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छत्तीसगढ़ सरकार का यू-टर्न…जमीन दरों में नई गाइडलाइन जारी:सेंट्रल इवैल्यूएशन बोर्ड ने जिलों से मांगी रिपोर्ट, भूपेश बोले-जबरदस्ती थोपे गए नियम वापस लिए गए

रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ में नई कलेक्टर गाइडलाइंस के बाद जमीनों की बढ़ी कीमतों के बीच सरकार ने यू-टर्न ले लिया है। रजिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट ने शहरों में लागू की गई नई दरों और वैल्यूएशन के प्रावधानों की समीक्षा करने का फैसला किया है। सेंट्रल वैल्यूएशन बोर्ड ने सभी जिलों से रिपोर्ट मांगी है।

सेंट्रल वैल्यूएशन बोर्ड की मीटिंग के बाद इंस्पेक्टर जनरल ऑफ रजिस्ट्रेशन और सुपरिटेंडेंट ऑफ स्टैंप्स, छत्तीसगढ़, रायपुर ने नई रिवाइज्ड गाइडलाइंस जारी की हैं। इन गाइडलाइंस में 6 बड़े बदलाव किए गए हैं। डिस्ट्रिक्ट वैल्यूएशन कमेटियों को 31 दिसंबर 2025 तक नए प्रपोजल सबमिट करने का निर्देश दिए गए हैं।

वहीं पूर्व CM भूपेश बघेल ने कहा कि गाइडलाइन दरों में अभी सुधार कहां हुआ? जब तक अनापशनाप बढ़ाई गई गाइडलाइन दरों को नहीं सुधारा जाएगा, काम नहीं बनेगा। सरकार को और संशोधन करना पड़ेगा। वह मजबूर होकर करेगी, लिखकर रखिए।

इसके पहले रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा था कि नई गाइडलाइन से भूमि अधिग्रहण में ज्यादा मुआवजा मिलने की बात भ्रामक है। इससे केवल 1% किसानों को फायदा होगा, जबकि 99% जनता पर आर्थिक बोझ पड़ेगा।

जिला मूल्यांकन समिति के लिए निर्देश जारी

सेंट्रल वैल्यूएशन बोर्ड की मीटिंग में यह तय किया गया कि डिस्ट्रिक्ट वैल्यूएशन कमेटी को निर्देश दिया जाए। वे हाल ही में रेट बढ़ने के बाद मिले मेमोरेंडम, आपत्तियों और सुझावों की समीक्षा करें। 31 दिसंबर तक गाइडलाइन रेट में बदलाव के लिए प्रस्ताव जमा करें।

सेंट्रल वैल्यूएशन बोर्ड की मीटिंग के बाद नई गाइडलाइन जारी।

बघेल बोले- जनता को बहुत कम राहत देने वाला सुधार

जमीन की दरों में नई गाइडलाइन को लेकर पूर्व CM भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया X पर लिखा कि गाइड लाइन दरों में अभी सुधार कहां हुआ?। जैसा कि मैंने कहा था कि सरकार को गाइड लाइन की दरों संबंधी आदेश में सुधार करना पड़ा, लेकिन यह सुधार सतही है और जनता को बहुत कम राहत देने वाला है।

भूपेश बघेल ने आगे लिखा कि अभी गाइड लाइन की दरों में सुधार नहीं हुआ है। बस एक जबरदस्ती थोपे गए नियम को वापस लिया गया है। थोड़े बहुत और परिवर्तन हुए हैं। वे बहुत असरकारी नहीं हैं।जब तक अनापशनाप बढ़ाई गई गाइडलाइन दरों को नहीं सुधारा जाएगा, काम नहीं बनेगा।

बघेल ने लिखा कि जनता पर प्रॉपर्टी टैक्स का जो बोझ आने वाला है। वह तो अभी बरकरार दिखता है। सरकार को और संशोधन करना पड़ेगा। वह मजबूर होकर करेगी, लिखकर रखिए।

जमीन की दरों में नई गाइडलाइन को लेकर पूर्व CM भूपेश बघेल ने X पर सरकार को घेरा।

नई जमीन दरों को लेकर क्या-क्या हुआ ?

दरअसल, छत्तीसगढ़ सरकार ने 9 नवंबर को जमीन की दरों और रजिस्ट्रेशन फीस में बढ़ोतरी के बारे में निर्देश जारी किए थे। इससे जमीन की कीमतों में 5-9 गुना बढ़ोतरी हुई। 10 लाख रुपए की जमीन अचानक 70 लाख रुपए की हो गई थी। इससे राज्यभर में व्यापारियों और नागरिकों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

इसी बीच 1 दिसंबर को दुर्ग में व्यापारियों ने विरोध प्रदर्शन किया। विरोध प्रदर्शन के दौरान, दुर्ग पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया। जमीन के व्यापारियों को सड़कों पर दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया। कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए। कुछ पुलिस अधिकारी भी घायल हुए।

दुर्ग में कलेक्ट्रेट और रजिस्ट्रार ऑफिस के बाहर छह पुलिस स्टेशनों की पुलिस तैनात की गई थी। कांग्रेस पार्टी भी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में शामिल हुई। पुतले जलाए और काले झंडे दिखाए। उन्होंने व्यापारियों पर लाठीचार्ज के लिए सरकार की आलोचना की।

सरकार के निर्णय पर आंदोलन करते हुए प्रदर्शनकारी।

किस नेता ने क्या कहा था ?

रायपुर से BJP सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने CM को चिट्ठी लिखी थी। इसके दूसरे दिन कहा था कि सरकार बिना अध्ययन, बिना जनसुनवाई के फैसले ले रही है। ये प्रदेश की आर्थिक रीढ़ पर सीधी चोट है। इसका असर जनता, किसानों और छोटे कारोबारियों पर पड़ेगा।

बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि नई कलेक्टर गाइडलाइन पर फैसले को लेकर सरकार पूरी तरह कन्फ्यूज है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को रेवेन्यू डिपार्टमेंट के एक्सपर्ट्स, रियल एस्टेट प्रतिनिधियों और किसानों के संगठनों को मिलाकर एक हाई-लेवल कमेटी बनानी चाहिए।

बृजमोहन अग्रवाल ने मुख्यमंत्री को लिखे अपने पत्र में क्या लिखा ?

रायपुर से बीजेपी सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने CM विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर निर्णय को तत्काल स्थगित करने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि नई गाइडलाइन से भूमि अधिग्रहण में ज्यादा मुआवजा मिलने की बात भ्रामक है। इससे केवल 1% किसानों को फायदा होगा, जबकि 99% जनता पर आर्थिक बोझ पड़ेगा।

अग्रवाल ने कहा था कि प्रदेश में जमीन की खरीद-फरोख्त पहले ही मंद है। किसानों और मध्यमवर्गीय परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में गाइडलाइन में बढ़ोतरी से स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क बढ़ जाएगा, जिससे जमीन लेना और मुश्किल हो जाएगा।

सरकार ने छोटे बिजनेस को बर्बाद कर दिया

PCC चीफ दीपक बैज ने कहा था कि कांग्रेस पार्टी आने वाले दिनों में एक बड़ा विरोध प्रदर्शन करेगी। सरकार ने इन नए रेट्स से छोटे बिजनेस को बर्बाद कर दिया है। घर बनाना, जो एक आम आदमी का सपना होता है, अब मुश्किल हो गया है। यह फैसला किसके फायदे के लिए लिया गया था?

दीपक बैज ने कहा था कि नए रेट्स के बारे में PCC चीफ दीपक बैज ने कहा कि जमीन रजिस्ट्रेशन की गाइडलाइन रेट्स काले धन को सफेद करने के लिए बढ़ाए गए हैं। सरकार गैर-कानूनी कमाई को जायज इनकम में बदलना चाहती है।

पिछली सरकार 30% छूट दी थी, जिसे खत्म कर दी गई

बता दें कि पहले सरकार जमीन का मूल्य (बाजार मूल्य) निकालते समय 30% कम कर देती थी। उदाहरण के तौर पर अगर किसी जमीन का बाजार मूल्य 10 लाख है, तो रजिस्ट्री के समय इसे 30% कम कर दिया जाता था। यानी 10 लाख का सिर्फ 70% (7 लाख) माना जाता था।

इसी कम किए गए मूल्य पर जमीन पर 4% और 75 लाख तक के मकानों पर 2% पंजीयन शुल्क लिया जाता था। अब सरकार ने 30% की छूट खत्म कर दी है। जमीन/मकान का पूरा 100% मूल्य ही गिना जाएगा, लेकिन पंजीयन ड्यूटी (4% और 2%) अभी भी वही रखी है, कम नहीं की गई।

व्यापारियों की मांग और समस्या समझिए

जब मूल्य कम किया जाता था (70%), तब 4% पंजीयन शुल्क लेना ठीक था, लेकिन अब मूल्य सीधा 100% गिना जा रहा है, तो लोगों का कहना है कि जब जमीन की कीमत बढ़ाकर 100% कर दी गई है। ऐसे में पंजीयन शुल्क में भी 3.2% कम किया जाए। इसे फिर से 0.8% किया जाए, ताकि भार बराबर रहे।

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