रायपुर, एजेंसी। बीजेपी की नई प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी अपने पहले छत्तीसगढ़ दौरे में ही सरकार और संगठन के कामकाज की समीक्षा करेंगी। उनके साथ प्रदेश सह-प्रभारी सिद्धार्थ शंभू भी छत्तीसगढ़ आएंगे।
25 और 26 अक्टूबर को होने वाली बैठकों में मंत्रियों के विभागीय कामकाज के साथ संगठन का जमीनी फीडबैक भी अहम रहेगा। पार्टी का फोकस 2023 के विधानसभा चुनाव में हारी हुई 36 सीटों पर रहेगा।
इन क्षेत्रों में संगठन की स्थिति, बूथ समितियों की सक्रियता और पन्ना प्रमुखों की भूमिका की समीक्षा की जाएगी। इसके जरिए यह समझने की कोशिश होगी कि पिछली बार इन सीटों पर पार्टी कहां कमजोर रही और आगामी चुनाव से पहले किन स्तरों पर सुधार की जरूरत है।
स्मृति ईरानी सांसदों, विधायकों और मंत्रियों से अलग-अलग चर्चा करेंगी। इसके अलावा संगठन के पदाधिकारियों और जिला स्तर के नेताओं से भी बातचीत होगी। ऐसे में मंत्रियों की ओर से विभागीय उपलब्धियों और योजनाओं का ब्योरा दिए जाने के साथ जिलों में कामकाज को लेकर संगठन से मिलने वाला फीडबैक भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
इससे सरकार की योजनाओं और संगठन की जमीनी स्थिति के बीच तालमेल को समझने का अवसर मिलेगा।
विभागों में कितना काम, कितने लक्ष्य पूरे?
मंत्रियों से उनके विभागों की उपलब्धियों का ब्योरा लिए जाने पर सबसे अहम सवाल योजनाओं की घोषणा और उनके वास्तविक क्रियान्वयन के बीच का अंतर होगा। विभाग ने अब तक कौन-कौन से लक्ष्य पूरे किए, कितने काम लंबित हैं और किन परियोजनाओं में देरी हो रही है, इसकी जानकारी महत्वपूर्ण हो सकती है।
साथ ही मोदी की गारंटी के कितने काम हुए और इसके लिए विभागीय योजनाओं की प्रगति, स्वीकृत और पूर्ण परियोजनाओं, बजट के उपयोग और लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचने की स्थिति का विवरण मांगा जा सकता है। जिन योजनाओं में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है, उनमें देरी के कारण और उन्हें पूरा करने की समय सीमा भी तय की जा सकती है।
इसके अलावा विभाग से जुड़े विवाद, लंबित मामले, जनता की शिकायतें और प्रशासनिक स्तर पर आ रही अड़चनें भी कामकाज की तस्वीर समझने में अहम होंगी। इससे उपलब्धियों के साथ उन क्षेत्रों की पहचान भी की जा सकती है, जहां सुधार की जरूरत है।
प्रभार वाले जिलों का भी देना पड़ सकता है हिसाब
मंत्रियों को जिलों की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। ऐसे में उनके कामकाज का आकलन केवल विभागीय प्रदर्शन से नहीं, बल्कि प्रभार वाले जिलों में उनकी सक्रियता से भी जुड़ सकता है।
उनसे जानकारी ली जा सकती है कि मंत्री नियमित रूप से जिलों में जा रहे हैं या नहीं, मासिक बैठकें हो रही हैं या नहीं और कार्यकर्ताओं तथा जनता की समस्याओं पर कितना ध्यान दिया जा रहा है। जिलाध्यक्षों, जिला प्रभारियों, विधायकों और सांसदों से भी फीडबैक लिया गया था।
बैठक में मंत्रियों से उनके प्रभार वाले जिलों में की गई बैठकों, उठाए गए मुद्दों और समस्याओं के समाधान की जानकारी मांगी जा सकती है। मसलन, पिछले कुछ महीनों में कितने दौरे किए, जिला संगठन के साथ कितनी बैठकें हुईं, कार्यकर्ताओं की शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई और प्रशासनिक समस्याओं को दूर करने के लिए क्या पहल की गई।
मंत्री की रिपोर्ट और संगठन का फीडबैक
मंत्री अपने कामकाज का ब्योरा देंगे, लेकिन जिला स्तर पर संगठन की स्थिति की जानकारी जिलाध्यक्षों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के पास भी होती है। ऐसे में दोनों स्तरों से मिली जानकारी को साथ रखकर देखने से सरकार और संगठन के बीच तालमेल की स्थिति समझी जा सकती है।
यदि किसी मंत्री की ओर से जिले में नियमित बैठकों और समस्याओं के समाधान का दावा किया जाता है, तो स्थानीय संगठन से मिलने वाला फीडबैक उस तस्वीर को और स्पष्ट कर सकता है। कार्यकर्ताओं की नाराजगी, प्रशासनिक अधिकारियों से समन्वय की समस्या और जनता से जुड़े लंबित मुद्दे भी इस आकलन के महत्वपूर्ण पहलू हो सकते हैं।
सरकारी योजनाओं के प्रचार का भी हिसाब
सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाना केवल प्रशासनिक काम नहीं, बल्कि संगठनात्मक जनसंपर्क से भी जुड़ा है। ऐसे में नेताओं की सोशल मीडिया गतिविधियां और सरकारी योजनाओं के प्रचार में उनकी भूमिका भी समीक्षा का हिस्सा हो सकती है।
बीजेपी नेताओं के सोशल मीडिया पोस्ट और केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के प्रचार को लेकर जानकारी मांगने की बात भी कही जा रही है।
2028 से पहले संगठन को सक्रिय रखने की तैयारी
स्मृति ईरानी के दो दिवसीय दौरे में सांसदों, विधायकों, मंत्रियों और संगठन के पदाधिकारियों से बातचीत प्रस्तावित है। इन बैठकों के जरिए पार्टी सरकार के कामकाज और संगठन की गतिविधियों की स्थिति समझ सकती है। साथ ही आगामी चुनाव को देखते हुए संगठनात्मक प्राथमिकताओं पर चर्चा भी हो सकती है।
दौरे के बाद यह स्पष्ट होगा कि पार्टी किन क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने पर जोर देती है और क्या बूथ स्तर तक कामकाज की समीक्षा के लिए कोई समयसीमा या नई जिम्मेदारी तय की जाती है।
36 सीटों पर संगठन की स्थिति समझने की चुनौती
2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 90 में से 54 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। बाकी 36 सीटों पर पार्टी को हार मिली थी। आगामी विधानसभा चुनाव 2028 में होना है। ऐसे में जिन क्षेत्रों में पिछली बार पार्टी को सफलता नहीं मिली, वहां संगठन की स्थिति और चुनावी चुनौतियों को समझना महत्वपूर्ण होगा।
इन सीटों पर हार के कारण हर जगह एक जैसे नहीं थे। कहीं स्थानीय मुद्दे महत्वपूर्ण थे, तो कहीं उम्मीदवार, संगठन की सक्रियता या बूथ स्तर पर कमजोरियां प्रभावी रही।
विधानसभा क्षेत्रवार समीक्षा से इन अलग-अलग परिस्थितियों को समझने में मदद मिल सकती है। लिहाजा ये माना जा रहा है कि इन 36 सीटों की समीक्षा बैठक में की जा सकती है।
बूथ और पन्ना प्रमुखों के पुर्नगठन का प्लान तैयार होगा
चुनाव में बूथ स्तर का संगठन पार्टी की रणनीति को मतदाताओं तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बूथ समितियां स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने, मतदाताओं से संपर्क बनाने और पार्टी के कार्यक्रमों को जमीन पर लागू करने का काम करती हैं। वहीं पन्ना प्रमुखों की जिम्मेदारी मतदाता सूची के निर्धारित हिस्से में मतदाताओं से संपर्क बनाए रखने की होती है।
इसलिए प्रदेश प्रभारी बूथ समिति के पुर्नगठन के लिए एक्शन प्लान तैयार करके देंगी। इसके लिए बूथ पर विशेष सदस्यों का गठन किया जा सकता है।
समीक्षा के बाद तय हो सकती हैं प्राथमिकताएं
स्मृति ईरानी के दौरे में सांसदों, विधायकों, मंत्रियों और संगठन के पदाधिकारियों से अलग-अलग चर्चा की योजना है। ऐसे में बैठकों से सरकार के कामकाज, संगठन की सक्रियता और आगामी चुनाव की तैयारियों को लेकर पार्टी की प्राथमिकताओं के संकेत मिल सकते हैं।
मंत्रियों के विभागीय प्रदर्शन, प्रभार वाले जिलों में सक्रियता, कार्यकर्ताओं के साथ तालमेल और हारी हुई सीटों पर संगठन की स्थिति जैसे विषयों पर मिली जानकारी के आधार पर आगे के काम तय किए जा सकते हैं। लेकिन समीक्षा के बाद मंत्रिमंडल में बदलाव होगा या किसी नेता को नई जिम्मेदारी मिलेगी, इसे लेकर अभी कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।
फिलहाल इस दौरे का महत्वपूर्ण पहलू यही रहेगा कि पार्टी सरकार और संगठन के कामकाज का आकलन किन आधारों पर करती है और सामने आने वाली कमियों को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
जांजगीर-चांपा। जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ में शराब पीने के बाद संदिग्ध परिस्थितियों में बसपा पार्षद समेत दो लोगों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान बसपा पार्षद रामखिलावन जांगड़े (55) और निजी क्लिनिक संचालक जोहितराम खरे (52) के रूप में हुई है।
दोनों ने शुक्रवार देर शाम अपने दो अन्य साथियों के साथ देशी शराब का सेवन किया था। घर पहुंचने के बाद उन्हें सांस लेने में परेशानी होने लगी और उनकी तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद दोनों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पामगढ़ ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर उन्हें बिलासपुर रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान दोनों की मौत हो गई।
रामखिलावन जांगड़े ने सिम्स में, जबकि जोहितराम खरे ने अपोलो अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वहीं, शराब पीने के दौरान साथ रहे कमल नाथ खरे उर्फ राजा की शनिवार को तबीयत बिगड़ने पर उसे इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। मामले में शराब पीने के दौरान मौजूद मुकेश कश्यप उर्फ गोलू को पुलिस ने हिरासत में लिया है। उससे पूछताछ की जा रही है।
बसपा पार्षद रामखिलावन जांगड़े।
निजी क्लिनिक संचालक जोहितराम खरे
जहरीला पदार्थ मिला होने की आशंका
घटना के बाद शराब में जहरीला पदार्थ मिले होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, फिलहाल दोनों की मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है। इसकी पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही हो सकेगी।
दोनों मृतकों के शवों का बिलासपुर में पोस्टमॉर्टम कराया जाना है। मौत के कारणों का पता लगाने के लिए विसरा सुरक्षित रखकर जांच कराए जाने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दोनों की मौत शराब के सेवन से हुई या इसके पीछे कोई अन्य कारण था।
चार लोग साथ बैठकर पी रहे थे शराब
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार देर शाम भाजपा पार्षद रामखिलावन जांगड़े अपने तीन साथियों के साथ बैठकर शराब पी रहे थे। इनमें रामखिलावन जांगड़े और जोहितराम खरे की तबीयत अचानक बिगड़ गई। शराब सेवन के बाद दोनों को सांस लेने में परेशानी होने लगी।
हालत खराब होने पर परिजन और आसपास के लोग उन्हें इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पामगढ़ लेकर पहुंचे। वहां शुरुआती इलाज के बाद दोनों की स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें बिलासपुर रेफर कर दिया।
सिम्स में इलाज के दौरान बसपा पार्षद रामखिलावन जांगड़े की मौत हो गई।
सिम्स और अपोलो अस्पताल में हुई मौत
पामगढ़ से बिलासपुर पहुंचने के बाद रामखिलावन जांगड़े को सिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि जोहितराम खरे का अपोलो अस्पताल में इलाज चल रहा था। इलाज के दौरान दोनों ने दम तोड़ दिया।
दोनों की मौत के बाद मामले को संदिग्ध माना जा रहा है। शराब में जहरीला पदार्थ मिला होने की आशंका के बीच पोस्टमॉर्टम और अन्य जांच के जरिए मौत की वजह पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों की मौत शराब में किसी जहरीले पदार्थ की मौजूदगी के कारण हुई या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी।
सांस लेने में परेशानी के बाद बिगड़ी हालत
एसडीओपी तोपेश वर्मा के अनुसार, दोनों मृतकों ने अपने दो अन्य साथियों के साथ सादी देशी शराब का सेवन किया था। इसके बाद घर पहुंचने पर उन्हें सांस लेने में परेशानी होने लगी। हालत बिगड़ने पर दोनों को बिलासपुर के अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
एसडीओपी ने बताया कि शराब पीने के दौरान मौजूद दो अन्य साथियों की तलाश की जा रही है, ताकि घटना के संबंध में जानकारी जुटाई जा सके।
पोस्टमॉर्टम और जांच रिपोर्ट से स्पष्ट होगी मौत की वजह
दोनों शवों का बिलासपुर में पोस्टमॉर्टम कराया जाना है। मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए विसरा सुरक्षित रखकर जांच कराए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि दोनों की मौत किस वजह से हुई और क्या शराब में किसी जहरीले पदार्थ की मिलावट थी।
फिलहाल पुलिस मामले से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटा रही है। शराब सेवन के दौरान मौजूद दोनों अन्य साथियों से पूछताछ के बाद घटना के संबंध में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर 2026 से धान खरीदी की शुरुआत होने जा रही है। सरकार 3100 रुपए समर्थन मूल्य पर किसानों से धान खरीदेगी। पंजीकृत किसानों से 1 एकड़ में अधिकतम 21 क्विंटल धान लिया जाएगा। धान खरीदी का यह अभियान 31 जनवरी 2027 तक चलेगा।
दुर्ग पंडवानी महासम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने तारीख का ऑफिशियल ऐलान किया। राज्य सरकार ने इस सीजन में कुल 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का बड़ा लक्ष्य रखा है। पिछले साल 140 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया था। धान खरीदी का लक्ष्य इस साल 20 लाख मीट्रिक टन बढ़ा है।
पिछले 5 सालों में 63% बढ़ा धान खरीदी का लक्ष्य
2021-22: 98 लाख मीट्रिक टन
2026-27: 160 लाख मीट्रिक टन
5 साल में लक्ष्य 1.63 गुना बढ़ा
कुल बढ़ोतरी: 62 लाख मीट्रिक टन (करीब 63%)
किसानों को इन बातों का रखना होगा ध्यान:
एग्रीस्टैक पंजीयन अनिवार्य: धान बेचने के लिए इस बार किसानों को एग्रीस्टैक पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीयन कराना जरूरी किया गया है।
टोकन की व्यवस्था: खरीदी केंद्रों पर टोकन के जरिए तय तारीख पर ही धान की बिक्री हो सकेगी।
बायोमेट्रिक सत्यापन: उपार्जन केंद्रों पर पारदर्शिता बरतने के लिए किसानों का बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा।
गुणवत्ता और नमी के मानक: धान में नमी की मात्रा 17 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए, अन्यथा माल रिजेक्ट हो सकता है।
सूरजपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में टीचर और उनके बेटे की हत्या के आरोपी की पत्नी ने अपने पति को फांसी देने की मांग की है। आरोपी की पत्नी और मृतका एक ही स्कूल में टीचर थीं।
आरोपी की पत्नी ने बताया कि करीब 15 दिन पहले ही उसके पति ने बिना उसकी मर्जी के उसका एक करोड़ रुपए का बीमा कराया था। उसे शक है कि अगला टारगेट वह खुद थी। उसका कहना है कि पति ने घटना वाली रात पेंड्रा जाने की बात कहकर उसे गुमराह किया था। उसे पति के इस हत्याकांड के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
आरोपी की पत्नी ने बताया कि पति ने पुलिस की पूछताछ में टीचर की हत्या इगो में करने की बात कही थी। रजनी ने शायद प्रवेश को ‘नामर्द’ कहा था। आरोपी की पत्नी ने कहा, हो सकता है कि दोनों के बीच अवैध संबंध रहे हों, हालांकि इसकी जानकारी मुझे नहीं है।
मामला जयनगर और विश्रामपुर थाना क्षेत्र का है। आरोपी ने टीचर रजनी बरेट (40) से पैसे मांगे, नहीं देने पर उसका गला घोंट दिया। वहीं, मृतका के बेटे सूजल बरेट (18) को सुनसान जगह ले जाकर पत्थर से उसके सिर और सीने पर वार कर उसकी हत्या कर दी थी। पुलिस ने हत्या के आरोप में परवेश कुमार उर्फ प्रवेश कुमार को गिरफ्तार किया है।
बेटे की लाश सड़क किनारे सुनसान जगह में मिली थी।
महिला सरकारी स्कूल में टीचर थी, उसकी लाश बाथरूम में मिली थी।
पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
पत्नी ने कहा-बीमा कराया था, अगला टार्गेट मैं थी
दोहरे हत्याकांड के आरोपी प्रवेश कुमार की गिरफ्तारी के बाद उसकी पत्नी सरिता लकड़ा ने पति से सारे रिश्ते तोड़ने की बात कही और उसे जल्द से जल्द फांसी देने की मांग की।
सरिता कैमरे के सामने फूट-फूटकर रोने लगी। उसने बताया कि हत्या की घटना से करीब 15 दिन पहले ही उनके पति प्रवेश ने बिना उनकी मर्जी के टाटा एआईए कंपनी में उनका एक करोड़ रुपए का बीमा कराया था। सरिता ने आशंका जताई कि उनके पति का अगला टारगेट वह खुद थी।
पत्नी बोली- जान का खतरा, पति ने झूठ बोला था
सरिता लकड़ा ने कहा कि अब उसे अपनी जान का डर सता रहा है। पति ने एक करोड़ रुपए का बीमा इसलिए कराया था, ताकि मेरी मौत के बाद बीमा की रकम लेकर वह आसानी से फरार हो सके।
सरिता ने बताया कि घटना वाली रात भी पति ने पेंड्रा जाने की बात कहकर उसे गुमराह किया था। उन्हें इस हत्याकांड की जानकारी बाद में पुलिस के जरिए मिली। सरिता ने प्रशासन से अपनी सुरक्षा की मांग की है।
चार साल से थे लिव इन में
हत्याकांड का आरोपी प्रवेश कुमार मूल रूप से हरियाणा के करनाल जिले का रहने वाला है। वह ऑटो पार्ट्स सप्लाई का कारोबार करता था और विश्रामपुर में रह रहा था। कोरोना काल में उसकी आर्थिक स्थिति खराब हो गई थी। उसने कारोबार के लिए बैंक से 20 लाख रुपए का लोन भी लिया था।
आर्थिक तंगी के कारण उसे अपनी दुकान बंद करनी पड़ी। इसके बाद वह अलग-अलग दुकानों पर ऑटो पार्ट्स की सप्लाई करने लगा। सरिता लकड़ा के संपर्क में आने के बाद दोनों वर्ष 2022 से पति-पत्नी की तरह रह रहे थे। सरिता ने बताया कि इस वारदात के बाद उन्होंने अपनी मांग का सिंदूर मिटा दिया है।
‘नामर्द’कहने पर हत्या, कहा- हो सकता है अवैध संबंध
सरिता ने बताया कि उनके पति प्रवेश कुमार ने पुलिस की पुलिस की पूछताछ में कहा था कि उसने इगो में आकर रजनी की हत्या कर दी। सरिता के मुताबिक, रजनी ने शायद प्रवेश को ‘नामर्द’ कहा था, जिसके कारण उसने हत्या की।
सरिता ने यह भी कहा कि हो सकता है कि प्रवेश और रजनी के बीच अवैध संबंध रहे हों, लेकिन उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।
टीचर और बेटे की हुई थी हत्या
जानकारी के मुताबिक, 10 अक्टूबर की सुबह जयनगर थाना क्षेत्र के महावीरपुर में नेशनल हाईवे-43 से लगी ग्रामीण सड़क के किनारे एक लड़के का शव मिला था। लड़के की हत्या के बाद शव सड़क किनारे फेंका गया था।
मृतक की पहचान बिश्रामपुर के कार्मल कॉन्वेंट स्कूल में 12वीं के छात्र सुजल बरेठ (18) के रूप में हुई। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि सुजल की स्कूटी घर से करीब 500 मीटर दूर एक पेट्रोल पंप पर लावारिस हालत में खड़ी थी।
मां का शव बाथरूम में मिला
देर रात पुलिस सुजल के घर पहुंची, तो मुख्य दरवाजे पर ताला लगा मिला। उसकी मां रजनी बरेठ का भी पता नहीं चल रहा था। इसके बाद बिश्रामपुर पुलिस ने सुजल के रिश्तेदारों को मौके पर बुलाया। उनकी मौजूदगी में घर का ताला तोड़ा गया। अंदर बाथरूम में सुजल की मां रजनी बरेठ (40) का शव भी संदिग्ध हालत में मिला।
पति से तलाक के बाद बेटे के साथ रहती थी
रजनी बरेठ बेलटिकरी के सरकारी स्कूल में टीचर थीं। पति से 5 साल पहले तलाक के बाद वह अपने बेटे सुजल के साथ विश्रामपुर थाना क्षेत्र के केशवनगर में किराए के मकान में रहती थीं। घटना के बाद पुलिस ने कई संदेहियों से पूछताछ की।
मामला ब्लाइंड मर्डर का होने के कारण साइबर सेल और सूरजपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने कई संदिग्धों से पूछताछ की। आसपास के CCTV फुटेज खंगाले गए और संदिग्धों के मोबाइल की लोकेशन भी निकाली गई।
सहेली के पति पर गया शक
जांच के दौरान रजनी बरेठ के स्कूल में पदस्थ एक महिला टीचर के पति परवेश उर्फ प्रवेश कुमार (36) की भूमिका संदिग्ध मिली। पुलिस को CCTV में एक व्यक्ति टीचर के घर की ओर जाते दिखा था। जांच के बीच संदिग्ध फरार हो गया था। इसके बाद 22 अक्टूबर को पुलिस ने उसे हिरासत में लिया। पूछताछ में आरोपी ने हत्या करना कबूल कर लिया।
पैसे देने से मना करने पर मां की हत्या
पूछताछ में प्रवेश कुमार ने रजनी बरेठ और सुजल बरेठ की हत्या करना स्वीकार किया। आरोपी ने बताया कि उसकी पत्नी और रजनी बरेठ एक ही स्कूल में टीचर थीं, जिसके कारण आरोपी का रजनी बरेठ के घर आना-जाना था।
आरोपी ने मोटर-पार्ट्स के व्यवसाय के लिए 20 लाख रुपये का लोन लिया था और उसे पैसों की जरूरत थी। उसे पता था कि रजनी बरेठ ने भी 19 लाख रुपये का लोन लिया है।
9 अक्टूबर की दोपहर आरोपी पैदल रजनी बरेठ के घर पहुंचा। रजनी शाम को ड्यूटी से लौटीं, तो सुजल ट्यूशन के लिए घर से चला गया। प्रवेश ने रजनी से पैसे मांगे। उन्होंने पैसे देने से मना कर दिया।
बाथरूम में गला दबाकर मार डाला
पैसों के लालच में प्रवेश कुमार ने रजनी बरेठ से झूमाझटकी की। जब रजनी भागने लगीं, तो आरोपी ने उन्हें बाथरूम में खींचकर उनके सिर पर शैंपू की बोतल मारी और गला दबाकर उनकी हत्या कर दी।
आरोपी प्रवेश कुमार
सबूत मिटाने बेटे को मार डाला
आरोपी ने बताया कि बेटे सुजल को पता था कि घर पर उसकी मां और आरोपी मौजूद थे, इसलिए उसने सुजल को भी मारने की प्लानिंग की। वह रजनी के घर जाने वाले रास्ते के तिराहे पर करीब 3 घंटे तक सुजल का इंतजार करता रहा। रात करीब 9 बजे सुजल आया, तो उसने कहा कि तेरी मम्मी मेरे घर पर हैं।
आरोपी सुजल को कार में बैठाकर घुमाते हुए अंबिकापुर लेकर आया और उसे मैगी खिलाई। रात को वे राईं जंगल में बाथरूम जाने के बहाने रुके, जहां आरोपी ने सुजल के गले में स्टॉक कसकर उसे मारने की कोशिश की।
सीमेंट के टुकड़े से सिर-सीने पर मारा
सुजल भागने लगा, तो आरोपी ने सड़क किनारे पड़े सीमेंट के खंभे के टुकड़े से उसके सिर और सीने पर वार कर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद शव को कार में रखकर वह कालीघाट पहुंचा, जहां सड़क के किनारे उसने सुजल का शव फेंक दिया।
सूरजपुर एसपी योगेश पटेल ने बताया कि पुलिस ने दोहरे हत्याकांड के आरोपी के कब्जे से मृतका का मोबाइल, ज्वेलरी एवं अन्य सामान बरामद किया है। घटना में प्रयुक्त कार भी जब्त की गई है। आरोपी को कोर्ट में पेश कर दिया गया है।
सूरजपुर एसपी योगेश पटेल ने बताया कि पुलिस ने आरोपी के पास से मृतका का मोबाइल, गहने और अन्य सामान बरामद किया है। जांच में आरोपी की पत्नी की इस हत्याकांड में कोई भूमिका नहीं मिली है।