धमतरी, एजेंसी। छत्तीसगढ़ में शराब घोटाला मामले में ED की रेड पड़ी है। रायपुर, दुर्ग-भिलाई और धमतरी में सुबह ED के अफसरों ने दबिश दी। अलग-अलग ठिकानों पर दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच की गई।
रायपुर में कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल के अनुपम नगर स्थित निवास और धमतरी में सिहावा रोड स्थित उनके घर पर 9 घंटे तक कार्रवाई चली। टीम अपने साथ कुछ अहम दस्तावेज लेकर गई है। रामगोपाल अग्रवाल को शराब, कोल और कस्टम मिलिंग घोटाले में आरोपी बनाया गया है। 8 दिन पहले ही ED ने उन्हें गिरफ्तार कर रायपुर कोर्ट में पेश किया था।
धमतरी में रामगोपाल अग्रवाल के घर ED की कार्रवाई के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ता धरने पर बैठ गए। कार्यकर्ताओं ने ED और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। मौके पर विधायक, जिलाध्यक्ष समेत कई कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
रायपुर के रवि नगर स्थित कारोबारी अनूप अग्रवाल के घर पर भी ED की टीम पहुंची है। अनूप अग्रवाल रामगोपाल अग्रवाल के करीबी माने जाते हैं। टीम घर के अंदर दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
वहीं, दुर्ग में बिल्डर सजल जैन और विश्वास गुप्ता के घर पर सुबह करीब 6 बजे ED की टीम पहुंची। करीब 7 अफसरों की टीम दोनों ठिकानों पर जांच कर रही है। कार्रवाई फिलहाल जारी है। जैन और विश्वास गुप्ता कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के करीबी माने जाते हैं।
ऐसी चर्चा है कि कई अधिकारियों का पैसा भी दोनों के रियल एस्टेट कारोबार में लगा हुआ है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

धमतरी में सुरक्षा बल के जवान मौके पर तैनात रहे।
दो गाड़ियों में ईडी की टीम रेड कार्रवाई करने पहुंची।
धमतरी में कांग्रेसियों का धरना
धमतरी में रामगोपाल अग्रवाल के घर ED की दबिश के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ता धरने पर बैठ गए। ED और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कांग्रेस प्रवक्ता शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा कि रामगोपाल पहले से ED की हिरासत में हैं, ऐसे में उनके परिवार के घर छापा मारकर परिजनों को परेशान करना गलत है। कार्रवाई से कांग्रेस और व्यापारी वर्ग में नाराजगी है।
विधायक ओंकार साहू ने कहा कि परिवार को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है। कांग्रेस पूरे प्रदेश में इस कार्रवाई का विरोध करेगी। जिलाध्यक्ष तारिणी चंद्राकर ने आरोप लगाया कि भाजपा राजनीतिक द्वेष के चलते केंद्रीय एजेंसी का दुरुपयोग कर रही है। कांग्रेस इसका जवाब आंदोलन के जरिए देगी।
रायपुर के रवि नगर स्थित रामगोपाल अग्रवाल के करीबी अनूप अग्रवाल के घर पर जांच।
धमतरी में रामगोपाल अग्रवाल के घर दबिश के बाद बाहर कांग्रेस नेता जुटे।
दुर्ग में सजल जैन और विश्वास गुप्ता के ठिकानों पर जांच
जानकारी के मुताबिक ED की टीम सुबह दुर्ग के गांधी चौक स्थित जय आनंद परिसर, जैन गली और डॉक्टर ताम्रकार के समीप सजल जैन से जुड़े परिसरों में पहुंची। इसके अलावा शनिचरी बाजार स्थित श्रीराम हार्डवेयर में भी विश्वास गुप्ता से जुड़े ठिकाने पर जांच की जानकारी सामने आई है।
बताया जा रहा है कि टीम अलग-अलग कार्यालयों और आवासीय परिसरों में दस्तावेज, कारोबारी लेन-देन और वित्तीय रिकॉर्ड खंगाल रही है। सजल जैन का संबंध रिद्धि-सिद्धि बिल्डर्स से बताया जाता है, जबकि विश्वास गुप्ता भी इसी बिल्डर समूह से जुड़े पार्टनर रहे हैं।
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि ईडी की कार्रवाई किस मामले में और किन वित्तीय लेन-देन को लेकर की जा रही है। एजेंसी की ओर से भी अभी कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
बिल्डर्स के ठिकानों पर पहले भी पड़ चुकी है रेड
दुर्ग में इससे पहले भी ACB दोनों के ठिकानों पर कार्रवाई कर चुकी है। फिलहाल, सुरक्षा के मद्देनजर कार्रवाई स्थल पर CRPF के जवान तैनात हैं। ED की टीम ने दुर्ग के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भी कार्रवाई की जानकारी दी है।
दुर्ग में बिल्डर सजल जैन के घर पर भी जांच चल रही है।
दुर्ग में बिल्डर विश्वास गुप्ता के घर पर कार्रवाई।
क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला
छत्तीसगढ़ का कथित शराब घोटाला राज्य के सबसे बड़े आर्थिक मामलों में से एक माना जाता है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) की जांच के अनुसार, साल 2019 से 2022 के बीच सरकारी शराब बिक्री व्यवस्था में कथित सिंडिकेट बनाकर अवैध शराब की बिक्री, कमीशनखोरी और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क के जरिए करीब 3,200 करोड़ रुपए का अवैध घोटाला हुआ। मामले में कई आईएएस अधिकारी, आबकारी विभाग के अधिकारी, कारोबारी और राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों के नाम सामने आए हैं। हालांकि, आरोपों की न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की जांच तथा अदालती प्रक्रिया जारी है।
वर्ष 2020 से 2022 के बीच कोयला परिवहन और खनन से जुड़े कारोबार में अवैध वसूली के आरोपों से जुड़ा है।
क्या है छत्तीसगढ़ कोल लेवी घोटाला?
छत्तीसगढ़ का कथित कोल लेवी घोटाला वर्ष 2020 से 2022 के बीच कोयला परिवहन और खनन से जुड़े कारोबार में अवैध वसूली के आरोपों से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) के अनुसार, कोयला परिवहन करने वाले कारोबारियों से प्रति टन तय राशि अवैध रूप से वसूली गई।
जांच एजेंसियों का दावा है कि इस नेटवर्क के जरिए करीब 540 करोड़ रुपए की अवैध लेवी वसूली गई। मामले में कई आईएएस अधिकारियों, कारोबारियों, बिचौलियों और राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों के नाम सामने आए हैं। हालांकि, सभी आरोपों की न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की जांच और सुनवाई जारी है।
कस्टम घोटाले का आरोप इन अफसरों, कारोबारियों और राजनेताओं पर लगा है।
क्या है कस्टम मिलिंग घोटाला?
छत्तीसगढ़ का कथित कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन घोटाला धान की मिलिंग के लिए राइस मिलर्स को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि में कथित अनियमितताओं से जुड़ा मामला है।
आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) के अनुसार, वर्ष 2015 से 2023 के बीच प्रोत्साहन राशि बढ़ाने और उसके भुगतान में नियमों का उल्लंघन कर चुनिंदा राइस मिलर्स को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। जांच एजेंसी का दावा है कि इस प्रक्रिया में करीब 127 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ।
मामले में तत्कालीन अधिकारियों, राइस मिलर्स और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। हालांकि, आरोपों की न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है।
