धमतरी, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के नगरी क्षेत्र में लोगों पर लगातार हमला कर रहे तेंदुए को आखिरकार ग्रामीणों ने पकड़ लिया है। तेंदुए ने दो दिनों में धमतरी और कोंडागांव जिले के अलग-अलग गांवों के 16 लोगों पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया था। इनमें दो लोगों की मौत हो गई। मृतकों में एक गर्भवती महिला रमशिला मंडावी और आमागांव के प्रभु लाल शामिल हैं।
वहीं, बाकी घायलों का इलाज धमतरी और कोंडागांव जिले के अस्पतालों में चल रहा है। वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया था, लेकिन वह उसमें नहीं फंसा। शुक्रवार सुबह ग्रामीणों ने लकड़ियों और जाली की मदद से तेंदुए को घेरकर पकड़ा और वन विभाग को इसकी सूचना दी।
वन विभाग के मुताबिक, तेंदुए के असामान्य व्यवहार के पीछे बीमारी या रेबीज संक्रमण की आशंका है। प्राथमिक उपचार के बाद उसे जांच के लिए जंगल सफारी भेजा जाएगा।
बैल के चिल्लाने की आवाज सुनकर बाहर निकली महिला पर हमला
जानकारी के अनुसार, धमतरी के कारीपानी के बुजुर्ग महिला उर्मिला बाई मरकाम के घर के बाहर बैल बंधा हुआ था। बुधवार की देर रात बैल के चिल्लाने की आवाज सुनकर महिला घर से बाहर निकलीं। इसी दौरान वहां मौजूद तेंदुए ने उन पर हमला कर दिया।
धमतरी के कारीपानी की बुजुर्ग महिला उर्मिला बाई मरकाम पर तेंदुए ने हमला कर घायल कर दिया।
महिला की आवाज सुनकर सुंदर लाल नेताम भी घर से बाहर आए। तेंदुए ने उन पर भी हमला कर दिया।
बैल के चिल्लाने की आवाज सुनकर बाहर निकली महिला पर हमला
जानकारी के अनुसार, धमतरी के कारीपानी के बुजुर्ग महिला उर्मिला बाई मरकाम के घर के बाहर बैल बंधा हुआ था। बुधवार की देर रात बैल के चिल्लाने की आवाज सुनकर महिला घर से बाहर निकलीं। इसी दौरान वहां मौजूद तेंदुए ने उन पर हमला कर दिया।
आवाज सुनकर सुंदर लाल नेताम भी घर से बाहर आए। तेंदुए ने उन पर भी हमला कर दिया। इसके बाद वह पास के एक अन्य घर में पहुंचा और वहां मौजूद एक महिला को घायल कर दिया। घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग को सूचना दी। तीनों घायलों को उपचार के लिए नगरी के सिविल अस्पताल ले जाया गया।
कोंडागांव के बस्तर बुडरा गांव में आंगन में बैठे परिवार पर तेंदुए ने किया हमला। हमले में गर्भवती महिला की मौत, 4 घायल
कोंडागांव में आंगन में बैठे परिवार पर किया हमला
वहीं, कोंडागांव जिले के अंतिम छोर पर बसे बस्तर बुडरा गांव गुरुवार सुबह करीब 5 बजे परिवार के सदस्य घर के आंगन में बैठकर मक्का छील रहे थे। इसी दौरान अचानक तेंदुआ वहां पहुंचा और लोगों पर हमला कर दिया। हमले में पांच लोग घायल हुए हैं।
घायलों में रमशीला मंडावी (34), देवलाल वट्टी (66), दुआरुराम मंडावी (44) और लता मंडावी (40) शामिल हैं। पांचवें घायल की पहचान की जानकारी सामने नहीं आई है। सभी को तत्काल विश्रामपुरी अस्पताल ले जाया गया। गंभीर रूप से घायल एक युवक को शुरुआती इलाज के बाद कांकेर रेफर किया गया।
दो दिनों से गांवों में मचा रखा था आतंक
तेंदुए के हमले से उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र के कारीपानी, आमागांव, बहीगांव, आमानारा और कोंडागांव जिले के बस्तर बुडरा सहित आसपास के गांवों में दहशत थी। इस तरह तेंदुए ने महज दो दिनों में अलग-अलग जगहों पर हमला कर करीब 16 लोगों को घायल कर दिया। हमलों में दो लोगों की मौत भी हो गई।
मृतकों की पहचान बस्तर बुडरा के रमशिला मंडावी और आमागांव की प्रभु लाल के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि रमशिला मंडावी गर्भवती थी। लगातार हो रहे हमलों से ग्रामीण डरे हुए थे और तेंदुए को पकड़ने की मांग कर रहे थे।
पिंजरा लगाने के बाद भी पकड़ में नहीं आया तेंदुआ
तेंदुए को पकड़ने के लिए वन विभाग ने पिंजरा भी लगाया था, लेकिन वह उसमें नहीं फंसा। इसके बाद ग्रामीणों ने खुद उसे पकड़ने की कोशिश की। शुक्रवार सुबह ग्रामीणों ने मिलकर तेंदुए को चारों तरफ से घेर लिया। लकड़ियों और जाली की मदद से उसे काबू करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। आखिरकार ग्रामीणों ने तेंदुए को पकड़ लिया।
इसके बाद वन विभाग को सूचना दी गई। जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और तेंदुए को अपने कब्जे में ले लिया।
पकड़ने से एक रात पहले सड़क पर घूमता दिखा था तेंदुआ
तेंदुए को पकड़े जाने से एक दिन पहले रात में वह सड़क पर घूमता हुआ भी दिखाई दिया था। इस दौरान कार से गुजर रहे कुछ लोगों ने उसका वीडियो बना लिया था। लगातार लोगों पर हमले और सड़क पर तेंदुए के दिखाई देने से क्षेत्र में दहशत का माहौल था।
अब तेंदुए के पकड़े जाने के बाद ग्रामीणों ने राहत महसूस की है। हालांकि, लगातार हुए हमलों में घायल लोगों के इलाज और तेंदुए की जांच पर वन विभाग की नजर है।
जांच के लिए जंगल सफारी भेजा जाएगा तेंदुआ
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के एसडीओ बाल गोविंद साहू ने बताया कि टाइगर रिजर्व क्षेत्र के बहीगांव, आमानारा और कारीपानी सहित कोंडागांव जिले के बस्तर बुडरा गांव के लोगों पर तेंदुए ने हमला किया था। इन घटनाओं में कुल 16 लोग घायल हुए, जिनमें से दो की मौत हो गई।
उन्होंने कहा कि कई सालों बाद इस तरह की घटना सामने आई है। आमतौर पर तेंदुआ एक साथ इतनी बड़ी संख्या में लोगों पर हमला नहीं करता। ऐसे में आशंका है कि उसके शरीर में कोई बदलाव हुआ हो या वह रेबीज से संक्रमित हो सकता है। हालांकि, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ने के बाद उसे अपने कब्जे में ले लिया है। प्राथमिक उपचार के बाद उसे जांच के लिए जंगल सफारी भेजा जाएगा। वहीं, हमले में घायल लोगों का धमतरी और कोंडागांव जिले के अस्पतालों में इलाज जारी है।
मीडिया से रूबरू हुए नीम करौली बाबा का किरदार निभाने वाले अभिनेता कोरबा। कैंचीधाम नैनीताल उत्तराखण्ड के पीठाधीश्वर नीम करौली बाबा के जीवन पर आधारित फिल्म हनुमान अंश में नीम करौली बाबा का किरदार निभाने वाले अभिनेता शोभिनव सत्य आज जश्न-ए-रिसोर्ट के सभागार में पत्रकारवार्ता ली और कहा कि हनुमान अंश का मुख्य उद्देश्य देश-दुनिया में नीम करौली बाबा के जीवन की प्रेरणा-सभी से प्रेम, सबकी सेवा, भूखों को भोजन कराना, सुमार्ग पर चलें, भक्ति करें का संदेश देना है। उन्होंने एक प्रश्न के जवाब में कहा कि माया के प्रकोप से सिर्फ भगवान का आशीर्वाद ही बचा सकता है। प्रेसवार्ता में शोभिनव सत्य के साथ महापौर श्रीमती संजूदेवी राजपूत, जिला भाजपा अध्यक्ष गोपाल मोदी, आयुक्त आशुतोष पाण्डेय, सभापति नूतन सिंह ठाकुर, पूर्व जिला अध्यक्ष डॉ. राजीव सिंह, घंटाघर में आयोजित रामलीला की प्रबंधक तन्नुप्रिया उपस्थित थे। पत्रकारवार्ता में मंच संचालन अधीक्षण अभियंता अखिलेश शुक्ला ने की। यहां उपायुक्त पवन वर्मा सहित भाजपा के नेतागण भी उपस्थित थे।
शोभिनव ने आगे कहा- वैसे तो मैं पहले से हनुमान भक्त और सात्विक जीवन जीने वाला आम आदमी हूं। 2018 से मैं हनुमान की उपासना करते आ रहा हूं और हनुमान जी का आशीर्वाद ही है कि मुझे नीम करौली बाबा का किरदार निभाने का मौका मिला। हनुमान अंश के डायरेक्टर डॉ. विशाल चतुर्वेदी ने नीम करौली बाबा के लिए किरदार की खोज की, जिसमें मैं शतप्रतिशत खरा उतर सका और हनुमान जी का यह आशीर्वाद ही था कि मुझे 2018 से ही इस रोल के लिए हनुमान जी तैयार कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हनुमान चालीसा में अनंत शक्ति है और सभी समस्या का समाधान भी। 2025 से शुटिंग प्रारंभ हुई, जिसमें कई बार आर्थिक समस्या भी आई
02 करोड़ की बजट वाली मूवी हनुमान अंश की शुटिंग 2025 में प्रारंभ हुई और 2026 में रिलिज हुई। उन्होंने अपना अनुभव साझा किया और कहा कि शुटिंग के दौरान कई बार डायरेक्टर एवं प्रोड्यूसर (अनुप्रिया नागर) को आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ा लेकिन हनुमान जी साथ थे, इस तरह की और कई समस्याएं आती थीं, तब डायरेक्टर टीम को हनुमान चालीसा का पाठ करने को कहते थे। हम 20-25 मिनट तक हनुमान चालीसा पढ़ते, तब तक समस्या दूर हो जाए रहती थी। हनुमान चालीसा का पाठ एक चमत्कार है। हमारे पास प्रमोशन के लिए पैसे नहीं थे
आज किसी भी फिल्म का हिट होने के लिए प्रमोशन भी हिट होना चाहिए, लेकिन हनुमान अंश के प्रमोशन के लिए डायरेक्टर-प्रोड्यूसर के पास पैसे नहीं थे और हमने फिल्म रिलिज कर दी। तीन-चार दिन तक फिल्म को ज्यादा रिस्पांस नहीं मिला, लेकिन यह हनुमान जी और नीम करौली बाबा का चमत्कार ही कहें कि तीन-चार दिन के बाद हनुमान अंश बच्चों-बच्चों के जुबान पर पहुंचा और बाक्स आफिस पर फिल्म ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने कि फिल्म जब तीन-चार दिन नहीं चली, लेकिन हमें पूरा विश्वास था कि हनुमान अंश घर-घर की कहानी, कीर्तन, भजन के रूप में हर घर में पहुंचेगा। हनुमान अंश के बाद जो भी फिल्म करूं, लेकिन मर्यादा में रहकर
शोभिनव सत्य ने कहा कि हनुमान अंश में नीम करौली बाबा का किरदार मेरे रोम-रोम में बस चुका है। मैंने बचपन से लेकर अब तक कभी किसी को अपशब्द नहीं बोले, सबके साथ प्रेम व्यवहार मेरे जीवन का हिस्सा रहा और इस किरदार ने तो मेरी मर्यादा बांध दी, जिसे कभी भी कोई भी फिल्म रोल मिले, मर्यादा के बंधन को सदैव स्मरण में रखूंगा। एक प्रश्न के जवाब में कहा-फिल्में समाज की आईना होती हैं और फिल्म देखकर युवा उसी ओर आकर्षित होते हैं। हमारी फिल्म का उद्देश्य सभी को एक-दूसरे से प्रेम करना सिखाना, सबकी सेवा करना, जिसमें जानवर भी शामिल हैं, भूखों को भोजन कराना, सेवा भाव से किसी का कष्ट और परेशानी को कम करना या दूर करना, जो संतों का भी संदेश होता है।
माता रानी से क्षेत्रवासियों के सुख, शांति, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना, डॉ. चरणदास महंत भी रहे साथ कोरबा। शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने आज कोरबा के विभिन्न देवी मंदिरों में पहुंचकर माता रानी की विधिवत पूजा-अर्चना की और समस्त क्षेत्रवासियों के सुख, शांति, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य एवं खुशहाली की कामना की।
जयसिंह अग्रवाल ने सर्वमंगला मंदिर, भवानी मंदिर एवं मुड़ादाई मंदिर में पहुंचकर माता रानी के दर्शन किए तथा विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान उनके साथ छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत भी उपस्थित रहे। दोनों नेताओं ने श्रद्धा एवं आस्था के साथ माता रानी की पूजा कर प्रदेश एवं कोरबा क्षेत्र की सुख-समृद्धि तथा जनकल्याण की कामना की।
नवरात्रि के अवसर पर शारदा विहार में आयोजित भोग-भंडारे में भी जयसिंह अग्रवाल शामिल हुए। उन्होंने श्रद्धालुओं एवं आयोजनकर्ताओं से मुलाकात की तथा भोग-प्रसाद ग्रहण कर माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह एवं भक्तिमय वातावरण देखने को मिला।
जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि नवरात्रि केवल शक्ति की आराधना का पर्व ही नहीं, बल्कि समाज में श्रद्धा, सद्भाव, सेवा और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने वाला पावन अवसर है। मां दुर्गा की आराधना हमें सत्य, धर्म, साहस और जनसेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। उन्होंने इस पावन अवसर पर सभी क्षेत्रवासियों को नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए माता रानी से प्रार्थना की कि कोरबा सहित पूरा छत्तीसगढ़ सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली से परिपूर्ण रहे तथा प्रत्येक परिवार में स्वास्थ्य, सुख और आनंद बना रहे। इस अवसर पर मंदिरों एवं भोग-भंडारा आयोजनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं स्थानीयजन उपस्थित रहे।
बिलासपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) की स्थायी बेंच बनाने की मांग पर हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। छत्तीसगढ़ सीनियर लॉयर फोरम की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्रा और जस्टिस संतोष शर्मा की डिवीजन बेंच ने केंद्र सरकार को तीन सप्ताह के भीतर सक्षम अधिकारी का शपथपत्र पेश करने का निर्देश दिया है।
इसके अलावा कोर्ट ने स्थायी बेंच बनाने के लिए उठाए गए कदमों और मौजूदा स्थिति की जानकारी भी मांगी है। दरअसल, याचिका में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ में CAT की स्थायी बेंच नहीं होने से सरकारी कर्मचारियों और दूसरे पक्षकारों को परेशानी होती है।
बिलासपुर में इसकी सर्किट बेंच सीमित समय के लिए चलती है। इस वजह से आवेदन जमा करने, दस्तावेजों की गलतियां सुधारने और दूसरी प्रक्रियाओं के लिए पक्षकारों को जबलपुर जाना पड़ता है। इससे उनका समय और खर्च दोनों बढ़ते हैं।
छत्तीसगढ़ में CAT की स्थायी बेंच नहीं होने से सरकारी कर्मचारियों और दूसरे पक्षकारों को परेशानी होती है।
साल में 5 बार ही बिलासपुर आती है सर्किट बेंच
याचिकाकर्ता छत्तीसगढ़ सीनियर लॉयर फोरम की ओर से अधिवक्ता बीपी राव, विकास बाजपेयी, अरविंद सिन्हा और पूजा सिन्हा ने पक्ष रखा। उन्होंने कोर्ट को बताया कि मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित CAT की मुख्य बेंच की सर्किट बेंच साल में 5 बार बिलासपुर आती है। हर बार यह एक सप्ताह तक काम करती है।
सीमित समय तक सुनवाई होने के कारण पक्षकारों को कई प्रक्रियाओं के लिए जबलपुर जाना पड़ता है। इसके बाद मामलों की ऑनलाइन सुनवाई होती है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, इस व्यवस्था से छत्तीसगढ़ के सरकारी कर्मचारियों और उनके वकीलों को परेशानी होती है।
CAT भवन के लिए जमीन आवंटित, फिर भी छोटे कमरे में चल रही बेंच
याचिका में बताया गया कि बिलासपुर में कैट भवन के लिए जमीन आवंटित की जा चुकी है। इसके बावजूद सर्किट बेंच जिला उपभोक्ता फोरम के पहले तल पर स्थित एक छोटे कमरे में चल रही है।
फोरम की ओर से दलील दी गई कि छत्तीसगढ़ में कैट की स्थायी बेंच बनने से पक्षकारों को बार-बार जबलपुर नहीं जाना पड़ेगा। इससे न्यायिक प्रक्रिया आसान होगी और प्रशासनिक मामलों की सुनवाई के लिए स्थानीय स्तर पर बेहतर व्यवस्था मिल सकेगी।
जबलपुर स्थित CAT की मुख्य बेंच की सर्किट बेंच साल में 5 बार बिलासपुर आती है।
जवाब के लिए केंद्र सरकार ने मांगा समय
केंद्र सरकार की ओर से उप सॉलिसिटर जनरल रमाकांत मिश्रा और अधिवक्ता अन्नपूर्णा तिवारी ने पक्ष रखा। रमाकांत मिश्रा ने स्थायी बेंच बनाने के लिए अब तक उठाए गए कदमों और मौजूदा स्थिति की जानकारी देने के लिए सक्षम अधिकारी का शपथपत्र पेश करने के लिए समय मांगा।
इसके बाद डिवीजन बेंच ने केंद्र सरकार को तीन सप्ताह के भीतर शपथपत्र पेश करने का निर्देश दिया। राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शशांक ठाकुर और उप शासकीय अधिवक्ता अनुजा शर्मा उपस्थित हुए।
राज्य बनने के 25 साल बाद भी नहीं हुई पहल
बता दें कि अविभाजित मध्य प्रदेश के समय केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण की स्थापना जबलपुर में की गई थी। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के 25 साल बाद भी प्रदेश में कैट की स्थायी बेंच स्थापित नहीं की गई है।
इस दिशा में अब तक कोई पहल नहीं हुई है। इसके चलते प्रदेश के अधिकारी-कर्मचारियों और दूसरे पक्षकारों को केस दायर करने के लिए जबलपुर स्थित अधिकरण जाना पड़ता है।