DivyaAkash: Your Daily Source for Hindi News

‘फैक्ट्री में घुसे आतंकी, बेटे को उठा ले गए’:माली में ओडिशा के वेंकट अगवा, फैमिली बोली- कंपनी ने कहा पुलिस ने अरेस्ट किया है

भुवनेश्वर,एजेंसी। ‘वेंकट से आखिरी बार 30 जून को बात हुई थी। वो मेरा बड़ा बेटा है। अफ्रीका के देश माली में काम करता है। हर रोज शाम को 6 से 7 के बीच मेरे पास फोन करता था। उसने बताया था कि उसके इलाके में आतंकी घुस आए हैं। कंपनी ने कहा है कि बाहर मत निकलना। खतरा है, इसलिए हम कंपनी के क्वार्टर में ही रह रहे हैं। एक-दो महीने की दिक्कत है, तब तक हम बाहर नहीं निकलेंगे।’

ओडिशा के गंजाम की रहने वाली पी. नरसम्मा एक हफ्ते से बेटे के फोन का इंतजार कर रही हैं। उनके बेटे पी. वेंकटरमन माली के कायस शहर में एक सीमेंट फैक्ट्री में सुपरवाइजर थे। ये फैक्ट्री हैदराबाद के प्रसादित्य ग्रुप की है। एक जुलाई, 2025 को आतंकियों ने फैक्ट्री पर हमला कर दिया और वर्कर्स को बंधक बनाकर ले गए। इनमें वेंकटरमन समेत तीन भारतीय भी हैं।

वेंकटरमन के साथ अगवा बाकी दो भारतीय तेलंगाना के सर्विस इंजीनियर अपरेश्वर और आंध्रप्रदेश के रहने वाले फोरमैन रमना हैं। कायस पर हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन अल-कायदा से जुड़े जमात नुसरत अल-इस्लाम वाल-मुस्लिमीन (JNIM) ने ली है। इसलिए माना जा रहा है कि वेंकटरमन, अमरेश्वर और रमना उसी के कब्जे में हैं।

फोटो में वेंकटरमन अपनी अफ्रीकी दोस्त के साथ हैं। ये फोटो 8 जून को ली गई थी। तब वे माली के पड़ोसी देश टोगो गए थे।

फोटो में वेंकटरमन अपनी अफ्रीकी दोस्त के साथ हैं। ये फोटो 8 जून को ली गई थी। तब वे माली के पड़ोसी देश टोगो गए थे।

कंपनी ने बताया- वेंकट को पुलिस ने अरेस्ट किया है

वेंकटरमन का परिवार गंजाम जिले के समरजोल गांव में रहता है। घर में मां और भाई हैं। एक बहन भी हैं, जिनकी शादी हो चुकी है।

वेंकट रमन ने आखिरी बात परिवार से 30 जून की शाम 6 से 7 बजे के बीच बात की थी। वे हर रोज शाम करीब 7 बजे कॉल करते थे। 30 जून के बाद वेंकट का फोन नहीं आया। परिवार ने फोन किया, लेकिन कोई रिस्पॉन्स नहीं मिला।

3 जुलाई को मुंबई से वेंकटरमन की कंपनी ब्लू स्टार प्राइवेट लिमिटेड से किसी जूलियट डिसूजा का फोन आया। उन्होंने बताया कि वेंकटरमन को पुलिस ने कस्टडी में ले लिया है। आप लोग चिंता न करें, हम उन्हें छुड़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

वजह पूछने पर जूलियट ने बताया कि माली के एक मॉल में आतंकियों ने आग लगा दी थी। वेंकटरमन वहीं थे, इसलिए पुलिस ने शक के आधार पर उन्हें कस्टडी में लिया है। कंपनी ने भरोसा दिया कि वे 3-4 दिन में छूट जाएंगे।

वेंकटरमन के बहनोई बब्लू बताते हैं, ‘हमें कंपनी की बातों पर यकीन नहीं हुआ। तभी हमें न्यूज से पता चला कि वेंकटरमन को आतंकियों ने अगवा कर लिया है। खबरों में तीन लोगों की फोटो दिखाई जा रही थी। इनमें वेंकट भी थे। ये खबर देखकर हम डर गए।’

‘हमने कंपनी को दोबारा फोन किया। तब हमें बताया कि खबर सही है। साथ ही हमें हिदायत दी कि हम इस बारे में किसी से बात न करें, क्योंकि इससे मामला बिगड़ सकता है। कंपनी ने यह भी कहा कि आतंकवादी फिरौती मांग रहे हैं। हम 7-8 दिनों में सभी को छुड़ा लेंगे।’

जिस नंबर से वेंकट की फैमिली को फोन आया था, हमने उस पर बात करनी चाही, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। इसलिए ब्लू स्टार प्राइवेट लिमिटेड का पक्ष नहीं मिल पाया।

अब वेंकट के परिवार की बात पिता की मौत, परिवार गरीब, वेंकट पढ़ाई छोड़ नौकरी करने लगे

वेंकटरमन तीन भाई-बहनों में सबसे बड़े हैं। बहन पी. जेमामणि, छोटे भाई पी. लम्बोदर और मां पी. नरसम्मा हैं। पिता का 2011 में निधन हो गया था। तब वेंकटरमन सिर्फ 14 साल के थे। 8वीं में पढ़ते थे। पिता की बीमारी ने परिवार को तोड़ दिया था। उनके जाने के बाद बच्चों की जिम्मेदारी मां पी. नरसम्मा पर आ गई।

उन्होंने अपना घर किराए पर दे दिया। खुद छोटे से किराए के मकान में रहने लगीं, ताकि कुछ पैसे बचें और वे बच्चों को पढ़ा सकें। नरसम्मा बताती हैं, ‘बच्चें पढ़-लिखकर काबिल बन जाएं, इसलिए मैंने एक दिन भी आराम नहीं किया। बेटे बड़े हुए, तो कमाने के लिए घर से बाहर चले गए।’

वेंकटरमन के बारे में नरसम्मा बताती हैं, ‘पति की डेथ हुई, तब वेंकट गांव के स्कूल में पढ़ता था। परिवार की हालत देखकर कम उम्र में ही उसने काम करने का मन बना लिया। 10वीं पास करने के बाद ITI में एडमिशन लिया। पढ़ाई पूरी होने से पहले ही उसे नौकरी मिल गई। इसलिए उसने कोर्स पूरा नहीं किया।’

‘2016 में वेंकट ने मुंबई की एक कंपनी में काम शुरू किया था। वहां एलिवेटर टेक्नीशियन का काम था। 2017 में मुंबई में ही ब्लू स्टार प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ गया। यहां उसे लिफ्ट टेक्नीशियन का काम मिला।’

2018 में पहली बार विदेश गए, 4 देशों में काम किया

वेंकटरमन के बचपन के दोस्त एम. रामकृष्ण बताते हैं, ‘वेंकट हमेशा कहता था कि मेरे परिवार की स्थिति खराब है। मुझे उनका ख्याल रखना है। ज्यादा पैसे कमाने के लिए वो 2018 में विदेश चला गया।

पहले अफ्रीका में सेनेगल, इसके बाद टोगो, नाइजीरिया और माली गया। वो 6 महीने के कॉन्ट्रैक्ट पर जाता था, फिर 1-2 महीने के लिए घर आता था। 9 महीने पहले वो माली गया था।’

वेंकटरमन अभी डायमंड सीमेंट कंपनी में क्वालिटी चेक सुपरवाइजर थे।

वेंकटरमन की बहन जेमामणि बताती हैं, ‘भाई को घूमने का बड़ा शौक था। वो हमेशा नई जगह जाने की बात करते थे। मेरी बेटी 5-6 महीने की थी, तब मैं आखिरी बार उनसे मिली थी। वे हैदराबाद में मुझसे मिलने आए थे। 10-15 दिन हमारे साथ ही रुके।’

वेंकटरमन घर पर हर महीने 20-25 हजार रुपए भेजते थे। इसी से घर का खर्च चलता था। मां नरसम्मा बताती हैं, ‘मैंने बेटी की शादी के लिए 4 लाख रुपए कर्ज लिया था। वेंकटरमन ही इसे चुका रहा था।’

एक हफ्ते से ज्यादा हो गया, वेंकट के बारे में पता नहीं चल रहा है। उसका फोन भी नहीं आ रहा है। बस मेरा बेटा जल्दी से वापस आ जाए। मुझे उसी का इंतजार है।

वेंकटरमन के छोटे भाई पी. लंबोदर 21 साल के हैं। वे कहते हैं, ‘भैया की शादी नहीं हुई थी। वे कहते थे कि पहले घर बनवा लें। शादी फिर हो जाएगी। वे हमें अपने काम के बारे में ज्यादा नहीं बताते थे। हमें लगता है कि ब्लूस्टार कंपनी के जरिए वे माली गए होंगे। वहां उन्हें डायमंड सीमेंट कंपनी में काम मिला होगा।’

वहीं, गंजाम जिला परिषद की सदस्य प्रीति साहू कहती हैं, ‘इन हालात की वजह गरीबी है। गरीबी न होती, तो कोई बच्चा घर से बाहर इतनी दूर कमाने नहीं जाता। कंपनियां गांव के लोगों को बाहर लेकर जाती हैं, वे अपनी जिम्मेदारी सही तरीके से नहीं निभातीं। अब ब्लू स्टार कंपनी परिवार के लोगों से कह रही है कि आपने मामले को उजागर कर दिया है। हम आपको अब कोई जानकारी नहीं देंगे, ये सही नहीं है।’

परिवार का आरोप- दूतावास से मदद नहीं मिली

वेंकटरमन के बारे में पता चलने पर परिवार ने 4 जुलाई को गंजाम जिले के हिंजलीकाटू थाने में शिकायत दर्ज कराई और वेंकट को जल्द छुड़वाने की गुजारिश की। पुलिस ने कहा कि यह इंटरनेशनल इश्यू है। देखना होगा कि हम क्या कर सकते हैं।

इसके बाद बब्लू ने गंजाम के कलेक्टर दिव्य ज्योति परिड़ा से बात की। उन्होंने दूतावास में बात करने की सलाह दी। बब्लू ने ऑनलाइन दूतावास का नंबर निकाला और फोन किया। वे बताते हैं कि वहां किसी ने फोन नहीं उठाया। हमने मेल भी किया लेकिन जवाब नहीं आया।

हालांकि, 2 जुलाई को विदेश मंत्रालय ने कहा कि माली की राजधानी बमाको में भारतीय दूतावास माली के अफसरों, एजेंसियों और सीमेंट फैक्ट्री के मैनेजमेंट के साथ लगातार कॉन्टैक्ट में है। अधिकारियों ने अगवा किए गए वर्कर्स के परिवारों से भी कॉन्टैक्ट किया गया है।

इमने इस बारे में हिंजलीकाटू के तहसीलदार तपन कुमार महापात्रा से बात की। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि मैंने कलेक्टर साहब को रिपोर्ट भेज दी है।

माली में एक साथ सात शहरों पर आतंकियों का हमला

सात देशों से घिरा माली दुनिया के सबसे ज्यादा आतंकवाद प्रभावित देशों में शामिल है। भारतीय विदेश मंत्रालय की वेबसाइट के मुताबिक, यहां 561 भारतीय रहते हैं। माली में 2020 और 2021 में यहां सेना तख्तापलट कर चुकी है। आतंकवादी संगठन अल कायदा से जमात नुसरत अल-इस्लाम वाल-मुस्लिमीन सेना पर हमले कर रहा है।

Exit mobile version