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कोरबा

सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आंगनबाड़ी मिलन सेवा कार्यक्रम संपन्न

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आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं महिला हितग्राहियों का किया गया सम्मान

कोरबा/हरदी बाजार। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत हरदी बाजार स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में आंगनबाड़ी मिलन सेवा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, महिला हितग्राहियों एवं क्षेत्र की महिलाओं ने सहभागिता की।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सुश्री ऊषा विश्वकर्मा, प्रदेश अध्यक्ष, भू-विस्थापित कोयला कर्मचारी एसोसिएशन एवं भाजपा नेत्री रहीं। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं महिला हितग्राहियों का सम्मान करते हुए उनके महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की।

कार्यक्रम में मुख्य अभ्यागत श्रीमती अनसुया राठौर, जिला महामंत्री एवं श्रीमती अनिल टंडन उपस्थित रहीं। साथ ही परियोजना अधिकारी टंकेश्वर लांझे एवं पर्यवेक्षक श्रीमती हेमलता साहू की गरिमामयी उपस्थिति रही। श्रीमती अनसुया राठौर का पुष्पगुच्छ से स्वागत किया गया, वहीं श्रीमती अनिल टंडन का स्वागत राजकुमारी राज द्वारा किया गया।

सम्मानित हितग्राही एवं कार्यकर्ता

हरदी क्षेत्र से: भगवती यादव (हरदी-04), शारदा राठौर, गौड़ भराई, चंद्रिका देवाकर एवं नंदनी कुमारी।

PMMVY/MYY योजना की महिला हितग्राही
सुमन महर, दुर्गा पाटले, पूनम एक्का, यशोदा कुरी, प्रेमा, चंद्रिका, संतोषी एवं सोना।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता
शिवकुमारी राज, खुलेखा, किरण श्रीवास, मिथिला लोनरी, दिनेश्वरी बंजारे, रसीमा खांडे, सुकृता मधुकर, शारदा राठौर एवं सुधा मिश्रा सहित अन्य कार्यकर्ताओं का सम्मान किया गया।

इस अवसर पर सुश्री ऊषा विश्वकर्मा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिला एवं बाल विकास की योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य, प्रारंभिक शिक्षा और महिलाओं से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सेवा, समर्पण और जिम्मेदारी समाज के स्वस्थ एवं सशक्त भविष्य की मजबूत नींव है। उनके योगदान का सम्मान करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित महिलाओं एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने सेवा, सम्मान और जनकल्याण की भावना के साथ सेवा संकल्प अभियान को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

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कोरबा

डीएमएफ से कोरबा में मजबूत हो रही अधोसंरचना, जर्जर भवनों के पुनर्निर्माण से बढ़ रही बुनियादी सुविधाएं’

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प्रशासन ने बदली तानाखार स्कूल की तस्वीर, 45 साल पुराने भवन से मिली मुक्ति, तानाखार के बच्चों को मिला सुरक्षित पढ़ाई का माहौल’
नए भवन में लौटी पढ़ाई की रौनक, बढ़ी विद्यार्थियों की संख्या और शैक्षणिक सुविधाएं, शाला परिवार ने जताया आभार

कोरबा 25 सितंबर 2026। दूरस्थ अंचलों में विकास की सुविधाएं पहुचांने के साथ बच्चों के भविष्य को संवारने की दिशा में जिला प्रशासन द्वारा जिला खनिज संस्थान न्यास मद से किए जा रहे कार्याे का असर ग्रामीण क्षेत्रों में परिलक्षित हो रहा। जिले के  पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के ग्राम पंचायत तानाखार में डीएमएफ मद से शिक्षा के लिए एक नई शुरुआत हुई है। करीब 45 वर्ष पुराने जर्जर माध्यमिक शाला भवन की जगह अब जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) मद से निर्मित नया शैक्षणिक भवन बच्चों को सुरक्षित, सुविधाजनक और बेहतर अध्ययन का वातावरण दे रहा है। नए भवन में विद्यालय का संचालन शुरू होने के साथ बच्चों में उत्साह बढ़ा है और पालकों को भी अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए बेहतर सुविधा मिलने की खुशी है।

पुराना विद्यालय भवन लंबे समय से जर्जर स्थिति में था। बरसात के दिनों में छत से पानी टपकता था, दीवारों में दरारें थीं और फर्श में सीलन बनी रहती थी। ऐसी परिस्थितियों में बच्चों के लिए कक्षा में एकाग्र होकर पढ़ाई करना कठिन होता था। विद्यालय में लंबे समय से 200 से अधिक विद्यार्थियों की दर्ज संख्या रही है। भवन की स्थिति को देखते हुए शाला स्टॉफ और क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों द्वारा नए भवन की मांग लगातार रखी जा रही थी।
जिला प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा और उनके अध्ययन के अनुकूल वातावरण की आवश्यकता को प्राथमिकता देते हुए लगभग दो वर्ष पूर्व डीएमएफ मद से नवीन भवन निर्माण की स्वीकृति दी। निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद अब माध्यमिक शाला नए भवन में संचालित हो रही है। विद्यालय परिसर में कक्षाओं के साथ स्टाफ रूम, प्रधानपाठक कार्यालय, हॉल, खेल मैदान, बाउंड्रीवाल, शौचालय और किचन शेड जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इन व्यवस्थाओं से विद्यार्थियों और शिक्षकों को विद्यालयीन गतिविधियों के लिए व्यवस्थित वातावरण मिला है।

प्रधानपाठक श्रीमती जयन्ती सिरसो बताती हैं, “पुराने भवन में बरसात के समय छत से पानी टपकता था और दीवारों में दरारें व फर्श में सीलन की समस्या रहती थी। बच्चों को ऐसी स्थिति में पढ़ाना चुनौतीपूर्ण होता था। नए भवन में पर्याप्त और व्यवस्थित कक्षाएं मिली हैं। स्टाफ रूम, प्रधानपाठक कार्यालय, हॉल, शौचालय, किचन शेड और खेल मैदान जैसी सुविधाओं से विद्यालय की पूरी व्यवस्था बेहतर हुई है। बच्चों में पढ़ाई के प्रति उत्साह बढ़ा है और पालक भी अब विद्यालय की सुविधाओं को देखकर संतुष्ट हैं। विद्यालय की दर्ज संख्या में भी वृद्धि हुई है और पर्याप्त शिक्षकों के साथ पढ़ाई का स्तर बेहतर हुआ है।”
नए भवन में पहुंचने के बाद विद्यार्थियों के लिए विद्यालय आना अधिक सुखद हो गया है। कक्षाओं में बेहतर वातावरण मिलने से वे पढ़ाई के साथ खेल और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों में भी उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। शाला प्रबंधन समिति के सदस्य, प्रधानपाठक, शिक्षक-शिक्षिकाएं और विद्यार्थी नए भवन को विद्यालय के लिए महत्वपूर्ण सुविधा मानते हुए अपनी प्रसन्नता व्यक्त कर रहे हैं।
जिला प्रशासन द्वारा डीएमएफ के माध्यम से जिले के विकास के लिए निरंतर अधोसंरचना और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने का कार्य किया जा रहा है। जर्जर आंगनबाड़ी केंद्रों, विद्यालय भवनों, स्वास्थ्य केंद्रों, आश्रम-छात्रावासों, पुल-पुलिया, सड़कों सहित विभिन्न आवश्यक विकास कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जिला खनिज संस्थान न्यास के माध्यम से कोरबा जिले को उपलब्ध संसाधनों का उपयोग क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों में किया जा रहा है।
तानाखार माध्यमिक शाला के शाला प्रबंधन समिति के सदस्यों, प्रधानपाठक, समस्त स्टॉफ और विद्यार्थियों ने नया भवन उपलब्ध कराने तथा बेहतर शैक्षणिक वातावरण प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और जिला प्रशासन के प्रति आभार एवं धन्यवाद व्यक्त किया है।

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प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम ने बदली वंदना की राह, डीजे-लाइट्स व्यवसाय से आर्थिक रूप से हुई सशक्त

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रोजगार की नई राह बनी प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना, वंदना के परिवार में आई खुशहाली

कोरबा 25 सितंबर 2026। स्वरोजगार को बढ़ावा देकर लोगों को अपने पैरों पर खड़ा करने की दिशा में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। योजना के तहत बैंक ऋण और अनुदान का लाभ लेकर हितग्राही अपने व्यवसाय की शुरुआत कर रहे हैं। कोरबा नगर के पटेलपारा निवासी श्रीमती वंदना पैंकरा भी इसी योजना का लाभ लेकर आज अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
वंदना बताती हैं कि योजना की जानकारी उन्हें जागरूकता शिविर के माध्यम से मिली। इसके बाद उन्होंने जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र के मार्गदर्शन में आवेदन किया। डीजे, लाइट्स एंड साउंड का व्यवसाय शुरू करने के लिए बैंक ऑफ बड़ौदा से उन्हें 10 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। योजना के अंतर्गत 35 प्रतिशत यानी 3.50 लाख रुपये की सब्सिडी का लाभ मिल रहा है, जबकि शेष ऋण राशि का भुगतान वे बैंक की किश्तों के माध्यम से कर रही हैं।
वंदना के लिए यह बदलाव केवल व्यवसाय शुरू होने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे परिवार की आमदनी का नया रास्ता खुला है। वे बताती हैं कि योजना से जुड़ने से पहले उनकी अनुमानित मासिक आय करीब 11 हजार रुपये थी। अब डीजे, लाइट्स एवं साउंड के व्यवसाय से उनकी मासिक आय लगभग 50 से 80 हजार रुपये तक पहुंच गई है।
वे शादी-विवाह, बारात, पार्टियों और विभिन्न सामाजिक आयोजनों में डीजे, लाइट एवं साउंड की सेवाएं दे रही हैं। नियमित रूप से काम मिलने से आमदनी में वृद्धि हुई है और परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में भी आसानी हो रही है। सात सदस्यों वाले परिवार के लिए पहले सीमित आय में घर चलाना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन अब आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में काफी सुदृढ़ हुई है।
वंदना कहती हैं कि “योजना से मिले सहयोग ने मुझे अपना व्यवसाय आगे बढ़ाने का अवसर दिया। अब मैं स्वयं काम कर रही हूं और अपनी आय से परिवार की जरूरतें पूरी कर पा रही हूं। पहले आमदनी सीमित थी, लेकिन आज नियमित काम मिलने से आत्मविश्वास भी बढ़ा है और परिवार का जीवन बेहतर हुआ है।”
वंदना को शासन की अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं का भी लाभ मिल रहा है। उनका कहना है कि स्वरोजगार के इस अवसर ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ाया है। अपने अनुभव के लिए वे भारत सरकार के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करती हैं।

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अंत्योदय योजना से जमुना के हुनर को मिला नया आधार, घर से शुरू किया सिलाई का काम

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अपने हुनर से कमाई का सपना था, योजना से उसे पूरा करने का अवसर मिला” – जमुना कुर्रे

कोरबा 25 सितंबर 2026। अंत्योदय स्वरोजगार योजना के जरिए गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के लोगों को अपने पैरों पर खड़े होने के लिए ऋण सुविधा दी जाती है। योजना में स्वीकृत ऋण का 50 प्रतिशत अथवा अधिकतम 10 हजार रुपये तक की राशि शासन द्वारा अनुदान के रूप में प्रदान की जाती है। इससे अपने कौशल के आधार पर काम शुरू करने की इच्छा रखने वाले हितग्राहियों को जरूरी साधन जुटाने में सहायता मिलती है।
कोरबा जिले के रजगामार की जमुना कुर्रे भी इसी योजना से जुड़कर अपने सिलाई कौशल को कमाई के साधन में बदल रही हैं। उन्हें सिलाई का काम पहले से आता था। उनकी इच्छा थी कि घर से ही सिलाई सेंटर चलाकर नियमित आमदनी शुरू करें, लेकिन आर्थिक परिस्थितियों के चलते सिलाई मशीन खरीदना और काम के लिए जरूरी व्यवस्था करना संभव नहीं हो पा रहा था।
अंत्यावसायी विभाग के माध्यम से उन्हें अंत्योदय स्वरोजगार योजना के बारे में पता चला। इसके बाद उन्होंने कार्यालय जाकर योजना की शर्तों और आवेदन संबंधी जानकारी प्राप्त की और प्रक्रिया पूरी करते हुए आवेदन किया। योजना के अंतर्गत उन्हें 30 हजार रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। साथ ही 10 हजार तक शासकीय अनुदान भी उन्हें मिला। इसी राशि से उन्होंने सिलाई मशीन लेकर घर पर अपना काम शुरू किया।
जमुना अब कपड़ों की सिलाई के साथ कढ़ाई और पीको-फॉल का काम भी कर रही हैं। आसपास के ग्रामीण नियमित रूप से उनके पास कपड़े सिलवाने पहुंचते हैं। काम से उन्हें प्रतिमाह करीब 5 से 7 हजार रुपये की आमदनी हो रही है। इससे घर की आय में उनका योगदान बढ़ा है और परिवार की आर्थिक स्थिति भी धीरे-धीरे बेहतर हो रही है।

जमुना कुर्रे अपने अनुभव को साझा करते हुए कहती हैं, “सिलाई मुझे आती थी और मन में अपना काम शुरू करने की इच्छा भी थी, लेकिन साधन जुटाना मुश्किल था। योजना के बारे में जानकारी मिलने के बाद मैंने आवेदन किया। ऋण मिलने पर मशीन खरीदकर घर से काम शुरू कर सकी। अब आसपास के लोग सिलाई के लिए आते हैं और मुझे हर महीने आमदनी हो जाती है। इससे परिवार की जरूरतों में सहयोग करने का भरोसा बढ़ा है।”
घर से संचालित इस काम ने जमुना को परिवार की जिम्मेदारियों के बीच अपनी आमदनी का जरिया उपलब्ध कराया है। वे अपने काम को आगे बढ़ाते हुए अधिक लोगों तक सिलाई की सुविधा पहुंचाना चाहती हैं। उन्होंने स्वरोजगार के लिए आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।

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