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लोकसभा चुनाव से पहले कई राज्यों में कांग्रेस प्रभारी बदले

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प्रियंका से यूपी की जिम्मेदारी वापस ली, महासचिव बनी रहेंगी

नई दिल्ली, एजेंसी। कांग्रेस ने 2024 लोकसभा चुनाव से पहले कई राज्यों के प्रभारी बदल दिए हैं। कुछ नेताओं को नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। प्रियंका गांधी वाड्रा को यूपी कांग्रेस प्रभारी पद से मुक्त कर दिया गया है, हालांकि वे महासचिव बनी रहेंगी। प्रियंका की जगह अविनाश पांडे को यूपी की जिम्मेदारी दी गई है। उधर, सचिन पायलट छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रभारी बने हैं। रमेश चेन्निथला को महाराष्ट्र, देवेंद्र यादव को पंजाब और रणदीप सुरजेवाला को कर्नाटक का प्रभार मिला है। जयराम रमेश कम्युनिकेशन, मुकुल वासनिक संगठन के महासचिव और माणिकराव ठाकरे को गोवा की जिम्मेदारी दी गई है। असम के प्रभारी महासचिव जितेंद्र सिंह को मध्य प्रदेश और दीपक बाबरिया के पास दिल्ली और हरियाणा का अतिरिक्त प्रभार है। जीए मीर झारखंड के प्रभारी महासचिव बने हैं, उन्हें पश्चिम बंगाल का अतिरिक्त प्रभार दिया है। दीपा दासमुंशी को तेलंगाना के अतिरिक्त प्रभार के साथ केरल और लक्षद्वीप का महासचिव बनाया गया है। कुमारी शैलजा को उत्तराखंड का प्रभारी महासचिव बनाया गया।

16 सदस्यीय मैनिफेस्टो कमेटी भी बनाई, चिदंबरम अध्यक्ष

शनिवार को ही कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के लिए मैनिफेस्टो कमेटी का गठन किया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और पार्टी के सीनियर लीडर पी चिदंबरम इसके अध्यक्ष बनाए गए हैं। छत्तीसगढ़ के पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव कमेटी के संयोजक (कन्वीनर) होंगे। 16 सदस्यीय इस कमेटी में प्रियंका गांधी वाड्रा, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, जयराम रमेश और शशि थरूर भी शामिल हैं। वहीं, कांग्रेस ने एक रेजोल्यूशन पास किया है। इसके मुताबिक जनता को मोदी सरकार की कथनी-करनी में अंतर बताया जाएगा। मैनिफेस्टो कमेटी में पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा, मणिपुर के पूर्व डिप्टी सीएम गायखंगम, लोकसभा में पार्टी के उपनेता गौरव गोगोई, ऑल इंडिया प्रोफेशनल्स कांग्रेस के चीफ प्रवीण चक्रवर्ती, इमरान प्रतापगढ़ी, के राजू, ओंकार सिंह मरकाम, रंजीत रंजन, जिग्नेश मेवाणी और गुरदीप सप्पल शामिल हैं।

पार्टी की 2024 के आम चुनाव पर नजर

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में मिली हार के बाद कांग्रेस की नजर 2024 लोकसभा चुनाव पर है। पार्टी ने गुरुवार 21 दिसंबर को कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक बुलाई थी, जिसमें लोकसभा चुनाव की रणनीति पर चर्चा हुई। एक दिन बाद यानी 22 दिसंबर को कांग्रेस ने मैनिफेस्टो कमेटी के गठन की घोषणा कर दी।

मोदी की चुनौती से कैसे निपटेंगे, इसकी रणनीति बनाई गई

सीडब्ल्यूसी की बैठक में एक रेजोल्यूशन पास किया गया। इसमें कहा गया- पार्टी मोदी सरकारी की कमजोरियों को उजागर करेगी। प्रधानमंत्री मोदी के दावों और जमीनी हकीकत में काफी अंतर है। सामाजिक ध्रुवीकरण काफी ज्यादा हो गया है और इसका इस्तेमाल चुनाव में जीत के लिए किया जा रहा है। रेजोल्यूशन में ये भी कहा गया कि लोकतंत्र चरमरा गया है। लोकतंत्र पर ही हमला हो रहा है और संविधान के तहत नागरिकों को मिली आजादी छिन गई है। इन मुद्दों पर बात होनी चाहिए।

पंजाब कांग्रेस इंचार्ज हरीश चौधरी को हटाया गया

पंजाब कांग्रेस इंचार्ज के तौर पर देवेंद्र यादव को लाया गया है। देवेंद्र दिल्ली के कांग्रेस नेता है। कांग्रेस प्रधान मल्लिकार्जुन खडग़े ने इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए है। देवेंद्र यादव अभी तक उत्तराखंड कांग्रेस के इंचार्ज थे। यह परिवर्तन ऐसे वक्त में हुआ है, जब इंडिया को लेकर पंजाब में आप और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर खूब बवाल मचा हुआ है।

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वक्फ बिल का विरोध, 6 मुस्लिम नेताओं ने JDU छोड़ी:बोले- मुख्यमंत्री ने भरोसा तोड़ा; पप्पू यादव ने कहा- वोटिंग तक ही नीतीश BJP की जरूरत

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पटना,एजेंसी। JDU ने वक्फ संशोधन बिल पर मोदी सरकार का समर्थन किया है। इसके बाद से CM नीतीश कुमार की पार्टी में घमासान मचा हुआ है। बगावत शुरू हो गई है। एक के बाद मुस्लिम नेताओं का इस्तीफा जारी है। अब तक बिल को समर्थन देने से नाराज 6 मुस्लिम नेताओं ने पार्टी छोड़ दी है।

इनमें पूर्व प्रदेश सचिव एम. राजू नैयर, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव मोहम्मद शाहनवाज मलिक, बेतिया जिला के उपाध्यक्ष नदींम अख्तर, प्रदेश महासचिव सिए मो. तबरेज सिद्दीकी अलीग, भोजपुर से पार्टी सदस्य मो. दिलशान राईन , और खुद को मोतिहारी के ढाका विधानसभा सीट से पूर्व प्रत्याशी बताने वाले मोहम्मद कासिम अंसारी शामिल हैं।

मुस्लिम नेताओं ने वक्फ बिल पर समर्थन पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि पार्टी ने लाखों मुसलमानों का भरोसा तोड़ा है। हालांकि, पार्टी ने दावों को खारिज किया है।

इधर, बिल पर जदयू के समर्थन को लेकर पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने कहा कि- ‘नीतीश कुमार सेक्युलर थे, हैं और रहेंगे.. लेकिन पार्टी के नेता नहीं है। वो आरक्षण विरोधी हैं। उनका पार्टी पर कोई कंट्रोल नहीं है।’

मुस्लिम नेताओं में नाराजगी, बोले- नीतीश ने भरोसा तोड़ा

मोहम्मद कासिम अंसारी ने CM को लिखे पत्र में कहा, ‘वक्फ बिल पर समर्थन देकर JDU ने अपनी सेक्युलर छवि वाला भरोसा तोड़ा है। लाखों मुसलमानों का यकीन टूटा है। साथ ही लोकसभा में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के दिए भाषण से भी लोग आहत हुए हैं।’

वहीं, मोहम्मद शाहनवाज मलिक ने कहा, ‘JDU के समर्थन से लाखों-करोड़ों मुस्लिमों को धक्का लगा है। ललन सिंह के बयान काफी दुख हुआ है। मैं कई साल तक इस पार्टी में रहा। लेकिन अब इस्तीफा दे रहा हूं।’

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राहुल गांधी को लखनऊ हाईकोर्ट से झटका:200 रुपए जुर्माना-समन रद्द करने की मांग खारिज, सावरकर को अंग्रेजों से पेंशन लेने वाला कहा था

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लखनऊ,एजेंसी। राहुल गांधी की याचिका लखनऊ हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। उन्होंने वीर सावरकर मानहानि मामले में लखनऊ की सेशन कोर्ट के समन आदेश और 200 रुपए जुर्माने को लेकर हाईकोर्ट में 2 अप्रैल को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने उन्हें अल्टरनेट रेमेडी (वैकल्पिक उपाय) अपनाने का सुझाव देते हुए लखनऊ सेशन कोर्ट जाने को कहा है।

दरअसल, 3 मार्च को लखनऊ की अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) कोर्ट ने लगातार पेशी से गायब रहने पर राहुल गांधी पर 200 रुपए जुर्माना लगाया था। चेतावनी दी थी कि 14 अप्रैल 2025 को अदालत में हाजिर हों, अगर वे इस तारीख को भी पेश नहीं होते हैं तो कठोर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। गैर-जमानती वारंट भी जारी किया जा सकता है।

राहुल गांधी के वकील प्रांशु अग्रवाल ने बताया – 12 दिसंबर, 2024 को धारा 153A और 505 IPC के तहत लखनऊ की सेशन कोर्ट ने राहुल गांधी को समन जारी किया था। 3 मार्च को ACJM ने भी 200 रुपए का जुर्माना लगाया था। इसके खिलाफ हम हाईकोर्ट गए थे, लेकिन कोर्ट ने हमारी मांग खारिज कर दी। अब हम एक और याचिका दाखिल करेंगे।

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अमेरिका में ईमेल भेज सैकड़ों विदेशी छात्रों का वीजा रद्द:AI से कैंपस एक्टिविस्ट्स की पहचान कर रही सरकार, देश छोड़ने के आदेश

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वॉशिंगटन डीसी ,एजेंसी। अमेरिका में पढ़ने वाले सैकड़ों विदेशी छात्रों को उनका एफ-1 वीजा यानी स्टूडेंट वीजा रद्द होने का अचानक ईमेल मिला है। यह मेल अमेरिकी विदेश मंत्रालय (DoS) की ओर से मार्च के आखिरी हफ्ते में भेजा गया है।

यह ई-मेल उन छात्रों को भेजा गया है, जो कैंपस एक्टिविज्म यानी कैंपस में होने वाले प्रदर्शनों में शामिल हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन छात्रों को भी ऐसे मेल भेजे गए हैं, जो भले ही कैंपस एक्टिविज्म में शामिल नहीं थे, लेकिन उन्होंने सोशल मीडिया पर ‘इजराइल विरोधी’ पोस्ट को शेयर, लाइक या फिर कमेंट किया।

मेल में कहा गया है कि छात्रों के एफ-1 वीजा रद्द कर दिए गए हैं। छात्रों से खुद को डिपोर्ट करने यानी अमेरिका छोड़ने के लिए कहा गया है। ऐसा न करने पर उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करने की चेतावनी भी दी गई है।

अमेरिकी सरकार ‘कैच एंड रिवोक’ ऐप की मदद से ऐसे छात्रों की पहचान कर रही है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो के मुताबिक 26 मार्च तक 300 से ज्यादा ‘हमास समर्थक’ छात्रों का F-1 वीजा रद्द किया जा चुका है। इसमें कई भारतीय छात्र भी शामिल हैं।

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