों की आवाजाही पर कोई असर नहीं पड़ा। घटना मंगलवार की है, जिसका वीडियो अब वायरल हो रहा है।

मुंबई में कुर्ला के अशोक नगर इलाके में बुधवार सुबह 3 बजे गौसिया चॉल के पास बारिश की वजह से मिट्टी का बड़ा हिस्सा गिर गया। इसकी चपेट में दो-तीन घर आ गए। महाराष्ट्र के कई इलाकों में 24 घंटे से बारिश हो रही है।

मुंबई में कुर्ला के अशोक नगर इलाके में बुधवार सुबह 3 बजे गौसिया चॉल के पास बारिश की वजह से मिट्टी का बड़ा हिस्सा गिर गया। इसकी चपेट में दो-तीन घर आ गए। महाराष्ट्र के कई इलाकों में 24 घंटे से बारिश हो रही है।

उत्तराखंड के चमोली की नीति घाटी में दो दिन पहले बादल फटने से तमक नाला उफान पर आ गया था। तेज बहाव में 17 टन स्टील से बना वैली ब्रिज बह गया। अब नाले पर अस्थायी ब्रिज बनाने का काम किया जा रहा है।

उत्तराखंड के चमोली की नीति घाटी में दो दिन पहले बादल फटने से तमक नाला उफान पर आ गया था। तेज बहाव में 17 टन स्टील से बना वैली ब्रिज बह गया। अब नाले पर अस्थायी ब्रिज बनाने का काम किया जा रहा है।

हिमाचल के शिमला-धर्मशाला NH-205 पर भराड़ीघाट के पास मंगलवार को चलती कार पर बड़ी चट्टान गिर गई। हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि 2 लोग घायल हो गए। राज्य में लैंडस्लाइड से अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है।

हिमाचल के शिमला-धर्मशाला NH-205 पर भराड़ीघाट के पास मंगलवार को चलती कार पर बड़ी चट्टान गिर गई। हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि 2 लोग घायल हो गए। राज्य में लैंडस्लाइड से अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है।

Continue Reading

देश

टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का इस्तीफा:फरवरी 2027 तक जिम्मेदारी संभालते रहेंगे, नोएल टाटा से मतभेद, ट्रस्ट में खींचतान बनी वजह

Published

on

मुंबई, एजेंसी। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने आज 12 अगस्त को इस्तीफा दे दिया है। उनका इस्तीफा 18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की एजीएम से ठीक पहले आया है। हालांकि, वे फरवरी 2027 तक पद पर बने रहेंगे।

चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल को लेकर टाटा ट्रस्ट्स के साथ सहमति नहीं बन पाई थी। नए कारोबारों में भारी निवेश, उनके प्रदर्शन और टाटा संस के भविष्य को लेकर मतभेद इस फैसले की बड़ी वजह बने।

एन चंद्रशेखरन के इस्तीफे की खबर के बाद टाटा ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में गिरावट है। टीसीएस, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील और टाटा कंज्यूमर के शेयर 3% तक नीचे हैं।

चंद्रशेखरन ने इस्तीफा देते हुए क्या कहा

चंद्रशेखरन ने कहा कि, “टाटा संस के चेयरमैन के रूप में मेरा मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को खत्म हो रहा है। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास करके मेरे अगले 5 साल के कार्यकाल के विस्तार की सिफारिश की थी।

इसे टाटा संस की नॉमिनेशन एंड रेमुनरेशन कमेटी और बोर्ड ने दर्ज किया था और आगे बढ़ाने की सिफारिश की थी। इसके बाद, यह प्रस्ताव 24 फरवरी 2026 को टाटा संस बोर्ड के सामने रखा गया था।

हालांकि, यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका क्योंकि बोर्ड के एक सदस्य ने इसका समर्थन नहीं किया। सर्वसम्मत समर्थन न मिलने की वजह से मैंने इस फैसले को टालने का विकल्प चुना। उस बोर्ड मीटिंग को हुए 6 महीने बीत चुके हैं और आज तक कोई फैसला नहीं हो पाया है।

टाटा संस एक बहुत बड़ा संस्थान है और कई बड़े रणनीतिक प्रोजेक्ट्स अभी अहम मोड़ पर हैं। फरवरी 2027 के बाद ग्रुप की अगुआई करने के लिए न सिर्फ एक लीडर का होना जरूरी है, बल्कि कर्मचारियों, निवेशकों, पार्टनर्स और बाकी स्टेकहोल्डर्स के लिए लीडरशिप को लेकर स्पष्टता होना भी बहुत जरूरी है।”

इस्तीफे की 4 बड़ी वजह

चंद्रशेखरन का कार्यकाल बढ़ाने पर मतभेद

फरवरी 2026 में टाटा संस बोर्ड ने चंद्रशेखरन के अगले 5 साल के कार्यकाल की सिफारिश की थी। बाद में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने इसका विरोध किया और सिर्फ 2 साल का कार्यकाल देने की वकालत की।

24 फरवरी 2026 को 5 साल के विस्तार का प्रस्ताव बोर्ड के सामने रखा गया। एक सदस्य के समर्थन न देने से इस पर सहमति नहीं बन सकी है।

नए कारोबारों के प्रदर्शन पर सवाल

चंद्रशेखरन के कार्यकाल में टाटा ग्रुप ने एविएशन, डिजिटल कारोबार, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और बैटरी जैसे नए क्षेत्रों में बड़े निवेश किए। इनमें से कुछ कारोबार अभी घाटे में हैं।

एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस को FY26 में कुल रू.22,238 करोड़ का घाटा हुआ, जबकि टाटा डिजिटल का घाटा रू.4,974 करोड़ रहा। इन्हीं मुद्दों पर नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन के प्रदर्शन को लेकर आपत्ति जताई थी।

टाटा संस की लिस्टिंग हो या नहीं

टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट किया जाए या निजी कंपनी ही रखा जाए, इस पर टाटा ट्रस्ट्स के अंदर अलग-अलग राय सामने आई। नोएल टाटा लिस्टिंग के पक्ष में नहीं बताए जाते हैं, जबकि कुछ ट्रस्टी लिस्टिंग की वकालत कर चुके हैं।

टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच तालमेल

टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66% हिस्सेदारी है, इसलिए दोनों के बीच बड़े फैसलों पर सहमति बेहद अहम है। नए कारोबारों की रणनीति, निवेश और चंद्रशेखरन के कार्यकाल को लेकर मतभेदों से दोनों के बीच तालमेल का सवाल भी सामने आया।

चंद्रशेखरन का 9 साल का सफर: रेवेन्यू रू.16.24 लाख करोड़ पहुंचा

चंद्रशेखरन के 2017 में कमान संभालने के बाद टाटा ग्रुप का दायरा काफी बढ़ा है। चंद्रशेखरन ने ग्रुप को एविएशन, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, बैटरी और डिजिटल बिजनेस जैसे नए क्षेत्रों में उतारा।

  • रेवेन्यू: वित्त वर्ष 2020 में ग्रुप का रेवेन्यू रू.7.89 लाख करोड़ था, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर रू.16.24 लाख करोड़ हो गया।
  • मुनाफा: ग्रुप का मुनाफा रू.32,000 करोड़ से बढ़कर रू.1.71 लाख करोड़ हो गया।
  • मार्केट कैप: लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 2020 के रू.9.31 लाख करोड़ से बढ़कर 2026 में रू.24.39 लाख करोड़ पहुंच गया।

टाटा ग्रुप, टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स में फर्क

  • टाटा ग्रुपः टाटा नाम से चलने वाली अलग-अलग कंपनियों और कारोबारों को मिलाकर टाटा ग्रुप बनता है। जैसे- टीसीएस, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा पावर और एअर इंडिया।
  • टाटा संसः टाटा संस, टाटा ग्रुप की मुख्य कंपनी है। यह ग्रुप की बड़ी कंपनियों में हिस्सेदारी रखती है और बड़े फैसलों में अहम भूमिका निभाती है।
  • टाटा ट्रस्ट्सः टाटा ट्रस्ट्स सामाजिक और परोपकारी काम करने वाले ट्रस्टों का समूह है। इसके पास टाटा संस की करीब 66% हिस्सेदारी है।

कैसे चुना जाएगा नया चैयरमैन

टाटा संस के चेयरमैन को चुनने की प्रक्रिया में पहले चयनसमिति उम्मीदवारों पर विचार करती है। इस समिति में टाटा ट्रस्ट्स की ओर से नामित सदस्य, टाटा संस बोर्ड का एक सदस्य और एक स्वतंत्र बाहरी सदस्य शामिल होते हैं।

समिति उम्मीदवार के नाम की सिफारिश टाटा संस के बोर्ड से करती है। बोर्ड उम्मीदवार की योग्यता और ग्रुप की जरूरतों को देखते हुए अंतिम नियुक्ति का फैसला करता है। अगर मौजूदा चेयरमैन को ही जारी रखना हो, तो उनके कार्यकाल के विस्तार पर भी इसी प्रक्रिया के तहत फैसला होता है।

Continue Reading
Advertisement

Trending

Copyright © 2020 Divya Akash | RNI- CHHHIN/2010/47078 | IN FRONT OF PRESS CLUB TILAK BHAVAN TP NAGAR KORBA 495677