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छत्तीसगढ़

विष्णु के सुशासन का एक वर्ष:खुशहाल छत्तीसगढ़ के लिए अपराध नियंत्रण भी जरूरी

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यह दो मत नहीं कि भाजपा सरकार बनते ही कुछ हद तक एक साल में छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार की लगी जंक को विष्णु सरकार ने धोने की कोशिश की और युवाओं तथा जनता का विश्वास पाने में सफल हुई। खासकर सीजी पीएससी घोटाले से तात्कालीन कांग्रेस सरकार के प्रति युवाओं में आक्रोश और उदासी छायी हुई थी और युवाओं ने समझा कि बड़े पदों पर सिर्फ रसूखदारों का ही आधिपत्य होगा। जिस तरह से सीजी पीएससी के चेयरमेन टामन सोनवानी ने अपने रिश्तेदारों, राजनेताओं के बच्चों, अधिकारियों के बच्चों को सलेक्ट कर डिप्टी कलेक्टर जैसे पदों पर नियुक्ति दे दी। विपक्ष में रहकर भाजपा ने जिस कदर पीएससी घोटाले को उजागर किया और जांच की मांग की। साथ ही यह भी कहा कि यदि प्रदेश में भाजपा की सरकार आती है तो सीजीपीएससी घोटाले के आरोपियों को जेल भेजेंगे। युवाओं ने भाजपा पर भरोसा किया और भ्रष्ट कांग्रेस शासन को उखाड़ फेंका। कई मामलों में कांग्रेस की तात्कालीन सरकार ने प्रदेश को लूटा और भाजपा के कहे अनुसार एटीएम बनकर छत्तीसगढ़ के करोड़ों रूपयों को दिल्ली भेजा। केन्द्रीय मंत्री अमित शाह ने गत विधानसभा चुनाव के पूर्व कांग्रेस पर हमलावर हुए और केन्द्रीय एजेंसियों की कार्यवाही से डीएमएफ घोटाला, कोयला लेवी घोटाला, महादेव सट्टा एप में कांग्रेसियों और अधिकारियों की संलिप्ता उजागर हुई। जनता ने भाजपा पर स्वच्छ सरकार देने की अपेक्षा के साथ बंपर वोट दिया और प्रदेश में विष्णु के सुशासन का सूर्योदय हुआ।
मातृ शक्ति सशक्त हुई आर्थिक दृष्टि से। महतारी वंदन योजना से महिलाओं में भी उत्साह था और मातृ शक्ति ने भी भाजपा को जिताने में अहम भूमिका निभाई। कांग्रेस 72 से 35 में सिमट गई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह की छवि से भाजपा को बेहद लाभ हुआ तथा 54 सीटों पर जीत दर्ज कर सरकार बनी और लोगों को उम्मीद थी कि फिर से डॉ रमन सिंह मुख्यमंत्री बनेंगे, लेकिन भाजपा ऐसी पार्टी है जो सभी को अवसर देती है। आदिवासी क्षेत्रों में भाजपा को एकतरफा जनादेश मिला और वरिष्ठ आदिवासी नेता विष्णुदेव साय को छत्तीसगढ़ की कमान सौंप दी गई।
सरल, सौम्य और सबकी सुनने वाले विष्णुदेव साय ने मोदी की गारंटी और विष्णु का सुशासन के ध्येय वाक्य को लेकर कुर्सी संभाली और जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए काम प्रारंभ किया। 13 दिसंबर 2023 को कुर्सी संभालने के बाद विष्णु सरकार ने उन 18 लाख गरीब परिवारों की सुध ली, जो भूपेश सरकार के समय छत का इंतजार करते-करते थक गए लेकिन गरीबों को पीएम आवास से वंचित कर दिया। 18 लाख प्रधानमंत्री आवास नहीं बना,इसके लिए भूपेश सरकार ने केन्द्र सरकार को जिम्मेदार ठहरा कर जनता को गुमराह करने की कोशीश की। यदि गरीब हित का जज्बा भूपेश सरकार में रहता तो वह सडक़ की लड़ाई लड़ती, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और अपना पल्ला झाडक़र गरीबों का बड़ा नुकसान किया।
आज गरीब परिवार को रोटी, कपड़ा और मकान की सबसे ज्यादा जरूरत रहती है। भूपेश सरकार ने रोटी और कपड़ा का जुगाड़ तो कर दिया, लेकिन गरीबों का सपना उस समय चकनाचूर हो गया, जब 18 लाख प्रधानमंत्री आवास को बनने ही नहीं दिय और आरोप मढ़ दिया केन्द्र पर । भ्रष्ट शासन 5 साल में ही उखड़ गया।
भूपेश सरकार ने प्रदेश में ऐसी-ऐसी योजनाएं लायी, जिसे भाजपा के लोग कभी सोच भी नहीं सकते थे। प्रारंभिक काल में भूपेश सरकार का ग्राफ बढ़ता गया और भाजपा को भी चिंता हो गई थी कि क्या फिर भूपेश रमन की तरह 15 साल राज करेंगे। दो साल बाद डीएमएफ में 20 से 30 प्रतिशत की कमीशन खोरी ने भूपेश सरकार को जमीन से उठाकर आसमान में उडऩे के लिए मजबूर कर दिया और भूपेश सरकार की लूट की वजह से राजनेता, कुछ कमीशनखोर अधिकारी हवा में उडऩे लगे और भूपेश सरकार की जमीन से लगाव हटता गया और भूपेश का राज सार्वजनिक होने में देर नहीं लगी, क्योंकि ईडी ने जनता को दिखा दिया कि भूपेश सरकार जनता की हितैषी नहीं बल्कि, लूटेरी सरकार है। चुनाव आते-आते जनता ने भूपेश सरकार की जमीनी हकीकत को भांप लिया और कुर्सी से उतार दिया। भूपेश की अकल्पनीय योजनाएं धरातल पर उतरी ही नहीं।
भूपेश की बड़ी सोच जनता को भाने लगी थी। भूपेश की सोच थी कि जब तक हम गांव को स्वावलंबी नहीं बनाएंगे, तब तक प्रदेश की तरक्की नहीं हो सकती। भूपेश ने ग्रामीणों को स्वावलंबी बनाने के लिए किसानों के लिए खजाना खोल दिया, रीपा की नई योजना को देश भर में प्रशंसा मिली, आदिवासी संस्कृति और विरासत को नई पहचान मिली, रामवनपथ गमन योजना से प्रदेश की पहचान पूरे देश में होने लगी। इसके बावजूद भी एक गलती ने भूपेश की बड़ी सोच को बदल दिया। भ्रष्टाचार का बड़ा बोलबाला और अधिकारियों की निरंकुशता ने जनता को भूपेश सरकार के प्रति मोह भंग करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
अब जब भाजपा का सुशासन आया है तो विष्णु देवसाय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार किसानों के लिए खजाना खोल दिया, तेंदू पत्ता संग्राहकों को समृद्धि का नया रास्ता दिखाया, रमन सिंह के कार्यकाल की कई बड़ी योजनाएं फिर से प्रारंभ होंगी। महतारी वंदन योजना से महिलाओं को बड़ी राहत मिल रही है।
विष्णु के सुशासन को आगे बढ़ाने में केन्द्रीय मंत्री नितीन गडकरी, रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव, तात्कालीन रेल मंत्री पियुष गोयल की भी बड़ी भूमिका मानी जा रही है। सडक़ और रेल परिवहन की जाल प्रदेश में बिछने लगी है। रेल और सडक़ परिवहन जितनी सुविधाजनक होगी, उस राज्य की तरक्की को कोई नहीं रोक सकता। प्रदेश में सडक़ें चमचमा रही हैं और प्रदेश आगे बढ़ रहा है।
विष्णु के सुशासन पर कुछ कमजोरियों को भी उजागर करना जरूरी है ताकि सरकार इस ओर भी ध्यान दे और जनता की खुशहाली और बढ़े और प्रदेश के मुखिया का मान बढ़े तथा जनता के दिलों में शासन के प्रति रिश्ता और प्रगाढ़ हो। आज प्रदेश में पुलिसिंग और प्रशासन में कसावट जरूरी है, ताकि प्रदेश की जनता किसी भी अधिकारी या मंत्री के पास आसानी से पहुंच जाए और अपनी समस्याएं बता सके। आज प्रदेश के कई हिस्सों में जिस तरह से अपराध घट रहे हैं, उससे सरकार की छवि धूमिल हो रही है। अपराध के लिए साजिश कर्ताओं का भंडाफोड़ जरूरी है, ताकि विष्णु का सुशासन सूर्योदय की तरह देश में ही नहीं विदेश में भी दैदिव्यमान होता रहे और भाजपा सरकार की उम्र बढ़ती जाए।
पुलिसिंग और प्रशासन को और अधिक चुस्त करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। देखने में आ रहा है कि विभागों के अधिकारी अपनी मर्जी चला रहे हैं और जनता कई विभागों में परेशान दिख रही है। भाजपा सरकार का दावा है कि भ्रष्टाचार पर जीरो टारलेंस पर सरकार काम कर रही है, लेकिन यह हकीकत से कोसों दूर है। रेत तस्करी पर प्रशासन की कहीं भी सख्ती नहीं दिखाई दे रही है। पीडीएस का चावल राशन दुकानों पर पहुंच रहा है।
हालांकि महतारी वंदन योजना से सरकार स्वयं की पीठ थपथपा तो रही है और समझ रही है कि 1000 की राशि से महिलाओं में सशक्तिकरण हो रहा है और उनकी जरूरतें पूरी हो रही है। दूसरी तरफ भाजपा शासन काल में महंगाई चरम पर पहुंच गई है और उन्हें लगता है कि प्रदेश खुशहाल हो गया है। तरक्की तो हो रही है… इसमें कोई दो मत नहीं, लेकिन महंगाई ने मध्यम एवं गरीब परिवार की कमर ही तोड़ दी है। कोरोना काल के बाद दवाईयों की कीमत 400 गुना बढ़ गई है और सरकार कहती है कि देश आगे बढ़ रहा है। महंगाई पर नियंत्रण जरूरी है। कम से कम जीवन रक्षक दवाईयों की कीमत कुछ सालों तक स्थित रहे, तो लोगों को कुछ राहत मिलेगी, लेकिन यहां दवाईयोंं का दाम भी हरी साग सब्जी की तरह रोज बढ़ रहा है।
खाद्य सामाग्रियों की ही बात करें तो भाजपा सरकार में 1 रूपए जब कीमत कम होती है और सरकार पीठ थपथपाने लगती है कि हमने कीमत कम की, लेकिन वही सामान एक सप्ताह बाद 10 रूपए बढ़ता है तो सरकार का फिर बयान आता है कि हम कीमत कंट्रोल कर रहे हैं। निरंतर खाद्यान्न सहित सभी सामानों की कीमत बढ़ती जा रही है और जनता घूटन सी महसूस कर रही है। आखिर वह दिन कब आएगा जब लोगों को लगे… अच्छे दिन आ रहे हैं। विष्णु के सुशासन में सबसे अहम बात यह है कि प्रदेश में घट रही घटनाओं सहित महिला अपराधों पर नियंत्रण हो और देश के सबसे शांति प्रिय के रूप में विख्यात टापू को राम राज्य की परिकल्पना के आधार पर विकसित, सुंदर, समन्वित विकास की ओर ले जाएं…।

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छत्तीसगढ़

PIB रायपुर का मीडिया दल गुजरात रवाना:बुलेट ट्रेन, अमूल, गिफ्ट सिटी और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का करेंगे अध्ययन, 12 पत्रकार और दो अधिकारी शामिल

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रायपुर, एजेंसी। पत्र सूचना कार्यालय (PIB) रायपुर की तरफ से आयोजित पांच दिवसीय मीडिया अध्ययन दौरे के तहत छत्तीसगढ़ के प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और सोशल मीडिया से जुड़े 12 पत्रकारों और पत्र सूचना कार्यालय के दो अधिकारियों का दल रविवार शाम रायपुर से अहमदाबाद के लिए रवाना हुआ। यह अध्ययन दौरा 20 से 24 जुलाई तक आयोजित किया जाएगा।

अध्ययन दौरे का उद्देश्य मीडिया प्रतिनिधियों को देश की प्रमुख विकास परियोजनाओं, औद्योगिक प्रतिष्ठानों, आधुनिक तकनीकी संस्थानों और राष्ट्रीय महत्व के स्थलों से प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराना है। इससे पत्रकारों को विकास संबंधी विषयों की बेहतर समझ विकसित होगी। जनहित के मुद्दों पर तथ्यपरक और संतुलित रिपोर्टिंग में मदद मिलेगी।

बुलेट ट्रेन और कोचरब आश्रम का करेंगे भ्रमण

दौरे के दौरान मीडिया दल अहमदाबाद स्थित पत्र सूचना कार्यालय का भ्रमण करेगा। साथ ही महात्मा गांधी के प्रथम सत्याग्रह स्थल कोचरब आश्रम, मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन) परियोजना और साबरमती मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब का अवलोकन कर आधुनिक परिवहन अवसंरचना की जानकारी प्राप्त करेगा।

लोथल से सेमीकंडक्टर प्लांट तक का अध्ययन

दल लोथल में सिंधु घाटी सभ्यता की विरासत और विकसित हो रहे राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर का भ्रमण करेगा। इसके अलावा माइक्रोन सेमीकंडक्टर संयंत्र का दौरा कर भारत के उभरते सेमीकंडक्टर विनिर्माण क्षेत्र और अत्याधुनिक तकनीक से भी रूबरू होगा।

अमूल, IOCL और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी भी शामिल

मीडिया प्रतिनिधि आणंद स्थित अमूल डेयरी के सफल सहकारी मॉडल और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) रिफाइनरी की आधुनिक ऊर्जा एवं शोधन प्रक्रियाओं का अध्ययन करेंगे। इसके साथ ही स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और सरदार सरोवर बांध का भ्रमण कर जल संसाधन प्रबंधन, सिंचाई, ऊर्जा उत्पादन और पर्यटन विकास के विभिन्न पहलुओं को समझेंगे।

गिफ्ट सिटी और फॉरेंसिक यूनिवर्सिटी का भी दौरा

दौरे के अंतिम चरण में पत्रकार राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय में फॉरेंसिक साइंस, साइबर सुरक्षा और अपराध अनुसंधान से जुड़े नवाचारों की जानकारी लेंगे। इसके बाद गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (गिफ्ट सिटी) का भ्रमण कर भारत के पहले अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र और वित्तीय प्रौद्योगिकी के विकसित होते पारिस्थितिकी तंत्र को समझेंगे।

तथ्यपरक रिपोर्टिंग को मिलेगा बढ़ावा

पत्र सूचना कार्यालय के अनुसार, यह अध्ययन दौरा मीडिया प्रतिनिधियों को राष्ट्रीय विकास, औद्योगिक प्रगति, तकनीकी नवाचार और जनकल्याण से जुड़ी परियोजनाओं को नजदीक से समझने का अवसर देगा। इससे आमजन तक विकास से जुड़ी प्रमाणिक, तथ्यपरक और उपयोगी जानकारी अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में मदद मिलेगी।

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छत्तीसगढ़

सर्पदंश मुआवजा घोटाला, महिला डॉक्टर के बाद 3 क्लर्क अरेस्ट:बिलासपुर में फर्जी पीएम रिपोर्ट से 17 करोड़ का फर्जीवाड़ा, 17 केस की जांच

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बिलासपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में सर्पदंश से मौत का फर्जी रिपोर्ट बनाकर 17 करोड़ से अधिक का मुआवजा घोटाला किया गया। इस मामले की जांच फर्जी पीएम रिपोर्ट बनाने वाले डॉक्टर के बाद तहसील ऑफिस तक पहुंच गई। पुलिस ने सिम्स की तत्कालीन महिला डॉक्टर के बाद अब एसडीएम और तहसीलदार के 3 बाबू को गिरफ्तार किया है।

आरोप है कि इन्होंने सर्पदंश का फर्जी केस बनाकर मुआवजा राशि का बंदरबाट किया है। दरअसल, विधानसभा में बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने ध्यानाकर्षण के जरिए एक बड़ा मुद्दा उठाया था। अब बिलासपुर जिले में सर्पदंश के फर्जी आंकड़े देकर हुए 17.24 करोड़ रुपए के मुआवजा घोटाले की जांच चल रही है।

मामले में अब तक 14 एफआईआर (FIR) दर्ज हो चुकी हैं। एसएसपी रजनेश सिंह ने इस फर्जी मुआवजा कांड को गंभीरता से लिया है। वो खुद लगातार सभी मामलों की जांच की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। यही वजह है कि पुलिस फर्जी रिपोर्ट बनाने वाले एक-एक अधिकारी-कर्मचारी को चिन्हित कर गिरफ्तार कर रही है। मामला सरकंडा थाना क्षेत्र का है।

क्या है पूरा मामला

दरअसल, जशपुर जिले में पिछले 3 साल में केवल 96 मौतें दर्ज हुईं। जबकि अकेले बिलासपुर में 431 मौतें बताकर 17 करोड़ 24 लाख रुपए का मुआवजा दिया गया। विधानसभा में काफी हंगामे के बाद इस पर सदन में राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की बात कही थी।

शासन के नियमों के अनुसार, सांप काटने पर 4 लाख रुपए मुआवजे का प्रावधान है। यही वजह है कि सरकारी मुआवजा हासिल करने लोगों ने अपने परिजनों की सामान्य मौत को सर्पदंश बताकर सरकार से लाखों रुपए मुआवजा ले लिए।

इसके लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और मौत का कारण बदलकर मुआवजे के लिए आवेदन जमा किया गया। जांच में यह भी पता चला है कि कुछ मामलों में बिना परिजनों की सहमति के आरोपी मुआवजा लेकर बंदरबांट कर चुके हैं।

महिला डॉक्टर प्रियंका सोनी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।

महिला डॉक्टर प्रियंका सोनी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।

महिला डॉक्टर के बाद तहसील ऑफिस के 3 बाबू गिरफ्तार

इस केस में एक दिन पहले तोरवा पुलिस ने सिम्स में पदस्थ रहीं तत्कालीन महिला डॉक्टर प्रियंका सोनी को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। आरोपी डॉक्टर पर सांप काटने से मौत की फर्जी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तैयार कर सरकार को लाखों रुपए का चूना लगाने का आरोप है।

वहीं, रविवार को अवकाश के दिन सरकंडा पुलिस ने तहसील ऑफिस के तीन क्लर्क को गिरफ्तार किया है। इनमें एसडीएम ऑफिस के बाबू नरेंद्र कौशिक, गरीब राम बिंझवार और तहसीलदार का क्लर्क हरिशंकर राठौर शामिल हैं।

राजस्व विभाग के इन कर्मचारियों पर आरोप है कि इन्होंने फर्जी प्रकरण रजिस्टर्ड कर अपने आईडी से रिपोर्ट बनाया था, जिसके माध्यम से शासन से मुआवजा मिला। इनके अलावा पांच साल के भीतर अलग-अलग मामलों रिपोर्ट देने वाले दर्जन भर डॉक्टरों से भी पुलिस की पूछताछ जारी है।

तहसीलदार का ड्राइवर निकला सरगना

पुलिस ने इन मामलों में अब तक तहसील कार्यालय में निगम से अटैच ड्राइवर गोविंद विश्वकर्मा, अधिवक्ता खांडेकर, बिल्हा रंजीत चतुर्वेदी समेत दर्जन भर लोगों को गिरफ्तार जेल भेज चुकी है। पुलिस की जांच में तहसीलदार के ड्राइवर गोविंद विश्वकर्मा को इस कांड का सरगना बताया जा रहा है।

उसने राजस्व कर्मचारियों के साथ मिलकर फर्जी मुआवजा रिपोर्ट बनाने में अहम भूमिका निभाई। पुलिस की जांच में सिम्स और अन्य तहसीलों के स्वास्थ्य केंद्रों के डॉक्टरों के नाम भी सामने आ रहे हैं।

वकील और रिश्तेदार का सिंडिकेट, और भी डॉक्टर नपेंगे

पुलिस के मुताबिक इस घोटाले के पीछे एक पूरा सिंडिकेट काम कर रहा था। तोरवा पुलिस इस मामले में मृतक निसार खान की पत्नी सफीना बानो, लता सूर्यवंशी के पति संतोष सूर्यवंशी और एक वकील रंजीत कुमार चतुर्वेदी को पहले ही जेल भेज चुकी है।

गिरोह का मुख्य मास्टरमाइंड वकील श्रवण वस्त्रकार फिलहाल फरार है, जिसकी तलाश जारी है। जिले में ऐसे 15 संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जिसमें सिम्स के 4 से 5 अन्य डॉक्टर भी पुलिस की रडार पर हैं।

जांजगीर के अधिवक्ता समेत तहसील के कर्मचारी भी गिरफ्तार

इस मामले की परतें लगातार खुल रही हैं। दो दिन पहले ही 16 जुलाई को सरकंडा पुलिस फर्जी स्नेक बाइट के 5 मामलों में बड़ी कार्रवाई करते हुए वकील हीराप्रसाद खांडेकर, बैंककर्मी कुशकुमार गुप्ता, कथित वकील महेन्द्र कुमार और तहसीलदार के दैनिक वेतनभोगी चालक गोविंद विश्वकर्मा को गिरफ्तार कर चुकी है।

2025 में सामने आया था पहला मामला

फर्जी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का पहला मामला 2025 में बिल्हा थाना क्षेत्र से सामने आया था। उस केस में जहर खाने से हुई मौत को सर्पदंश बताकर फर्जी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तैयार की गई थी। उस समय भी डॉ. प्रियंका सोनी, मृतक के परिजन और एक अधिवक्ता को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।

इसके बाद पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू की, जिसमें कई और संदिग्ध केस सामने आए।

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छत्तीसगढ़

कांग्रेस बोली- स्कूलों में 57 हजार शिक्षकों के पद खाली:धनंजय ठाकुर बोले- 12,560 से ज्यादा स्कूल भवन जर्जर, सुविधाओं का भी अभाव

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रायपुर, एजेंसी। प्रदेश कांग्रेस ने राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस का कहना है कि नया शिक्षा सत्र शुरू हुए करीब दो महीने हो चुके हैं, लेकिन अब भी कई स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं और पढ़ाई के लिए जरूरी सुविधाओं का अभाव है। इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।

कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में करीब 57 हजार शिक्षकों के पद खाली हैं। उनका आरोप है कि भाजपा सरकार ने अपने ढाई साल के कार्यकाल में नियमित रूप से एक भी नए शिक्षक की भर्ती नहीं की। उन्होंने कहा कि संविलियन के नाम पर शिक्षकों के पद खत्म किए गए और 10,400 से अधिक स्कूल बंद कर दिए गए।

कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में करीब 57 हजार शिक्षकों के पद खाली हैं।

कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में करीब 57 हजार शिक्षकों के पद खाली हैं।

शिक्षक भर्ती की घोषणा पूरी नहीं होने का आरोप

कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय ठाकुर ने कहा कि भाजपा सरकार ने शिक्षक भर्ती को लेकर कई घोषणाएं कीं, लेकिन उन्हें लागू नहीं किया। तत्कालीन शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने विधानसभा में 35 हजार शिक्षकों की भर्ती की घोषणा की थी, लेकिन भर्ती नहीं हुई।

इसके बाद वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने साल 2025 के बजट में 20 हजार शिक्षकों की भर्ती का ऐलान किया, लेकिन उस पर भी अमल नहीं हुआ। वहीं, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 5 हजार शिक्षकों की भर्ती जल्द शुरू करने की बात कही थी, लेकिन नया शिक्षा सत्र शुरू होने के बाद भी भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी।

छत्तीसगढ़ के कई स्कूलों की हालत जर्जर

छत्तीसगढ़ के कई स्कूलों की हालत जर्जर

हर महीने शिक्षक रिटायर, नई भर्ती नहीं होने का आरोप

कांग्रेस का आरोप है कि हर महीने सैकड़ों शिक्षक रिटायर हो रहे हैं, लेकिन पिछले डेढ़ साल में सरकार एक भी नियमित शिक्षक की नियुक्ति नहीं कर सकी। कांग्रेस नेता शुक्ला ने दावा किया कि रायपुर जिले के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट स्कूलों में ही 250 से अधिक शिक्षकों के पद खाली हैं।

नगर निगम के स्कूलों में सहायक शिक्षक ही व्याख्याता की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उनका कहना है कि पूरे प्रदेश में शिक्षकों की कमी की स्थिति इससे भी अधिक गंभीर है।

तत्कालीन शिक्षामंत्री ने दी थी शिक्षकों के भर्ती की जानकारी

तत्कालीन शिक्षामंत्री ने दी थी शिक्षकों के भर्ती की जानकारी

स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी

कांग्रेस ने स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा भी उठाया। शुक्ला ने कहा कि सरकार अब तक सभी स्कूलों में पाठ्यपुस्तकें नहीं पहुंचा पाई है। उनका दावा है कि प्रदेश के 12,560 से अधिक स्कूल भवन जर्जर हैं, जहां बारिश के दौरान छत टपकती है।

कई स्कूलों में पीने के साफ पानी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं भी नहीं हैं। उनका आरोप है कि इन समस्याओं के कारण कई छात्राएं पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो रही हैं। कांग्रेस ने इसे सरकार की शिक्षा के प्रति उदासीनता बताते हुए व्यवस्था में सुधार की मांग की।

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