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सोनिया बोलीं- नहीं चाहती थी कि राजीव PM बनें:मेरी किताब आएगी तो तमाशा होगा

नई दिल्ली, एजेंसी। सोनिया गांधी ने कहा- जब राजीव गांधी को देश का प्रधानमंत्री बनाया जा रहा था, तब मैं इस फैसले के खिलाफ थीं। कभी नहीं चाहती थीं कि राजीव गांधी प्रधानमंत्री बनें।

मेरी किताब आने पर कुछ ‘तमाशा’ जरूर होगा। दशकों से लोग मेरी कहानी बता रहे, अब मेरी बारी है अपनी कहानी बताने की।

सोनिया गांधी पर लिखी गई किताब ‘बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ 10 नवंबर को रिलीज होगी। उन्होंने मंगलवार को X पर इसका नया वीडियो पोस्ट किया।

यह X पर पिछले हफ्ते जुड़ने के बाद सोनिया गांधी की दूसरी पोस्ट है। वीडियो में वह किताब के पन्ने पलटते हुए अपनी कहानी खुद बताने की बात कहती हैं।

सोनिया ने 5 दिन में सोशल मीडिया पर तीसरा वीडियो पोस्ट किया। 22 अक्टूबर को इंस्टाग्राम पर और 24 अक्टूबर को एक्स पर डेब्यू किया था।

सोनिया ने कहा- बहुत सी बातें मनगढ़ंत थीं

सोनिया ने कहा, बहुत सी बातें या तो मनगढ़ंत थीं या फिर उन्हें बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया था। इसलिए मुझे लगा कि अब मुझे खुद अपनी कहानी लिखनी चाहिए और तथ्यों और घटनाओं को ठीक वैसे ही बताना चाहिए, जैसे वे असलियत में घटी थीं।

राजीव से रेस्टोरेंट में मिलीं सोनिया, वहीं प्यार हुआ

शनिवार को X पर सोनिया ने पहले पोस्ट में लिखा- कैम्ब्रिज में राजीव गांधी से पहली मुलाकात ने दोस्ती का रास्ता खोला।

सोनिया ने कहा-

यहीं से प्यार की शुरुआत हुई, हमने साथ मिलकर यादों की एक दुनिया बनाई।

सोनिया ने किताब खोलकर बताया- इसमें प्रियंका की कई तस्वीरें हैं।

सोनिया की जिंदगी के किस्से

पहली मुलाकात में ही राजीव पसंद आ गए

सोनिया ने बताया कि राजीव गांधी से पहली बार मिलने पर उन्हें तुरंत लगा कि वह ऐसे व्यक्ति हैं, जिनके साथ वह रहना चाहेंगी। बाद में उन्हें पता चला कि राजीव भी ऐसा ही महसूस करते थे। दोनों की दोस्ती पार्टियों, घूमने और छात्रों की बैठकों में साथ समय बिताने से आगे बढ़ी।

उन्होंने कहा

वह बहुत सौम्य दिखने वाले व्यक्ति थे। बेशक, वह बहुत अच्छे दिखते थे। लेकिन उनका सौम्य स्वभाव साफ नजर आता था।

इंदिरा से पहली मुलाकात और नए परिवार में ढलना

राजीव से शादी के बाद सोनिया ने नेहरू-गांधी परिवार में अपनी जगह बनाई। आत्मकथा में अपनी सास और तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी से पहली मुलाकात और भारत में परिवार के साथ जीवन बिताने के अनुभवों का जिक्र है।

उन्होंने लिखा कि यहां की भाषा, खानपान और संस्कृति से तालमेल बैठाना भी जीवन का हिस्सा था। किताब में हिंदी सीखने, साड़ी पहनने और भारतीय जीवनशैली अपनाने के बारे में भी लिखा है।

इंदिरा और राजीव की हत्या के बाद बदली जिंदगी

1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने। सात साल बाद, 1991 में राजीव की भी हत्या कर दी गई। सोनिया ने बताया कि अपनों को खोने के दर्द ने उन्हें सार्वजनिक जीवन और राजनीति की ओर धकेला। इससे पहले वह अपनी निजी जिंदगी को सार्वजनिक नजरों से दूर रखना चाहती थीं।

राजीव की हत्या के बाद भी राजनीति से दूर रहीं

1991 में राजीव की हत्या के बाद भी सोनिया राजनीति से दूर रहीं। पीवी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बने। 1996 तक कांग्रेस कमजोर होने लगी और पार्टी में कई गुट बन गए।

1997 में कांग्रेस को एकजुट करने के लिए सोनिया ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ली। 62 दिन बाद 1998 में वे कांग्रेस अध्यक्ष बन गईं। सोनिया 2017 तक अध्यक्ष रहीं, जो पार्टी के इतिहास में सबसे लंबा कार्यकाल है।

पीएम बनने का मौका मिला, लेकिन मनमोहन सिंह को चुना

2004 में कांग्रेस ने 14 सहयोगी दलों के साथ UPA बनाया। चुनाव के बाद लेफ्ट समेत कई दलों के समर्थन से UPA को 335 सांसदों का समर्थन मिला। सहयोगियों ने सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री बनाने का समर्थन किया, लेकिन उन्होंने 18 मई 2004 को पद ठुकरा दिया। इसके बाद मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने।

हालांकि, NDA ने सोनिया के विदेशी नागरिक का मुद्दा उठाकर उनके पीएम बनने का विरोध किया। इसके कारण सोनिया ने पीएम पद ठुकरा दिया और मनमोहन सिंह को पीएम बनाने का प्रस्ताव रखा। मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बनें। हालांकि, कहा जाता है कि पर्दे के पीछे रहकर सरकार की बागडोर सोनिया के हाथों में ही थी।

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