नई दिल्ली, एजेंसी। विपक्ष के नेता राहुल गांधी के दिल्ली स्थित आवास पर INDIA ब्लॉक के नेताओं की चाय पर मीटिंग शुरू हो गई है। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ और SIR के विरोध में आंदोलन को आगे बढ़ाने की रणनीति पर चर्चा हो रही है। राहुल ने X पर पोस्ट कर बताया कि चाय के बाद सभी नेता मिलकर मीडिया के सामने अपनी बात रखेंगे।
राहुल के 5, सुनहरी बाग रोड स्थित आवास पर बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी और शशि थरूर भी शामिल हुए हैं। RJD नेता तेजस्वी यादव, TMC सांसद महुआ मोइत्रा के अलावा JMM, समाजवादी पार्टी, CPI(M) और CPI के नेता भी पहुंचे हैं। छात्र संगठन AISA की प्रमुख नेहा बोरा भी मीटिंग में मौजूद रहीं।
विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और SIR के विरोध में 6, 7, 8, 9 और 12 अक्टूबर को प्रदर्शन किए। सोमवार को विपक्षी नेताओं ने बाराखंभा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला था। इसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी समेत 11 विपक्षी पार्टियों के नेता शामिल हुए थे। विपक्षी सांसदों ने SIR के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की।
तेजस्वी यादव बोले- अमित शाह और ज्ञानेश कुमार ने वोट चोरी कराई
तेजस्वी यादव ने कहा कि विपक्ष एकजुट है और लोकतंत्र बचाने की लड़ाई जारी रखेगा। उन्होंने कहा- हम सब लोग एकजुट हैं। जो कुर्बानी देनी होगी, वह सब मिलकर देंगे। देश गांधी जी का देश है। जो भी संवैधानिक संस्थाओं को हाईजैक करने की कोशिश करेगा, उसके खिलाफ हम लड़ते रहेंगे।
तेजस्वी ने कहा कि ज्ञानेश कुमार ने लोकतंत्र को धोखा दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने कठपुतली की तरह काम किया है और उन्हें इसकी सजा जरूर मिलेगी। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन होते रहे हैं और आगे भी होते रहेंगे, लेकिन प्रदर्शन स्थल को दिल्ली के बॉर्डर पर शिफ्ट करना सरकार के डर को दिखाता है।
तेजस्वी यादव, महुआ मोइत्रा और डी. राजा भी बैठक में पहुंचे
राहुल गांधी के आवास पर RJD नेता तेजस्वी यादव और मनोज झा, JMM की महुआ माजी, समाजवादी पार्टी के हरेंद्र मलिक, आनंद भदौरिया और मोहिबुल्लाह नदवी, CPI(M) के एमए बेबी, CPI के डी. राजा और पी. संतोश कुमार, CPI-ML के दीपांकर भट्टाचार्य और TMC सांसद महुआ मोइत्रा पहुंचे हैं।
सोनिया गांधी, शशि थरूर और सुप्रिया सुले भी बैठक में शामिल
माता का वार होने के कारण मंगलवार को अभूतपूर्व भीड़ कोरबा। नवरात्रि के तीसरे दिन माँ श्री सर्वमंगला देवी मंदिर दुरपा कोरबा में चंद्रघंटा देवी स्वरूपा माँ श्री सर्वमंगला का दर्शन करने एवं पूजन करने अगाध श्रद्धा देखी गई। क्वांर शुकल तृतीया तिथि पर माँ आदिशक्ति के तृतीय स्वरूप का दर्शन करने के लिए अलसुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ देखी गई।
माँ सर्वमंगला देवी मंदिर दुरपा कोरबा के प्रबंधक एवं राजपुरोहित नमन पाण्डेय (नन्हा महराज) ने बताया माँ चंद्रघंटा साहस, शांति और सौम्यता की प्रतिक हैं और सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर में बढ़ने लगी थी। मंगलवार होने के कारण श्रद्धा का सैलाब देखने को मिला।
नन्हा महराज ने बताया कि माँ चंद्रघंटा के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्ध चन्द्र होने के कारण आदिशक्ति के तृतीय रूप को चंद्रघंटा देवी के रूप में जाना जाता है और माँ सर्वमंगला की पूजा अर्चना आज चंद्रघंटा देवी के रूप में की गई। श्री पाण्डेय ने बताया कि वेद पुराणों में मान्यता है कि माँ चंद्रघंटा स्वरूपा की पूजा अर्चना से साधकों, भक्तों के जीवन से सभी बाधाएं दूर होती हैं, संकट टल जाता है और जीवन में अलौकिक शांति की प्राप्ति होती है और घर परिवार खुशहाल बनता है।
तीसरे दिन विशेष रूप से छप्पन भोग में माँ को केसर की खीर और दूध से बनी मिठाईयों को शामिल किया गया और माता को अर्पित किया गया। माँ की महाआरती से चारों तरफ फैल रहा सत्व का प्रकाशपूंज
रोज सुबह एवं संध्या 07.00 बजे माँ की महाआरती की जाती है और आज संध्या महाआरती में मंगलवार होने के कारण हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। माँ की आरती करने से मन में तामसिक प्रवृत्ति का नाश होता है और माँ के प्रति श्रद्धा का भाव जागृत होता है। आरती से बच्चों में संस्कार पनपता है और बुद्धि में श्रेष्ठता आती है। नमन पाण्डेय ने बताया कि महाआरती से परिसर सहित चारों तरफ सत्व का प्रकाशपूंज फैलता है और वातावरण में विशुद्धता आती है और मन पवित्र होता है। कल माँ कुसमाण्डा स्वरूपा की होगी पूजा
कल बुधवार को माँ सर्वमंगला देवी की पूजा अर्चना माँ कुसमाण्डा स्वरूपा के रूप में होगी और श्रद्धालु तथा भक्तजन माँ को भोग अर्पण के रूप में मालपुआ एवं फल अर्पित कर सकते हैं, इससे माँ प्रसन्न होती हैं और ऐसा करने से शत्रु कम होते हैं और शत्रुता का नाश होता है। माँ कुसमाण्डा देवी सौम्य होती हैं और उनकी पूजा अर्चना से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
नई दिल्ली, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि सस्ती दवाओं से लेकर प्रतिभा तक, दुनिया भारत पर भरोसा करती है। भारत ने दुनिया को शून्य दिया, लेकिन कभी इसका श्रेय या रॉयल्टी नहीं मांगी।
दिल्ली में पहली बार हो रहे ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में मोदी ने 25 मिनट स्पीच दी। कहा कि भारत की ताकत दूसरों को सक्षम बनाने में है। उन्होंने डिजिटल तकनीक, वैक्सीन सप्लाई, आर्थिक सुधारों और वैश्विक चुनौतियों से निपटने में भारत की भूमिका का जिक्र किया।
तीन दिन का यह कार्यक्रम 15 अक्टूबर को खत्म होगा। इस साल फोरम की थीम ‘बदलती दुनिया में ताकत के नए स्रोत तय करना’ है।
पीएम बोले- अवसर पैदा करें, देशों को जोड़े
1. दूसरों को सक्षम बनाएं: ज्ञान, धन और शक्ति का महत्व इस बात में है कि उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाता है। भारत दूसरों के लिए अवसर पैदा करने और देशों को जोड़ने में विश्वास रखता है।
2. 100 देशों में वैक्सीन सप्लाई की: कोविड के दौरान भारत ने 100 से ज्यादा देशों में वैक्सीन पहुंचाई। भारत अपनी क्षमताओं का इस्तेमाल पूरी मानवता के फायदे के लिए करना चाहता है।
3. AI ने तरीका बदल रहा: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ सप्लाई चेन, ऊर्जा, खनिज और तकनीक भी देशों के बीच दबाव बनाने के साधन बन रहे हैं। दुनिया को भरोसेमंद साझेदारों की जरूरत है।
4. 25 करोड़ गरीबी से बाहर: सरकार का उद्देश्य लोगों को अपने पैरों पर खड़ा करना है। उन्होंने दावा किया कि पिछले एक दशक में भारत ने 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला। स्टार्टअप के मौके छोटे शहरों तक पहुंचे हैं।
5. भारत की GDP ग्रोथ 7.8%: आर्थिक सुधारों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत की विकास दर 7.8% रही और विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर से ज्यादा है। कारोबार को आसान बनाना और सुधार करना सरकार की प्रतिबद्धता है।
6. सस्ते मोबाइल डेटा से बढ़े अवसर: 2014 के बाद मोबाइल डेटा सस्ता हुआ है। इससे छोटे शहरों और कस्बों के छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाई, जानकारी और रोजगार से जुड़े नए अवसरों तक पहुंच मिली है।
7. देश में भ्रष्टाचार कम हुआ: देश में भ्रष्टाचार कम हुआ है। सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे लोगों तक पहुंच रहा है और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बढ़ी है।
8. भारत लोकतंत्र की जननी: भारत लोकतंत्र की जननी है। शासन का मकसद सिर्फ ताकत का इस्तेमाल करना नहीं, बल्कि लोगों को सशक्त बनाना और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर देना है।
ब्लूमबर्ग के संस्थापक माइकल ब्लूमबर्ग ने की थी शुरुआत
ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम की शुरुआत 2018 में ब्लूमबर्ग के संस्थापक माइकल ब्लूमबर्ग ने की थी। इसका उद्देश्य दुनिया की अर्थव्यवस्था से जुड़ी बड़ी चुनौतियों पर चर्चा करने और उनके समाधान तलाशने के लिए सरकारों और निजी कंपनियों के प्रमुखों को एक मंच पर लाना है।
इसमें विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्ष, मंत्री, बड़ी कंपनियों के CEO, निवेशक और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल होते हैं। फोरम में वैश्विक व्यापार, निवेश, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, सामान की आपूर्ति और दुनिया में बदलते शक्ति संतुलन जैसे मुद्दों पर चर्चा होती है।
बीजिंग/नई दिल्ली, एजेंसी। चीन ने लद्दाख की 28 जगहों पर अपना बताया है। चीन ने मंगलवार को इन जगहों के नाम तय करने के भारत के फैसले पर आपत्ति भी जताई। चीन ने कहा- ये इलाके हमारे हैं और भारत के नाम बदलने या नया नाम रखने से जमीन पर मालिकाना हक नहीं बदलेगा।
भारत ने 2 अक्टूबर को इन जगहों के नाम आधिकारिक तौर पर तय किए थे। इनमें गोगरा और हॉट स्प्रिंग जैसे इलाके भी शामिल हैं, जहां 2020 में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच तनाव हुआ था।
चीन बोला- लद्दाख को भारत का UT नहीं मानते
चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने मंगलवार को कहा कि चीन लद्दाख को भारत की ओर से बनाया गया केंद्र शासित प्रदेश नहीं मानता। चीन ने भारत के इस कदम को गैरकानूनी बताते हुए कहा कि सीमा के पश्चिमी हिस्से के ये इलाके उसके हैं।
माओ के मुताबिक, भारत के इस फैसले से सीमा के पश्चिमी हिस्से में उन इलाकों पर चीन का दावा नहीं बदल सकता, जिन्हें वह अपना क्षेत्र मानता है।
चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने मंगलवार को भारत के लद्दाख के इलाकों का नाम तय करने या बदलने का विरोध किया।
भारत बोला- लद्दाख हमारा हिस्सा, इनकार करने से हकीकत नहीं बदलेगी
चीन की आपत्ति पर भारत ने भी जवाब दिया है। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि लद्दाख भारत का हिस्सा है। चीन के इनकार करने से यह हकीकत नहीं बदलेगी।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इन जगहों के नाम सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक नक्शे में दर्ज किए गए हैं। यह काम लद्दाख प्रशासन और स्थानीय लोगों से सलाह लेकर किया गया है।
जायसवाल ने कहा कि इन जगहों के नाम नक्शे में दर्ज करने का मकसद उनकी सही पहचान करना और लोगों को उनके बारे में जानकारी देना है।
भारत ने 28 जगहों के नाम क्यों तय किए?
भारत के गृह मंत्रालय ने 2 अक्टूबर को आधिकारिक तौर पर लद्दाख की 28 जगहों और क्षेत्रों के नाम तय किए थे।
भारत का फैसला 2023 में चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश के इलाकों के नाम बदलने के जवाब में उठाया गया था। चीन अरुणाचल प्रदेश को ‘जांगनान’ यानी दक्षिणी तिब्बत कहता रहा है।
गोगरा और हॉट स्प्रिंग पूर्वी लद्दाख के संवेदनशील इलाके
भारत ने जिन जगहों के नाम तय किए, इनमें गोगरा और हॉट स्प्रिंग भी शामिल हैं। ये पूर्वी लद्दाख के संवेदनशील इलाके हैं, जहां भारत और चीन के सैनिकों के बीच सीमा पर तनाव रहा है। इन जगहों पर भारतीय सैनिक गश्त भी करते हैं।
मई 2020 में पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच सीमा विवाद बढ़ गया था। 5 मई को पैंगोंग झील के पास दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी।
2020 के जून में गलवान घाटी में भी दोनों सेनाओं के बीच हिंसक संघर्ष हुआ था। इसके बाद दोनों देशों ने सीमा पर तनाव कम करने और सैनिकों को पीछे हटाने के लिए बातचीत शुरू की। सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया 2022 में शुरू हुई।
लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर पैंगोंग झील के इलाके में दोनों देशों के सैन्य अधिकारी मिले थे। तस्वीर 10 फरवरी 2022 की है।
28 जगहों में कौन-कौन से नाम शामिल हैं?
भारत की ओर से तय किए गए 28 नामों में पहाड़, दर्रे, ग्लेशियर, जमीन के हिस्से, घाटियां और जल स्रोत शामिल हैं।
दर्रे-ग्लेशियर: चापचिंगल दर्रा, शाचमिरिक दर्रा, पारपिक ग्लेशियर और स्कामरी ग्लेशियर।
जमीन के इलाके: ब्रांगसा, कुकसेल, देहरा कम्पास, गोगरा, कुमारायण पॉइंट, पंगलुंग और शमाल लुंगपा।
घाटी-जल स्रोत: श्कोर्गा घाटी, गुरु रिनपोछे झील, यांगपा नदी और हॉट स्प्रिंग।
इन जगहों के नाम तय करके सरकारी नक्शे में शामिल करने का मकसद उनकी सही पहचान बताना है।
गलवान में भारत और चीन के बीच हिंसक झड़प हुई थी
जून 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच सीमा विवाद को लेकर हिंसक झड़प हुई थी। भारत के मुताबिक, 6 जून को दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच सैनिकों को पीछे हटाने पर सहमति बनी थी, लेकिन 15 जून की रात फिर टकराव हो गया।
इस दौरान सैनिकों के बीच पत्थरों और डंडों से लड़ाई हुई। झड़प में भारत के 20 सैनिकों की मौत हुई थी। चीन ने फरवरी 2021 में अपने 4 सैनिकों की मौत की बात स्वीकार की थी। इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया और सीमा पर सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी गई।
जून 2020 में गलवान घाटी में भारत-चीन सीमा पर झड़प के दौरान आमने-सामने खड़े दोनों देशों के सैनिक।
अरुणाचल प्रदेश को लेकर भी दोनों देशों के बीच विवाद
भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश को लेकर लंबे समय से सीमा विवाद है। चीन अरुणाचल प्रदेश के बड़े हिस्से पर अपना दावा करता है और इसे ‘जांगनान’ यानी दक्षिणी तिब्बत कहता है।
इसी दावे के तहत चीन 2017 से कई बार अरुणाचल प्रदेश की जगहों के चीनी नाम जारी कर चुका है। 2023 में चीन ने 11 और 2024 में करीब 30 जगहों के नाम जारी किए थे। भारत हर बार इसका विरोध करता रहा है।
भारत का कहना है कि अरुणाचल प्रदेश उसका अभिन्न हिस्सा है और चीन के नाम बदलने से जमीन पर स्थिति नहीं बदल सकती। भारत की नजर में यह सिर्फ नामों का मामला नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र पर चीन के दावे से जुड़ा विवाद है।