देश
मोदी-सुबियांतो ने बड़े रक्षा समझौते पर लगाई मुहर, इंडोनेशिया को ब्रह्मोस मिसाइल देगा भारत
जकार्ता, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच मंगलवार को हुई वार्ता में इंडोनेशियाई सैन्य बलों को ब्रह्मोस मिसाइलों की आपूर्ति, समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखला को सुदृढ़ बनाने पर सहमति बनी। दोनों पक्षों ने महत्वपूर्ण खनिज, प्रौद्योगिकी, खाद्य सुरक्षा, दवाओं और समुद्री सुरक्षा सहित कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा देने के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए। मोदी 2018 की भारत-इंडोनेशिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत व्यापार तथा सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने के उद्देश्य से तीन देशों की अपनी यात्रा के पहले चरण के तहत सोमवार को जकार्ता पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया।

ऐसा समझा जाता है कि दोनों देशों के रक्षा संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में इंडोनेशिया ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान इस हथियार की सफलता के बाद हवा से हवा में प्रहार करने वाली ‘अस्त्र’ मिसाइलों का भारत से आयात करने का फैसला किया है। महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने के लिए, भारत ने इंडोनेशिया में इस्पात, निकल और दुलर्भ स्थायी चुंबकों के निर्माण में निवेश करने का फैसला किया। भारत और इंडोनेशिया ने सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सबांग बंदरगाह का संयुक्त रूप से विकास करने पर भी सहमति जताई। यह बंदरगाह मलक्का जलडमरूमध्य के निकट स्थित है और भारत की ग्रेट निकोबार बंदरगाह परियोजना से लगभग 100 मील की दूरी पर है।
वार्ता के बाद अपने मीडिया बयान में मोदी ने कहा, ”2018 में बनी हमारी व्यापक रणनीतिक साझेदारी आज एक नयी उड़ान ले रही है। हम विकास, सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, संस्कृति और शिक्षा.. हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा रहे हैं।” उन्होंने कहा, ”मुझे विश्वास है, आज से भारत-इंडोनेशिया साझेदारी का एक सुनहरा अध्याय शुरू होगा।” प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच बढ़ता विश्वास द्विपक्षीय रक्षा, सुरक्षा और समुद्री सहयोग को मजबूत कर रहा है। उन्होंने कहा, ”आज हमने रक्षा आदान-प्रदान, आपदा प्रबंधन और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनाई।” मोदी ने इंडोनेशिया में भारतीय प्रबंधन संस्थान-बेंगलुरु का एक परिसर स्थापित करने के निर्णय की भी घोषणा की। उन्होंने कहा, ”हमें बहुत खुशी है कि भारत का UPI इंडोनेशिया की भुगतान प्रणाली के साथ जुड़ने जा रहा है।
इससे व्यापार सुगमता और यात्रा सुगमता, दोनों को ही बल मिलेगा।” दोनों पक्षों ने समुद्री अर्थव्यवस्था, समुद्री व्यापार और बंदरगाह विकास के क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने का फैसला किया। प्रधानमंत्री और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति ने पश्चिम एशिया की स्थिति सहित विभिन्न वैश्विक चुनौतियों पर भी चर्चा की। मोदी ने कहा, ”वैश्विक उथल-पुथल के इस दौर में भारत का मानना है कि संवाद और कूटनीति की भूमिका, पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।” उन्होंने कहा, ”फलस्तीन के विषय पर, हम द्वि-राष्ट्र समाधान और दीर्घकालिक शांति का समर्थन करते हैं।”

देश
सस्ता होगा सोना, 20 हजार रुपए तक गिर सकते हैं दाम, एक्सपर्ट्स का अनुमान
मुंबई, एजेंसी। साल 2026 की शुरुआत में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद अब सोने की कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। जनवरी में अंतरराष्ट्रीय बाजार में 5,595 डॉलर प्रति औंस का ऑल-टाइम हाई का लेवल छूने के बाद सोना अब 27 फीसदी तक टूट चुका है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोने में 16 फीसदी तक और गिरावट आ सकती है, यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 3,400 से 3,500 डॉलर प्रति औंस के दायरे तक पहुंच सकता है। इसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिलेगा, जहां सोने की कीमतों में करीब 20,000 रुपए प्रति 10 ग्राम तक की गिरावट संभव बताई जा रही है।
कमोडिटी बाजार के जानकारों का कहना है कि पिछले दो वर्षों में सोने की कीमतों में असाधारण तेजी आई थी। ऐसे में मौजूदा गिरावट को तकनीकी करेक्शन के तौर पर देखा जा रहा है। उनका मानना है कि लंबी अवधि में सोने का रुख अब भी सकारात्मक बना हुआ है लेकिन निकट भविष्य में कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
क्यों सस्ता होगा सोना?
विशेषज्ञों के अनुसार, सोने पर दबाव बढ़ने की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ा भू-राजनीतिक तनाव है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे महंगाई और ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ी है। इसके अलावा अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने भी सोने की मांग को प्रभावित किया है। डॉलर मजबूत होने पर अन्य देशों के निवेशकों के लिए सोना महंगा हो जाता है, जिससे इसकी खरीदारी घटती है।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि 4,000 डॉलर प्रति औंस का स्तर सोने के लिए एक अहम सपोर्ट जोन है। हालांकि, यदि वैश्विक बाजारों में बिकवाली का दबाव और बढ़ता है तो कीमतें अस्थायी रूप से 3,500 डॉलर तक भी जा सकती हैं। इसके बावजूद लंबी अवधि के लिए सोने को लेकर विशेषज्ञ आशावादी बने हुए हैं। उनका अनुमान है कि अगले तीन वर्षों में सोना एक बार फिर नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ सकता है।
केंद्रीय बैंक लगातार गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे
सोने को समर्थन देने वाले प्रमुख कारकों में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की खरीदारी भी शामिल है। कई देशों के केंद्रीय बैंक लगातार अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं, जिससे बाजार में सोने की मांग बनी हुई है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के हालिया सर्वे के अनुसार, अधिकांश केंद्रीय बैंक अगले 12 महीनों में भी अपने स्वर्ण भंडार में वृद्धि करने की योजना बना रहे हैं। पिछले चार वर्षों में केंद्रीय बैंकों ने औसतन 1,000 टन सोना खरीदा है, जो पिछले दशक के औसत से कहीं अधिक है।
निवेशकों के लिए सलाह
का कहना है कि आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक जोखिम और महंगाई की आशंकाओं के बीच सोना अब भी सुरक्षित निवेश विकल्प बना हुआ है। ऐसे में अल्पकालिक गिरावट के बावजूद लंबी अवधि के निवेशकों के लिए कीमतों में आने वाली कमजोरी को चरणबद्ध खरीदारी के अवसर के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि, निवेश से पहले बाजार की स्थिति और अपनी जोखिम क्षमता का आकलन करना जरूरी रहेगा।
देश
RBI के लक्ष्य से पार पहुंची महंगाई, जून में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 4.38%
मुंबई, एजेंसी। जून 2026 में खुदरा महंगाई (Retail Inflation) बढ़कर 4.38 फीसदी पर पहुंच गई है। खाद्य पदार्थों और ईंधन की बढ़ती कीमतों, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कमजोर मानसून की आशंकाओं के चलते महंगाई पर दबाव बना रहा। 6 महीनों में यह पहली बार है जब खुदरा महंगाई भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के टारगेट 4% के पार निकली है।
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में खुदरा महंगाई दर 3.93 फीसदी थी, जो जून में बढ़कर 4.38 फीसदी हो गई।
RBI का क्या है महंगाई लक्ष्य?
भारतीय रिजर्व बैंक का लक्ष्य खुदरा महंगाई को 4 फीसदी पर बनाए रखना है। हालांकि, केंद्रीय बैंक को इसे 2 फीसदी से 6 फीसदी के दायरे में रखने की अनुमति है। यह लक्ष्य अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक के लिए निर्धारित की गई है।
देश
देश का निर्यात जून में 15.5 प्रतिशत बढ़कर 40.41 अरब डॉलर पर, व्यापार घाटा 30.43 अरब डॉलर
नई दिल्ली, एजेंसी। देश का निर्यात जून महीने में 15.5 प्रतिशत बढ़कर 40.41 अरब डॉलर रहा। इस दौरान व्यापार घाटा बढ़कर 30.43 अरब डॉलर हो गया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, आयात जून माह में करीब 31 प्रतिशत बढ़कर 70.84 अरब डॉलर रहा। चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में निर्यात 15.92 प्रतिशत बढ़कर 129.32 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 19.89 प्रतिशत बढ़कर 216.18 अरब डॉलर हो गया।
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सोने का आयात बढ़कर 11.01 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले साल अप्रैल-जून में 7.49 अरब डॉलर था।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि जून में पश्चिम एशियाई देशों को भारत का निर्यात 7.29 प्रतिशत बढ़कर पांच अरब डॉलर हो गया। अग्रवाल ने कहा कि कच्चे तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और कीमती धातुओं के आयात बढ़ने के कारण कुल आयात बढ़ा है।
-
Uncategorized10 months agoसुमेधा पुल पर लुट कांड सहित तीन अलग अलग जगह पर लुटकांड करने वाले आरोपी पुलिस के गिरफ्त में,,,दो आरोपी नाबालिक,,,देखे पूरी खबर
-
Uncategorized11 months agoबाँकी कॉलोनी के दुर्गा भवन क्लब का होगा नवनिर्माण, नपा अध्यक्षा ने दिया आश्वाशन….देखे पूरी खबर
-
बाँकी मोगरा10 months agoथाना बाँकी–दर्री के सीमा सुमेधा पुल पर हुई लूट कांड, प्रार्थी तीन दिनों से भटक रहा, अब तक नहीं हुई शिकायत दर्ज…..।
-
कोरबा6 months agoकोरबा बांकीमोंगरा क्षेत्र में युवती से दुष्कर्म – मुख्य आरोपी तरुण व एक सहयोगी हिरासत में। अन्य की तलाश जारी…..देखे पूरी खबर…।
-
कोरबा2 years agoमहतारी वंदन योजना से महिलाएं परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने सहित समाज की प्रगति में दे रही योगदान’
-
कोरबा12 months agoबांकीमोंगरा सड़क निर्माण गुणवत्ताहीन की शिकायत पर पहुंची न.प्रशा. विकास विभाग परीक्षण टीम, नवनिर्माण सीसी सड़क का किया कोर कटिंग परीक्षण…देखे पूरी खबर
-
कोरबा11 months agoअंकित सिंह बने श्रमजीवी पत्रकार संघ के जिला उपाध्यक्ष
-
Uncategorized1 year agoबाकी मोगरा में गूंजी या अली या हुसैन की सदाएं, मुहर्रम ताजिया जुलूस व झांकी निकाल इमाम हुसैन को याद कर मनाया मुहर्रम पर्व…..।
