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नोएडा में प्रदर्शन तो अमेरिका में चांदी! जानें USA के वर्कर्स को हर घंटे कितने हजार मिलते हैं? देखें चौंकाने वाला अंतर

नोएडा,एजेंसी। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक केंद्र नोएडा में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर हुए उग्र प्रदर्शन ने सरकार को हिलाकर रख दिया है। 13 अप्रैल को हुई आगजनी और हिंसा के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा कदम उठाते हुए मजदूरों की नई वेतन दरों को मंजूरी दे दी है। इस घटना ने जहाँ भारत में मजदूरों की सुरक्षा और हक पर सवाल उठाए हैं वहीं दुनिया के सबसे अमीर देश अमेरिका के साथ भारत के ‘वेतन अंतर’ (Wage Gap) पर भी एक नई चर्चा शुरू कर दी है।

नोएडा संग्राम: क्यों भड़की हिंसा?

सोमवार को नोएडा और गाजियाबाद की सड़कों पर हजारों मजदूर उतर आए। महंगाई की मार झेल रहे इन श्रमिकों का आरोप था कि लंबे समय से उनकी न्यूनतम मजदूरी में कोई सम्मानजनक बढ़ोतरी नहीं हुई है। प्रदर्शन के दौरान कई गाड़ियों को जला दिया गया और फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ हुई जिसके बाद पूरे एनसीआर में हाई अलर्ट जारी करना पड़ा।

योगी सरकार की नई दरें (गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद)

हालात बिगड़ते देख सीएम योगी ने तुरंत हाई-पावर कमेटी बनाई और सोमवार रात ही अंतरिम वेतन वृद्धि का ऐलान कर दिया। ये दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू मानी जाएंगी:

श्रेणीपुराना वेतन (लगभग)नया वेतन (प्रति माह)
अकुशल (Unskilled)₹11,313₹13,690
अर्धकुशल (Semi-skilled)₹15,059
कुशल (Skilled)₹16,868

उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में अकुशल मजदूरों के लिए न्यूनतम रू.12,356 तय किए गए हैं।

नोएडा के इस विवाद ने वैश्विक स्तर पर मजदूरी की तुलना को जन्म दिया है। जब हम अमेरिका के आंकड़ों को देखते हैं तो तस्वीर पूरी तरह अलग दिखती है:

  • प्रति घंटा कमाई: अमेरिका में वेतन महीने के हिसाब से नहीं बल्कि प्रति घंटे के आधार पर मिलता है। वहां फेडरल न्यूनतम मजदूरी $7.25 प्रति घंटा है जबकि न्यूयॉर्क जैसे राज्यों में यह $15 से $17 (करीब रू.1400) तक है।
  • सालाना आय: अमेरिका में एक फैक्ट्री वर्कर साल भर में $32,000 से $37,500 (करीब 27 से 31 लाख रुपये) कमा लेता है।
  • कंस्ट्रक्शन सेक्टर: वहां एक मजदूर को औसतन $23.69 प्रति घंटा (लगभग रू.2000) मिलते हैं। अनुभव बढ़ने पर यह रू.3000 प्रति घंटा तक जा सकता है।

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