रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के PWD विभाग में 91 सिविल उप अभियंताओं का ट्रांसफर किया गया है। प्रशासनिक आधार पर यह तबादला किया गया है। आदेश के मुताबिक, संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नई पदस्थापना पर कार्यभार संभालना होगा।
आदेश के अनुसार, प्रदीप कुमार चंद्राकर को रायपुर संभाग क्रमांक-3 से गरियाबंद, फारूक इशराक को नवा रायपुर से दुर्ग और चुन्नूलाल साहू को बलौदाबाजार से रायपुर संभाग क्रमांक-3 भेजा गया है।
इसी तरह मंगल प्रसाद चंद्राकर को महासमुंद संभाग से विधानसभा रायपुर, मुकेश नायक को महासमुंद संभाग से राष्ट्रीय राजमार्ग (रा.रा.) संभाग रायपुर और अंशुमान सिंह को गरियाबंद से धमतरी पदस्थ किया गया है।
सुकमा, एजेंसी। सुकमा जिले के भेज्जी थाना क्षेत्र में सीआरपीएफ की 219वीं बटालियन की सी कंपनी ने अभियान चलाकर 79 जिलेटिन स्टिक और नक्सली उपयोग की अन्य सामग्री बरामद की है। जवानों ने ग्राम मोसलमुडगु के बाहरी जंगल में छिपाकर रखे गए सामान को जब्त किया। सीआरपीएफ के अनुसार, इस कार्रवाई से विस्फोटक सामग्री के संभावित इस्तेमाल का खतरा टालने में मदद मिली।
सीआरपीएफ की 219वीं बटालियन को 24 अक्टूबर को सूचना मिली थी कि मोसलमुडगु के बाहरी इलाके में नक्सलियों ने विस्फोटक और अन्य सामान छिपाकर रखा है। इसके आधार पर 25 अक्टूबर को शाम 4 बजे एरिया डोमिनेशन अभियान शुरू किया गया।
डॉग स्क्वॉड की मदद से की तलाशी
अभियान के दौरान शाम करीब 5:35 बजे जवान संदिग्ध स्थान पर पहुंचे। यहां DSMD और K9 डॉग स्क्वॉड की मदद से सघन तलाशी ली गई। इस दौरान एक छोटा नीला कंटेनर मिला, जिसमें विस्फोटक सामग्री और नक्सली गतिविधियों से जुड़ा सामान रखा था।
बम निरोधक दस्ते ने सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए सामग्री को सुरक्षित तरीके से बरामद किया। इसके बाद आसपास के इलाके में अन्य डंप की तलाश भी की गई।
डंप से ये सामग्री मिली
79 जिलेटिन स्टिक
पीले रंग के इलेक्ट्रिक वायर के 4 बंडल
हरे रंग के इलेक्ट्रिक वायर के 3 बंडल
7 हरे सिंथेटिक कॉम्बैट बेल्ट
नक्सली वर्दी के काले कपड़े के 3 बंडल
1 छोटा नीला कंटेनर
7 पेन
1 छोटा कैलकुलेटर
1 पॉकेट डायरी
शाम 7:20 बजे कैंप लौटे जवान
सर्च ऑपरेशन पूरा करने के बाद जवान शाम 7:20 बजे बरामद सामग्री के साथ सुरक्षित भेज्जी कैंप लौट आए। सीआरपीएफ के अनुसार, इलाके में नक्सली गतिविधियों पर नियंत्रण और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अभियान लगातार चलाए जा रहे हैं।
धमतरी, एजेंसी। धमतरी जिले के करका वन क्षेत्र में पेड़ों की छाल काटकर उन्हें नुकसान पहुंचाया गया है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व ने ऐसे 3500 क्षतिग्रस्त पेड़ों को बचाने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है।
पेड़ों की स्थिति की जांच कर वैज्ञानिक तरीके से उनका उपचार किया जा रहा है। इस काम में बेंगलुरु के वृक्ष संरक्षण विशेषज्ञ विजय निशांत भी मदद कर रहे हैं। उनकी संस्था प्रोजेक्ट वृक्ष फाउंडेशन इस अभियान में तकनीकी सहयोग दे रही है।
पेड़ों के तने के चारों ओर छाल काटने की प्रक्रिया को ‘गर्डलिंग’ कहते हैं। इससे पेड़ों में भोजन और पोषक तत्वों के परिवहन पर असर पड़ता है। नुकसान अधिक होने पर पेड़ सूखकर मर सकते हैं। करका वन क्षेत्र में इसी तरह क्षतिग्रस्त हुए पेड़ों को बचाने के लिए वन विभाग और विशेषज्ञों की टीम काम कर रही है।
पेड़ों की स्थिति के आधार पर तय होगा उपचार
वन विभाग और विशेषज्ञों की टीम ने चिह्नित 3500 पेड़ों को उनकी स्थिति और जीवित रहने की संभावना के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटा है। जिन पेड़ों को तत्काल उपचार की जरूरत है, उन्हें प्राथमिकता दी जा रही है। गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त पेड़ों के लिए विशेष तकनीकों और नियमित निगरानी की व्यवस्था की जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ पेड़ों के बचने की संभावना बेहतर है, जबकि कुछ को लंबे समय तक उपचार और देखभाल की जरूरत होगी। पूरी तरह मृत पेड़ों के संबंध में भी विशेषज्ञों की जांच के बाद ही जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
उपचार की योजना बनाते समय पेड़ की प्रजाति, उम्र, तने की मोटाई, क्षति की गंभीरता और छाल काटे जाने के बाद बीते समय को ध्यान में रखा जा रहा है। प्रत्येक पेड़ को एक क्रमांक दिया गया है। उसका रिकॉर्ड तैयार किया गया है, ताकि उपचार के बाद उसकी स्थिति में होने वाले बदलावों पर नजर रखी जा सके।
ब्रिज ग्राफ्टिंग तकनीक से बचाने की कोशिश
क्षतिग्रस्त पेड़ों के उपचार में ‘ब्रिज ग्राफ्टिंग’ जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें तने के प्रभावित हिस्से के ऊपर जीवित ऊतकों के बीच दोबारा संपर्क स्थापित करने की कोशिश की जाती है। इससे पेड़ में पोषक तत्वों का परिवहन बहाल करने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा ट्री बैंडेजिंग, घावों की देखभाल और जड़ों को मजबूत करने के उपाय भी किए जा रहे हैं। उपचार का तरीका प्रत्येक पेड़ की स्थिति के अनुसार तय किया जा रहा है, ताकि जहां संभव हो, वहां पेड़ प्राकृतिक रूप से दोबारा स्वस्थ हो सकें।
100 से ज्यादा वनकर्मी अभियान में जुटे
इस अभियान में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के 100 से अधिक मैदानी वनकर्मी जुटे हैं। इनके साथ ट्री डॉक्टर विजय निशांत, उद्यानिकी विशेषज्ञ और ग्राफ्टिंग के जानकार भी काम कर रहे हैं।
अभियान का उद्देश्य क्षतिग्रस्त पेड़ों को बचाने के साथ वनकर्मियों को वैज्ञानिक उपचार का व्यावहारिक प्रशिक्षण देना भी है। इससे भविष्य में ऐसे मामलों में समय पर उपचार किया जा सकेगा। उपचार के बाद प्रत्येक पेड़ की नियमित निगरानी होगी और उसकी स्थिति में होने वाले बदलावों का रिकॉर्ड रखा जाएगा।
कुछ पेड़ों में नए ऊतक विकसित होने के संकेत
मैदानी निरीक्षण के दौरान कुछ ऐसे पेड़ भी मिले हैं, जिनके क्षतिग्रस्त तनों पर नए ऊतक विकसित होते दिखाई दिए हैं। यह संकेत है कि कुछ पेड़ों में घाव भरने की प्रक्रिया प्राकृतिक रूप से शुरू हो चुकी है।
विशेषज्ञ इन पेड़ों का अध्ययन करेंगे, ताकि यह समझा जा सके कि किन परिस्थितियों में पेड़ अपने आप स्वस्थ हो सकते हैं और किन मामलों में सर्जरी या अतिरिक्त उपचार की जरूरत पड़ती है। इस अध्ययन के आधार पर भविष्य में वृक्ष संरक्षण की रणनीति को और प्रभावी बनाने का प्रयास किया जाएगा।
एक दशक में 1.25 लाख से ज्यादा पेड़ नष्ट होने का दावा
ड्रोन और सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से पता चला है कि पिछले एक दशक में करका वन क्षेत्र में 1.25 लाख से ज्यादा पेड़ नष्ट हुए हैं। अतिक्रमण बढ़ने से जंगल और जैव विविधता को नुकसान पहुंचने की चिंता बढ़ी है।
करका वन क्षेत्र पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यह पैरी नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र का हिस्सा है। ऐसे में यहां पेड़ों को होने वाला नुकसान केवल वन्यजीवों के आवास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर मिट्टी के संरक्षण, जैव विविधता और जलग्रहण क्षेत्र पर भी पड़ सकता है।
क्षतिग्रस्त पेड़ों को बचाने के साथ अतिक्रमण पर नियंत्रण, शेष वन क्षेत्र का संरक्षण और लगातार निगरानी करना भी जरूरी है।
डिप्टी डायरेक्टर बोले- पेड़ों के उपचार के बाद होगी नियमित निगरानी
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर वरुण जैन ने बताया कि करका क्षेत्र में क्षतिग्रस्त पेड़ों को बचाने के लिए वैज्ञानिक तरीके से उपचार किया जा रहा है। विशेषज्ञों की मदद से पेड़ की स्थिति का आकलन कर उसके अनुसार उपचार की योजना बनाई गई है।
उन्होंने बताया कि अभियान में वनकर्मियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है, ताकि उपचार के साथ उनकी तकनीकी क्षमता भी बढ़ाई जा सके। उपचार के बाद पेड़ों की नियमित निगरानी की जाएगी और परिणामों का रिकॉर्ड रखा जाएगा।
इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि कौन-सी तकनीक किस तरह के पेड़ों के लिए अधिक प्रभावी है। वन विभाग का प्रयास है कि अधिक से अधिक क्षतिग्रस्त पेड़ों को बचाकर करका क्षेत्र की प्राकृतिक विरासत का संरक्षण किया जा सके।
रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 में भारतीय वायुसेना की सारंग हेलिकॉप्टर डिस्प्ले टीम आकर्षण का केंद्र रहेगी। सोमवार को टीम रायपुर पहुंच गई। राज्योत्सव के दौरान नवा रायपुर अटल नगर के सेंध लेक क्षेत्र के ऊपर हेलिकॉप्टर से हवाई करतब दिखाए जाएंगे। तीन दिवसीय राज्योत्सव में होने वाला यह प्रदर्शन दर्शकों को रोमांचित करेगा।
पब्लिक रिलेशन ऑफिसर विंग कमांडर देबर्थो धर ने बताया सारंग टीम स्वदेशी एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर (ALH) ध्रुव से प्रदर्शन करती है। टीम की पहचान हवा में सटीक उड़ान, एक साथ तालमेल के साथ बनाई जाने वाली आकृतियों और हैरतअंगेज करतबों के लिए है। प्रदर्शन के दौरान वायुसेना के जवान अपने कौशल, अनुशासन और टीमवर्क का प्रदर्शन करेंगे। इसके साथ ही स्वदेशी हेलिकॉप्टरों की क्षमता भी दिखाई जाएगी।
मोर के रंगों से मिलती है टीम की पहचान
सारंग हेलिकॉप्टर डिस्प्ले टीम के हेलिकॉप्टरों के रंग मोर से प्रेरित हैं। टीम का ध्येय वाक्य ‘इंस्पायर थ्रू एक्सीलेंस’ है, जिसका अर्थ उत्कृष्टता के जरिए प्रेरित करना है। टीम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भारतीय वायुसेना का प्रतिनिधित्व करती है।
युवाओं को विमानन के क्षेत्र में आगे बढ़ने की मिलेगी प्रेरणा
राज्योत्सव में सारंग टीम का प्रदर्शन आम लोगों, विद्यार्थियों और युवाओं को हेलिकॉप्टरों की उड़ान और विमानन की दुनिया को करीब से देखने का अवसर देगा। इसके जरिए युवाओं में विमानन के क्षेत्र में करियर बनाने और देश की सेवा करने के प्रति रुचि बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।