रायपुर,एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बीआर गवई पर वकील राकेश किशोर ने जूता फेंकने की कोशिश की थी। अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के एक सरकारी वकील ने राकेश किशोर के जूता फेंकने वाले कांड का समर्थन किया है।
वकील सतीश गुप्ता ने वॉट्सऐप पर लिखा है कि, वो ऐतिहासिक पल जब जूता CJI की ओर उड़ा। राकेश ने 71 की उम्र में क्या कमाल की निशानेबाजी थी। सतीश गुप्ता ने जूता फेंकने वाले वकील की पढ़ाई और मुख्य न्यायाधीश की शैक्षणिक पृष्ठभूमि से तुलना की है।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के सरकारी वकील सतीश गुप्ता ने कहा कि सनद रहे- वकील राकेश किशोर एमएससी गोल्ड मेडलिस्ट हैं और मुख्य जज बी आर गवई तृतीय श्रेणी में BA पास। वो ऐतिहासिक पल था। क्या कमाल की निशानेबाजी थी।
वहीं इस पर पूर्व CM भूपेश बघेल ने कहा कि सतीश गुप्ता सरकारी वकील हैं। CJI पर जूते फेंकने पर खुश हो रहे हैं। अगर भाजपा सचमुच गंभीर है तो CM विष्णुदेव साय जी को निर्देशित करें कि सरकारी वकील को तत्काल पद से हटाएं, वरना माना जाएगा कि इस घटना से भाजपा भी खुश है।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के वकील सतीश गुप्ता ने जूता फेंकने वाले की पढ़ाई और मुख्य न्यायाधीश की शैक्षणिक पृष्ठभूमि की तुलना कर दी।
क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सरकार की ओर से पक्ष रखने वाले सरकारी वकील सतीश गुप्ता ने वकीलों से जुड़े एक वॉट्सऐप ग्रुप में पोस्ट शेयर किया है। इसमें एक 3 सेकेंड का वीडियो है। साथ ही CJI पर जूता फेंकने के सपोर्ट में लिखे कंटेंट के पक्ष में उतरते दिख रहे हैं।
सतीश गुप्ता के पोस्ट को स्क्रीन शॉट लेकर किसी वकील ने पूर्व CM भूपेश बघेल तक पहुंचा दिया। इसके बाद स्क्रीन शॉट को पूर्व CM भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया X पर पोस्ट कर सरकार को घेरा है। स्क्रीनशॉट तेजी से वायरल हो रहा है। यूजर जमकर खरी-खोटी सुना रहे हैं।
ये सिर्फ जूता नहीं, दलित सम्मान पर हमला है- भूपेश
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने x पर लिखा कि, सरकारी वकील होकर न्यायाधीश पर हमले का समर्थन करना न केवल कानून का मजाक है, बल्कि यह अनुसूचित जाति समाज का अपमान है। सिर्फ प्रधानमंत्री के अफसोस जताने से बात नहीं बनेगी।
बघेल ने कहा कि, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। अगर भाजपा इस वकील को पद पर बनाए रखती है, तो क्या यह नहीं माना जाएगा कि वह इस मानसिकता को संरक्षण दे रही है?। मुख्य न्यायाधीश का अपमान करने वालों को उसका संरक्षण है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने x पर लिखा कि ये सिर्फ जूता नहीं, दलित सम्मान पर हमला है।
कांग्रेस के राष्ट्रीय नेताओं ने भी उठाए सवाल
कांग्रेस की राष्ट्रीय नेता सुप्रिया श्रीनेत और रागिनी नायक ने भी भाजपा की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। सुप्रिया ने कहा कि, ये सिर्फ एक व्यक्ति पर हमला नहीं था, ये उस व्यवस्था पर हमला है, जो दलितों को न्याय दिलाने के लिए खड़ी की गई थी। भाजपा की चुप्पी डरावनी है।
बीवी श्रीनिवास ने इसे “भारत के सामाजिक न्याय तंत्र के खिलाफ सुनियोजित हमला” बताया और मांग की है कि केंद्र सरकार इस पूरे मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करे।
कांग्रेस के आरोपों पर क्या बोली बीजेपी ?
सरकारी वकील सतीश गुप्ता के पोस्ट शेयर करने पर भाजपा प्रवक्ता उज्जवल दीपक ने बताया कि भूपेश बघेल के पास कोई काम धाम रह नहीं गया है, इसलिए वो वॉट्सऐप ग्रुप पर आई हुई सूचनाओं को फॉरवर्ड कर ट्वीट कर देते हैं।
उन्होंने कहा कि भूपेश बघेल को अपने सरकार में महाधिवक्ता रहे सतीश चंद्र वर्मा का वो चैट भी ट्वीट करें, जिसमे वो भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने के लिए न्याय के पद पर बैठे लोगों से डील करते नजर आते थे। इस मामले में भाजपा का पक्ष वही है, जो हमारे प्रधानमंत्री का है। भाजपा भारत की न्याय व्यवस्था, सीजेआई और दलितों का पूरा सम्मान करती है।
क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, वकील राकेश ने 6 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट के अंदर CJI गवई पर जूता फेंकने की कोशिश की थी। जूता CJI तक नहीं पहुंच सका था। घटना के समय CJI की बेंच एक मामले की सुनवाई कर रही थी। सुरक्षाकर्मियों ने वकील को पकड़कर बाहर किया। इस दौरान उसने नारे लगाए- सनातन का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान।
CJI बी आर गवई पर वकील राकेश किशोर ने जूता फेंक दिया। स्केच।
पुलिस ने 3 घंटे पूछताछ के बाद वकील को छोड़ा था
जूता फेंकने वाले वकील को पुलिस ने हिरासत में लेने के बाद सुप्रीम कोर्ट कैंपस में 3 घंटे पूछताछ की थी। पुलिस ने कहा कि SC अधिकारियों ने मामले में कोई शिकायत नहीं की। उनसे बातचीत के बाद वकील को छोड़ा गया।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने उसी दिन आरोपी वकील का लाइसेंस रद्द कर दिया था। उसका रजिस्ट्रेशन 2011 का था। इसके बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने भी आरोपी को तुरंत निलंबित कर दिया था। अब मेंबरशिप तत्काल प्रभाव से खत्म कर दी गई है।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने ये आदेश जारी किया था। उन्होंने कहा था कि यह वकीलों के आचरण, नियमों का उल्लंघन है। निलंबन के दौरान किशोर कहीं भी प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे। 15 दिनों में शो कॉज नोटिस भी जारी किया जाएगा।
हमले के एक दिन बाद, 7 अक्टूबर को आरोपी वकील राकेश किशोर ने कहा था कि मैंने जो किया उस पर कोई अफसोस नहीं है।
वकील राकेश ने कहा था- जो किया, उसका अफसोस नहीं
आरोपी वकील राकेश ने 7 अक्टूबर को मीडिया से बात की और बताया कि वे भगवान विष्णु पर CJI के बयान से आहत थे। इसी के कारण उनपर हमला करने की कोशिश की। वकील राकेश ने कहा- उनके एक्शन (टिप्पणी) पर ये मेरा रिएक्शन था। मैं नशे में नहीं था। जो हुआ, मुझे उसका अफसोस नहीं, किसी का डर भी नहीं है।
वकील ने कहा- यही चीफ जस्टिस बहुत सारे धर्मों के खिलाफ, दूसरे समुदाय के लोगों के खिलाफ केस आता है तो बड़े-बड़े स्टेप लेते हैं। उदाहरण के लिए- हल्द्वानी में रेलवे की जमीन पर विशेष समुदाय का कब्जा है, सुप्रीम कोर्ट ने उस पर तीन साल पहले स्टे लगाया, जो आज तक लगा हुआ है।
क्या है भगवान विष्णु की मूर्ति से जुड़ा मामला
16 सितंबर को मध्य प्रदेश के खजुराहो के जवारी (वामन) मंदिर में भगवान विष्णु की 7 फीट ऊंची खंडित मूर्ति की बहाली की मांग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की थी। याचिकाकर्ता ने इस फैसले पर नाराजगी जताई थी।
उन्होंने कहा था कि ये हमारी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला फैसला है। कोर्ट ने कहा है कि प्रतिमा जिस स्थिति में है, उसी में रहेगी। भक्तों को पूजा करनी है तो वे दूसरे मंदिर जा सकते हैं।
दरअसल, याचिकाकर्ता का दावा है कि यह मूर्ति मुगलों के आक्रमणों के दौरान खंडित हो गई थी और तब से यह इसी हालत में है। इसलिए श्रद्धालुओं के पूजा करने के अधिकार की रक्षा करने और मंदिर की पवित्रता को पुनर्जीवित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट हस्तक्षेप करे।
रायपुर, एजेंसी। रायपुर के हीरापुर में बंद पड़ी इस्पात फैक्ट्री में बदमाशों ने लूट की वारदात को अंजाम दिया। रात में 7-8 बदमाश फैक्ट्री में पहुंचे और सबसे पहले चौकीदार को रस्सी से बांध दिया। इसके बाद ऑफिस और फैक्ट्री में रखा एल्युमिनियम, कॉपर और दूसरे कीमती सामान लूटकर फरार हो गए। मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से करीब 17 लाख रुपए का सामान बरामद किया है। वारदात में इस्तेमाल टाटा एस वाहन, स्कूटी और दूसरे औजार भी जब्त किए गए हैं। घटना में शामिल बाकी आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश की जा रही है।
एक हफ्ते तक फैक्ट्री की रेकी, फिर रात में वारदात
घटना 22 अक्टूबर की रात करीब 1:30 बजे की है। हीरापुर के तेंदुआ रोड पर स्थित अमरनाथ इस्पात फैक्ट्री साल 2020 से बंद है। यहां दिलीप कुमार वर्मा चौकीदारी करते हैं।
घटना के समय वे ऑफिस के पोर्च में बैठे थे। तभी उन्हें बाउंड्रीवॉल के अंधेरे हिस्से से एक व्यक्ति आता दिखाई दिया। चौकीदार ने उसे आवाज देकर रोकने की कोशिश की, तो वह पत्थर फेंकने लगा। इसी दौरान चेहरे पर कपड़ा बांधे 7-8 और लोग वहां पहुंच गए।
चौकीदार के हाथ बांधकर फैक्ट्री से 17 लाख का सामान लूटा
बदमाशों ने चौकीदार के दोनों हाथ पीछे की ओर रस्सी से बांध दिए। इसके बाद ऑफिस में घुसकर एल्युमिनियम वायर के बंडल, कॉपर का सामान, एल्युमिनियम प्लेट, हैलोजन लाइट, नकदी, पैनल कार्ड और कॉपर कॉइल लूट लिया।
वे सारा सामान टाटा एस वाहन में लोडकर ले गए। भागने के लिए बदमाशों ने फैक्ट्री की दीवार तोड़ी और खेत के रास्ते रिंग रोड की ओर फरार हो गए।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने वारदात से पहले करीब एक सप्ताह तक फैक्ट्री की रेकी की थी। वे वहां की गतिविधियों और सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रख रहे थे। योजना के तहत टाटा एस और स्कूटी से फैक्ट्री पहुंचे थे।
CCTV फुटेज और मुखबिर की मदद से पकड़ में आए आरोपी
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने फैक्ट्री और आसपास के रास्तों पर लगे CCTV कैमरों के फुटेज खंगाले। संदिग्धों की आवाजाही का पता लगाने के लिए घटना से पहले और बाद के फुटेज का मिलान किया गया। पुलिस ने तकनीकी जांच और मुखबिरों की मदद से सरोना के संदीप नेताम को पकड़ा। पूछताछ और मिले सबूतों के आधार पर अजीत भारती और उमेन्द्र ठाकुर उर्फ उमेन को भी गिरफ्तार किया गया।
पुलिस के मुताबिक, तीनों ने साथियों के साथ मिलकर वारदात को अंजाम देना स्वीकार किया है। उनके कब्जे से एलुमिनियम वायर, एल्युमिनियम और कॉपर के सामान, प्लेट, हैलोजन लाइट, पैनल कार्ड और कॉपर कॉइल सहित करीब 17 लाख रुपए का सामान जब्त किया गया। वारदात में इस्तेमाल टाटा एस, स्कूटी, कटर मशीन और ड्रिल मशीन भी जब्त की गई है।
पहले भी आपराधिक मामलों में जेल जा चुके हैं आरोपी
पुलिस के अनुसार, संदीप नेताम पहले गुढ़ियारी थाने के चोरी और मारपीट के मामले में, उमेन्द्र ठाकुर उर्फ उमेन टिकरापारा के नकबजनी के मामले में और अजीत भारती डीडी नगर के प्रतिबंधात्मक मामले में जेल जा चुका है।
गिरफ्तार आरोपियों में संदीप नेताम (35), अजीत भारती (30) और उमेन्द्र ठाकुर उर्फ उमेन (27) शामिल हैं। पुलिस अब वारदात में शामिल बाकी आरोपियों की तलाश कर रही है।
पुलिस की संयुक्त कार्रवाई
यह कार्रवाई पुलिस उपायुक्त (क्राइम एवं साइबर) स्मृति रजनाला और पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) रॉबिन्सन गुरिया की निगरानी में एंटी क्राइम एवं साइबर यूनिट और कबीर नगर पुलिस ने की।
पुलिस के मुताबिक, रायपुर कमिश्नरेट में अब तक चोरी, नकबजनी, मोबाइल छिनतई, लूट और डकैती के 150 मामलों में 237 आरोपियों को गिरफ्तार कर करीब 4.66 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की गई है।
सुकमा, एजेंसी। सुकमा जिले के भेज्जी थाना क्षेत्र में सीआरपीएफ की 219वीं बटालियन की सी कंपनी ने अभियान चलाकर 79 जिलेटिन स्टिक और नक्सली उपयोग की अन्य सामग्री बरामद की है। जवानों ने ग्राम मोसलमुडगु के बाहरी जंगल में छिपाकर रखे गए सामान को जब्त किया। सीआरपीएफ के अनुसार, इस कार्रवाई से विस्फोटक सामग्री के संभावित इस्तेमाल का खतरा टालने में मदद मिली।
सीआरपीएफ की 219वीं बटालियन को 24 अक्टूबर को सूचना मिली थी कि मोसलमुडगु के बाहरी इलाके में नक्सलियों ने विस्फोटक और अन्य सामान छिपाकर रखा है। इसके आधार पर 25 अक्टूबर को शाम 4 बजे एरिया डोमिनेशन अभियान शुरू किया गया।
डॉग स्क्वॉड की मदद से की तलाशी
अभियान के दौरान शाम करीब 5:35 बजे जवान संदिग्ध स्थान पर पहुंचे। यहां DSMD और K9 डॉग स्क्वॉड की मदद से सघन तलाशी ली गई। इस दौरान एक छोटा नीला कंटेनर मिला, जिसमें विस्फोटक सामग्री और नक्सली गतिविधियों से जुड़ा सामान रखा था।
बम निरोधक दस्ते ने सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए सामग्री को सुरक्षित तरीके से बरामद किया। इसके बाद आसपास के इलाके में अन्य डंप की तलाश भी की गई।
डंप से ये सामग्री मिली
79 जिलेटिन स्टिक
पीले रंग के इलेक्ट्रिक वायर के 4 बंडल
हरे रंग के इलेक्ट्रिक वायर के 3 बंडल
7 हरे सिंथेटिक कॉम्बैट बेल्ट
नक्सली वर्दी के काले कपड़े के 3 बंडल
1 छोटा नीला कंटेनर
7 पेन
1 छोटा कैलकुलेटर
1 पॉकेट डायरी
शाम 7:20 बजे कैंप लौटे जवान
सर्च ऑपरेशन पूरा करने के बाद जवान शाम 7:20 बजे बरामद सामग्री के साथ सुरक्षित भेज्जी कैंप लौट आए। सीआरपीएफ के अनुसार, इलाके में नक्सली गतिविधियों पर नियंत्रण और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अभियान लगातार चलाए जा रहे हैं।
धमतरी, एजेंसी। धमतरी जिले के करका वन क्षेत्र में पेड़ों की छाल काटकर उन्हें नुकसान पहुंचाया गया है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व ने ऐसे 3500 क्षतिग्रस्त पेड़ों को बचाने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है।
पेड़ों की स्थिति की जांच कर वैज्ञानिक तरीके से उनका उपचार किया जा रहा है। इस काम में बेंगलुरु के वृक्ष संरक्षण विशेषज्ञ विजय निशांत भी मदद कर रहे हैं। उनकी संस्था प्रोजेक्ट वृक्ष फाउंडेशन इस अभियान में तकनीकी सहयोग दे रही है।
पेड़ों के तने के चारों ओर छाल काटने की प्रक्रिया को ‘गर्डलिंग’ कहते हैं। इससे पेड़ों में भोजन और पोषक तत्वों के परिवहन पर असर पड़ता है। नुकसान अधिक होने पर पेड़ सूखकर मर सकते हैं। करका वन क्षेत्र में इसी तरह क्षतिग्रस्त हुए पेड़ों को बचाने के लिए वन विभाग और विशेषज्ञों की टीम काम कर रही है।
पेड़ों की स्थिति के आधार पर तय होगा उपचार
वन विभाग और विशेषज्ञों की टीम ने चिह्नित 3500 पेड़ों को उनकी स्थिति और जीवित रहने की संभावना के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटा है। जिन पेड़ों को तत्काल उपचार की जरूरत है, उन्हें प्राथमिकता दी जा रही है। गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त पेड़ों के लिए विशेष तकनीकों और नियमित निगरानी की व्यवस्था की जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ पेड़ों के बचने की संभावना बेहतर है, जबकि कुछ को लंबे समय तक उपचार और देखभाल की जरूरत होगी। पूरी तरह मृत पेड़ों के संबंध में भी विशेषज्ञों की जांच के बाद ही जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
उपचार की योजना बनाते समय पेड़ की प्रजाति, उम्र, तने की मोटाई, क्षति की गंभीरता और छाल काटे जाने के बाद बीते समय को ध्यान में रखा जा रहा है। प्रत्येक पेड़ को एक क्रमांक दिया गया है। उसका रिकॉर्ड तैयार किया गया है, ताकि उपचार के बाद उसकी स्थिति में होने वाले बदलावों पर नजर रखी जा सके।
ब्रिज ग्राफ्टिंग तकनीक से बचाने की कोशिश
क्षतिग्रस्त पेड़ों के उपचार में ‘ब्रिज ग्राफ्टिंग’ जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें तने के प्रभावित हिस्से के ऊपर जीवित ऊतकों के बीच दोबारा संपर्क स्थापित करने की कोशिश की जाती है। इससे पेड़ में पोषक तत्वों का परिवहन बहाल करने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा ट्री बैंडेजिंग, घावों की देखभाल और जड़ों को मजबूत करने के उपाय भी किए जा रहे हैं। उपचार का तरीका प्रत्येक पेड़ की स्थिति के अनुसार तय किया जा रहा है, ताकि जहां संभव हो, वहां पेड़ प्राकृतिक रूप से दोबारा स्वस्थ हो सकें।
100 से ज्यादा वनकर्मी अभियान में जुटे
इस अभियान में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के 100 से अधिक मैदानी वनकर्मी जुटे हैं। इनके साथ ट्री डॉक्टर विजय निशांत, उद्यानिकी विशेषज्ञ और ग्राफ्टिंग के जानकार भी काम कर रहे हैं।
अभियान का उद्देश्य क्षतिग्रस्त पेड़ों को बचाने के साथ वनकर्मियों को वैज्ञानिक उपचार का व्यावहारिक प्रशिक्षण देना भी है। इससे भविष्य में ऐसे मामलों में समय पर उपचार किया जा सकेगा। उपचार के बाद प्रत्येक पेड़ की नियमित निगरानी होगी और उसकी स्थिति में होने वाले बदलावों का रिकॉर्ड रखा जाएगा।
कुछ पेड़ों में नए ऊतक विकसित होने के संकेत
मैदानी निरीक्षण के दौरान कुछ ऐसे पेड़ भी मिले हैं, जिनके क्षतिग्रस्त तनों पर नए ऊतक विकसित होते दिखाई दिए हैं। यह संकेत है कि कुछ पेड़ों में घाव भरने की प्रक्रिया प्राकृतिक रूप से शुरू हो चुकी है।
विशेषज्ञ इन पेड़ों का अध्ययन करेंगे, ताकि यह समझा जा सके कि किन परिस्थितियों में पेड़ अपने आप स्वस्थ हो सकते हैं और किन मामलों में सर्जरी या अतिरिक्त उपचार की जरूरत पड़ती है। इस अध्ययन के आधार पर भविष्य में वृक्ष संरक्षण की रणनीति को और प्रभावी बनाने का प्रयास किया जाएगा।
एक दशक में 1.25 लाख से ज्यादा पेड़ नष्ट होने का दावा
ड्रोन और सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से पता चला है कि पिछले एक दशक में करका वन क्षेत्र में 1.25 लाख से ज्यादा पेड़ नष्ट हुए हैं। अतिक्रमण बढ़ने से जंगल और जैव विविधता को नुकसान पहुंचने की चिंता बढ़ी है।
करका वन क्षेत्र पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यह पैरी नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र का हिस्सा है। ऐसे में यहां पेड़ों को होने वाला नुकसान केवल वन्यजीवों के आवास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर मिट्टी के संरक्षण, जैव विविधता और जलग्रहण क्षेत्र पर भी पड़ सकता है।
क्षतिग्रस्त पेड़ों को बचाने के साथ अतिक्रमण पर नियंत्रण, शेष वन क्षेत्र का संरक्षण और लगातार निगरानी करना भी जरूरी है।
डिप्टी डायरेक्टर बोले- पेड़ों के उपचार के बाद होगी नियमित निगरानी
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर वरुण जैन ने बताया कि करका क्षेत्र में क्षतिग्रस्त पेड़ों को बचाने के लिए वैज्ञानिक तरीके से उपचार किया जा रहा है। विशेषज्ञों की मदद से पेड़ की स्थिति का आकलन कर उसके अनुसार उपचार की योजना बनाई गई है।
उन्होंने बताया कि अभियान में वनकर्मियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है, ताकि उपचार के साथ उनकी तकनीकी क्षमता भी बढ़ाई जा सके। उपचार के बाद पेड़ों की नियमित निगरानी की जाएगी और परिणामों का रिकॉर्ड रखा जाएगा।
इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि कौन-सी तकनीक किस तरह के पेड़ों के लिए अधिक प्रभावी है। वन विभाग का प्रयास है कि अधिक से अधिक क्षतिग्रस्त पेड़ों को बचाकर करका क्षेत्र की प्राकृतिक विरासत का संरक्षण किया जा सके।