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खेल

इंडिया मास्टर्स बनी IML-2025 की चैंपियन…वेस्टइंडीज को हराया:रायपुर में सचिन ने दिलाई पुराने समय की याद; युवराज सिंह ने ली विनर सेल्फी

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रायपुर, एजेंसी। इंटरनेशनल मास्टर्स लीग 2025 के फाइनल में सचिन की टीम ने ब्रायन लारा की वेस्टइंडीज मास्टर्स को 6 विकेट से हरा दिया। जीत के बाद सचिन, युवराज सिंह, इरफान पठान जैसे दिग्गज क्रिकेटर ग्राउंड का चक्कर लगाते हुए दर्शकों का अभिवादन स्वीकार रहे थे। यह नजारा क्रिकेट फैंस को कई यादें दे गया, जब सचिन भारतीय टीम का हिस्सा हुआ करते थे।

रविवार 16 मार्च को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में शहीद वीर नारायण क्रिकेट स्टेडियम में फाइनल मैच खेला गया। ग्रैंड फिनाले में वेस्टइंडीज मास्टर्स के कप्तान ब्रायन लारा ने भी शानदार बैटिंग की। उम्र दराज हो चले खिलाड़ियों में कहीं भी जोश कम नजर नहीं आया। शानदार शॉट लगाकर और विकेट लेकर खिलाड़ी मैदान में माहौल में बनाते रहे।

इंडिया मास्टर्स के कप्तान सचिन तेंदुलकर और वेस्टइंडीज मास्टर्स के कप्तान ब्रायन लारा।

इंडिया मास्टर्स के कप्तान सचिन तेंदुलकर और वेस्टइंडीज मास्टर्स के कप्तान ब्रायन लारा।

सचिन और रायडू की शानदार पार्टनरशिप

इंडिया मास्टर्स ने पहले गेंदबाजी करते हुए विपक्षी टीम वेस्ट इंडीज मास्टर्स को 148/7 के स्कोर पर रोक दिया। लक्ष्य का पीछा करते हुए मास्टर ब्लास्टर तेंदुलकर (25) और अंबाती रायडू (74) की 67 रनों की साझेदारी ने मैच में इंडियन टीम को मजबूत किया।

वेस्टइंडीज मास्टर्स के बल्लेबाज ड्वेन स्मिथ।

वेस्टइंडीज मास्टर्स के बल्लेबाज ड्वेन स्मिथ।

सचिन के शॉट्स ने दर्शकों में भरा जोश

इंडिया मास्टर्स ने अपनी बल्लेबाजी से सबको चौंका दिया, क्योंकि तेंदुलकर और रायडू ने लोगों से खचाखच भरे स्टेडियम में पुराने शॉट्स की याद दिला दी। जिसके लिए यह खिलाड़ी जाने जाते हैं।

इरफान पठान ने कसी हुई गेंदबाजी की।

इरफान पठान ने कसी हुई गेंदबाजी की।

तेंदुलकर ने अपने खास कवर ड्राइव, फ्लिक से मैदान में दर्शकों में जोश भर दिया। रायडू ने आक्रामक रुख अपनाया और वेस्टइंडीज मास्टर्स की गेंदबाजी को ध्वस्त कर दिया। 51 वर्षीय स्टार सचिन ने 18 गेंदों की अपनी पारी के दौरान 2 चौके और एक छक्का लगाकर दर्शकों को रोमांचित कर दिया।

कैरेबियाई पारी को लेंडल सिमंस ने अर्धशतक के साथ संभाले रखा।

कैरेबियाई पारी को लेंडल सिमंस ने अर्धशतक के साथ संभाले रखा।

रायडू ने 34 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया, जबकि गुरकीरत सिंह मान (14) के साथ उनकी दूसरे विकेट की साझेदारी ने भारतीय टोटल में 28 रन जोड़े। मैन ऑफ स्पिनर एश्ले नर्स की गेंद पर शानदार शॉट लगाने के प्रयास में आउट हो गए। उसके बाद युवराज सिंह (नाबाद 13) मैदान पर आए।

सचिन तेंदुलकर की शानदार बल्लेबाजी देखने को मिली, इस दौरान उन्होंने कवर ड्राइव और फ्लिक जैसे शॉट लगाए।

सचिन तेंदुलकर की शानदार बल्लेबाजी देखने को मिली, इस दौरान उन्होंने कवर ड्राइव और फ्लिक जैसे शॉट लगाए।

जब इंडिया मास्टर्स जीत की ओर बढ़ रहा था, तभी वेस्टइंडीज मास्टर्स के स्पिनरों ने रायडू के विकेट ले लिया। रायडू 50 गेंदों की अपनी पारी में 9 चौके और 3 छक्के लगाने के बाद बाएं हाथ के स्पिनर सुलेमान बेन का शिकार बने।

युवराज सिंह अंत तक नाबाद रहे, इंडिया मास्टर्स 6 विकेट से जीती।

युवराज सिंह अंत तक नाबाद रहे, इंडिया मास्टर्स 6 विकेट से जीती।

इसके बाद यूसुफ पठान को नर्स ने आउट कर दिया। हालांकि, अंतिम 28 गेंदों पर भारत को 17 रन की जरूरत थी। स्टुअर्ट बिन्नी (नाबाद 16) ने 2 विशाल छक्के लगाकर इंडिया मास्टर्स को जीत तक पहुंचा दिया।

इंटरनेशनल मास्टर्स लीग 2025 की चैंपियन इंडिया मास्टर्स।

इंटरनेशनल मास्टर्स लीग 2025 की चैंपियन इंडिया मास्टर्स।

इससे पहले, कैरेबियाई टीम ने पहले बल्लेबाजी का फैसला किया और इंडिया मास्टर्स ने अपने गेंदबाजों के दम पर उसे 148/7 के मामूली स्कोर पर रोक दिया। कैरेबियाई पारी को मुख्य रूप से लेंडल सिमंस के अर्धशतक से मजबूती मिली।

टीम का नेतृत्व करते हुए, ब्रायन लारा (6) ने खुद पारी की शुरुआत करने के लिए कदम बढ़ाते हुए एक साहसिक फैसला किया। 55 वर्षीय लारा की मौजूदगी ही दर्शकों में भावनाओं जोश भरने के लिए पर्याप्त थी। इस कैरेबियाई जोड़ी ने नई गेंद पर हमला किया, और चार ओवरों में 34 रन बनाकर इंडिया मास्टर्स के कप्तान सचिन तेंदुलकर को सोचने पर मजबूर कर दिया।

इंटरनेशनल मास्टर्स लीग 2025 की ट्राफी के साथ कप्तान सचिन।

इंटरनेशनल मास्टर्स लीग 2025 की ट्राफी के साथ कप्तान सचिन।

विनय ने लारा को किया आउट

भारत की ओर से विनय कुमार थे, जिन्होंने लारा को आउट करके वेस्टइंडीज मास्टर्स के आक्रमण को रोक दिया। जैसे ही बाएं हाथ के इस दिग्गज बल्लेबाज ने वापसी की, दर्शकों की भीड़, जो उनकी टीम के शुरूआती आक्रमण से खामोश हो गई थी, एक स्वर में उठ खड़ी हुई। न केवल विकेट बल्कि महान क्रिकेटर को भी सराहा।

विलियम पर्किन्स (6) ने लारा की जगह ली, लेकिन जल्द ही शाहबाज नदीम की चालाकी भरी गेंदबाजी का शिकार हो गए।

इसके बाद, इंडिया मास्टर्स ने नदीम और पवन नेगी की स्पिन जोड़ी के साथ मैच पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली, जिससे कैरेबियाई टीम गति पकड़ने के लिए हांफने लगी। रवि रामपॉल (2) को स्टुअर्ट बिन्नी ने उन्हें सस्ते में आउट कर दिया। नेगी ने फिर एक और बड़ा झटका दिया, चाडविक वाल्टन (6) को छक्का लगाने के तुरंत बाद आउट कर दिया।

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कोरबा

सुयश:शास्वत सिंह ने स्टेट लेबल डीएव्ही वुशु (काम्बेट) में जीता सिल्वर मेडल

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कोरबा। डीएव्ही स्कूल का होनहार छात्र शास्वत सिंह ने स्टेट लेबल डीएव्ही वुशु(काम्बेट) खेल प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम किया। इस उपलब्धि पर स्कूल प्रबंधन ने शास्वत सिंह को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं प्रेषित की है।
शास्वत सिंह कोरबा की जानमानी पंचकर्म चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. मनीषा सिंह एवं एसईसीएल से सेवानिवृत्त अधिकारी कन्हैया सिंह के पौत्र हैं।
नेशनल के लिए चयन
शास्वत सिंह का चयन नेशनल लेबल डीएव्ही वुशु (काम्बेट) के लिए हुआ है और शुभचिंतकों, परिजनों एवं विद्यालय प्रबंधन ने बेहतर प्रदर्शन के लिए शास्वत सिंह को शुभकामनाएं प्रेषित की है।

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खेल

विनोद कांबली वृद्धाश्रम में दिखे:बोले- यहां अच्छी सुविधाएं हैं, ऐसा महसूस नहीं होता कि घर से दूर हूं

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मुंबई, एजेंसी। पूर्व भारतीय क्रिकेटर विनोद कांबली का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कांबली ठाणे के वृद्धाश्रम ‘निदान सेंटर फॉर एल्डरली केयर’ में नजर आ रहे हैं।

वीडियो में कांबली कहते दिखे कि यहां अच्छी सुविधाएं हैं। यहां लोगों से बहुत प्यार और सम्मान मिल रहा है। ऐसा महसूस ही नहीं होता कि अपने घर से दूर हूं। हालांकि, कांबली वृद्धाश्रम में रहने गए हैं या नहीं, इस बात की पुष्टि नहीं हुई है।

कांबली को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें

विनोद कांबली काफी समय से बीमारी, पैसों की कमी और अपनी निजी जिंदगी की परेशानियों की वजह से लगातार खबरों में रहे हैं। इससे पहले भी उनके ऐसे वीडियो वायरल हुए थे, जिनमें वे बिना किसी के सहारे चल भी नहीं पा रहे थे।

कांबली के करीबी दोस्त मार्कस कूटो ने बताया था कि उनकी मानसिक स्थिति काफी नाजुक है। उनकी याददाश्त इतनी कमजोर हो गई है कि वे अक्सर भूल जाते हैं कि उन्हें क्या करना है और क्या नहीं। उन्होंने शराब छोड़ दी है, लेकिन वे अक्सर भूल जाते हैं कि उन्हें स्मोकिंग नहीं करना है। वे घर के नीचे जाकर राहगीरों या ऑटो वालों से सिगरेट मांग लेते हैं।

कांबली साल 1993 से 2000 तक भारत के लिए खेले ​​​​​​

कांबली ने भारत के लिए 17 टेस्ट मैच और 104 वनडे मैच खेले हैं। उन्होंने वनडे क्रिकेट में 2477 रन बनाए, जिसमें 2 शतक और 14 अर्धशतक शामिल है। टेस्ट में 4 शतक के साथ उनके 1084 रन हैं। वे भारत के लिए 1993 से 2000 तक खेले।

वे घरेलू क्रिकेट में आखिरी बार साल 2004 में नजर आए। कांबली ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 9665 रन बनाए। इसमें उनका हाईएस्ट स्कोर 262 रन है।

सचिन के साथ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था

कांबली और सचिन तेंदुलकर के बचपन के दोस्त हैं। दोनों ने मुंबई की मशहूर कांगा लीग में एकसाथ डेब्यू किया था। तेंदुलकर-कांबली ने स्कूल में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था। दोनों ने शारदाश्रम स्कूल की तरफ से खेलते हुए 664 रनों की साझेदारी निभाई थी।

इस साझेदारी में कांबली ने नॉटआउट 349 रन बनाए थे। यहीं से दोनों चर्चा में आए। तेंदुलकर ने 1988 में रणजी में डेब्यू किया था, जबकि कांबली को ये मौका एक साल बाद 1989 में मिला।

सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली एक ही स्कूल में पढ़ते थे। दोनों को कोच रमाकांत आचरेकर ने क्रिकेट की बारीकियां सिखाई थीं।

सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली एक ही स्कूल में पढ़ते थे। दोनों को कोच रमाकांत आचरेकर ने क्रिकेट की बारीकियां सिखाई थीं।

1996 वर्ल्ड कप में मैदान पर रोए

13 मार्च 1996 को कोलकाता के ईडन गार्डन्स में भारत और श्रीलंका के बीच वर्ल्ड कप का सेमीफाइनल खेला गया। श्रीलंका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 251 रन बनाए। जवाब में भारतीय टीम ने एक समय 98 रन पर सिर्फ एक विकेट गंवाया था और अच्छी स्थिति में थी। लेकिन सचिन तेंदुलकर के आउट होते ही भारतीय पारी लड़खड़ा गई। टीम इंडिया ने 120 रन तक पहुंचते-पहुंचते 8 विकेट गंवा दिए।

35वां ओवर शुरू होना था और भारत को 89 गेंदों में 132 रन चाहिए थे। विनोद कांबली 10 रन और अनिल कुंबले बिना खाता खोले क्रीज पर थे। तभी दर्शकों ने मैदान पर बोतलें फेंकना शुरू कर दिया। स्टेडियम के एक हिस्से में आग भी लगा दी गई। हालात बिगड़ने के बाद मैच रोक दिया गया और श्रीलंका को विजेता घोषित कर दिया गया।

मैच खत्म होने के बाद जब भारतीय खिलाड़ी मैदान से बाहर लौट रहे थे, तब विनोद कांबली अपने आंसू नहीं रोक सके। वह मैदान पर ही रो पड़े

मैच खत्म होने के बाद नाबाद रहे कांबली मैदान पर ही रोने लगे थे।

मैच खत्म होने के बाद नाबाद रहे कांबली मैदान पर ही रोने लगे थे।

कांबली ने कीं दो शादियां

कांबली की निजी जिंदगी भी कुछ खास सफल नहीं रही। उन्होंने 1998 में नोएला लुईस से पहली शादी की थी। बाद में दोनों का डिवोर्स हो गया।

इसके बाद कांबली ने फैशन मॉडल एंड्रिया हेविट से शादी की और अब तक साथ हैं। जून 2010 में एंड्रिया ने कांबली के बेटे जीसस क्रिस्टियानो को जन्म दिया।

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कोरबा

कोरबा की बेटी संजू देवी ने एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर बढ़ाया देश-प्रदेश का गौरव – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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मुख्यमंत्री ने भारतीय महिला कबड्डी टीम की सदस्य संजू देवी से फोन पर की आत्मीय बातचीत, स्वर्णिम सफलता के लिए दी बधाई

मुख्यमंत्री ने कहा – संजू देवी की उपलब्धि प्रदेश की बेटियों और युवा खिलाड़ियों के लिए बनेगी प्रेरणा

एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला कबड्डी टीम ने ईरान को पराजित कर जीता स्वर्ण पदक

भारतीय टीम की ऐतिहासिक जीत में कोरबा की संजू देवी ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

कोरबा, 26 सितंबर 2026। जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला कबड्डी टीम ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस स्वर्णिम सफलता में कोरबा जिले के ग्राम केराकछार की रहने वाली भारतीय महिला कबड्डी खिलाड़ी संजू देवी (संजू यादव) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारत ने फाइनल मुकाबले में ईरान को पराजित कर स्वर्ण पदक हासिल किया।

भारतीय महिला कबड्डी टीम की इस ऐतिहासिक सफलता पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कोरबा की बेटी संजू देवी से फोन पर आत्मीय बातचीत की और उन्हें स्वर्ण पदक जीतने पर बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने संजू के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि उनकी उपलब्धि से पूरा छत्तीसगढ़ गौरवान्वित है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि संजू देवी ने अपनी प्रतिभा, कड़ी मेहनत और खेल कौशल के बल पर न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है। एशियन गेम्स जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय महिला कबड्डी टीम की स्वर्णिम सफलता में छत्तीसगढ़ की बेटी की भागीदारी प्रदेश के लिए विशेष गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि संजू की सफलता प्रदेश की उन बेटियों और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी, जो खेल के क्षेत्र में आगे बढ़कर देश और प्रदेश का नाम रोशन करने का सपना देखते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की बेटियां आज शिक्षा, खेल सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा और सामर्थ्य का परिचय दे रही हैं। कोरबा के छोटे से गांव केराकछार से निकलकर राष्ट्रीय टीम तक पहुंचने और अब एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम का हिस्सा बनना संजू देवी की मेहनत और संघर्ष का परिणाम है। प्रदेश सरकार राज्य की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए बेहतर प्रशिक्षण, सुविधाएं और अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है, ताकि गांवों, आदिवासी अंचलों और छोटे शहरों की प्रतिभाएं राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकें।
संजू देवी का जन्म 19 दिसंबर 2002 को हुआ। उनके पिता रामजी यादव ड्राइवर एवं दैनिक मजदूरी का कार्य करते हैं, जबकि माता श्रीमती अमरिका बाई गृहिणी हैं। उनका मूल निवास ग्राम केराकछार, पाली ब्लॉक, जिला कोरबा है। साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से आने वाली संजू ने अपने खेल के जुनून और निरंतर मेहनत के बल पर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक का सफर तय किया है।
संजू ने कक्षा पांचवीं से अपने गांव के स्कूल में कबड्डी खेलना शुरू किया था। उनकी प्रतिभा को जिला कबड्डी संघ के कोच अनुज प्रताप सिंह ने पहचाना और उन्हें प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन दिया। इसके बाद संजू ने कबड्डी में लगातार बेहतर प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह बनाई। वर्तमान में वे बहतराई बालिका आवासीय खेल अकादमी, बिलासपुर में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में भी संजू ने अपनी पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने शासकीय महाविद्यालय, कटघोरा से उच्च शिक्षा प्राप्त की तथा आईटीआई की पढ़ाई भी पूरी की है। कबड्डी में वे मुख्य रूप से रेडर की भूमिका निभाती हैं।
संजू देवी के अंतरराष्ट्रीय करियर में वर्ष 2025 भी महत्वपूर्ण रहा। ढाका, बांग्लादेश में आयोजित महिला कबड्डी वर्ल्ड कप में उन्होंने भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया और टीम की स्वर्ण पदक जीत में योगदान दिया। वे 2025 की विश्व कप विजेता भारतीय टीम की सदस्य रहीं और टूर्नामेंट में उनके प्रदर्शन को भी विशेष रूप से सराहा गया। एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय महिला टीम की घोषित 12 सदस्यीय टीम में भी संजू देवी शामिल रहीं।
एशियन गेम्स 2026 में संजू ने प्रतियोगिता के शुरुआती मुकाबलों में भी भारतीय टीम के आक्रमण में अहम भूमिका निभाई। बांग्लादेश के खिलाफ भारत की 42-21 की जीत में उनके सफल रेड निर्णायक रहे। सेमीफाइनल में नेपाल के खिलाफ भारत की 48-24 की जीत में भी संजू देवी ने लगातार प्रभावी रेड कर टीम की जीत में योगदान दिया।
संजू देवी की यह उपलब्धि कोरबा सहित पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। गांव के स्कूल से कबड्डी का सफर शुरू करने वाली संजू ने अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर अपनी पहचान बनाई है। एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अपने परिवार, कोरबा और छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया है।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ ओलिंपिक संघ के महासचिव विक्रम सिसोदिया भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री श्री साय ने भारतीय महिला कबड्डी टीम के सभी खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों एवं सहयोगी स्टाफ को भी स्वर्णिम सफलता के लिए बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

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