यह दो मत नहीं कि भाजपा सरकार बनते ही कुछ हद तक एक साल में छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार की लगी जंक को विष्णु सरकार ने धोने की कोशिश की और युवाओं तथा जनता का विश्वास पाने में सफल हुई। खासकर सीजी पीएससी घोटाले से तात्कालीन कांग्रेस सरकार के प्रति युवाओं में आक्रोश और उदासी छायी हुई थी और युवाओं ने समझा कि बड़े पदों पर सिर्फ रसूखदारों का ही आधिपत्य होगा। जिस तरह से सीजी पीएससी के चेयरमेन टामन सोनवानी ने अपने रिश्तेदारों, राजनेताओं के बच्चों, अधिकारियों के बच्चों को सलेक्ट कर डिप्टी कलेक्टर जैसे पदों पर नियुक्ति दे दी। विपक्ष में रहकर भाजपा ने जिस कदर पीएससी घोटाले को उजागर किया और जांच की मांग की। साथ ही यह भी कहा कि यदि प्रदेश में भाजपा की सरकार आती है तो सीजीपीएससी घोटाले के आरोपियों को जेल भेजेंगे। युवाओं ने भाजपा पर भरोसा किया और भ्रष्ट कांग्रेस शासन को उखाड़ फेंका। कई मामलों में कांग्रेस की तात्कालीन सरकार ने प्रदेश को लूटा और भाजपा के कहे अनुसार एटीएम बनकर छत्तीसगढ़ के करोड़ों रूपयों को दिल्ली भेजा। केन्द्रीय मंत्री अमित शाह ने गत विधानसभा चुनाव के पूर्व कांग्रेस पर हमलावर हुए और केन्द्रीय एजेंसियों की कार्यवाही से डीएमएफ घोटाला, कोयला लेवी घोटाला, महादेव सट्टा एप में कांग्रेसियों और अधिकारियों की संलिप्ता उजागर हुई। जनता ने भाजपा पर स्वच्छ सरकार देने की अपेक्षा के साथ बंपर वोट दिया और प्रदेश में विष्णु के सुशासन का सूर्योदय हुआ। मातृ शक्ति सशक्त हुई आर्थिक दृष्टि से। महतारी वंदन योजना से महिलाओं में भी उत्साह था और मातृ शक्ति ने भी भाजपा को जिताने में अहम भूमिका निभाई। कांग्रेस 72 से 35 में सिमट गई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह की छवि से भाजपा को बेहद लाभ हुआ तथा 54 सीटों पर जीत दर्ज कर सरकार बनी और लोगों को उम्मीद थी कि फिर से डॉ रमन सिंह मुख्यमंत्री बनेंगे, लेकिन भाजपा ऐसी पार्टी है जो सभी को अवसर देती है। आदिवासी क्षेत्रों में भाजपा को एकतरफा जनादेश मिला और वरिष्ठ आदिवासी नेता विष्णुदेव साय को छत्तीसगढ़ की कमान सौंप दी गई। सरल, सौम्य और सबकी सुनने वाले विष्णुदेव साय ने मोदी की गारंटी और विष्णु का सुशासन के ध्येय वाक्य को लेकर कुर्सी संभाली और जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए काम प्रारंभ किया। 13 दिसंबर 2023 को कुर्सी संभालने के बाद विष्णु सरकार ने उन 18 लाख गरीब परिवारों की सुध ली, जो भूपेश सरकार के समय छत का इंतजार करते-करते थक गए लेकिन गरीबों को पीएम आवास से वंचित कर दिया। 18 लाख प्रधानमंत्री आवास नहीं बना,इसके लिए भूपेश सरकार ने केन्द्र सरकार को जिम्मेदार ठहरा कर जनता को गुमराह करने की कोशीश की। यदि गरीब हित का जज्बा भूपेश सरकार में रहता तो वह सडक़ की लड़ाई लड़ती, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और अपना पल्ला झाडक़र गरीबों का बड़ा नुकसान किया। आज गरीब परिवार को रोटी, कपड़ा और मकान की सबसे ज्यादा जरूरत रहती है। भूपेश सरकार ने रोटी और कपड़ा का जुगाड़ तो कर दिया, लेकिन गरीबों का सपना उस समय चकनाचूर हो गया, जब 18 लाख प्रधानमंत्री आवास को बनने ही नहीं दिय और आरोप मढ़ दिया केन्द्र पर । भ्रष्ट शासन 5 साल में ही उखड़ गया। भूपेश सरकार ने प्रदेश में ऐसी-ऐसी योजनाएं लायी, जिसे भाजपा के लोग कभी सोच भी नहीं सकते थे। प्रारंभिक काल में भूपेश सरकार का ग्राफ बढ़ता गया और भाजपा को भी चिंता हो गई थी कि क्या फिर भूपेश रमन की तरह 15 साल राज करेंगे। दो साल बाद डीएमएफ में 20 से 30 प्रतिशत की कमीशन खोरी ने भूपेश सरकार को जमीन से उठाकर आसमान में उडऩे के लिए मजबूर कर दिया और भूपेश सरकार की लूट की वजह से राजनेता, कुछ कमीशनखोर अधिकारी हवा में उडऩे लगे और भूपेश सरकार की जमीन से लगाव हटता गया और भूपेश का राज सार्वजनिक होने में देर नहीं लगी, क्योंकि ईडी ने जनता को दिखा दिया कि भूपेश सरकार जनता की हितैषी नहीं बल्कि, लूटेरी सरकार है। चुनाव आते-आते जनता ने भूपेश सरकार की जमीनी हकीकत को भांप लिया और कुर्सी से उतार दिया। भूपेश की अकल्पनीय योजनाएं धरातल पर उतरी ही नहीं। भूपेश की बड़ी सोच जनता को भाने लगी थी। भूपेश की सोच थी कि जब तक हम गांव को स्वावलंबी नहीं बनाएंगे, तब तक प्रदेश की तरक्की नहीं हो सकती। भूपेश ने ग्रामीणों को स्वावलंबी बनाने के लिए किसानों के लिए खजाना खोल दिया, रीपा की नई योजना को देश भर में प्रशंसा मिली, आदिवासी संस्कृति और विरासत को नई पहचान मिली, रामवनपथ गमन योजना से प्रदेश की पहचान पूरे देश में होने लगी। इसके बावजूद भी एक गलती ने भूपेश की बड़ी सोच को बदल दिया। भ्रष्टाचार का बड़ा बोलबाला और अधिकारियों की निरंकुशता ने जनता को भूपेश सरकार के प्रति मोह भंग करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अब जब भाजपा का सुशासन आया है तो विष्णु देवसाय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार किसानों के लिए खजाना खोल दिया, तेंदू पत्ता संग्राहकों को समृद्धि का नया रास्ता दिखाया, रमन सिंह के कार्यकाल की कई बड़ी योजनाएं फिर से प्रारंभ होंगी। महतारी वंदन योजना से महिलाओं को बड़ी राहत मिल रही है। विष्णु के सुशासन को आगे बढ़ाने में केन्द्रीय मंत्री नितीन गडकरी, रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव, तात्कालीन रेल मंत्री पियुष गोयल की भी बड़ी भूमिका मानी जा रही है। सडक़ और रेल परिवहन की जाल प्रदेश में बिछने लगी है। रेल और सडक़ परिवहन जितनी सुविधाजनक होगी, उस राज्य की तरक्की को कोई नहीं रोक सकता। प्रदेश में सडक़ें चमचमा रही हैं और प्रदेश आगे बढ़ रहा है। विष्णु के सुशासन पर कुछ कमजोरियों को भी उजागर करना जरूरी है ताकि सरकार इस ओर भी ध्यान दे और जनता की खुशहाली और बढ़े और प्रदेश के मुखिया का मान बढ़े तथा जनता के दिलों में शासन के प्रति रिश्ता और प्रगाढ़ हो। आज प्रदेश में पुलिसिंग और प्रशासन में कसावट जरूरी है, ताकि प्रदेश की जनता किसी भी अधिकारी या मंत्री के पास आसानी से पहुंच जाए और अपनी समस्याएं बता सके। आज प्रदेश के कई हिस्सों में जिस तरह से अपराध घट रहे हैं, उससे सरकार की छवि धूमिल हो रही है। अपराध के लिए साजिश कर्ताओं का भंडाफोड़ जरूरी है, ताकि विष्णु का सुशासन सूर्योदय की तरह देश में ही नहीं विदेश में भी दैदिव्यमान होता रहे और भाजपा सरकार की उम्र बढ़ती जाए। पुलिसिंग और प्रशासन को और अधिक चुस्त करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। देखने में आ रहा है कि विभागों के अधिकारी अपनी मर्जी चला रहे हैं और जनता कई विभागों में परेशान दिख रही है। भाजपा सरकार का दावा है कि भ्रष्टाचार पर जीरो टारलेंस पर सरकार काम कर रही है, लेकिन यह हकीकत से कोसों दूर है। रेत तस्करी पर प्रशासन की कहीं भी सख्ती नहीं दिखाई दे रही है। पीडीएस का चावल राशन दुकानों पर पहुंच रहा है। हालांकि महतारी वंदन योजना से सरकार स्वयं की पीठ थपथपा तो रही है और समझ रही है कि 1000 की राशि से महिलाओं में सशक्तिकरण हो रहा है और उनकी जरूरतें पूरी हो रही है। दूसरी तरफ भाजपा शासन काल में महंगाई चरम पर पहुंच गई है और उन्हें लगता है कि प्रदेश खुशहाल हो गया है। तरक्की तो हो रही है… इसमें कोई दो मत नहीं, लेकिन महंगाई ने मध्यम एवं गरीब परिवार की कमर ही तोड़ दी है। कोरोना काल के बाद दवाईयों की कीमत 400 गुना बढ़ गई है और सरकार कहती है कि देश आगे बढ़ रहा है। महंगाई पर नियंत्रण जरूरी है। कम से कम जीवन रक्षक दवाईयों की कीमत कुछ सालों तक स्थित रहे, तो लोगों को कुछ राहत मिलेगी, लेकिन यहां दवाईयोंं का दाम भी हरी साग सब्जी की तरह रोज बढ़ रहा है। खाद्य सामाग्रियों की ही बात करें तो भाजपा सरकार में 1 रूपए जब कीमत कम होती है और सरकार पीठ थपथपाने लगती है कि हमने कीमत कम की, लेकिन वही सामान एक सप्ताह बाद 10 रूपए बढ़ता है तो सरकार का फिर बयान आता है कि हम कीमत कंट्रोल कर रहे हैं। निरंतर खाद्यान्न सहित सभी सामानों की कीमत बढ़ती जा रही है और जनता घूटन सी महसूस कर रही है। आखिर वह दिन कब आएगा जब लोगों को लगे… अच्छे दिन आ रहे हैं। विष्णु के सुशासन में सबसे अहम बात यह है कि प्रदेश में घट रही घटनाओं सहित महिला अपराधों पर नियंत्रण हो और देश के सबसे शांति प्रिय के रूप में विख्यात टापू को राम राज्य की परिकल्पना के आधार पर विकसित, सुंदर, समन्वित विकास की ओर ले जाएं…।
जांजगीर-चांपा। जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ में शराब पीने के बाद संदिग्ध परिस्थितियों में बसपा पार्षद समेत दो लोगों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान बसपा पार्षद रामखिलावन जांगड़े (55) और निजी क्लिनिक संचालक जोहितराम खरे (52) के रूप में हुई है।
दोनों ने शुक्रवार देर शाम अपने दो अन्य साथियों के साथ देशी शराब का सेवन किया था। घर पहुंचने के बाद उन्हें सांस लेने में परेशानी होने लगी और उनकी तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद दोनों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पामगढ़ ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर उन्हें बिलासपुर रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान दोनों की मौत हो गई।
रामखिलावन जांगड़े ने सिम्स में, जबकि जोहितराम खरे ने अपोलो अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वहीं, शराब पीने के दौरान साथ रहे कमल नाथ खरे उर्फ राजा की शनिवार को तबीयत बिगड़ने पर उसे इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। मामले में शराब पीने के दौरान मौजूद मुकेश कश्यप उर्फ गोलू को पुलिस ने हिरासत में लिया है। उससे पूछताछ की जा रही है।
बसपा पार्षद रामखिलावन जांगड़े।
निजी क्लिनिक संचालक जोहितराम खरे
जहरीला पदार्थ मिला होने की आशंका
घटना के बाद शराब में जहरीला पदार्थ मिले होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, फिलहाल दोनों की मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है। इसकी पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही हो सकेगी।
दोनों मृतकों के शवों का बिलासपुर में पोस्टमॉर्टम कराया जाना है। मौत के कारणों का पता लगाने के लिए विसरा सुरक्षित रखकर जांच कराए जाने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दोनों की मौत शराब के सेवन से हुई या इसके पीछे कोई अन्य कारण था।
चार लोग साथ बैठकर पी रहे थे शराब
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार देर शाम भाजपा पार्षद रामखिलावन जांगड़े अपने तीन साथियों के साथ बैठकर शराब पी रहे थे। इनमें रामखिलावन जांगड़े और जोहितराम खरे की तबीयत अचानक बिगड़ गई। शराब सेवन के बाद दोनों को सांस लेने में परेशानी होने लगी।
हालत खराब होने पर परिजन और आसपास के लोग उन्हें इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पामगढ़ लेकर पहुंचे। वहां शुरुआती इलाज के बाद दोनों की स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें बिलासपुर रेफर कर दिया।
सिम्स में इलाज के दौरान बसपा पार्षद रामखिलावन जांगड़े की मौत हो गई।
सिम्स और अपोलो अस्पताल में हुई मौत
पामगढ़ से बिलासपुर पहुंचने के बाद रामखिलावन जांगड़े को सिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि जोहितराम खरे का अपोलो अस्पताल में इलाज चल रहा था। इलाज के दौरान दोनों ने दम तोड़ दिया।
दोनों की मौत के बाद मामले को संदिग्ध माना जा रहा है। शराब में जहरीला पदार्थ मिला होने की आशंका के बीच पोस्टमॉर्टम और अन्य जांच के जरिए मौत की वजह पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों की मौत शराब में किसी जहरीले पदार्थ की मौजूदगी के कारण हुई या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी।
सांस लेने में परेशानी के बाद बिगड़ी हालत
एसडीओपी तोपेश वर्मा के अनुसार, दोनों मृतकों ने अपने दो अन्य साथियों के साथ सादी देशी शराब का सेवन किया था। इसके बाद घर पहुंचने पर उन्हें सांस लेने में परेशानी होने लगी। हालत बिगड़ने पर दोनों को बिलासपुर के अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
एसडीओपी ने बताया कि शराब पीने के दौरान मौजूद दो अन्य साथियों की तलाश की जा रही है, ताकि घटना के संबंध में जानकारी जुटाई जा सके।
पोस्टमॉर्टम और जांच रिपोर्ट से स्पष्ट होगी मौत की वजह
दोनों शवों का बिलासपुर में पोस्टमॉर्टम कराया जाना है। मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए विसरा सुरक्षित रखकर जांच कराए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि दोनों की मौत किस वजह से हुई और क्या शराब में किसी जहरीले पदार्थ की मिलावट थी।
फिलहाल पुलिस मामले से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटा रही है। शराब सेवन के दौरान मौजूद दोनों अन्य साथियों से पूछताछ के बाद घटना के संबंध में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर 2026 से धान खरीदी की शुरुआत होने जा रही है। सरकार 3100 रुपए समर्थन मूल्य पर किसानों से धान खरीदेगी। पंजीकृत किसानों से 1 एकड़ में अधिकतम 21 क्विंटल धान लिया जाएगा। धान खरीदी का यह अभियान 31 जनवरी 2027 तक चलेगा।
दुर्ग पंडवानी महासम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने तारीख का ऑफिशियल ऐलान किया। राज्य सरकार ने इस सीजन में कुल 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का बड़ा लक्ष्य रखा है। पिछले साल 140 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया था। धान खरीदी का लक्ष्य इस साल 20 लाख मीट्रिक टन बढ़ा है।
पिछले 5 सालों में 63% बढ़ा धान खरीदी का लक्ष्य
2021-22: 98 लाख मीट्रिक टन
2026-27: 160 लाख मीट्रिक टन
5 साल में लक्ष्य 1.63 गुना बढ़ा
कुल बढ़ोतरी: 62 लाख मीट्रिक टन (करीब 63%)
किसानों को इन बातों का रखना होगा ध्यान:
एग्रीस्टैक पंजीयन अनिवार्य: धान बेचने के लिए इस बार किसानों को एग्रीस्टैक पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीयन कराना जरूरी किया गया है।
टोकन की व्यवस्था: खरीदी केंद्रों पर टोकन के जरिए तय तारीख पर ही धान की बिक्री हो सकेगी।
बायोमेट्रिक सत्यापन: उपार्जन केंद्रों पर पारदर्शिता बरतने के लिए किसानों का बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा।
गुणवत्ता और नमी के मानक: धान में नमी की मात्रा 17 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए, अन्यथा माल रिजेक्ट हो सकता है।
सूरजपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में टीचर और उनके बेटे की हत्या के आरोपी की पत्नी ने अपने पति को फांसी देने की मांग की है। आरोपी की पत्नी और मृतका एक ही स्कूल में टीचर थीं।
आरोपी की पत्नी ने बताया कि करीब 15 दिन पहले ही उसके पति ने बिना उसकी मर्जी के उसका एक करोड़ रुपए का बीमा कराया था। उसे शक है कि अगला टारगेट वह खुद थी। उसका कहना है कि पति ने घटना वाली रात पेंड्रा जाने की बात कहकर उसे गुमराह किया था। उसे पति के इस हत्याकांड के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
आरोपी की पत्नी ने बताया कि पति ने पुलिस की पूछताछ में टीचर की हत्या इगो में करने की बात कही थी। रजनी ने शायद प्रवेश को ‘नामर्द’ कहा था। आरोपी की पत्नी ने कहा, हो सकता है कि दोनों के बीच अवैध संबंध रहे हों, हालांकि इसकी जानकारी मुझे नहीं है।
मामला जयनगर और विश्रामपुर थाना क्षेत्र का है। आरोपी ने टीचर रजनी बरेट (40) से पैसे मांगे, नहीं देने पर उसका गला घोंट दिया। वहीं, मृतका के बेटे सूजल बरेट (18) को सुनसान जगह ले जाकर पत्थर से उसके सिर और सीने पर वार कर उसकी हत्या कर दी थी। पुलिस ने हत्या के आरोप में परवेश कुमार उर्फ प्रवेश कुमार को गिरफ्तार किया है।
बेटे की लाश सड़क किनारे सुनसान जगह में मिली थी।
महिला सरकारी स्कूल में टीचर थी, उसकी लाश बाथरूम में मिली थी।
पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
पत्नी ने कहा-बीमा कराया था, अगला टार्गेट मैं थी
दोहरे हत्याकांड के आरोपी प्रवेश कुमार की गिरफ्तारी के बाद उसकी पत्नी सरिता लकड़ा ने पति से सारे रिश्ते तोड़ने की बात कही और उसे जल्द से जल्द फांसी देने की मांग की।
सरिता कैमरे के सामने फूट-फूटकर रोने लगी। उसने बताया कि हत्या की घटना से करीब 15 दिन पहले ही उनके पति प्रवेश ने बिना उनकी मर्जी के टाटा एआईए कंपनी में उनका एक करोड़ रुपए का बीमा कराया था। सरिता ने आशंका जताई कि उनके पति का अगला टारगेट वह खुद थी।
पत्नी बोली- जान का खतरा, पति ने झूठ बोला था
सरिता लकड़ा ने कहा कि अब उसे अपनी जान का डर सता रहा है। पति ने एक करोड़ रुपए का बीमा इसलिए कराया था, ताकि मेरी मौत के बाद बीमा की रकम लेकर वह आसानी से फरार हो सके।
सरिता ने बताया कि घटना वाली रात भी पति ने पेंड्रा जाने की बात कहकर उसे गुमराह किया था। उन्हें इस हत्याकांड की जानकारी बाद में पुलिस के जरिए मिली। सरिता ने प्रशासन से अपनी सुरक्षा की मांग की है।
चार साल से थे लिव इन में
हत्याकांड का आरोपी प्रवेश कुमार मूल रूप से हरियाणा के करनाल जिले का रहने वाला है। वह ऑटो पार्ट्स सप्लाई का कारोबार करता था और विश्रामपुर में रह रहा था। कोरोना काल में उसकी आर्थिक स्थिति खराब हो गई थी। उसने कारोबार के लिए बैंक से 20 लाख रुपए का लोन भी लिया था।
आर्थिक तंगी के कारण उसे अपनी दुकान बंद करनी पड़ी। इसके बाद वह अलग-अलग दुकानों पर ऑटो पार्ट्स की सप्लाई करने लगा। सरिता लकड़ा के संपर्क में आने के बाद दोनों वर्ष 2022 से पति-पत्नी की तरह रह रहे थे। सरिता ने बताया कि इस वारदात के बाद उन्होंने अपनी मांग का सिंदूर मिटा दिया है।
‘नामर्द’कहने पर हत्या, कहा- हो सकता है अवैध संबंध
सरिता ने बताया कि उनके पति प्रवेश कुमार ने पुलिस की पुलिस की पूछताछ में कहा था कि उसने इगो में आकर रजनी की हत्या कर दी। सरिता के मुताबिक, रजनी ने शायद प्रवेश को ‘नामर्द’ कहा था, जिसके कारण उसने हत्या की।
सरिता ने यह भी कहा कि हो सकता है कि प्रवेश और रजनी के बीच अवैध संबंध रहे हों, लेकिन उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।
टीचर और बेटे की हुई थी हत्या
जानकारी के मुताबिक, 10 अक्टूबर की सुबह जयनगर थाना क्षेत्र के महावीरपुर में नेशनल हाईवे-43 से लगी ग्रामीण सड़क के किनारे एक लड़के का शव मिला था। लड़के की हत्या के बाद शव सड़क किनारे फेंका गया था।
मृतक की पहचान बिश्रामपुर के कार्मल कॉन्वेंट स्कूल में 12वीं के छात्र सुजल बरेठ (18) के रूप में हुई। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि सुजल की स्कूटी घर से करीब 500 मीटर दूर एक पेट्रोल पंप पर लावारिस हालत में खड़ी थी।
मां का शव बाथरूम में मिला
देर रात पुलिस सुजल के घर पहुंची, तो मुख्य दरवाजे पर ताला लगा मिला। उसकी मां रजनी बरेठ का भी पता नहीं चल रहा था। इसके बाद बिश्रामपुर पुलिस ने सुजल के रिश्तेदारों को मौके पर बुलाया। उनकी मौजूदगी में घर का ताला तोड़ा गया। अंदर बाथरूम में सुजल की मां रजनी बरेठ (40) का शव भी संदिग्ध हालत में मिला।
पति से तलाक के बाद बेटे के साथ रहती थी
रजनी बरेठ बेलटिकरी के सरकारी स्कूल में टीचर थीं। पति से 5 साल पहले तलाक के बाद वह अपने बेटे सुजल के साथ विश्रामपुर थाना क्षेत्र के केशवनगर में किराए के मकान में रहती थीं। घटना के बाद पुलिस ने कई संदेहियों से पूछताछ की।
मामला ब्लाइंड मर्डर का होने के कारण साइबर सेल और सूरजपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने कई संदिग्धों से पूछताछ की। आसपास के CCTV फुटेज खंगाले गए और संदिग्धों के मोबाइल की लोकेशन भी निकाली गई।
सहेली के पति पर गया शक
जांच के दौरान रजनी बरेठ के स्कूल में पदस्थ एक महिला टीचर के पति परवेश उर्फ प्रवेश कुमार (36) की भूमिका संदिग्ध मिली। पुलिस को CCTV में एक व्यक्ति टीचर के घर की ओर जाते दिखा था। जांच के बीच संदिग्ध फरार हो गया था। इसके बाद 22 अक्टूबर को पुलिस ने उसे हिरासत में लिया। पूछताछ में आरोपी ने हत्या करना कबूल कर लिया।
पैसे देने से मना करने पर मां की हत्या
पूछताछ में प्रवेश कुमार ने रजनी बरेठ और सुजल बरेठ की हत्या करना स्वीकार किया। आरोपी ने बताया कि उसकी पत्नी और रजनी बरेठ एक ही स्कूल में टीचर थीं, जिसके कारण आरोपी का रजनी बरेठ के घर आना-जाना था।
आरोपी ने मोटर-पार्ट्स के व्यवसाय के लिए 20 लाख रुपये का लोन लिया था और उसे पैसों की जरूरत थी। उसे पता था कि रजनी बरेठ ने भी 19 लाख रुपये का लोन लिया है।
9 अक्टूबर की दोपहर आरोपी पैदल रजनी बरेठ के घर पहुंचा। रजनी शाम को ड्यूटी से लौटीं, तो सुजल ट्यूशन के लिए घर से चला गया। प्रवेश ने रजनी से पैसे मांगे। उन्होंने पैसे देने से मना कर दिया।
बाथरूम में गला दबाकर मार डाला
पैसों के लालच में प्रवेश कुमार ने रजनी बरेठ से झूमाझटकी की। जब रजनी भागने लगीं, तो आरोपी ने उन्हें बाथरूम में खींचकर उनके सिर पर शैंपू की बोतल मारी और गला दबाकर उनकी हत्या कर दी।
आरोपी प्रवेश कुमार
सबूत मिटाने बेटे को मार डाला
आरोपी ने बताया कि बेटे सुजल को पता था कि घर पर उसकी मां और आरोपी मौजूद थे, इसलिए उसने सुजल को भी मारने की प्लानिंग की। वह रजनी के घर जाने वाले रास्ते के तिराहे पर करीब 3 घंटे तक सुजल का इंतजार करता रहा। रात करीब 9 बजे सुजल आया, तो उसने कहा कि तेरी मम्मी मेरे घर पर हैं।
आरोपी सुजल को कार में बैठाकर घुमाते हुए अंबिकापुर लेकर आया और उसे मैगी खिलाई। रात को वे राईं जंगल में बाथरूम जाने के बहाने रुके, जहां आरोपी ने सुजल के गले में स्टॉक कसकर उसे मारने की कोशिश की।
सीमेंट के टुकड़े से सिर-सीने पर मारा
सुजल भागने लगा, तो आरोपी ने सड़क किनारे पड़े सीमेंट के खंभे के टुकड़े से उसके सिर और सीने पर वार कर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद शव को कार में रखकर वह कालीघाट पहुंचा, जहां सड़क के किनारे उसने सुजल का शव फेंक दिया।
सूरजपुर एसपी योगेश पटेल ने बताया कि पुलिस ने दोहरे हत्याकांड के आरोपी के कब्जे से मृतका का मोबाइल, ज्वेलरी एवं अन्य सामान बरामद किया है। घटना में प्रयुक्त कार भी जब्त की गई है। आरोपी को कोर्ट में पेश कर दिया गया है।
सूरजपुर एसपी योगेश पटेल ने बताया कि पुलिस ने आरोपी के पास से मृतका का मोबाइल, गहने और अन्य सामान बरामद किया है। जांच में आरोपी की पत्नी की इस हत्याकांड में कोई भूमिका नहीं मिली है।