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कोरबा

बालको ने डिजिटल कंट्रोल टावर्स के माध्यम से प्रचालन को बनाया अधिक स्मार्ट

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बालकोनगर, 31 अगस्त 2026। वेदांता एल्यूमिनियम मेटल लिमिटेड की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने अपने लॉजिस्टिक्स और प्रचालन को अधिक स्मार्ट और कनेक्टेड बनाने की दिशा में पांच एआई-सक्षम डिजिटल कंट्रोल टावर्स को एकीकृत किया है। ये कंट्रोल टावर्स कोयला लॉजिस्टिक्स, फिनिश्ड प्रोडक्ट, फ्लाई फ्लाई ऐश प्रबंधन, आंतरिक वाहनों और अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े संचालन को एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाते हैं। इससे महत्वपूर्ण प्रचालन गतिविधियों की रियल-टाइम निगरानी, बेहतर समन्वय और डेटा आधारित निर्णय लेने में मदद मिल रही है। यह पहल तकनीक-सक्षम और मजबूत घरेलू विनिर्माण मूल्य श्रृंखला विकसित करने की भारत की व्यापक दिशा के अनुरूप है।

इस डिजिटल व्यवस्था में जीपीएस, आईओटी आधारित वाहन ट्रैकिंग, एआई आधारित वीडियो टेलीमैटिक्स, जियो-फेंसिंग और रियल-टाइम एनालिटिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया है। इनके माध्यम से लॉजिस्टिक्स गतिविधियों की शुरुआत से अंत तक निगरानी और बेहतर प्रबंधन संभव हो रहा है। एजेंटिक एआई से लैस ये कंट्रोल टावर्स उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण कर प्रचालन के रुझानों को समझने, संभावित आवश्यकताओं की पहचान करने और समय पर कार्रवाई के लिए सुझाव देने में मदद करते हैं। इससे संसाधनों के बेहतर उपयोग, प्रक्रियाओं में अनुशासन और प्रचालन की प्रभावशीलता को बढ़ावा मिलता है।

कोयला लॉजिस्टिक्स कंट्रोल टावर कोयले के परिवहन की डिजिटल ट्रैकिंग और मूवमेंट प्लानिंग में मदद करता है। इससे कोयले की आवाजाही की निगरानी और आपूर्ति श्रृंखला में बेहतर समन्वय सुनिश्चित होता है। फिनिश्ड प्रोडक्ट कंट्रोल टावर प्लांट के भीतर तैयार उत्पादों की आवाजाही को डिजिटल रूप से प्रबंधित करता है। इसमें डिजिटल प्रूफ ऑफ डिलीवरी, जियो-फेंसिंग आधारित रूटिंग और ट्रैफिक मैनेजमेंट जैसी सुविधाएं शामिल हैं, जो उत्पादों की आवाजाही को अधिक व्यवस्थित बनाती हैं। फ्लाई ऐश मैनेजमेंट कंट्रोल टावर राख की आवाजाही और निर्धारित मार्गों की रियल-टाइम निगरानी करता है। इससे राख के परिवहन की बेहतर ट्रैकिंग, संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन और पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन में सहायता मिलती है। वेस्ट मैनेजमेंट कंट्रोल टावर अपशिष्ट पदार्थों की आवाजाही और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुपालन की निगरानी करता है, जिससे बेहतर ट्रेसबिलिटी और जवाबदेही सुनिश्चित होती है।

वहीं, इंटरनल व्हीकल कंट्रोल टावर प्लांट परिसर में संचालित तकनीकी और उपयोगिता वाहनों की केंद्रीकृत निगरानी करता है। इसमें मीडियम टैक्टिकल व्हीकल्स (एमटीवी), लाइट मीडियम टैक्टिकल व्हीकल्स (एलटीवी), फोर्कलिफ्ट, हाइड्रा, कैंपर और बस जैसे वाहन शामिल हैं। इन सभी वाहनों को साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने से उनकी गतिविधियों की निगरानी और प्रबंधन अधिक सुव्यवस्थित तरीके से किया जा रहा है।

ये कंट्रोल टावर्स बालको की व्यापक डिजिटलाइजेशन रणनीति का हिस्सा हैं। वाहनों, मार्गों, आवाजाही और अन्य प्रचालन गतिविधियों से प्राप्त आंकड़ों को एकीकृत कर यह व्यवस्था टीमों को महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक्स कार्यों की समग्र जानकारी उपलब्ध कराती है। इससे प्रचालन में होने वाले बदलावों की पहचान, प्रदर्शन का विश्लेषण और आवश्यक कार्रवाई तेजी से करने में मदद मिलती है।

कंट्रोल टावर्स के माध्यम से कच्चे माल, फिनिश्ड प्रोडक्ट, आंतरिक वाहनों और विनियमित अपशिष्ट की आवाजाही में बेहतर निगरानी और समन्वय स्थापित हुआ है। इससे जवाबदेही, संसाधनों के बेहतर उपयोग और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती को बढ़ावा मिल रहा है।

एल्यूमिनियम उद्योग तेजी से तकनीक आधारित और कनेक्टेड विनिर्माण व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। इस दिशा में बालको आधुनिक तकनीकों और औद्योगिक अनुभव के संयोजन से अपनी डिजिटल क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रहा है। पांच डिजिटल कंट्रोल टावर्स का एकीकरण इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो बालको के प्रचालन को अधिक एकीकृत, प्रभावी और भविष्य के लिए तैयार बनाने में योगदान दे रहा है।

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सेजेस पाली में नुक्कड़ नाटक के माध्यम से महिला सशक्तिकरण का संदेश

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नमो सेवा गाथा पर विद्यार्थियों की प्रभावशाली प्रस्तुति, लगभग 495 लोग हुए शामिल
कोरबा, 07 अक्टूबर 2026। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत सेजेस अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, पाली में ‘नमो सेवाकृअनकही कहानियां’ कार्यक्रम के तहत नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से महिला सशक्तिकरण और नमो सेवा गाथा पर प्रभावशाली प्रस्तुति दी।
विद्यार्थियों की शानदार प्रस्तुति से ग्रामीणजन, जनप्रतिनिधि, पालक और छात्र-छात्राएं उत्साहित नजर आए। कार्यक्रम में स्कूली विद्यार्थियों, जनप्रतिनिधियों और पालकों सहित लगभग 495 लोग उपस्थित रहे।

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मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल से दिव्यांगजनों की राह हुई आसान

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कोरबा, 7 अक्टूबर 2026। समाज कल्याण विभाग द्वारा आज प्रतीक जैन मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत कोरबा, ओएसडी तरुण कुमार किरण की उपस्थिति में पात्र दिव्यांगजनों को मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल वितरित की गई। दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के उद्देश्य से दी गई इस सहायता से उनके आवागमन में सुविधा होगी और वे दैनिक कार्य अधिक सुगमता से कर सकेंगे।
मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल प्राप्त करने वाले हितग्राहियों में रेल्वे कॉलोनी, कोरबा निवासी 55 वर्षीय सैय्यद याकूब, पिता सैय्यद अब्दुल कादर, सुभाष ब्लॉक, कोरबा निवासी 44 वर्षीय श्रीमती सुनीता दास, पिता बाबू राज, शांति नगर, कुसमुंडा निवासी 34 वर्षीय श्रीमती सीमा कुमारी, पिता अदरू, तथा गुरसिया, कटघोरा निवासी 20 वर्षीय प्रदीप कुमार उरांव, पिता हरिराम शामिल हैं।
ट्राईसाइकिल मिलने पर हितग्राहियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए शासन और समाज कल्याण विभाग के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि इस सहायता से उनकी गतिशीलता बढ़ेगी और वे अपने दैनिक कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय अधिक आत्मनिर्भर बन सकेंगे।

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रंग-बिरंगी दीवारों से बदली आंगनबाड़ी की तस्वीर, बरपाली के नौनिहालों को मिला सुरक्षित माहौल और सीखने का अवसर

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सुरक्षित छत और रंगीन दीवारों ने बदला माहौल, बरपाली आंगनबाड़ी में बढ़ी नौनिहालों की उपस्थिति
कोरबा, 07 अक्टूबर 2026। कभी जर्जर भवन की दीवारों और असुविधाओं के बीच संचालित होने वाला आंगनबाड़ी केंद्र अब बच्चों की खिलखिलाहट और रंग-बिरंगे चित्रों से गुलजार है। जहां पहले पालकों को अपने छोटे बच्चों को केंद्र भेजते समय उनकी सुरक्षा की चिंता रहती थी, वहीं अब ग्राम पंचायत बरपाली का नया आंगनबाड़ी भवन नौनिहालों के लिए सुरक्षित, सुंदर और सहज वातावरण बन गया है। जिला प्रशासन द्वारा डीएमएफ मद से 11.69 लाख की लागत से निर्मित नए भवन में पक्की छत, मजबूत दीवार, पक्का फर्श, रंगीन चित्र और बच्चों के लिए खिलौनों सहित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसका असर बच्चों की उपस्थिति में भी दिखाई दे रहा है और 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चे नियमित रूप से आंगनबाड़ी पहुंच रहे हैं।
पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के बरपाली स्थित इस आंगनबाड़ी केंद्र में वर्तमान में 30 बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें 6 माह से 3 वर्ष आयु वर्ग के 17 तथा 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के 13 बच्चे शामिल हैं। इसके साथ ही 2 गर्भवती महिलाएं, 3 शिशुवती माताएं और 6 किशोरी बालिकाएं भी केंद्र की सेवाओं से लाभान्वित हो रही हैं। नए भवन के बाद बच्चों के लिए उपलब्ध स्थान और वातावरण में आए बदलाव ने केंद्र की गतिविधियों को भी अधिक व्यवस्थित किया है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती शिवकला बताती हैं कि पुराने भवन की स्थिति ऐसी थी कि बच्चों को केंद्र में रखते समय उनकी सुरक्षा को लेकर हमेशा चिंता बनी रहती थी। भवन जर्जर होने के कारण पालक भी बच्चों को आंगनबाड़ी भेजने में सहज महसूस नहीं करते थे। नए भवन के बनने से सबसे बड़ा बदलाव बच्चों की सुरक्षा और उनके सहज वातावरण में आया है। अब पक्की छत, मजबूत दीवार और पक्के फर्श वाले भवन में बच्चे आराम से बैठते हैं, खेलते हैं और विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं।
श्रीमती शिवकला के अनुसार नए भवन की दीवारों पर बने रंग-बिरंगे चित्र बच्चों को खूब आकर्षित करते हैं। बच्चे चित्रों को देखकर उनके बारे में जानने की उत्सुकता दिखाते हैं और आसपास की वस्तुओं को पहचानने का प्रयास करते हैं। खिलौनों और आकर्षक वातावरण के कारण उनमें केंद्र आने की रुचि भी बढ़ी है। पहले की तुलना में अब बच्चे अधिक संख्या में आंगनबाड़ी पहुंचते हैं और 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की नियमित उपस्थिति दिखाई देती है। बच्चों के लिए केंद्र अब केवल आने-जाने की जगह नहीं रहा, यहां वे खेलते हुए सीखते हैं और सहज माहौल में अपनी प्रारंभिक शिक्षा की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।
आंगनबाड़ी सहायिका श्रीमती चमेली बाई बताती हैं कि नए भवन में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने और उन्हें भोजन कराने में भी काफी सुविधा हुई है। निर्धारित साप्ताहिक मेन्यू के अनुसार सुबह बच्चों को मीठा या नमकीन दलिया दिया जाता है। इसके बाद दाल, चावल और सब्जी सहित भोजन उपलब्ध कराया जाता है। सुरक्षित और सुविधाजनक भवन में बच्चों को भोजन कराने तथा उनकी देखभाल करने में आसानी होती है। बच्चों का नियमित रूप से केंद्र आना उनके लिए भी उत्साह का विषय है।

कार्यकर्ता श्रीमती शिवकला कहती हैं कि पहले भवन की स्थिति के कारण बच्चों और पालकों में जो संकोच था, वह अब दूर हुआ है। नए भवन ने बच्चों को सुरक्षित जगह दी है और आकर्षक वातावरण ने उनके मन में आंगनबाड़ी के प्रति अपनापन बढ़ाया है। बच्चे सुबह केंद्र आने के लिए उत्साहित रहते हैं और यहां होने वाली गतिविधियों में रुचि के साथ शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए ऐसी बेहतर सुविधा उपलब्ध होने से उन्हें अपने कार्य में भी संतोष और उत्साह मिलता है। नौनिहालों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराने की इस पहल के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया।

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