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CJI पर जूता अटैक…सरकारी वकील ने बताया ऐतिहासिक पल:हाईकोर्ट के एडवोकेट ने लिखा-कमाल की निशानेबाजी, भूपेश बोले-दलित सम्मान पर हमला, सरकार पद से हटाए

रायपुर,एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बीआर गवई पर वकील राकेश किशोर ने जूता फेंकने की कोशिश की थी। अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के एक सरकारी वकील ने राकेश किशोर के जूता फेंकने वाले कांड का समर्थन किया है।

वकील सतीश गुप्ता ने वॉट्सऐप पर लिखा है कि, वो ऐतिहासिक पल जब जूता CJI की ओर उड़ा। राकेश ने 71 की उम्र में क्या कमाल की निशानेबाजी थी। सतीश गुप्ता ने जूता फेंकने वाले वकील की पढ़ाई और मुख्य न्यायाधीश की शैक्षणिक पृष्ठभूमि से तुलना की है।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के सरकारी वकील सतीश गुप्ता ने कहा कि सनद रहे- वकील राकेश किशोर एमएससी गोल्ड मेडलिस्ट हैं और मुख्य जज बी आर गवई तृतीय श्रेणी में BA पास। वो ऐतिहासिक पल था। क्या कमाल की निशानेबाजी थी।

वहीं इस पर पूर्व CM भूपेश बघेल ने कहा कि सतीश गुप्ता सरकारी वकील हैं। CJI पर जूते फेंकने पर खुश हो रहे हैं। अगर भाजपा सचमुच गंभीर है तो CM विष्णुदेव साय जी को निर्देशित करें कि सरकारी वकील को तत्काल पद से हटाएं, वरना माना जाएगा कि इस घटना से भाजपा भी खुश है।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के वकील सतीश गुप्ता ने जूता फेंकने वाले की पढ़ाई और मुख्य न्यायाधीश की शैक्षणिक पृष्ठभूमि की तुलना कर दी।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के वकील सतीश गुप्ता ने जूता फेंकने वाले की पढ़ाई और मुख्य न्यायाधीश की शैक्षणिक पृष्ठभूमि की तुलना कर दी।

क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सरकार की ओर से पक्ष रखने वाले सरकारी वकील सतीश गुप्ता ने वकीलों से जुड़े एक वॉट्सऐप ग्रुप में पोस्ट शेयर किया है। इसमें एक 3 सेकेंड का वीडियो है। साथ ही CJI पर जूता फेंकने के सपोर्ट में लिखे कंटेंट के पक्ष में उतरते दिख रहे हैं।

सतीश गुप्ता के पोस्ट को स्क्रीन शॉट लेकर किसी वकील ने पूर्व CM भूपेश बघेल तक पहुंचा दिया। इसके बाद स्क्रीन शॉट को पूर्व CM भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया X पर पोस्ट कर सरकार को घेरा है। स्क्रीनशॉट तेजी से वायरल हो रहा है। यूजर जमकर खरी-खोटी सुना रहे हैं।

ये सिर्फ जूता नहीं, दलित सम्मान पर हमला है- भूपेश

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने x पर लिखा कि, सरकारी वकील होकर न्यायाधीश पर हमले का समर्थन करना न केवल कानून का मजाक है, बल्कि यह अनुसूचित जाति समाज का अपमान है। सिर्फ प्रधानमंत्री के अफसोस जताने से बात नहीं बनेगी।

बघेल ने कहा कि, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। अगर भाजपा इस वकील को पद पर बनाए रखती है, तो क्या यह नहीं माना जाएगा कि वह इस मानसिकता को संरक्षण दे रही है?। मुख्य न्यायाधीश का अपमान करने वालों को उसका संरक्षण है।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने x पर लिखा कि ये सिर्फ जूता नहीं, दलित सम्मान पर हमला है।

कांग्रेस के राष्ट्रीय नेताओं ने भी उठाए सवाल

कांग्रेस की राष्ट्रीय नेता सुप्रिया श्रीनेत और रागिनी नायक ने भी भाजपा की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। सुप्रिया ने कहा कि, ये सिर्फ एक व्यक्ति पर हमला नहीं था, ये उस व्यवस्था पर हमला है, जो दलितों को न्याय दिलाने के लिए खड़ी की गई थी। भाजपा की चुप्पी डरावनी है।

बीवी श्रीनिवास ने इसे “भारत के सामाजिक न्याय तंत्र के खिलाफ सुनियोजित हमला” बताया और मांग की है कि केंद्र सरकार इस पूरे मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करे।

कांग्रेस के आरोपों पर क्या बोली बीजेपी ?

सरकारी वकील सतीश गुप्ता के पोस्ट शेयर करने पर भाजपा प्रवक्ता उज्जवल दीपक ने बताया कि भूपेश बघेल के पास कोई काम धाम रह नहीं गया है, इसलिए वो वॉट्सऐप ग्रुप पर आई हुई सूचनाओं को फॉरवर्ड कर ट्वीट कर देते हैं।

उन्होंने कहा कि भूपेश बघेल को अपने सरकार में महाधिवक्ता रहे सतीश चंद्र वर्मा का वो चैट भी ट्वीट करें, जिसमे वो भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने के लिए न्याय के पद पर बैठे लोगों से डील करते नजर आते थे। इस मामले में भाजपा का पक्ष वही है, जो हमारे प्रधानमंत्री का है। भाजपा भारत की न्याय व्यवस्था, सीजेआई और दलितों का पूरा सम्मान करती है।

क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, वकील राकेश ने 6 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट के अंदर CJI गवई पर जूता फेंकने की कोशिश की थी। जूता CJI तक नहीं पहुंच सका था। घटना के समय CJI की बेंच एक मामले की सुनवाई कर रही थी। सुरक्षाकर्मियों ने वकील को पकड़कर बाहर किया। इस दौरान उसने नारे लगाए- सनातन का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान।

CJI बी आर गवई पर वकील राकेश किशोर ने जूता फेंक दिया। स्केच।

पुलिस ने 3 घंटे पूछताछ के बाद वकील को छोड़ा था

जूता फेंकने वाले वकील को पुलिस ने हिरासत में लेने के बाद सुप्रीम कोर्ट कैंपस में 3 घंटे पूछताछ की थी। पुलिस ने कहा कि SC अधिकारियों ने मामले में कोई शिकायत नहीं की। उनसे बातचीत के बाद वकील को छोड़ा गया।

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने उसी दिन आरोपी वकील का लाइसेंस रद्द कर दिया था। उसका रजिस्ट्रेशन 2011 का था। इसके बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने भी आरोपी को तुरंत निलंबित कर दिया था। अब मेंबरशिप तत्काल प्रभाव से खत्म कर दी गई है।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने ये आदेश जारी किया था। उन्होंने कहा था कि यह वकीलों के आचरण, नियमों का उल्लंघन है। निलंबन के दौरान किशोर कहीं भी प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे। 15 दिनों में शो कॉज नोटिस भी जारी किया जाएगा।

हमले के एक दिन बाद, 7 अक्टूबर को आरोपी वकील राकेश किशोर ने कहा था कि मैंने जो किया उस पर कोई अफसोस नहीं है।

वकील राकेश ने कहा था- जो किया, उसका अफसोस नहीं

आरोपी वकील राकेश ने 7 अक्टूबर को मीडिया से बात की और बताया कि वे भगवान विष्णु पर CJI के बयान से आहत थे। इसी के कारण उनपर हमला करने की कोशिश की। वकील राकेश ने कहा- उनके एक्शन (टिप्पणी) पर ये मेरा रिएक्शन था। मैं नशे में नहीं था। जो हुआ, मुझे उसका अफसोस नहीं, किसी का डर भी नहीं है।

वकील ने कहा- यही चीफ जस्टिस बहुत सारे धर्मों के खिलाफ, दूसरे समुदाय के लोगों के खिलाफ केस आता है तो बड़े-बड़े स्टेप लेते हैं। उदाहरण के लिए- हल्द्वानी में रेलवे की जमीन पर विशेष समुदाय का कब्जा है, सुप्रीम कोर्ट ने उस पर तीन साल पहले स्टे लगाया, जो आज तक लगा हुआ है।

क्या है भगवान विष्णु की मूर्ति से जुड़ा मामला

16 सितंबर को मध्य प्रदेश के खजुराहो के जवारी (वामन) मंदिर में भगवान विष्णु की 7 फीट ऊंची खंडित मूर्ति की बहाली की मांग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की थी। याचिकाकर्ता ने इस फैसले पर नाराजगी जताई थी।

उन्होंने कहा था कि ये हमारी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला फैसला है। कोर्ट ने कहा है कि प्रतिमा जिस स्थिति में है, उसी में रहेगी। भक्तों को पूजा करनी है तो वे दूसरे मंदिर जा सकते हैं।

दरअसल, याचिकाकर्ता का दावा है कि यह मूर्ति मुगलों के आक्रमणों के दौरान खंडित हो गई थी और तब से यह इसी हालत में है। इसलिए श्रद्धालुओं के पूजा करने के अधिकार की रक्षा करने और मंदिर की पवित्रता को पुनर्जीवित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट हस्तक्षेप करे।

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