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मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कांग्रेस का देशव्यापी प्रदर्शन:दिल्ली-पटना में मार्च, देहरादून में कार्यकर्ता बैरिकेड्स पर चढ़े, कॉकरोच पार्टी बोली- 2 अक्टूबर से आंदोलन

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दिल्ली/पटना/देहरादून, एजेंसी। कांग्रेस शुक्रवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर देशभर में प्रदर्शन कर रही है। उत्तराखंड के देहरादून में कार्यकर्ता बैरिकेडिंग पर चढ़ गए। पटना में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।

इधर, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने शुक्रवार को कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार ने इस्तीफा नहीं दिया तो 2 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन करेंगे। CJP ने गुरुवार को ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे की डेडलाइन दी थी।

SIR को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिका में SIR के फैसलों, दिशानिर्देशों और सॉफ्टवेयर बदलावों को असंवैधानिक घोषित करने और करीब 13 करोड़ वोटर्स के नाम हटाने की SIT जांच की मांग है।

देशभर में प्रदर्शन की तस्वीरें…

दिल्ली: चुनाव आयोग के ऑफिस तक मार्च

हिमाचल: शिमला में EC के ऑफिस बोर्ड पर कालिख पोती

यूपी: लखनऊ में कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया

बिहार: पटना में भी EC ऑफिस का घेराव

उत्तराखंड: देहरादून में बैरिकेड तोड़ा

हरियाणा: चंडीगढ़ में कार्यकर्ताओं पर पानी छोड़ा गया

बंगाल: कोलकाता में मार्च निकाला

असम: गुवाहाटी में अखिल गोगोई हिरासत में लिया

कांग्रेस बोली- चुनाव आयोग मनमानी कर रहा

कांग्रेस का आरोप है कि ज्ञानेश कुमार चुनाव आयोग में मनमानी कर रहे हैं और दो अन्य आयुक्तों की बात नहीं सुन रहे हैं। पार्टी का ये आरोप इंडियन एक्सप्रेस में छपी उस खबर के बाद आया है जिसमें कहा गया है कि पिछले 10 महीनों में 14 बार दोनों चुनाव आयुक्तों ने आयोग के फैसलों पर आपत्ति जताई है।

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देश

आतंकी हाफिज पर सवाल से भागे पाकिस्तानी PM शहबाज:UN में पत्रकारों ने पूछा- आतंकियों को पनाह देना कब बंद करेंगे, कोई जवाब नहीं दिया

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न्यूयॉर्क/नई दिल्ली, एजेंसी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय पहुंचे। यहां पत्रकारों ने उनसे लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद को लेकर सवाल किया, लेकिन शहबाज सवालों को नजरअंदाज करते हुए आगे बढ़ गए।

UN मुख्यालय में दाखिल होते समय पत्रकारों ने शहबाज से पूछा, ‘प्रधानमंत्री, आप आतंकियों को पनाह देना कब बंद करेंगे?’

शहबाज ने इस सवाल का जवाब नहीं दिया। बाहर निकलते समय पत्रकारों ने फिर पूछा कि पाकिस्तान हाफिज सईद पर कार्रवाई कब करेगा, लेकिन शहबाज ने दोबारा कोई जवाब नहीं दिया।

हाफिज सईद 26/11 मामले में आरोपी

हाफिज सईद प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का सरगना है। भारत ने उसे UAPA के तहत आतंकवादी घोषित किया है। वह 26/11 मुंबई आतंकी हमले के मामले में आरोपी है।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की जांच में दाखिल सप्लीमेंट्री चार्जशीट में भी सईद को आरोपी बनाया है।

NIA ने उसे कथित साजिश में आरोपी नंबर 8 बताया है और पाकिस्तान स्थित LeT के आतंकियों की भूमिका का आरोप लगाया है।

शहबाज बोले थे- पाकिस्तान नहीं लड़ता तो आतंकी न्यूयॉर्क की सड़कों पर घूम रहे होते

शहबाज शरीफ ने 2025 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा था कि अगर पाकिस्तान ने आतंकियों का मुकाबला नहीं किया होता, तो वे न्यूयॉर्क और लंदन की सड़कों पर घूम रहे होते।

शहबाज ने दावा किया था कि पाकिस्तान दो दशक से ज्यादा समय से आतंकवाद के खिलाफ लड़ रहा है। उनके मुताबिक, इस दौरान 90 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई और देश को 150 अरब डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ।

शहबाज का 2025 में UNGA में दिया भाषण

40 साल पहले बना लश्कर-ए-तैयबा

लश्कर-ए-तैयबा की स्थापना 1987 में पाकिस्तान में हुई थी। यह संगठन सोवियत-अफगान युद्ध के दौरान बने जिहादी नेटवर्क से निकला था। ओसामा बिन लादेन के मेंटर माने जाने वाले अब्दुल्ला अज्जाम और उसके दो साथियों ने मिलकर मरकज-अद-दावा-वल-इरशाद नाम के धार्मिक संगठन की स्थापना की।

मरकज-अद-दावा-वल-इरशाद संगठन का सशस्त्र (मिलिटेंट) विंग बाद में लश्कर-ए-तैयबा कहलाया। अरबी में इसका अर्थ है पवित्र लोगों की सेना। शुरुआती दौर में संगठन के लड़ाके अफगानिस्तान में सोवियत सेना के खिलाफ लड़ने के लिए भेजे जाते थे।

1989 में सोवियत सेना की वापसी के बाद संगठन का फोकस जम्मू-कश्मीर पर आ गया। इसी साल पेशावर में एक बम धमाके में अब्दुल्लाह अज्जाम की मौत हो गई। इसके बाद हाफिज सईद ने इस संगठन की कमान संभाल ली।

भारत, अमेरिका और कई पश्चिमी देशों का आरोप रहा है कि लश्कर-ए-तैयबा को लंबे समय तक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI का समर्थन मिलता रहा। पाकिस्तान आधिकारिक तौर पर इन आरोपों से इनकार करता है।

भारत बोला- PAK आतंकियों ने कश्मीरी पंडितों को घर छोड़ने पर मजबूर किया

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में पाकिस्तान ने 23 सितंबर को भारत में कश्मीर और अल्पसंख्यकों की स्थिति पर सवाल उठाए।

इसके जवाब में भारतीय राजनयिक क्षितिज त्यागी ने कहा कि पाकिस्तान ने जिन आतंकियों को हथियार और ट्रेनिंग दी, उन्हीं ने 1990 में कश्मीरी पंडितों को घर छोड़ने पर मजबूर किया।

त्यागी ने कहा कि यही आतंकी बाद में कश्मीर में अलग-अलग धर्मों के लोगों को निशाना बनाते रहे, जिनमें बड़ी संख्या में मुस्लिम भी शामिल थे।

भारत ने पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों का भी मुद्दा उठाया

भारत ने पाकिस्तान में हिंदू, सिख और ईसाई समुदायों की स्थिति का भी मुद्दा उठाया। त्यागी ने जबरन धर्म परिवर्तन और शादी, ईशनिंदा कानून और शिया, अहमदिया, इस्माइली और हजारा समुदायों के खिलाफ भेदभाव का जिक्र किया।

त्यागी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा था, है और रहेगा। उन्होंने पाकिस्तान से जम्मू-कश्मीर के उसके कब्जे वाले हिस्से को खाली करने को कहा। साथ ही उन्होंने पाकिस्तान को अपनी कर्ज में डूबी अर्थव्यवस्था पर ध्यान देने की सलाह दी।

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छत्तीसगढ़

कर्मवीर सिंह बने छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रदेश महामंत्री:पवन साय को झारखंड की जिम्मेदारी, अजय जामवाल महाराष्ट्र के प्रदेश महामंत्री बनाए गए

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रायपुर, एजेंसी। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने कर्मवीर सिंह को छत्तीसगढ़ का संगठन महामंत्री बनाया है। इससे पहले कर्मवीर झारखंड के संगठन महामंत्री थे। वहीं, वर्तमान में छत्तीसगढ़ भाजपा के संगठन महामंत्री रहे पवन साय को झारखंड भाजपा के संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई है।

गुरुवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने देश भर के लिए संगठन महामंत्री के नामों की घोषणा की। इसके साथ ही राष्ट्रीय संगठन महामंत्री सौदान सिंह को फिर से झारखंड भाजपा में सह महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई है।

सौदान सिंह 2014 के विधानसभा चुनाव के समय झारखंड के प्रभारी थे और उनका चुनावी रणनीति में बड़ा योगदान था। इसके अलावा छत्तीसगढ़ संगठन से जुड़े रहे अजय जामवाल को महाराष्ट्र की जिम्मेदारी दी गई है। शिवप्रकाश को मुंबई का राष्ट्रीय संगठन सह महामंत्री बनाया गया है।

छत्तीसगढ़ भाजपा के संगठन महामंत्री रहे पवन साय और छत्तीसगढ़ संगठन से जुड़े नेता अजय जामवाल।

छत्तीसगढ़ भाजपा के संगठन महामंत्री रहे पवन साय और छत्तीसगढ़ संगठन से जुड़े नेता अजय जामवाल।

छत्तीसगढ़ से हटाकर झारखंड का संगठन सौंपा

पवन साय को अब झारखंड प्रदेश महामंत्री (संगठन) की जिम्मेदारी दी गई है। उनका संगठन केंद्र रांची रहेगा। वे लंबे समय तक छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रदेश महामंत्री (संगठन) रहे हैं। 2022 में भी उन्हें प्रदेश टीम में इसी जिम्मेदारी पर रखा गया था।

2023 के विधानसभा चुनाव तक छत्तीसगढ़ में संगठन के प्रमुख फैसलों और कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय में उनकी भूमिका रही। अब उन्हें छत्तीसगढ़ से हटाकर झारखंड का संगठन सौंपा गया है।

छत्तीसगढ़ संगठन से जुड़े रहे जामवाल

अजय जामवाल को अब महाराष्ट्र प्रदेश महामंत्री (संगठन) की जिम्मेदारी दी गई है। उनका संगठन केंद्र मुंबई रहेगा। मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के जोगिंदरनगर से जुड़े जामवाल ने छात्र जीवन में ABVP से संगठनात्मक काम शुरू किया।

2022 में उन्हें मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ का क्षेत्रीय संगठन महामंत्री बनाया गया। 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने दोनों राज्यों में संगठन की जिम्मेदारी संभाली। अब उन्हें महाराष्ट्र का संगठन सौंपा गया है।

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छत्तीसगढ़

स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़ और हरियाणा का प्रभारी बनाया गया :36 राज्यों-UTs की लिस्ट जारी, संजय भाटिया राजस्थान, बिप्लब देव एमपी के भाजपा प्रभारी, 5 चेहरों को दो-दो राज्यों की जिम्मेदारी

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नई दिल्ली, एजेंसी। भाजपा ने बुधवार को 36 राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों में पार्टी के नए प्रभारियों और 24 राज्यों में सह-प्रभारियों का ऐलान किया। संजय भाटिया को राजस्थान और बिप्लब कुमार देव को मध्य प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है। राजस्थान में पहले डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल प्रभारी थे। वहीं, मध्य प्रदेश की जिम्मेदारी डॉ. महेंद्र सिंह के पास थी।

नई लिस्ट के मुताबिक, स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़ और हरियाणा का प्रभारी बनाया गया है। राम माधव को तमिलनाडु और उत्तराखंड की जिम्मेदारी दी गई है। तीन अन्य नेताओं को भी दो-दो राज्यों का प्रभारी बनाया गया है। बिहार में हरीश द्विवेदी को प्रभारी बनाया गया है। यूपी में 4 सह-प्रभारी नियुक्त हुए हैं।

भाजपा ने उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात के प्रभारी नहीं बदले हैं। विनोद तावड़े उत्तर प्रदेश, सतीश पूनिया पंजाब और तरुण चुघ गुजरात के प्रभारी बने रहेंगे। इन तीनों नेताओं की नियुक्ति 18 अगस्त को ही की गई थी। उस समय पार्टी ने कहा था कि बाकी राज्यों के प्रभारी और सह-प्रभारी बाद में नियुक्त किए जाएंगे।

अब नई लिस्ट में इन तीनों राज्यों और उनके प्रभारियों के नाम फिर से शामिल किए गए हैं। ये तीनों राज्य 2027 में विधानसभा चुनाव वाले 7 राज्यों में शामिल हैं। इनके अलावा उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर और हिमाचल प्रदेश में अगले साल चुनाव होंगे।

12 राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों में कोई सह-प्रभारी नहीं

12 राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों में भाजपा ने कोई सह-प्रभारी नियुक्त नहीं किया है। इसमें अंडमान-निकोबार, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा नगर हवेली एवं दमन और दीव, लद्दाख और लक्षद्वीप शामिल है। मणिपुर, मिजोरम, नगालैंड, पुडुचेरी, सिक्किम और त्रिपुरा में भी सिर्फ प्रभारी नियुक्त किए गए हैं, कोई सह-प्रभारी नहीं है।

एंटनी प्रभारी और सह-प्रभारी दोनों बने, यूपी में 4 सह-प्रभारी बने; 4 खास फैक्ट्स

  • 5 राज्यों में दो-दो सह-प्रभारी: असम, बिहार, दिल्ली, राजस्थान और तमिलनाडु में दो-दो सह-प्रभारी नियुक्त किए गए हैं।
  • महाराष्ट्र में 3 सह-प्रभारी: बैजयंत जय पांडा प्रभारी हैं। वहीं, अमित मालवीय, सदानंद शेट तनवाडे और कमलजीत सहरावत सह-प्रभारी बनाए गए हैं।
  • अनिल एंटनी को दो राज्यों में दोहरी जिम्मेदारी: अनिल एंटनी नगालैंड के प्रभारी बनाए गए हैं। वे गोवा के सह-प्रभारी भी होंगे।
  • UP में 1 प्रभारी के साथ 4 सह-प्रभारी: विनोद तावड़े को प्रभारी बनाया गया है, जबकि उनके साथ चार सह-प्रभारी नियुक्त किए गए हैं।

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